शनिवार, 9 दिसंबर 2017

डेंगू ईलाज 16 लाख फिर भी मौत-अस्पताल की भूमि लीज रद्द

- अति विशेष समाचार 9.12.2017.

हरियाणा सरकार ने डेंगू बुखार से पीड़ित 7 साल की बच्ची आद्या सिंह के इलाज के लिए 16 लाख का बिल थमाने वाले गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल का लीज कैंसिल कर दिया है।

 हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अस्पताल की जमीन का लीज रद्द करने का आदेश दिया है। इसके अलावा अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। अस्पताल के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के लिए FIR दर्ज करायी जाएगी। 

आद्या सिंह का लगभग 2 हफ्ते तक फोर्टिस अस्पताल में इलाज हुआ था लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। अस्पताल प्रशासन ने इस इलाज के लिए 16 लाख रुपये का बिल दिया था।


 सोशल मीडिया में इस खबर पर काफी हंगामा मचने के बाद हरियाणा सरकार ने जांच के आदेश दिये थे। इसके बाद ये कार्रवाई की गई है। 

आद्या सिंह के पिता जयंत सिंह को जब बेटी की बुखार के बारे में बता चला तो उसे 28 अगस्त को द्वारका के रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस अस्पताल में आद्या का इलाज किया गया, लेकिन दो दिन बाद उसे गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया गया था। इस हॉस्पिटल में आद्या को आईसीयू में रखा गया, उसे इनक्यूबेटर पर रखा गया लेकिन 15 दिनों के बाद उसकी मौत हो गई।

आद्या के पिता का कहना है कि अस्पताल के खिलाफ गुरुग्राम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। सुशांत लोक पुलिस स्टेशन के एसएचओ गौरव फोगट ने कहा कि हमें शिकायत मिल गई है, हमलोग एफआईआर दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच करेंगे।

 शिकायत में जयंतसिंह ने अस्पताल को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है। जयंत सिंह ने कहा है कि अस्पताल ने उनकी बेटी के इलाज में आपराधिक लापरवाही की है। इसके अलावा जयंत सिंह ने अस्पताल पर जालसाजी, धोखाधड़ी और बेइमानी का भी आरोप लगाया है।

जयंत सिंह का आरोप है कि वह अस्पताल को MRI और सीटी स्कैन करने को कह रहे थे लेकिन अस्पताल उन्हें दवाइयां दे रहा था। 14 सितंबर को जब MRI की गई तो डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची का 80 फीसदी ब्रेन डैमेज हो चुका है और उसे अब बॉडी प्लाजमा ट्रांसप्लांट की जरूरत है, जिसमें 16 लाख रुपये लगेंगे। सात साल की आद्या की उसी दिन मौत हो गई थी। अस्पताल ने इलाज के लिए 15,79,322 रुपये का बिल दिया था।

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नई दिल्‍ली: 

फोर्टिस अस्‍पताल काम यह मामला घोर अमानवीय है।

 डेंगू से पीडि़त बच्‍ची को भर्ती कराया गया था। बच्ची तो अपने घरवालों को और दुनिया को छोड़ गई लेकिन उसके मरने के बाद अस्‍पताल ने इतना भारी बिल थमाया है कि उन्हें इसे चुकाने के लिए लोन तक लेना पड़ा है।

गुरुग्राम के फोर्टिस अस्‍पताल में डेंगू से पीड़ित सात साल की बच्‍ची को भर्ती कराया गया। करीब 15 दिनों तक इलाज चला लेकिन यह नामी अस्पताल उसकी जान जाने से रोक नहीं पाया लेकिन बच्ची के इलाज का खर्च जरूर बताया है जो 16 लाख रुपये है।


 परिजनों की मांग है कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर उसका कौन सा इलाज किया गया, जिसमें इतने पैसे खर्च हुए?। बच्‍ची इलाज के दौरान आईसीयू में भर्ती रही और उसके बाद फोर्टिस से रॉकलैंड अस्‍पताल में शिफ्ट करने के दौरान उसकी मौत हो गई।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे के उठने और परिजनों की मांग पर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यदि गलत चार्ज किया गया तो इस मामले की पूरी जांच कराई जाएगी।

फोर्टिस अस्‍पताल ने अपनी तरफ से किसी भी गड़बड़ी को खारिज किया। अस्‍पताल ने बताया कि बच्‍ची आद्या सिंह के इलाज में पूरे स्‍टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया और सभी क्‍लीनिकल गाइडलाइंस का ध्‍यान रखा गया। उसने अपनी पूरी रिपोर्ट स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को दी है। साथ ही यह भी कहा कि 15.79 लाख रुपये चार्ज किए।

दरअसल, 17 नवंबर को आद्या के पिता के दोस्‍त ने ट्विटर पर लिखा कि मेरे एक बैचमेट की सात साल की बच्‍ची 15 दिनों तक फोर्टिस में भर्ती रही। इस दौरान 18 लाख से भी अधिक बिल आया और अंत में उसको बचाया भी नहीं जा सका। इस मैसेज को चार दिनों में नौ हजार से अधिक बार रिट्वीट किया गया। नतीजतन स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा को हस्‍तक्षेप करना पड़ा। उन्‍होंने पूरी घटना का ब्‍यौरा मांगते हुए मामले की जांच का आश्‍वासन दिया।

आद्या के पिता जयंत सिंह आईटी प्रोफेशनल हैं और द्वारका में रहते हैं। उन्‍होंने कहा कि उनकी बेटी आद्या दूसरी क्‍लास में पढ़ती थी। 27 अगस्‍त  2017 को उसको तेज बुखार चढ़ा। दो दिन बाद तक बुखार नहीं कम हुआ तो वहीं रॉकलैंड अस्‍पताल में ले गए। वहां पर टेस्‍ट से पुष्टि हुई कि उसको डेंगू है।

उसके बाद जब उसकी तबियत और बिगड़ गई तो उनसे किसी बड़े अस्‍पताल में जाने को कहा गया। 31 अगस्‍त को उसको गुरुग्राम के फोर्टिस अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। 

उसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसको वेंटिलेटर पर रखा गया। उसको 10 दिनों तक इसी प्रकार रखा गया और इस दौरान परिवार से भारी बिल थमाया गया।

उसके बाद 14 सितंबर को जब एमआरआई हुआ तो पता चला कि मस्तिष्‍क बुरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गया है। डॉक्‍टरों ने भी उम्‍मीद छोड़ दी। हमने उसको दूसरे अस्‍पताल ले जाने की ठानी और फिर रॉकलैंड अस्‍पताल लाए, जहां 14-15 सितंबर की रात को आद्या की मौत हो गई।

आद्या के पिता ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया को बताया कि, उन्‍होंने बच्‍ची के इलाज के लिए इस दौरान पांच लाख का पर्सनल लोन लिया। इसके अलावा परिवार और अपनी बचत को मिलाकर बिल भरा।


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