रविवार, 31 दिसंबर 2017

जापान सरकार के आमंत्रण पर छात्रा कोमल कंवर शेखावत की जापान यात्रा:

 -  करणीदानसिंह राजपूत -

भारत की विश्व विख्यात छात्राओं की शिक्षण संस्था वनस्थली विद्यापीठ की छात्रा कुमारी  कोमल कंवर शेखावत की जापान की शैक्षणिक यात्रा जापान की सामाजिक ऐतिहासिक विविधतापूर्ण संस्कृति की जानकारी उच्चकोटि की तकनीकी और विकास की जानकारी युवाओं को देने के लिए जापान के युवा विभाग के मंत्रालय की ओर से आयोजित की गई थी। यह यात्रा "JENE sys 2017( Japan east Asia network of exchange for students and youth) SAARC countries economic cooperation कार्यक्रम के तहत थी।

 सार्क देशों के युवा और छात्र एवम छात्राओं ने भाग लिया था। 

कोमल कंवर शेखावत का वर्णन प्रथम दृष्टि से इसलिए किया जाना महत्वपूर्ण है कि वह उत्तर भारत की तरफ से एकमात्र छात्रा चयनित हुई थी। कुमारी कोमल शेखावत ने भूटान नेपाल और भारत के तीन देशों के ग्रुप में यह यात्रा प्रतिनिधित्व के रूप में की।

 इस यात्रा में भारत के कुल 16 छात्र छात्राओं ने भाग लिया था। आठ  छात्र छात्र मास्टर डिग्री में अध्ययन करने वाले और  आठ छात्र-छात्रा 11वीं 12वीं कक्षाओं के थे।

 जापान के युवा मंत्रालय के इस आयोजन में भारत की सभी  यूनिवर्सिटी से एक एक  प्रतिभागी का चयन होना था। वनस्थली विद्यापीठ ने शैक्षणिक योग्यता सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी भाषा संवाद कौशल के आधार पर कोमल कंवर शेखावत का चयन इस यात्रा के लिए किया।

 यह यात्रा 26 नवंबर से 6 दिसंबर तक हुई जिसमें 27 नवंबर से 5 दिसंबर तक सभी जापान में रहे।

 हम मानते हैं कि अपने शहर में आस पड़ोस की जानकारी की जिज्ञासा होती है। वह जिज्ञासा बढ़ते हुए पड़ोस के शहरों की,पड़ोस के प्रांत की,पड़ोस के देशों की ओर बढ़ती हुई दूरस्थ देशों की जानकारी के लिए बढ़ती जाती है। हम अवगत हों मेलजोल हो बहुत सी सामाजिक जानकारियां और आधुनिक तकनीकी जानकारियां अपने मस्तिषक में सामान लेने की चाहत होती है। यह भी सोचते हैं कि जो कुछ हमने जाना देखा सीखा,हमारा ज्ञानवर्धन हुआ वह समाज के विभिन्न वर्गों के लाभ के लिए और देश के लाभ के लिए प्रचारित और प्रसारित कर दें ताकि अन्य लोग उन जानकारियों का लाभ उठा सकें। कोमल कंवर शेखावत भी इसे बांटने की इच्छुक हैं।

कोमल कंवर शेखावत ने जापान की इस यात्रा में क्या कुछ देखा क्या पाया? उसकी विस्तृत रिपोर्ट जब देगी तो उसमें बहुत कुछ सामग्री होगी। वैसे तो रिपोर्ट सौंपने की अवधि 3 महीने से 9 महीने के बीच में है। हम कोशिश करेंगे कि कोमल कंवर शेखावत जब अपनी रिपोर्ट पेश करें तब उसके बारे में भी समुचित जानकारी हमारे असंख्य पाठकों को दे सकें। 

जापान के युवा मंत्रालय ने जानकारियों के आदान-प्रदान के रूप में है आयोजन किया था जिसमें  Tepia advanced technology gallery, North Asia University, Warabi za co.ltd. (रंगमंच),Akita shuroi seizoh co.ltd.( उद्योग) का अवलोकन किया। जापान में लोगों के नीति निर्माण पर व्याख्यान आदि भी शामिल थे।अकिता प्रिफेक्चर में द्विदिवसीय जापानी परिवार के संग गृह निवास भी था। यह निवास भी रोचक अनूभूति व आनंददायक रहा होगा।

जापान समुद्रतटीय भूकंपीय पट्टी में अनेक बार की विनाशलीलाओं में संकट झेलते हुए नयी तकनीक में आगे बढने वाले देशों में हैं। वहां के युवा निश्चित रूप से देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। वहां के स्त्री पुरुष राजनेता भी अपने देश को पूरे विश्व में शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित कर चुके हैं। जापान के ज्ञान विज्ञान में तकनीकी में झांकने की कोशिश कोमल कंवर शेखावत ने की है। 

कोमल कंवर शेखावत का सपना भी अपने देश भारत को सर्वोच्च स्थान पर देखने का है। कोमल कंवर शेखावत अर्थशास्त्र की छात्रा है। शैक्षणिक जीवन बड़ा ही जीवट वाला रहा है।

 सैनिक परिवार में जन्मी मां अचरज कंवर जोधा( राठौड़) व सूबेदार प्रेम सिंह शेखावत की संतान  कोमल कंवर शेखावत की शिक्षा विभिन्न स्थानों पर हुई। जहां जहां इनके पिता सूबेदार प्रेम सिंह शेखावत रहे। पिता की  सीमा क्षेत्र में ड्यूटी थी जहां शिक्षा के लिए कोमल को दूर भी रहना पड़ा था।

कोमल के पिता प्रेम सिंह शेखावत सेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात अब राजस्थान के सूरतगढ़ में श्री सीमेंट कंपनी में सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

कोमल कंवर शेखावत ने शिक्षा में भी नाम रोशन किया है। मोदी यूनिवर्सिटी में भी वह अग्रणीय छात्राओं में रही थीं।

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 कोमल कंवर शेखावत














दायें से - कोमल कंवरशेखावत,माता श्रीमती अचरज कंवर, पिता प्रेम सिंह शेखावत,भाई अजय सिंह शेखावत।

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

सूरतगढ़ : अतिक्रमण 3 दिन में हटालें बाद में नगरपालिका खर्च भी वसूलेगी


सूरतगढ़ 30.12.2017.

नगरपालिका सूरतगढ़ ने धरनों प्रर्दशनों मांगों के दौरान भारी कसमकस के बाद आखिर आज 30 दिसंबर को सूचना जारी कर दी है।

रेलवे स्टेशन से महाराणा प्रताप चौक तक दोनों ओर, सिकंदर ज्वैलर्स से सुभाष चौक तक दोनों ओर के अतिक्रमण  सूचना के तीन दिन में स्वयं हटाने के लिए सूचित किया गया है। 

सूचना में चेतावनी भी दी गई है कि अन्यथा नगर पालिका नियमों के अनुसार अतिक्रमण हटाए जाएंगे और संबंधित अतिक्रमी से सारा खर्चा वसूल किया जाएगा।

यह असमंजस भी है कि प्रशासन ने अतिक्रमणों का सर्वे करवाया था लेकिन बताया नहीं कि कहां तक हटाना है?

सही स्थिति है कि साधारण रूप में स्टार से बाहर अतिक्रमण है जो फुटपाथ को तोड़ कर ऊंचा चौकी ( थोड़ी)रूप में पक्का निर्माण कर लिया गया।

स्टर से बाहर 3 फुट रख कर अतिक्रमण हटाने की कोई कानूनी छूट नहीं है।

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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री का अमानवीय अत्याचार

 जनसत्ता संपादकीयः हिरासत में मौत

हालांकि भारत ने मानवाधिकार संबंधी संयुक्त राष्ट्र के अन्य संकल्प-पत्रों की तरह कैदियों के भी अधिकारों का खयाल रखने और उन्हें यातना न देने के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया हुआ है।

हालांकि भारत ने मानवाधिकार संबंधी संयुक्त राष्ट्र के अन्य संकल्प-पत्रों की तरह कैदियों के भी अधिकारों का खयाल रखने और उन्हें यातना न देने के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया हुआ है। पर सारी दुनिया को जो भरोसा दिलाया गया, हकीकत उससे अलग है। यहां कैदियों के साथ मानवीय सलूक होना तो दूर, उलटे उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा जाता है। पुलिस मानो यह मान कर चलती है कि हिरासत में लिये गए व्यक्ति के साथ कुछ भी किया जा सकता है और इस बारे में किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं होगी। सिर्फ शक की बिना पर पकड़े व्यक्ति को हिरासत में बर्बरता झेलनी पड़ती है, जिसमें उसे थप्पड़ मारे जाने से लेकर बुरी तरह मारे-पीटे जाने और यातना दिए जाने के तमामतरीके शामिल हैं। इसलिए हैरत की बात नहीं कि विचाराधीन कैद के दौरान कइयों की मौत हो जाती है। यह राहत की बात है कि हिरासत के दौरान कैदियों की मौत के मामलों को न्यायपालिका ने गंभीरता से लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर में सभी उच्च न्यायालयों से कहा था कि 2012 के बाद जेलों में हिरासत के दौरान अस्वाभाविक मौत के मामलों में कैदियों के परिजनों की पहचान के लिए स्वत: याचिका दर्ज करें और यदि पहले पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया है तो उचित मुआवजा देने का आदेश दें।

गौरतलब है कि इस निर्देश के अनुरूप सोलह उच्च न्यायालयों में कार्यवाही शुरू की गई है। आठ उच्च न्यायालयों ने कार्यवाही की बाबत फिलहाल जानकारी नहीं दी है। सर्वोच्च अदालत ने देश की 1382 जेलों में कैदियों की अमानवीय स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बाकी यानी आठ उच्च न्यायालयों को भी हिरासत में मौत से संबंधित मामलों पर यथाशीघ्र करने का निर्देश भेजा है। इस अदालती पहल का औचित्य जाहिर है। हमारे देश में अधिकतर मामलों में हिरासत संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होता। जो होता है वह बहुतों के लिए दु:स्वप्न ही साबित होता है। एक विचाराधीन कैदी पर लगा अभियोग सिद्ध न हो, तो अदालत उसे बाइज्जत बरी करने का हुक्म देती है। लेकिन पुलिस थाने और जेल में उसने जो भोगा होता है उसे वह जिंदगी में शायद ही कभी भुला पाता है।

मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2009 से 2015 के दरम्यान यानी छह साल में करीब छह सौ लोग पुलिस हिरासत में जिंदगी से हाथ धो बैठे। पुलिस अमूमन ऐसे वाकये को खुदकुशी या बीमारी से हुई मौत बता कर पल्ला झाड़ लेती है। जबकि असल वजह होती है हिरासत के दौरान दी गई यातना, जिसके लिए ‘थर्ड डिग्री’ नाम प्रचलित है। यों तो कानूनन इस तरह के व्यवहार की मनाही है, और गिरफ्तारी व हिरासत संबंधी दिशा-निर्देश भी बने हुए हैं। पर बहुत सारे मामलों में हिरासत में लिये गए व्यक्ति को चौबीस घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के नियम का भी पालन नहीं होता। सर्वोच्च अदालत और उच्च न्यायालयों ने हिरासत में हुई मौतों पर स्वत: संज्ञान लेकर, नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें संविधान की तरफ से सौंपी गई जिम्मेदारी के प्रति गंभीरता का ही परिचय दिया है। इसी के साथ, उन्हें इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या किया जाए कि किसी को विचाराधीन कैदी के रूप में, यानी अभियोग सिद्ध हुए बगैर, जेल में न सड़ना पड़े।

जनसत्ता का संपादकीय दि. 29.12.2017.)

