शनिवार, 23 दिसंबर 2017

बीकानेर में 2 गिरफ्तार-राहुल गांधी के बहनोई वाड्रा की जमीन मामले:



कांग्रेस पार्टी किसी मामले में जीत हासिल कर खुश होती है कि फिर कोई आफत घेर लेती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रॉबर्ट वाड्रा भूमि घोटाला प्रकरण में शुक्रवार  22.12.2017 को शहर की जयनारायण व्यास कॉलोनी में छापा मारकर दो लोगों को गिरफ्तार किया। दोनों की गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में प्रॉपर्टी डीलर जयप्रकाश बागरवा और अशोक कुमार शामिल हैं। अशोक कुमार ‘मेसर्स स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा.लि.’ के महेश नागर का सहयोगी है। उल्लेखनीय है कि स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी फर्म कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित है। ईडी ने बीते अप्रैल में कुमार और नागर के ठिकानों की तलाशी ली थी।

फर्म द्वारा बीकानेर में जमीन खरीद के चार मामलों में आधिकारिक प्रतिनिधि नागर ही था। ईडी का आरोप है कि कुमार ने अन्य लोगों की ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ का इस्तेमाल कर इसी क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। ईडी की यह जांच कुछ साल पहले जिले के कोलायत क्षेत्र में कंपनी द्वारा 275 बीघा जमीन खरीदे जाने से जुड़ी है। पीएमएलए के तहत ईडी इस संबंध में कई सरकारी अधिकारियों व अन्य लोगों की 1.18 करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। इस संबंध में 2015 में मामला दर्ज किया गया था।

वसुंधरा सरकार ने यहां के जमीन घोटाले से जुड़े 18 मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। यह मामला बीकानेर के समीप 275 बीघा जमीन के गलत तरीके से आवंटन से जुड़़ा है। जमीन का एक हिस्सा वाड्रा की कंपनी ने खरीदा था।

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नई दिल्ली

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कांग्रेस को थोड़ी राहत मिली लेकिन राबर्ट वाड्रा के इर्द-गिर्द शिकंजा कसना शुरू हो गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने बीकानेर जमीन घोटाले से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से अशोक कुमार नाम का एक आरोपी महेश नागर का करीबी है, जो राबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हास्पीटलिटी का आधिकारिक प्रतिनिधि है। स्काईलाइट हास्पीटलिटी पर विस्थापितों के लिए निर्धारित जमीन पर फर्जी तरीके से खरीद-बेचकर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने का आरोप है।


ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बीकानेर जमीन घोटाले में पहली गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए कहा कि दो मुख्य आरोपियों जयप्रकाश बगरवा और अशोक कुमार को गिरफ्तार किया गया है। उनके अनुसार बिकानेर में महाजन फायरिंग रेंज के निर्माण के दौरान विस्थापितों के लिए निर्धारित जमीन को फर्जी तरीके के खरीदने-बेचने में इन दोनों ने अहम भूमिका निभाई थी।


ईडी के अनुसार गिरफ्तार अशोक कुमार ने स्काइलाइट हास्टपीटलिटी को 69.55 हेक्टेयर जमीन 72 लाख रुपये में खरीदने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद इसी जमीन को 5.15 करोड़ रुपये में एलीजनी फिनलीज नाम की कंपनी को बेच दिया गया। ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एलीजनी फिनलीज एक मुखौटा कंपनी है और कोई वास्तविक बिजनेस नहीं करती है। यही नहीं, इस कंपनी के कई शेयरहोल्डरों का कोई अता-पता ही नहीं है। आशंका है कि यह राबर्ट वाड्रा की मुखौटा कंपनी है।

विस्थापितों के लिए निर्धारित इस जमीन पर अवैध तरीके और फर्जी नामों से रजिस्ट्री कराने के मामले में राजस्थान पुलिस एफआइआर दर्ज कर जांच कर रही है। इसी आधार पर ईडी ने मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत इस मामले में केस दर्ज किया था। केस दर्ज करने के बाद ईडी जयप्रकाश बगरवा और अशोक कुमार के ठिकानों पर छापा मार चुका है। इसके साथ ही राबर्ट वाड्रा से ही इस जमीन के खरीद-फरोख्त से संबंधित कई दस्तावेज जमाने कराने को कहा गया था।


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सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कथित कंपनी से जुड़े जमीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो लोगों को अरेस्ट किया है। आरोपियों को आज जयपुर में अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को 10 दिन की रिमाण्ड पर भेज दिया गया।


ईडी ने  साम्प्रदायिक दंगा मामलों की विशेष एडीजे कोर्ट में आरोपियों को पेशकर पूछताछ के लिए 10 दिन का रिमांड मांगा। इस पर दोनों आरोपियों को 30 दिसंबर तक रिमांड पर सौंप दिया। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान के चर्चित बीकानेर घोटाले के मामले में अशोक कुमार और जय प्रकाश को गिरफ्तार किया है।

अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि महाजन फा​यरिंग रेंज के लिए केन्द्र सरकार की ओर से भूमि अवाप्ति की गई। इसके बदले मुआवजे के तौर पर प्रभावितों को भूमि दी गई, लेकिन आरोपियों ने फर्जी लोगों के नाम आवंटन पत्र जारी करा लिए और बाद में भूमि को रॉबर्ट वाड्रा की स्काईलाइन कंपनी सहित अन्य कई कंपनियों को बेचा गया। इसे लेकर बीकानेर के कोलायत और गजनेर थाने में आरोपी जयप्रकाश के खिलाफ 18 और अशोक के खिलाफ 2 मामले दर्ज हैं।


आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन सहयोग नहीं करने पर इन्हें गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि करोडों रुपए का लेनदेन की पूछताछ आरोपियों से करनी है। ऐसे में उन्हें दस दिन का रिमांड दिया जाए। 


जिसका विरोध करते हुए बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि सभी मामलों में आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और अदालत में आरोप पत्र भी पेश किया जा चुका है। इसके अलावा किसी दस्तावेज पर भी आरोपियों के हस्ताक्षर नहीं है। ईडी यह भी नहीं बता रहा है कि आरोपियों ने कितनी राशि का लेनदेन किया है। ऐसे में उन्हें रिमांड पर नहीं सौंपा जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को तीस दिसंबर तक ईडी को सौंप दिया है। 


मुआवजे की जमीन को यूं बेचा गया


बीकानेर  जिले में जमीन अवाप्ति हुई थी। कुछ लोगों ने मुआवजा भूमि का फर्जी लोगों के नाम आवंटन पत्र जारी करवाया और वे जमीनें विभिन्न कंपनियों को बेच दी गई। जिन कंपनियों को जमीन बेची गई उनमें राबर्ट वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनी स्काईलाइट भी थी।

बाद में इन कंपनियों ने औने-पौने दामों में खरीदी ये जमीन भारी मुनाफा कमाकर बेची।

बताया जा रहा है कि स्काईलाइट कम्पनी में जमीन खरीदने का अधिकार महेश के पास था और ये खरीद उसके माध्यम से हुई है। आरोपियों ने उसे जमीन बेची थी।



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