शनिवार, 23 दिसंबर 2017

लालू यादव चारा घोटाले के एक मामले में दोषी:सजा 3-1-2018 को सुनाई जाएगी

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने देवघर मामले उन्हें 14 अन्य लोगों के साथ दोषी ठहराया व

पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा सहित सात लोगों को बरी कर दिया है.

यह मामला देवघर कोषागार से 1991 से 1994 के बीच अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकाले जाने से जुड़ा है. इस मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा के अलावा पूर्व सांसद आरके राना और तीन आईएएस अधिकारियों सहित 20 आरोपित थे. इस मामले में तीन जनवरी को सजा सुनाई जाएगी. 

इस मामले में लालू प्रसाद यादव द्वारा 1990 के बाद अर्जित की गई सारी संपत्ति अटैच कर ली जाएगी.

अदालत के फैसले के साथ राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि भारतीय इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिस व्यक्ति ने अवैध निकासी की शिकायत दर्ज कराई, उसी को जेल भेज दिया गया. भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि ऊपरी अदालत में यह मामला दो पेशी में ही खारिज हो जाए.’ सीबीआई पर निशाना साधते हुए मनोझ झा ने यह भी कहा कि जो लोग लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक तौर पर नहीं लड़ पा रहे, वे उन्हें इस तरीके से मजबूर कर रहे हैं।

फैसले के बाद ट्विटर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने लिखा, ‘जो बोया वो पाया! बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होई. यह तो होना ही था.’ जबकि जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव भ्रष्टाचार के प्रतीक हैं. यह फैसला उनके लिए नए साल का तोहफा है.’

लालू प्रसाद यादव अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव के साथ शुक्रवार शाम को ही रांची पहुंच गए थे. उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया था और अपने समर्थकों से अदालत के फैसले को लेकर शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की थी. लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में तीन अन्य मामलों का भी सामना कर रहे हैं. सीबीआई के अधिकारी के मुताबिक 27 अक्टूबर 1997 को पेश चार्जशीट में 38 लोगों को आरोपित बनाया गया था. इनमें से 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन सरकारी गवाह बन गए. इसके अलावा दो आरोपितों ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था.


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