( आप इस संपादकीय में प्रस्तुत विचार मानते हैं तो इसे शेयर जरुर करें: पुलिस जांच में आधुनिक तरीके इस्तेमाल हों व  थर्ड डिग्री जैसे अमानवीय तरीके बंद हों)


गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

भारत में पुरानी है कांग्रेस पार्टी-जानिए

भारत के राजनीतिक दलों में कांग्रेस पार्टी सबसे पुरानी पार्टी के नाम से जानी जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए।

 कांग्रेस पार्टी में देश आजादी के​ पहले वे  बाद में कितने उतार-चढ़ाव आए और नेताओं में विचार भिन्नता भी रही।

28 दिसंबर 1885 में बनी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का आज 133वां स्थापना दिवस है. ये स्थापना दिवस इस बार खास होगा क्योंकि 19 साल बाद पार्टी को राहुल गांधी के तौर पर नया अध्यक्ष मिला है. राहुल कांग्रेस के 60वें अध्यक्ष हैं. वहीं आजादी के बाद की बात करें तो राहुल पार्टी के 19वें अध्यक्ष हैं. उनकी मां सोनिया गांधी ने 19 साल तक पार्टी की कमान संभाले रखी थी।


कांग्रेस की स्थापना एक अंग्रेज ऑफिसर रहे ए ओ ह्यूम (एलन ऑक्टेवियन ह्यूम) ने की थी. 28 दिसंबर 1885 को 72 सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों के दल ने कांग्रेस के पहले सेशन में हिस्सा लिया.


बम्बई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुए उस पहले सेशन के अध्यक्ष थे बैरिस्टर व्योमेश चंद्र बनर्जी. वहीं पार्टी का दूसरा सेशन ठीक एक साल बाद 27 दिसंबर 1886 में कोलकाता में हुआ था. सेशन की अध्यक्षता दादाभाई नैरोजी ने की थी।


इतिहासकारों के मुताबिक, कांग्रेस के शुरुआती सालों में इसका मकसद ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर देश की दिक्कतों को दूर करना था. लेकिन 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद कांग्रेस ने खुले तौर पर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिए.


कांग्रेस की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी के आंदोलन के ज्यादातर बड़े नेताओं का इस पार्टी से सरोकार रहा है. मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने आजादी से पहले इस पार्टी की अध्यक्षता की।

आजादी के बाद कांग्रेस के पहले अध्यक्ष आचार्य कृपलानी रहे. वहीं पार्टी ने जवाहरलाल नेहरू के चेहरे पर चुनाव लड़ा और पहले आम चुनावों में जबरदस्त सफलता पाई. देश के पहले पीएम के तौर पर नेहरू ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपना आधार बनाया, साथ ही देश की विदेश नीति भी कांग्रेस सरकार की खासियत बनी. कांग्रेस ने इसके बाद के सालों में कई अहम फैसले लिए जिसका आज के भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में अहम योगदान है.

साल 2017 में राहुल गांधी के तौर पर कांग्रेस को आजादी के बाद का 19वां अध्यक्ष मिला. राहुल नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी के 5वें ऐसे शख्स हैं जिन्होंने ये कुर्सी संभाली है. इससे पहले उनके नाना जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते समय 5 साल, इंदिरा गांधी- राजीव गांधी ने करीब 5-5 साल, सोनिया गांधी ने 19 साल तक इस पद को संभाला है.

कांग्रेस अध्यक्ष पद को महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चंद्र बोस समेत कुल 59 लोगों ने अबतक संभाला है. राहुल गांधी 60वें अध्यक्ष हैं.कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर पहला मतभेद साल 1939 में सामने आया था, जब सुभाष चंद्र बोस ने इस पद से इस्तीफा दे दिया था.आजादी के बाद पार्टी का नेतृत्व करने वाले कुल 18 नेताओं में से 14 नेहरू-गांधी परिवार से नहीं हैं.राहुल गांधी नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी के 5वें ऐसे व्यक्ति हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे हैं.आजादी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नजर डाले तो जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते समय 5 साल, इंदिरा गांधी- राजीव गांधी ने करीब 5-5 साल और पीवी नरसिंह राव ने भी करीब 4 साल तक इस जिम्मेदारी को संभाला.कांग्रेस में लालबहादुर शास्त्री और मनमोहन सिंह दो ऐसे नेता हैं जो प्रधानमंत्री तो बने लेकिन वो पार्टी के अध्यक्ष नहीं बन पाये.सोनिया गांधी ने सबसे ज्यादा 19 साल बतौर कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला, वहीं उनकी सास इंदिरा गांधी ने अलग-अलग कार्यकाल में कुल 7 साल इस दायित्व को निभाया है.सोनिया गांधी ने साल 1997 में पार्टी की सदस्यता ली थी और साल 1998 में अध्यक्ष बनी जो 2017 तक पदासीन रहीं। सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ने पार्टी की बागडोर अध्यक्ष के रूप में संभाली है।


स्वतंत्र भारत में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे नेताओं​ के नाम



स्वतंत्र भारत में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रह चुके नेताओं के नाम में हैं। वंशवाद का आरोप कितना सच्चा कितना झूठा है?

आचार्य कृपलानी (1947-1948)

पट्टाभिभि सीतारमैया (1948-1950)

पुरषोत्तम दास टंडन (1950-1951)

जवाहरलाल नेहरू(1951-1955)

यू. एन. धेबर (1955-1959)

इंदिरा गांधी ( 1978-84)

नीलम संजीव रेड्डी (1960-1964)

के. कामराज (1964-1968)

एस. निजलिंगप्पा (1968-1969)

पी. मेहुल (1969-1970)

जगजीवन राम (1970-1972)

शंकर दयाल शर्मा (1972-1974)

देवकांत बरआ (1975-1977)

इंदिरा गांधी (1959-1960 और 1978-84)

राजीव गांधी (1985-1991)

कमलापति त्रिपाठी (1991-1992)

पी. वी. नरसिंह राव (1992-1996)

सीताराम केसरी (1996-1998)

सोनिया गांधी (1998-2017)

राहुल गांधी- 2017.

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बुधवार, 27 दिसंबर 2017

एपेक्स सूरतगढ़ मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सूचनादाई रहा ईएसआईसी सेमिनार


सूरतगढ़ 27 दिसंबर 2017.

एपेक्स सूरतगढ़ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में ईएसआईसी सेकेंडरी सुविधा प्रारंभ होने के उपलक्ष में आज कर्मचारी राज्य बीमा निगम एवं एपेक्स सूरतगढ़ मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार का आयोजन हुआ जिसमें महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई।

मुख्य अतिथि राज्य चिकित्सा आयुक्त राजस्थान डॉक्टर मोना वर्मा ने अपने वक्तव्य में विभिन्न जानकारियां प्रदान की संयुक्त निदेशक प्रभारी जोधपुर के जी. सी. दर्जी, उप निदेशक जोधपुर बी.सी मीना, श्री गंगानगर के शाखा प्रबंधक मोहम्मद सलीम ने भी विभिन्न प्रकार से संपूर्ण सुविधाओं के बारे में बताया। उपस्थित संभागियों की ओर से पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देकर भी जानकारियां दी गई। डॉक्टर राजेंद्र छाबड़ा,डॉ अरविंद बंसल ने विचार प्रस्तुत किए।

 कार्यक्रम में डॉ विजय बेनीवाल, डॉक्टर संजय बजाज,डॉक्टर स्वर्णा बंसल भी उपस्थित थे।

अनेक संस्थाओं के संचालकों ने सेमिनार में भाग लिया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में सूरतगढ़ में यह सुविधा शुरू होने का बहुत बड़ा लाभ बताया।

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मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

घोटाले बाज मंचों पर होंगे विराजमान तो कैसे होगा भ्रष्टाचार मुक्त भारत


 - करणीदान सिंह राजपूत -

 भ्रष्टाचार घोटालों और काला बाजार से संपूर्ण देश दुखी है,परेशान है । 

सब जगह से सब तरह से आवाज उठ रही है कि देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराया जाए। 

देश की आजादी का क्या लाभ हुआ ? हालात सब के सामने हैं। 

हम साल भर देशभक्तों के बलिदानों की गाथा गाते हैं। उनकी याद में प्रतिमाओं के आगे या भवनों में समारोह मनाते हैं। राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं। उन पर विचार प्रकट करते हैं कि देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो तो संपूर्ण देश का कायाकल्प हो जाए। दिन रात दूसरों को उपदेश देते हैं लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। राष्ट्रीय दिवसों के कार्यक्रमों में शहीदों के कार्यक्रमों में सामाजिक कार्यक्रमों में मंचों पर घोटालेबाजों को भ्रष्टाचारियों को बैठाने में हमें मामूली शर्म महसूस नहीं होती है। 

