Friday, December 22, 2017

सूरतगढ थर्मल पावर प्लांट के एक्सईएन को रिश्वत मामले में 2 साल की कैद


सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट में 12 सितंबर 2009 को रिश्वत लेते पकड़े गए अधिशासी अभियंता( सिविल) विनोद माथुर को भ्रष्टाचार निवारण विशिष्ट न्यायालय श्री गंगानगर ने 2 साल का  कठोर कारावास और ₹20000 का जुर्माना लगाया। यह आदेश 21.12.2017 को  अदालत में सुनाया गया।

सूरतगढ़ वार्ड नंबर 19 के निवासी महेंद्र प्रताप पुरोहित पुत्र भंवरलाल पुरोहित ने 10 सितंबर 2009 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत की थी। उसने शिकायत में लिखा कि उसकी बी आर कंस्ट्रक्शन के नाम से फर्म है जिसने सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट में निर्माण कार्य किए।  इन कार्यों का बकाया बिल 2 लाख 70 हजार रुपए प्राप्त करने के अधिशासी अभियंता विनोद माथुर से संपर्क किया तो उन्होंने ₹70000 की रिश्वत मांगी आखिर में यह सौदा ₹50000 में तय हुआ इसमें ₹25000 एडवांस देना क्या हुआ लेकिन 25,000 के बजाय ₹15000 की बात कही गई। पुरोहित ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क कर लिया।


 पुरोहित ने भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से संपर्क करने के बाद छापे की प्रक्रिया अपनाई गई।

 भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम 12 सितंबर 2009 को सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट पहुंची।

अधिशासी अभियंता ने ज्योंहि रिश्वत की राशि ली तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने अभियंता के विरुद्ध अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने संपूर्ण सुनवाई प्रक्रिया अपनाने के बाद अभियंता को दोषी माना और दंडित किया।अभियंता जोधपुर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड का रहने वाला है।

( टिप्पणी -भ्रष्टाचार के मामले में  सूरतगढ का नाम बेहद बदनाम है।खासकर नगरपालिका व अन्य कुछ विभाग बहुत कुख्यात हैं। लोग सामान्य रूप से मान लेते हैं कि क्या होता है? कुछ भी नहीं होता, लेकिन सच यह है की कार्यवाही होती है। भ्रष्टाचार में लिप्त लोग निश्चित रूप से दंडित होते हैं। इसलिए भ्रष्टाचार करने वालों के विरुद्ध लोगों को आगे आना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।)


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