हम कितने ही परिश्रम करके  आयोजन को सफल बनाने के लिए जनता से सहयोग की अपील करते हैं। जनता को आमंत्रित करते हैं। जनता भौचंकी रह जाती है कि जिन लोगों के विरुद्ध आवाज उठाते रहे हैं वे भ्रष्ट लोग घोटालेबाज लोग त़ मंच पर आसीन हैं। वे घोटालेबाज जनता को अच्छी बनने का उपदेश भी देते हैं। ऐसे में बाहर से आमंत्रित हुए को तो मालूम नहीं होता है कि उसके बराबर में बैठा व्यक्ति किस आचरण का है और जनता में उसकी क्या छवि है? अधिकतर राजनीति लोग जो किन्हीं पदों पर होते हैं उनको मंचों पर बैठा दिया जाता है।वे किन्हीं तिकड़मों से जीत कर पद हासिल कर लेते हैं मगर आयोजकों से तो कुछ छिपा नहीं होता। वे जानते हुए भी ऐसा करते हैं।

ऐसे में जब हम लोग ही घोटालेबाजों को इज्जत देते हैं तब वे सम्मानित हो जाते हैं। उनका स्थान तो जेलों में होना चाहिए लेकिन वे मंचों पर आसीन होते हैं। 

ऐसा तो नहीं है कि हम आयोजन करें और हमें मालूम भी न हो एक प्रकार से हम जीती मक्खी को निगलते हैं। ऐसे में जनता ही विचार करेगी वह ऐसे आयोजनों को माने या न माने और इनमें शामिल होने में परहेज करे। 

जनता जब नहीं पहुंचेगी या आयोजकों से सवाल जवाब करेगी तो निश्चित रुप से आने वाले समय में घोटालेबाजों का स्थान मंच पर नहीं होगा।

 हम एक तरफ तो कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते हैं घोटालेबाजों से मुक्त करना चाहते हैं। लेकिन एक प्रधानमंत्री कैसे अपनी योजना को कार्य रूप में परिणित कर सकेगा जब हम या अन्य लोग अच्छे कार्यक्रमों में अच्छे समारोहों में पूजनीय लोगों के याद कार्यक्रमों में घोटालेबाजों को मंचों पर बिठाएंगे? विचार करें कि क्या भ्रष्टाचारियों का स्थान समारोहों के मंचों पर होना चाहिए या जेल में होना चाहिए?

रविवार, 24 दिसंबर 2017

'हाबू'- चित्र रेखांकन एवं शीर्षक - अनाया सिंह ( 2वर्ष 1 माह)


प्रस्तुतकर्ता- करणीदानसिंह राजपूत।


प्रधानमंत्री जी,एक दिन डाक्टर बन कर देखो-कितने दबाव में काम करते हैं डाक्टर?

एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी में अपना हाल  बताने के लिए जो लिखा वह चर्चाओं में आ गया है।

 उन्होंने अपनी चिट्ठी में पीएम मोदी से अपील की है कि वो एक दिन के लिए उन जैसी जिंदगी जिएं तो उन्हें पता चलेगा कि डॉक्टरों पर किस तरह का दबाव होता है।

एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने यह कदम तब उठाया जब राजस्थान में कुछ डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए डॉक्टर सैलरी ना बढ़ाए जाने और प्रमोशन ना मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की बात कर रहे थे।

बता दें कि ऑल राजस्थान इन-‌सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन की हड़ताल पर जाने की मांग के बाद राजस्थान सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन महीने के लिए प्रदेश में राजस्थान इसेंशियल सर्विस मेंटेनेंस एक्ट(रेस्मा RESMA) लागू कर दिया है।


 च‌िट्ठी में लिखा यह-------

राजस्थान सरकार के इसी कदम के बाद एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने मोदी को चिट्ठी लिखते हुए विनती की है कि वह सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के ऊपर पड़ने वाले प्रेशर को समझें। जिस तरह सरकारी अस्पतालों में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण मरीजों के परिजन उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं उसे भी समझा जाना चाहिए।


एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हरजीत सिंह भट्टी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, 'हम खुशनसीब हैं कि हमें आपके जैसा सक्रिय पीएम मिला है, अब एम्स का रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आपसे विनती करता है कि आप सफेद एप्रन पहने और एक दिन सरकारी डॉक्टर के रूप में बिताएं ताकि आप समझ सकें कि हम कितना ज्यादा प्रेशर संभालते हैं। उन मरीजों का गुस्सा जिन्हें खराब होते हेल्थकेयर सिस्टम और बुरे इंफ्रास्ट्रक्टर की वजह से सही इलाज नहीं मिलता।'


उन्होंने आगे ये भी लिखा कि, 'अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका एक दिन का सरकारी डॉक्टर बनना हेल्थकेयर सिस्टम के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होगा और इससे लोगों की मेडिकल प्रोफेशन में आस्था बढ़ जाएगी।



हनुमानगढ़:सरस्वती महाविद्यालय में राजस्थानी विषय शुरू करवाने की मांग


 प्रतिनिधि मंडल ने की प्राचार्य से भेंट

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हनुमानगढ़ 24 दिसंबर 2017.


सरस्वती महाविद्यालय में आगामी सत्र 2018 में राजस्थानी साहित्य विषय बीए स्नातक में शुरू करवाने के लिए  डॉ.श्याम सुंदर शर्मा ,प्राचार्य ,सरस्वती महाविद्यालय से प्रतिनिधि मंडल मिला।

गौरतलब है कि कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय,जयपुर द्वारा नए विषय स्वीकृत किए जा रहे हैं।राजस्थानी छात्र मोर्चा राजस्थान में राजस्थानी साहित्य विषय खुलवाने का अभियान चला रहा है जिसके तहत मायड़ भाषा राजस्थानी छात्र मोर्चा,हनुमानगढ़ इकाई के  जिला अध्यक्ष अधिवक्ता अनिल शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधिमंडल में विक्रम बिश्नोई तहसील संयोजक, राजस्थानी छात्र मोर्चा, हनुमानगढ़,नवदीप कड़वासरा,नरेश स्वामी, राजेंद्र सारण, अजय सिंह झोरड़,एडवोकेट हरपाल सिंह भी शामिल थे।

राजस्थानी छात्र मोर्चा के प्रदेश संयोजक डॉ. गौरीशंकर निमिवाल ने बताया कि महाविद्यालयों में नए विषय खोलने हेतु  30 दिसंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं इसलिए अनेक महाविद्यालयों में नए विषय के रूप में राजस्थानी साहित्य को शुरू करवाने हेतु अभियान चलाया जा रहा है।डॉ.निमिवाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए सदैव तत्पर रहें। गौरतलब है कि राजस्थानी भाषा,साहित्य व राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के लेखकों,राजस्थानी भाषा प्रेमियों का बहुत बड़ा योगदान है जिसमें चंद्रसिंह बिरकाली,पदम् श्री रानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत,करणीदान बारहठ,मोहन आलोक,डॉ. मंगत बादल,जनकराज पारीक,ओम पुरोहित कागद,रामस्वरूप किसान,डॉ. सत्यनारायण सोनी,डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी,डॉ. भरत ओला,डॉ. कृष्ण कुमार 'आशु',मनोज स्वामी, विनोद स्वामी,राजू सारसर'राज' राजस्थानी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।वर्तमान में राजस्थानी युवा लेखन में इन दोनों जिलों में बहुत काम हो रहा है।राजस्थानी साहित्य के विद्यार्थियों की संख्या भी हजारों की तादाद में  सरस्वती महाविद्यालय में स्नातक स्तर राजस्थानी साहित्य विषय का अध्ययन अध्यापन होना बहुत जरूरी है।




शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

अनूपगढ़ से पालिका ईओ पृथ्वीराज जाखड़ को हटाया गया-एपीओ किया गया


- करणीदानसिंह राजपूत -

अनूपगढ़ नगर पालिका के कार्यरत अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ (  कर निर्धारक ) को इस स्थान से हटाया गया है। जाखड़ को एपीओ किया गया है। नए पद की प्रतीक्षा में जाखड़ की ड्यूटी स्थानीय निकाय निदेशालय जयपुर में रहेगी।


श्रीबिजयनगर के अधिशासी अधिकारी  को अनूपगढ़ अधिशासी अधिकारी पद का अतिरिक्त कार्यभार का आदेश दिया गया है।

 यह आदेश 14 दिसंबर 2017 को अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा की ओर से जारी किया गया है।

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गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का 37 वां प्रांतीय व 7 वां राष्ट्रीय अधिवेशन अलवर में आयोजित हुआ






अलवर के इतिहास की सबसे बड़ी जनजागरण रैली का आयोजन

19 दिसम्बर 2017 में

-- गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का 37 वां प्रांतीय व 7 वां राष्ट्रीय त्री दिवसीय अधिवेशन. 16 से 18 दिसंबर को महावर भवन अलवर में आयोजित हुआ।

 सम्मेलन में कार्यक्रम की अध्यक्षता चैन्नई से आए समिति संरक्षण मोतीलाल बिनानी ने की। मुख्य अतिथि भाजपा नेता ज्ञानदेव आहुजा थे। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी थे। विशिष्ट अतिथी के रूप में प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार राणियां वाला, महिला प्रदेश प्रभारी सरिता रूवाटियां, यूआईटी अलवर के चैयरमैन देवीसिंह शेखावत, प्रदेश मंहामंत्री लीलाधर पटवा व सरिता सरावगी मंचासिन थे। मेहमानों द्वारा सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुए इस अधिवेशन में छात्रा प्राची ने 'औ री चिरैया अंगना में आजा रै' सुनाया। सबसे पहले अलवर संभाग प्रभारी प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाबुलाल शर्मा ने स्वागत उदबोधन दिया। 

 राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी ने अपने सम्बोधन में सबसे पहले बेमिशाल रैली के आयोजन के लिए अलवरवासियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भी यही नारा देते हैं  कि बेटी बचाओ तो क्या भ्रूण हत्या बेटों की नहीं होती। गर्भ में पलने वाले सभी जीवों की रक्षा होनी चाहिए। 

गिरजा व्यास, अर्जुनराम मेघवाल आदि सांसदों द्वारा विधेयक लाने के वादे को भूल जाने पर नाराजगी जताई क्योंकि भ्रूण हत्या जैसे गंभीर विषय पर हमारे प्रतिनिधी संवेदन नहीं है। मानवता के मुद्दों से उन्हे कोई लेना देना नहीं है। कुछ सरकारी कानून ऐसे हैं जिनके चलते हजारों बेटियों की हत्या गर्भ में हो जाती है। गर्भस्थ शिशु के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। मुख्य अतिथि रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहुजा ने कहा कि हमारी भक्ति, हमारी शक्ति को परमात्मा इतनी शक्ति दे की हम सब इस जघन्य अपराध को रोकने में कामयाब हो सकें।



            साधक सम्मान से इन्हे किया गया सम्मानित


गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से 37 वें प्रातीय अधिवेशन में विशेष कार्य करने के लिए समिति से जुड़े साधकों को मुख्य अतिथि ज्ञानदेव आहुजा व अन्य अतिथियों ने शाल ओढाकर व समृति प्रतीक देकर साधक सम्मान से सम्मानित किया। जिनमें महेन्द्र वर्मा चूरू, योगेन्द्र कुमार भाटी बीकानेर, गिरधारी बेनीवाल सरदारशहर, मनोज कुमार स्वामी सूरतगढ़, श्याम खेड़लवाल बांदीकुई, लीलाधर पटवा श्रीगंगानगर, सरिता सरावगी तारानगर, करणीदान मंत्री सुजानगढ़, श्याम मंत्री कुचामन, राजकुमार राणियांवाला नोहर, बाबुलाल शर्मा, प्राची पारीक, दलीप सिंह यादव अलवर शामिल थे। 

श्रीगंगानगर समिति की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी को शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया। 

इससे पहले विशाल जनजागरण रैली को कम्पनी बाग से डीएसपी यशपाल त्रिपाठी न हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम का संचालन धर्मवीर पारासर ने किया।



मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

राजस्थान के एक मंत्री की जबान फिसली-पीएम को बताया सबसे भ्रष्ट

 वाह-वाही करने के प्रयास में अक्सर राजनेता कुछ ऐसा कह जाते हैं जो उनकी परेशानी का कारण बन जाता है। एेसा ही कुछ भाजपा के एक और वरिष्ठ मंत्री के साथ हुआ है। राजस्थान की भाजपा सरकार के श्रम मंत्री जसवंत सिंह यादव की जुबान एेसी फिसली कि उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल मंत्री से जब पार्टी की गुजरात व हिमाचल में हुई जीत पर सवाल पूछा गया, तो उनकी जुबान फिसल गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते-करते उन्हें ही दु​निया के सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री बता दिया। इस दौरान उन्हें बिलकुल महसूस ही नहीं हुआ कि उनकी जुबान फिसल गई है। वहां मीडिया सहित सभी सुनने वाले चौंक गए, लेकिन मंत्री अपनी बात पूरी करते रहे, उन्हें एेसा लगा ही नहीं कि वे कुछ गलत बोल गए हैं।।

टिप्पणी-शायद वे वरिष्ठ कहना चाहते हों।

गुजरात का 2019 वास्ते संदेश ! कांग्रेस मुक्त भारत संभव नहीं!!



सामयिक लेख-रमेश छाबड़ा


जनता ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपना फैसला दे दिया है।दोनों प्रदेशों में बीजेपी की जीत हुई है।जहाँ तक हिमाचल का सवाल है वहां पिछले तीस साल से बीजेपी व कांग्रेस बारी बारी से सरकार में आते रहे हैं व इस बार वहां वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी जिसके स्थान पर अब बीजेपी दो तिहाई बहुमत से 44 सीटों पर कब्ज़ा करके सरकार में आ रही है जबकि कांग्रेस को 21 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। हालांकि इस चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री के चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल व बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती खुद अपना चुनाव हार गए है । बीजेपी के दो प्रमुख चेहरों की हार के बाद भले ही पार्टी ने चुनाव जीत लिया हो पर वहां जश्न जैसा माहौल नहीं है। दूसरी तरफ गुजरात में बीजेपी जो 150 सीट जीतने का दावा कर रही थी व अधिकांश एग्जिट पोल उसे 120 के आसपास सीट दे रहे थे वो प्राप्त परिणाम में 99 पर सिमट कर रह गयी है जबकि कांग्रेस 80 सीटों तक आ कर कड़ी टक्कर दे सकी है। भले ही बीजेपी ने जीत हासिल कर ली होै पर पिछले 22 वर्षों में उसकी ये सीटें सबसे कम रही है और विपक्ष के पास इतनी सीटें आज़ादी के बाद आज तक कभी नहीं रही। परिणाम ये तो बताता है कि मोदी का करिश्मा अभी बरक़रार है पर जिस तरह से सीट घटी हैं वो भविष्य की ओर इशारा भी है कि 2019 का कुछ तय नहीं हैं। बीजेपी ये दावा कर रही है कि इस बार उसकी सीट कम हो गयी हैं पर उनका मत प्रतिशत 2012 के मुकाबले 2 प्रतिशत बढ़ा है उसे यह भी याद रखना चाहिए कि 2014 के चुनाव में उसका मत प्रतिशत जो 60 तक हो गया था अब वो मात्र साढ़े तीन साल में घट कर 49.5 प्रतिशत रह गया है।2014 चुनाव में बीजेपी को 165 विधान सभा सीटों में बढ़त हासिल थी जो अब घटकर सिर्फ 99 सीटों में सिमट गयी है।इसके विपरीत कांग्रेस की सीट और मत प्रतिशत दोनों में इजाफा हुआ है।कुल मिला कर ये एक ऐसा परिणाम है जिसमे जीतने व हारने वाले दोनों खुश हो सकते हैं। मोदी इस जीत को जातिवाद पर विकास की जीत बता रहे हैं जबकि अन्य इसे चुनाव के अंतिम चरण में किये गए ध्रुवीकरण का प्रभाव बता रहे हैं।चुनाव प्रचार जिस तरह चला और मोदी जी ने प्रधान मंत्री रहते हुए इस बार विकास  का नाम छोड़ कर कभी हाफिज सईद, पाकिस्तान  व कभी गुजरात का बेटा जैसे भावनात्मक और ध्रुवीकरण के मुद्दों पर ज्यादा बात की।यही नहीं उन्होंने प्रचार के दौरान पूर्व पीएम मनमोहनसिंह ,पूर्व उपराष्ट्रपति व पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर सहित बहुत लोगों पर षड्यंत्र करने के आरोप भी लगा दिए उससे लगता है कि चुनाव प्रचार में पीएम अपने पद की गरिमा तक का ख्याल रखना भूल जाते  हैं।इसके विपरीत पूरे चुनाव में राहुल ने प्रचार में शालीनता बनाये रक्खी।उनके दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने जब पीएम के खिलाफ गलत टिपण्णी की तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाने में देरी नहीं की।ये सभी मानते हैं कि जो लोग राहुल को अब तक हल्के में लेते थे इसबार उन्होंने उन्हें परिपक्व मान कर गंभीरता से सुना।कुल मिला करअगर प्रचार में कही गयी बातों को देखा जाय तो इस बार राहुल का कद बढ़ा है  जबकि इस मामले में मोदी का कद कुछ कम हुआ है।चुनाव परिणामो ने बीजेपी को जीत तो दी है पर दोनों जगह मजबूत विपक्ष भी दिया है । जो लोग कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे उन्हें समझा दिया है कि ऐसा फ़िलहाल संभव नहीं है।


रमेश छाबड़ा

मो 09928831763



मंत्री डा. रामप्रताप के राजस्थानी भाषा मान्यता पर दिए बयान की निंदा की गई:



सूरतगढ 19.12.2017.

 राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप द्वारा राजस्थानी भाषा को लेकर दिए गए बयान के बाद राजस्थानी भाषा प्रेमियों में आक्रोश फैल गया है। सूरतगढ़ में अखिल भारतीय राजस् थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति की ओर से जल संसाधन मंत्री  के प्रति निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।

 इस मौके पर संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भाषा प्रेमियों ने जल संसाधन मंत्री के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और विरोध जताया। 


इन भाषा प्रेमियों नें की निंदा

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अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश मंत्री मनोज कुमार स्वामी ने जल संसाधन मंत्री के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया और जल संसाधन मंत्री से बयान वापस लेने की मांग की। 

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक करणीदान सिंह राजपूत ने कहा कि केवल रामप्रताप की ही नहीं राजस्थान सरकार की भी निंदा की जानी चाहिए क्योंकि अकादमी कहां अध्यक्ष मनोनीत नहीं किया जिससे सारे कार्य रुके हुए पड़े हैं। जिला परिषद सदस्य डूंगरराम गेदर ने कहा कि एक तरफ तो सरकार राजस्थानी को बढ़ावा देने की बात कर रही है। दूसरी ओर ऐसे बयान राजस्थानी संस्कृति के लिए अपमान रूप से देखे जाने चाहिए। 

युवा पत्रकार योगेश मेघवाल ने कहा कि राजस्थान के युवाओं की आजीविका से जुड़ा हुआ राजस्थानी भाषा की मान्यता का सवाल जो वर्षो से संघर्ष के मार्ग पर है। ऐसे में डॉक्टर रामप्रताप के गैर जिम्मेदाराना बयान की कड़े शब्दो में युवा निंदा करते है। 

डॉ. गौरीशंकर निमिवाल ने कहा कि 25 अगस्त 2003 को कांग्रेस सरकार ने सर्वसम्मति से 200 विधायकों के हस्ताक्षर युक्त संकल्प प्रस्ताप को केन्द्र सरकार को भिजवाया था। उस वक्त डाॅ. रामप्रताप प्रतिपक्ष के नेता थे और उनके भी हस्ताक्षर थे। 

महावीर भोजक ने कहा कि जब डाॅ. रामप्रताप सूरतगढ़ आएंगे हम उन्हें काले झण्डे दिखाएगे। 

व्योवृद्व भाषा प्रेमी दिलात्मप्रकाश जैन ने कहा कि ऐसे बयान से डॉ. रामप्रताप के सार्वजनिक स्थानों पर पुतले लटकाकर विरोध किया जाना चाहिए।

 निंदा प्रस्ताव बैठक में अध्यक्षीय उद्बोधन में परसराम भाटिया ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2013 के चुनाव में अपने घोषणापत्र में राजस्थानी भाषा की मान्यता व संवर्धन की बात की थी लेकिन उसी राजस्थान सरकार के मंत्री का ऐसा बयान बौखलाहट भरा है।

 पवन सोनी नें कहा कि ऐसे बयान का खामियाजा भाजपा को आने वाले समय में भुगतना पड़ेगा। 

इस निंदा प्रस्ताव बैठक में अवस्थ्य कुमार, पीताम्बरदत शर्मा, शिव सेना के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कांडा आदि बड़ी संख्या में भाषा प्रेमी शामिल हुए। गौरतलब है कि पीलीबंगा तहसील के बहलोल नगर में आयोजित जनसुनवाई में राजस्थानी भाषा प्रेमियों के शिष्टमंडल से वार्ता के दौरान सिंचाई मंत्री ने राजस्थानी भाषा को लेकर गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की थी। जिसके बाद से प्रदेश भर के राजस्थानी भाषा प्रेमियों में आक्रोश है।

भाषा के प्रति ये दिया था बयान

डाॅ. रामप्रताप ने कहा कि राजस्थान में अलग अलग तरीके से बोली जाती है राजस्थानी। आप किस राजस्थानी भाषा की मान्यता की बात कर रहे हो। राजस्थानी भाषा मान्यता का सवाल ही नहीं है। मै इस मुददे पर कोई बात नहीं करना चाहता।

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

गुजरात जीत के बावजूद राजस्थान में भाजपा की चिंता क्यों बढी-गुजरात मिशन 150था राजस्थान में मिशन 180है

गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उठे इस एक ज्वलंत सवाल ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा कि चिंता बढ़ा दी है। ये चिंता विशेषकर चुनाव से पूर्व तय किए गए मिशन को लेकर है।

राजस्थान में भी ठीक एक साल बाद दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ​अमित शाह ने राजस्थान को 'मिशन-180' दिया है।

गुजरात में 182 विधानसभा की सीट है और वहां के लिए 'मिशन-150' तय किया गया था, लेकिन 'मिशन-150' को हासिल करने में भाजपा काफी पीछे रह गई। वहां भाजपा सरकार बना रही है, लेकिन मिशन का आकड़ा बहुत पीछे छूट गया है। जबकि इस मिशन को ​पूरा करने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अमित शाह पूरी तरह सक्रिय रहे।

राजस्थान में विधानसभा की 200 विधानसभा सीट हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 161, कांग्रेस ने 24, बसपा ने दो, नेशनल पीपुल पार्टी ने चार, जमीदारा पार्टी ने दो और निर्दलीयों सात सीट पर कब्जा किया था।  

विधानसभा चुनाव-2018 के लिए राजस्थान में मिशन-180 दिया है। गुजरात चुनाव परिणाम इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि नोटबंदी, जीएसटी, जैसे कदमों का असर पड़ा है। भले ही इसे भाजपा नकारे। स्थानीय मुद्दों में आरक्षण ने भी गुजरात में खासा असर डाला है। 

बात राजस्थान की करें तो यहां भाजपा में अंदरूनी तौर पर प्रदेश नेतृत्व को लेकर खासी नाराजगी है। सत्ता और संगठन के बीच खींचतान कई बार सामने आ चुकी है। विधायक कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरते नजर आए हैं। दो-तीन विधायक तो ऐसे हैं जिन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वे कई बार नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा चुके हैंं।

 वसुंधरा सरकार ने सरकारी नौकरियों को जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया। कभी आरक्षण विवाद के चलते तो कभी अन्य कारणों से ये अटका रहा। आरक्षण को लेकर विवाद अभी तक नहीं सुलझा है। इस बारे में सरकार की ओर से जो भी फैसला लिया उस पर अदालती विवाद हो गया। इससे गुर्जर तथा अन्य जातियों में खासी नाराजगी है।किसानों की कर्जमाफी की मांग को नजरअंदाज किया गया। डॉक्टर्स की बार-बार हड़ताल से जनता परेशान। वेतन आयोग में विंसगतियों और एरियर को लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश। प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ी है। पहलू खां, अफराजुल लाइव मर्डर, चेतन सैनी, पद्मावती विवाद, जयपुर में उपद्रव, आनंदपाल एनकाउंटर समेत ऐसे कई मुद्दे है जिनकों लेकर सरकार की किरकिरी हुई है।

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क्या गुजरात की जीत का लाभ भाजपा को राजस्थान में तीन उपचुनावों में मिलेगा?


अजमेर, अलवर में लोकसभा तथा मांडलगढ़ में विधानसभा के उपचुनाव होने वाले हैं

18 दिसम्बर 2017 को गुजरात और हिमाचल के चुनाव परिणाम हो जाने के बाद अब राजस्थान में होने वाले तीन उपचुनावों की घोषणा कभी भी हो सकती हैं। राजस्थान में अजमेर व अलवर में लोकसभा तथा भीलवाड़ा के मांडलगढ़ के विधानसभा के उपचुनाव होने हैं। इन तीनों ही स्थानों पर भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधियों के निधन की वजह से उपचुनाव हो रहे हैं।

गुजरात राजस्थान की सीमा से लगा होने के कारण यह माना जा रहा है कि वहां के परिणाम राजस्थान पर असर डालेंगे।

हालांकि राजस्थान में भी 11 माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार को इन  तीन उपचुनावों का सामना करना पड़ेगा। 

वर्तमान में राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों में से 162 पर भाजपा के विधायक हैं। लेकिन सरकार की स्थिति को अच्छा नहीं माना जा रहा है।

 अब भाजपा के नेता गुजरात की जीत को  यहां उपचुनावों में भुनाने की कोशिश करेंगे। वहीं कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि गुजरात के परिणामों का असर राजस्थान में नहीं पडे़गा। क्योंकि दोनों प्रदेशों की परिस्थितियां अलग अलग हैं। 

राजस्थान में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर समाज के सभी वर्गो से नाराजगी हैं। उपचुनाव के माध्यम से मतदाता भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं। इस समय भी चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से प्रदेश भर के मरीज परेशान है तो राज्य भर में नए वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों ने भी सरकार के विरुद्ध आंदोलन चला रखा है। आंदनपाल एकाउंटर की वजह से राजपूत और रावणा राजपूत सरकार से नाराज चल रहे हैं।

 भाजपा के विधायकों के घमंडी व्यवहार की वजह से आम लोगों में नाराजगी है। हालांकि सीएम राजे ने उपचुनाव वाले दोनों जिलों में विधानसभा वार जनसंवाद कर नाराजगी को कम करने की कोशिश की है, लेकिन सीएम के यह प्रयास ज्यादा सफल नहीं हो पाते हैं। सत्ता के नशे की वजह से भाजपा के बढ़े नेताओं में आपसी खींचतान भी है। ऐसे में देखना होगा कि राजस्थान में भाजपा गुजरात का कितना फायदा उठा पाती है।

एस.पी.मित्तल) (18-12-17)


रविवार, 17 दिसंबर 2017

भाजपा सांसद ने क्या कह दिया? गुजरात में भाजपा हारेगी



भारतीय जनता पार्टी के ही एक सांसद ने गुजरात में पार्टी की हार का दावा किया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय काकड़े का दावा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार हो रही है।

काकड़े ये भी कहते हैं कि गुजरात में बहुमत तो छोड़ दीजिए, भाजपा को सरकार बनाने लायक सीटें भी नहीं मिल रहीं। आपको बता दें कि गुजरात चुनाव में नतीजे 18 दिसंबर को आने वाले हैं। इससे पहले ज्यादातर एग्जिट पोल में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी को बहुमत मिलने की बात कही गई है। 

राज्यसभा सदस्य संजय काकड़े ने कहा है कि बहुंत पार्टी को नहीं बल्कि कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचेगी। उन्होंने ये भी कहा कि यदि फिर भी पार्टी ने राज्य में सत्ता कायम रखी तो भी यह सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी के चलते होगी। 

काकड़े ने दावा किया कि उनकी टीम ने गुजरात में एक सर्वेक्षण किया है और उनका दावा सर्वेक्षण के नतीजों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि मैंने छह लोगों की एक टीम गुजरात भेजी थी। वे ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में गए जहां वे लोग किसानों, चालकों, वेटरों और श्रमिकों से मिले। उनके सर्वेक्षण के आधार पर और खुद के अवलोकन से मुझे लगता है कि भाजपा को गुजरात में पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। 

काकड़े ने अपने अनुमान के लिए भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ नकरात्मक भावना की भाजपा को कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि पिछली कुछ रैलियों में पार्टी नेताओं ने विकास पर एक शब्द नहीं बोला।



कुलचंद्र गांव कविताओं से हर्षाया - हुआ भाव विभोर

 कुलचंद्र गांव में एक कदम गांव की ओर कार्यक्रम के तहत राजकीय माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में ग्राम की प्रतिभाओं का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण सांखला,विशिष्ठ अतिथि डॉ.रमेश डूडी,मदन लाल भोबिया,अधिवक्ता अनिल शर्मा थे।

संयोजक मोहनलाल डूडी ने बताया कवि सम्मेलन में बीकानेर संभाग के कवियों ने कविताओं से विविध रंगों से दर्शकों को रूबरू करवाया।बीकानेर से पधारे सुप्रसिद्ध राजस्थानी कवि शंकरसिंह राजपुरोहित बीकानेर ने मोबाईल पर कटाक्ष करते हुए धमाल कर लो दुनियां मुठ्ठी में,ओ बेचणिया रो नारो रे,काम धाम सब छोड़ भायां मोबाईल धारो रे सुनाकर खूब दाद पाई।

राजस्थानी हास्य कवि हरीश हैरी ने अपने ही अंदाज में राजस्थानी कविताएं सुनाई।

युवा कवि अशोक परिहार उदय ने मां बाप का यूं दिल ना दुखा,तेरी करतूत से दिल टूट जाएगा सुनाकर भावविभोर कर दिया।

कुलचन्द्र के युवा रंगकर्मी,आलोचक व कवि डॉ.गौरीशंकर निमिवाल ने अपनी कविताओं से खूब दाद पाई।कवि अजमेरसिंह ने हास्य कविताओं से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।

कार्यक्रम में गांव की प्रतिभाओं का भी सम्मान व गरीब प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए एक फाउंडेशन का गठन भी किया गया।मुख्य अतिथि लक्ष्मणसिंह सांखला ने युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने के लिए 

कार्यक्रम में विनोद झोरड़,मोहनलाल शर्मा,चानणराम सैनी,डॉ.सुरेन्द्र सहारण,दिनेश जाखड़,अभिषेक झोरड़,विजयसिंह डूडी,दौलतराम टाक,विष्णु शर्मा,चंदुराम शर्मा,कुलवंत वर्मा,रामकुमार निमिवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।मंच संचालन रमन निमिवाल ने किया। संस्था के अध्यक्ष बूटासिंह बजरोत ने सफल कार्यक्रम हेतु सबका आभार व्यक्त किया


शनिवार, 16 दिसंबर 2017

राजस्थान के भाजपा विधायक ने सरकार पर मारा ताना- सरकार के 4साल समारोह में

राजनीति में अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले बीजेपी एमएलए ने एक बार फिर अपनी ही सरकार के मंत्री और सांसद पर ताना मारा।

मामला राजस्थान के कोटा जिले से आने वाले बीजेपी एमएलए भवानी सिंह राजावत से जुड़ा है। आज यहां एमएलए भवानी सिंह ने राजस्थान सरकार के 4 साल पूरे होने पर आयोजित हुए समारोह में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लेकर सांसद और प्रभारी मंत्री सहित सभी को आड़े हाथों लेते हुए खरी-खरी सुनाई। मंच पर मौजूद मंत्री प्रभुलाल सैनी सहित सांसद ओम बिरला और सभी विधायको के बीच विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि सरकार के 4 साल बेमिसाल तब होते जब कोटा में नया एयरपोर्ट का शिलान्यास होता।

राजावत ने कहा कि वे अपनी मेहनत के बल पर खड़े हुए हैं ना कि किसी सरकार की बदौलत। राजावत ने कहा कि अब कोटा उड़ना चाहता है, लेकिन इन उड़नखटोलों से नहीं। यहीं नहीं राजावत ने केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की सी-प्लेन उड़ाने की योजना पर कहा कि हमें सी-प्लेन की जरूरत नहीं है।

एमएलए भवानी सिंह राजावत ने मंच पर मौजूद प्रदेश सरकार में मंत्री प्रभुलाल सैनी की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप प्रभारी भी हैं और भारी भी हैं। हम सरकार में जीरो हैं और आप हीरो, लेकिन जनता में हम ही हीरो हो सकते हैं। यहीं उन्होनें स्मार्ट सिटी में शामिल कोटा के लिए कहा कि सांसद बिरला  ने शहर की सफाई के दौरान झाड़ू तोड़ दिए, लेकिन शहर साफ नहीं हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले भी एमएलए राजावत ने चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ की मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए आयोजित अधिकारियों की बैठक को छोड़कर बाहर आ गए थे। उन्होंने चिकित्सा महकमे पर आरोप जड़े थे कि महकमा गलत आंकड़े पेश कर रहा है। आंकडे डेंगूं से होने वाली मौतों को लेकर था।

कोटा 16..12.2017.


मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को काले झंडे दिखाए-पुलिस ने की पिटाई


राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जनसंवाद कार्यक्रम में विरोध का  सामना करना पड़ा। यहां फतेहपुर में सरकारी कॉलेज नहीं खोले जाने से नाराज एसएफआई के छात्रों ने सीएम को काले झंडे दिखाए और कार्यक्रम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में पुलिस ने विरोध करने वाले छात्रों पर लाठियां भांजकर खदेड़ा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जनसंवाद कार्यक्रम के लिए फतेहपुर पहुंची। मुख्यमंत्री राजे ने अन्नपूर्णा भंडार योजना व 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत की। इस दौरान वसुंधरा राजे महिलाओं से रूबरू हुईं। मुख्यमंत्री ने अलग अलग समाजों से संवाद स्थापित किया और समस्याएं जानीं। सीएम राजे ने लोगों की परेशानियों के निदान करने के दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अन्नपूर्णा रसोई योजना के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इससे पहले हेलीपैड पर सांसद सुमेधानंद, चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया, प्रभारी मंत्री राजकुमार रिणवा, आईजी हेमंत प्रियदर्शी, जिला कलक्टर नरेश ठकराल, एसपी विनीत कुमार सहित जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने सीएम राजे का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों से संवाद कायम कर रही थीं, इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के बाहर कॉलेज छात्रों ने काले झंडे दिखाकर जमकर नारेबाजी की। फतेहपुर में सरकारी कॉलेज खोलने सहित विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों ने जमकर हुड़दंग मचाया। 

बाद में पुलिस ने बल प्रयोग कर छात्रों को खदेड़ा। पुलिस ने घरों में घुसे छात्रों को निकाल निकाल कर पीटा। इस दौरान छात्रों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने की कोशिश भी की। पुलिस ने इस मामले में आधा दर्जन छात्रों को हिरासत में लिया है।

16.12.2017..


शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

30 पत्रकारों के सर्वे में भी गुजरात में भाजपा की सरकार

एबीपी न्यूज ने गुजरात के 30 पत्रकारों के जरिए अलग-अलग जिलों का एग्जिट पोल कराया है। एग्जिट पोल के मुताबिक 182 सदस्यों वाले गुजरात विधान सभा में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 75 और अन्य को तीन सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि, इससे पहले 14 दिसंबर को आए सभी एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक बीजेपी को औसतन 115 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। 30 पत्रकारों का सर्वे इस औसत से भी कम सीट बीजेपी को दे रहा है।

तीस पत्रकारों के सर्वे में कच्छ-सौराष्ट्र इलाके में दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर बताई गई है। यहां की  कुल 54 विधान सभा सीटों में से बीजेपी को 25, कांग्रेस को 27 और अन्य को दो सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वे में जिलावार एग्जिट पोल के नतीजे भी दिखाए गए हैं। इनके मुताबिक कच्छ जिले की छह में से 5 सीटें बीजेपी को मिलने की उम्मीद  है। 1 सीट कांग्रेस को मिल सकती है। सुरेंद्र नगर जिले की पांच में से 3 सीटें बीजेपी को और 2 सीट कांग्रेस को मिलने की उम्मीद जताई गई है। पत्रकारों के सर्वे में बताया गया है कि राजकोट जिले की कुल आठ सीटों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों को 4-4 सीट मिलने की उम्मीद है। यहां बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर बताई जा रही है।

दक्षिण गुजरात की 35 सीटों में बीजेपी को बढ़त मिलता हुआ दिखाया गया है। बीजेपी को 21 और कांग्रेस को 14 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। उत्तर गुजरात की कुल 53 विधान सभा सीटों में बीजेपी के खाते में 34 और कांग्रेस के खाते में 19 सीटें जाने की उम्मीद पत्रकारों ने जताई है। इसी इलाके के तहत अहमदाबाद जिले में बदलाव के संकेत नहीं हैं। 21 सीटों में 18 बीजेपी और तीन कांग्रेस के खाते में जाने का अनुमान है। मध्य गुजरात के तहत आने वाली कुल 40 विधान सभा सीटों में से 24 बीजेपी के खाते में जा सकती है जबकि 15 कांग्रेस और एक सीट अन्य के खाते में जा सकती है।

पत्रकारों के सर्वे में भी बीजेपी की सरकार बन रही है। इससे पहले विभिन्न सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल के मुताबिक भी बीजेपी की सरकार बनती दिख रही थी। जहां तक एबीपी न्यूज और सीएसडीएस के एग्जिट पोल का सवाल है, उसमें बीजेपी को 117, कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 64 जबकि अन्य को 1 सीट मिलने की संभावना जताई गई है। बता दें कि गुजरात में कुल 182 विधान सभा सीटों के लिए वोटिंग हुई है। मौजूदा विधान सभा में बीजेपी के पास 116 सीटें हैं। पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य होने की वजह से गुजरात चुनाव बीजेपी के लिए नाक की लड़ाई है। दूसरे चरण के लिए गुरुवार 14 दिसंबर को मतदान हुआ। इस चरण में कुल 93 सीटों पर मतदान किया गया। 9 दिसंबर को पहले चरण की 89 सीटों पर 66.75 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

15.12.2017.
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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

गुजरात में दिग्गजों ने वोट कहां डाले?


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने पूर्व मतक्षेत्र नारणपुरा में मतदान करने पहुंचे जबकि केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वेजलपुर में मतदान किया। मतदान के दौरान उनके साथ भारी संख्या में कार्यकर्ता भी मोजूद रहे।

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने मेहसाणा में मतदान के बाद कहा कि राज्य में भाजपा के पक्ष में माहौल है, आंदोलन करने वाले कांग्रेस के एजेंट थे, यह बात अब चुनाव के समय साफ हो गया। गुजरात की जनता विकास पसंद है। वह ऐसे आंदोलन कर विकास में बाधा उत्पन्न करने वालों को माफ नहीं करेगी। कांग्रेस ने पूरे चुनाव प्रचार में गलत मुद्दे उठाकर चुनाव के माहौल को खराब करने का प्रयास किया।

 गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जाडेजा, राज्य परिवहन मंत्री वल्ललभ काकडिया ने अहमदाबाद में मतदान किया। काकडिया ने मतदान से पहले अपने ट्रस्ट के हॉस्पीटल पहुंचे और मरीजों का हालचाल पूछा। अस्पताल से वे सीधे मतदान करने बूथ पर गए।

पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने घाटलोडिया में मतदान किया। मुख्य चुनाव अधिकारी बी बी स्वैन ने भी अपना मतदान किया, सुबह करीब नौ बजे स्वेन गांधीनगर मतदान केन्द्र पर पहुंचे वहां उन्होंने मतदान किया।

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने अपने गांव वीरमगाम में मतदान किया। हार्दिक ने कहा उनका आंदोलन भाजपा के खिलाफ था इसलिए चुनाव में अपने आप ही उनका समर्थन कांग्रेस को जाता है।

हार्दिक के मुताबिक, इस चुनाव में जनता ने अपने अधिकारों की मांग की जिसे भाजपा पूरा नहीं कर सकी। हार्दिक की मां उषा पटेल व बहन मोनिका ने भी सुबह वीरमगाम में ही मतदान किया।

दूसरे चरण के मतदान से पहले दलित नेता जिगनेश मेवाणी के विधानसभा क्षेत्र वडगाम में उन पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगाते हुए पेम्पलेट बांटे गए। मेवाणी को मुस्लिमों का फर्जी पोस्टर ब्वॉय बताते हुए उनके नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा है।

उत्तर गुजरात की वडगाम सीट से निर्दलीय प्रत्याशी जिगनेश मेवाणी के सामने कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है, कांग्रेस के समर्थन से मेवाणी यहां भाजपा के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।

वडगाम में मुस्लिम व दलित मतदाता बहुल संख्या में होने से मेवाणी अपनी जीत को लेकर भले आश्वस्त हों लेकिन हाल ही में उनके मतक्षेत्र में पंपलेट बांटे जा रहे हैं जिन पर लिखा है कि जिगनेश मुस्लिम विरोधी मानसिकता रखते हैं।

एक टीवी इंटरव्यू के हवाले से दावा किया जा रहा है कि खुद जिगनेश ने माना है कि उनकी पहली प्रेमिका मुस्लिम थी। साथ ही आरोप लगाया गया है कि वह केवल मुस्लिम समाज को गुमराह कर रहा है, मुस्लिम समाज का नेता बनने वाले मेवाणी को उनके नाम पर केवल राजनीति करनी है।



भगवान गुजरात का भला करे- नरेंद्र मोदी की मां हीरा बा-वोट देने के बाद कहा




अहमदाबाद 14.12.2017.

 गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीरा बा ने गांधीनगर में सुबह नौ बजे से पहले पहुंचकर मतदान किया। हीरा बा ने अपने संदेश में कहा कि भगवान गुजरात का भला करे। वे अपने पुत्र व बहू के साथ मतदान केंद्र पहुंची थीं।

हीरा बा गांधीनगर के रायसण गांव में अपने छोटे बेटे पंकज मोदी के साथ रहती हैं। मोदी अपने जन्मदिन पर अक्सर अपनी माता का आशीर्वाद लेने जाया करते हैं।

हीराबा हर चुनाव में मतदान करने जाती हैं। गत लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे मतदान करने पहुंची थीं। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के नोटबंदी के ऐलान के बाद हीराबा ने उसके समर्थन में बैंक पहुंचकर अपने हजार व पांच के नोट बदलवाने के लिए भी बैंक गई थीं।

हीराबा वर्षों तक अपने छोटे पुत्र पंकज के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री आवास से लगभग दो किलोमीटर दूरी पर रही लेकिन कभी अपने तत्कालीन सीएम पुत्र से मिलने बंगले पर नहीं गईं।



गुजरात: लोगों का गुस्सा भाजपा विरोधी वोट में क्यों नहीं बदला? कांग्रेस के उधार के नेता थे




चुनाव विश्लेषक से नेता बने योगेंद्र यादव ने गुजरात चुनाव को लेकर अपना अनुमान गलत मान लिया है। उन्होंने 13 दिसंबर को कहा था कि गुजरात में बीजेपी की जीत संभव नहीं है, बल्कि बड़ी हार भी हो सकती है। उन्होंने एग्जिट पोल के नतीजे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोटे तौर पर गुजरात में बीजेपी का वर्चस्व कायम है। बता दें कि 14 दिसंबर को आए सभी एग्जिट पोल में बीजेपी को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीतता दिखाया गया। योगेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा वोट में तब्दील क्यों नहीं हो पाया। कांग्रेस के बारे में उन्होंने कहा कि गुजरात में बीजेपी के विरोध में कांग्रेस सड़क पर नहीं उतरी। उतरे तो हार्दिक पटेल, अल्पेश ठकोर जैसे नेता। उधार के नेताओं से लड़ाई नहीं जीती जा सकती।


यादव ने कहा कि मेरा अनुमान मन की बात पर आधारित नहीं था। यह दो सर्वेक्षणों पर आधारित था। लेकिन आज की तारीख में उन सर्वेक्षणों के नतीजे भी बदले हुए हैं। मैं उनका सम्मान करूंगा, उनसे सीखूंगा।


क्या आशंका जताई थी योगेंद्र यादव ने?


योगेंद्र यादव ने जो तीन मुमकिन परिणाम अपने हिसाब से बताएं थे। अगर उनकी बात की जाए तो तीनों ही नतीजों में बीजेपी को राज्य में हार मिल रही है।


My projections for Gujarat


Scenario1: Possible

BJP 43% votes, 86 seats

INC 43% votes, 92 seats


Scenario 2: Likely

BJP 41% votes, 65 seats

INC 45% votes, 113 seats


Scenario 3: Can’t be ruled out

Even bigger defeat for the BJP


बता दें कि एग्जिट पोल में गुजरात में पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से सत्ता पर काबिज भाजपा की ही सरकार बनती दिख रही है। समाचार चैनल ‘आज तक’ पर प्रसारित ‘इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया पोल’ के मुताबिक, राज्य में मोदी मैजिक कायम है। इस एग्जिट पोल में भाजपा को 99 से 113 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में गुजरात की सत्ता में भाजपा की ही वापसी होने जा रही है। पिछले 22 वर्षों से सत्ता से दूर कांग्रेस को 68 से 82 सीटें मिलने का अनुमान है। गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं। पहले चरण में 89 सीटों के लिए मतदान हुआ था। ‘आज तक’ के एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा को 48 और कांग्रेस को 40 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। पहले चरण में भाजपा को 46 तो कांग्रेस को 43 फीसद वोट मिलने की बात कही गई है

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गुजरात चुनाव एक्जिट पोल में भाजपा को बहुमत



गुजरात चुनाव में अंतिम चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही एग्जिट पोल के नतीजे भी आ गए हैं। अलग अलग सर्वे एजेंसियों और न्यूज चैनलों ने मिलकर गुजरात और हिमाचल दोनों चुनावी राज्यों में सर्वे किया था जिसका परिणाम एग्जिट पोल के माध्यम से जारी किया गया है। हालांकि सभी न्यूज चैनलों और एजेंसियों के परिणामों में सीटों का थोड़ा बहुत अंतर बना हुआ है, लेकिन एक बात साफ है कि गुजरात में एक बार फिर भाजपा सत्ता में लौटती दिख रही है। प्रधानमंत्री मोदी का धुआंधार प्रचार और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सटीक रणनीति के सामने एक बार फिर कांग्रेस पस्त होती दिख रही है। जानिए क्या कहते हैं तमाम एग्जिट पोल।

एबीपी का एग्जिट पोल

न्यूज चैनल एबीपी के एग्जिट पोल के अनुसार दक्षिण गुजरात में भाजपा को साफ बढ़त मिलती दिख रही है। जिसमें 35 सीटों में से भाजपा को 24 और कांग्रेस को 11 सीटें मिलती दिख रही हैं। जबकि सौराष्ट्र और कच्छ इलाके की 54 सीटों में भी भाजपा कांग्रेस से आगे दिखाई दे रही है, जिसमें भाजपा को 34 और काग्रेस को 19 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं पूरे राज्य की बात करें तो भाजपा को 182 में से 117 सीटें मिलने की उम्‍मीद ‌दिख रही है, जबकि कांग्रेस को 64 सीटें मिलने की उम्‍मीद दिख रही है।


न्यूज 24 के अनुसार

न्यूज 24 और चाणक्य के एग्जिट पोल के अनुसार गुजरात में भाजपा एकतरफा बहुमत की ओर जाती दिख रही है। परिणामों के अनुसार यहां भाजपा को 135 और कांग्रेस को मात्र 47 सीटें मिलती दिख रही हैं।


टाइम्स नाउ का एग्जिट पोल


न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल के अनुसार गुजरात में भाजपा स्पष्ट बहुमत लेती दिख रही है। पोल के अनुसार 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 109 और कांग्रेस को 70 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालांकि पिछली बार के मुकाबले इस बार भाजपा का वोटिंग प्रतिशत कम होता दिख रहा है। भाजपा को इस बार पिछली बार से एक फीसदी कम यानि 47 फीसदी वोट मिलने की उम्‍मीद है जबकि कांग्रेस को पहले से दो फीसदी ज्यादा यानि 41 फीसदी वोट मिलने की उम्‍मीद है, जबकि अन्य के हिस्से में 12 फीसदी वोट आएंगी।


इंडिया टुडे के अनुसार 


न्यूज चैनल इंडिया टुडे के एग्जिट पोल में भी गुजरात में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। चैनल द्वारा करवाए गए सर्वे में भाजपा को 99-113 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है जबकि कांग्रेस को 68-82 सीटें मिलने की उम्‍मीद है।


सी वोटर के अनुसार


सी वोटर के एग्जिट पोल के अनुसार गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से भाजपा के खाते में 108 सीटें जाती दिख रही हैं। जबकि कांग्रेस के हिस्से में 74 सीटें आने की उम्‍मीद जताई गई है। पिछले चुनाव में भाजपा को यहां 112 और कांग्रेस को 61 सीटें मिली थीं, ऐसे में इस बार भाजपा को यहां घाटा और कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है।



बुधवार, 13 दिसंबर 2017

वसुंधरा सरकार की उल्टी गिनती शुरू-कांग्रेस ने काला पर्चा जारी किया

राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार की चौथी वर्षगांठ पर प्रदेश कांग्रेस ने जयपुर पार्टी मुख्यालय में सरकार की बची हुई अवधि के लिए "काउंट डाउन घड़ी" लगाई है। 

पीसीसी मुख्यालय के मुख्य द्वार के बाहर लगाई गई डिजिटल घड़ी का मंगलवार 12.12.2017 को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी ने उद्घाटन किया। शाम करीब 4 बजे शुरू की गई इस घड़ी में मौजूदा वसुंधरा सरकार का शेष कार्यकाल 365 दिन 22 घंटे 19 मिनट और 22 सैकंड दिखाए गए।

पायलट ने कहा कि यह घड़ी वसुंधरा सरकार के जाने और कांग्रेस की सरकार आने के काउंट डाउन का हिसाब रखेगी । उन्होंने कहा कि इस घड़ी को देखकर कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव की तैयारी प्रतिदिन नये ढंग से करेंगे । इस घड़ी से सरकार की उलटी गिनती शुरू होने का संदेश दिया गया है। पायलट और डूडी ने सरकार के खिलाफ "ब्लैक पेपर "भी जारी किया । इस ब्लैक पेपर में सरकार की नाकामी और वादा खिलाफी का बिन्दूवार वर्णन किया गया है ।

चार वर्ष पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार द्वारा जारी किए सुराज  संकल्प पत्र में किए गए वादों और उनके अधूरे रहने का बिन्दूवार उल्लेख किया गया । इसमें मनरेगा के बजट में कटौती, कर्मचारियों की हड़ताल,अस्पतालों  में अव्यवस्था के चलते हो रही नवजात बच्चों की मौत,बजली के ट्रांसफार्मर फटने से अब तक हुई 40 लोगों की मौत,बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया गया है । 

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर सत्ता के लिए लगाई गई काउंट डाउन घड़ी । पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी ने इसका उद्घाटन किया । 


वसुंधरा राजे की झुंझुनू सभा में हंगामा​

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार अपनी चौथी वर्षगांठ मना रही है। इस दौरान मुख्य समारोह झुंझुनूं में आयोजित हुआ।  इस कार्यक्रम में करीब एक दर्जन कांग्रेसी नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद जैसे ही वसुंधरा राजे ने मंच से बोलना शुरू किया, श्रोताओं में मौजूद कांग्रेसियों ने हल्ला बोल दिया।  उन्होंने जमकर नारेबाजी की। इससे वहां सुरक्षाकर्मियों में हडकम्प मच गया और एक बार के लिए माहौल गरमा गया। सीएम वसुंधरा राजे भी अचानक हुए इस प्रदर्शन से गुस्सा नजर आई। इसके बाद उन्होंने कहा कि कहा कि 'ये आदत से मजबूर है। खुद भी काम नहीं करते और ना ही करने देते। इनके पास कोई काम नहीं है।'  इसके बाद सीएम ने अपना भाषण शुरू किया। इस दौरान कई मौकों पर उन्होंने कांग्रेस को निशाने पर लिया।   ।

जनता वसुंधरा सरकार को कभी माफ नहीं करेगी-हर तबका परेशान- अशोक गहलोत


पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (भारतीय कांग्रेस महासचिव)  ने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पर आरोप लगाया है कि अपने पिछले चार वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने गौरवशाली राजस्थान को न केवल बर्बादी की ओर धकेला है, बल्कि देश में कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं छोड़ा है। गहलोत ने राजे सरकार के चार साल के कार्यकाल पर सवाल किया कि इन चार सालों में हुआ क्या है जिस पर राजे और भाजपा गर्व कर रही है और जश्न मना रही है? उन्होंने कहा कि सच कड़वा होता है और उन्हें यह सच स्वीकार करना चाहिए कि इन चार सालों में राजस्थान में खूब भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद हुआ है। अपराध, खास तौर पर मासूम बच्चियों से बलात्कार, गैंग रेप और उनकी हत्या रोज की बातें हो गयी हैं। यहां कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज दिखती नहीं है। बीमारियों से सैंकडों की संख्या में लोग मर रहे हैं, स्कूल बंद हो रहे हैं और सड़कें इस तरह की हो गयी है कि उन पर चलना मौत को दावत देना है।


उन्होंने कहा कि अफसोस इस बात का है कि विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के विधायक और नेता भी ये सारी बातें कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सबसे आगे उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ने राज्य सरकार के कामकाज पर जिस तरह और जितनी तीखी टिप्पणियां की, उतनी तो 70 सालों में नहीं हुई होगी। लेकिन मुख्यमंत्री हैं कि चैन की नींद सो रही हैं। उल्टे अव्यवस्थाओं से कराह रही राज्य की जनता के घावों पर नमक छिड़कने के लिये वे और भाजपा के कुछ राष्ट्रीय नेता ‘राजस्थान को अपना मॉडल स्टेट‘ बता रहे हैं।


पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 50 सालों के अपने राजनीतिक जीवन में मैंने कभी ऐसी निकम्मी, निकृष्ट और नाकारा सरकार नहीं देखी जिसके गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री, सरकार में मंत्री होने पर शर्मिंदगी महसूस करते हों, जिसके विधायक खुद सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर हत्यारा होने का आरोप लगाते हों और फिर भी सरकार चल रही हो। उन्होंने कहा कि लगता है जैसे मुख्यमंत्री को पता हो कि यह उनका आखिरी टर्म है। ऐसे में एक ओर जहां हर तरफ जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है, सारे फैसले विभागों के मंत्री नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री जन असंतोष को जानती हैं, इसीलिए अजमेर, अलवर और माण्डलगढ उप चुनावों को लेकर अब इन क्षेत्रों में डेरा डाले हुए है, परन्तु जनता हकीकत जानती है।


गहलोत ने कहा कि आज राज्य की जनता का कोई तबका इस सरकार से खुश नहीं है। कर्मचारी सातवें वेतनमान को लेकर नाराज हैं। व्यापारी जीएसटी से दुखी है। युवा नौकरी के रास्ते नहीं खुलने से परेशान है। महिला घर से बाहर निकलने में डरती है। किसान अपनी उपज का वाजिब दाम नहीं मिलने से आत्महत्या कर रहा है। आमजन को बिजली मिल नहीं रही, पानी मिल नही रहा। अस्पतालों में सिवाय घक्कों के कुछ नहीं मिल रहा। रिसर्जेंट राजस्थान और विदेश दौरों के नाम पर सरकार ने करोड़ों रूपये फूंक दिये, लेकिन नतीजा जीरो है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राजनीतिक लाभ के लिये राजस्थान से जितना लगाव दिखायें और राजपूत, जाट, गुर्जर आदि जातियों को अपना बताएं लेकिन हकीकत में उन्हें किसी से भी कोई अपनापन नहीं है। यदि ऐसा होता तो बाडमेर में रिफाइनरी कभी की लग गई होती और जयपुर में मेट्रो का दूसरा चरण कभी का शुरू हो गया होता। इसी तरह राज्य की अन्य महत्वाकांक्षी योजनायें, भीलवाडा में मेमो कोच फैक्ट्री, कोटा-झालावाड-बारां की परबन सिंचाई एवं पेयजल योजना, डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल परियोजना अब तक अटकी नहीं रहती।


गहलोत ने कहा कि सरकार ने नया कुछ किया नहीं और 70 साल की मेहनत से जो चीजें तैयार हुई उन्हें भी निजीकरण या पीपीपी के नाम पर अपनों को बांटने में लगी है। उन्होंने कहा कि राज्य की बिजली कम्पनियां और उनकी जमीनें राजस्थान रोडवेज और उसकी जमीनें, स्पिन फेड, खासा कोठी, होटल आनन्द और आरटीडीसी के अन्य होटल-मोटल सब इसके उदाहरण हैं। हर सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार की बू आने लगी है, लेकिन सरकार है कि अरबों के खान महाघोटाले तक की सीबीआई या न्यायिक जांच को तैयार नहीं है, जबकि उसके छींटे खुद उन तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि खान महाघूस कांड, पेयजल, यातायात, सहकारी उपभोक्ता भण्डार एवं जेडीए में भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई से कराई जाये तो बडे़ खुलासे सामने आयेंगे।


 गहलोत ने आरोप लगाया कि ऐसे आरोपों की सच्चाई को राज्य की जनता तक नहीं पहुंचने देने की नीयत से ही तमाम विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री ऐसा कानून लेकर आई (जिसे प्रवर समिति को भेजना पड़ा) जिससे मीड़िया का मुंह बंद हो जाये और न्यायपालिका तथा पुलिस के हाथ बंध जायें। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस राज्य की जनता के सहयोग से उनके इन इरादों को पूरा नहीं होने देगी, न केवल इस कानून को बनने से रोका जायेगा अपितु जनता की अदालत में भी इस सरकार की तमाम नाकामियों को जोर-शोर से उजागर किया जायेगा। जनता इस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी। ऐसे हालात में अगर मुख्यमंत्री स्वयं इस्तीफा देने की पेशकश कर देती तो उनके स्वयं के लिए बेहतर होता।

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गुजरात में कांग्रेस जीत रही है-भाजपा के विरुद्ध जबरदस्त लहर- राहुल

नोटबंदी और जीएसटी पर गुजरात में नहीं बोले मोदी। कांग्रेस और भाजपा की कड़ी टक्कर वाली स्थिति है।



कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा ने अपने प्रचार की शुरूआत नर्मदा मुद्दे पर की थी. चार-पांच दिन के बाद लोगों ने कहा कि उन्हें नदी का पानी नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा दाहिनी ओर मुड़ गई. उसने कहा कि चुनाव नर्मदा पर नहीं लड़ा जाएगा, चलिये चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मुद्दे पर लड़ते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यद्यपि तब ओबीसी ने कहा कि भाजपा सरकार ने उनके लिए कुछ भी नहीं किया. पांच-छह दिन बाद भाजपा फिर बाएं ओर मुड़ गई और कहा कि वह विकास यात्रा निकालेगी और 22 वर्ष के विकास की बात करेगी.’’ गांधी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना जिसमें ‘‘मोदीजी ने अपने संबोधन के करीब 90 प्रतिशत समय अपने बारे में बात की. पहले दाहिने मुड़ो, उसके बाद बाएं मुड़ो और उसके बाद ब्रेक लगा दो.’’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि गुजरात में ‘‘हार को सामने देख बौखलाहट में असत्य एवं अफवाहों का सहारा ले रहे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आचरण व शब्दों से मुझे अत्यंत पीड़ा एवं क्षोभ है.’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हताशा में अपशब्दों का सहारा लेकर और ‘‘हर झूठे तिनके को पकड़कर अपनी चुनावी नैया को पार कराने का विफल प्रयास कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह खेदजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदीजी पूर्व प्रधानमंत्री और सेना अध्यक्ष सहित सभी संस्थागत पदों को बदनाम करने की कोशिश में एक आपत्तिजनक उदाहरण स्थापित कर रहे हैं.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सुझाव दिया कि पाकिस्तान राज्य के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने दावा कि कुछ पाकिस्तानी अधिकारी एवं मनमोहन की कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर छह दिसंबर को बैठक हुई. इसके एक दिन बाद ही अय्यर ने मोदी को अपनी एक टिप्पणी में ‘नीच आदमी’ कहा था.लोकसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली ने कहा, ‘‘उन्हें हटाने की कोशिश को सार्वजनिक करने में उन्होंने (मोदी ने) इतना समय क्यों लगाया? क्या वह जिम्मेदारी के साथ बात कर रहे हैं? यह किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री को हटाने की कोशिश की बात है.’’ उन्होंने प्रधानमंत्री से प्रश्न किया कि उनके दावों को साबित करने के लिए क्या जांच किये गए हैं. मोइली ने कहा कि गुजरात के लोगों को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने और किसी भी तरह विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए उन्होंने आधारहीन आरोप लगाए. बनासकांठा जिले में राहुल गांधी ने कहा कि अब मोदी जी अफगानिस्तान, चीन, पाकिस्तान और जापान की बात करते हैं. मोदी जी, यह चुनाव गुजरात के भविष्य को लेकर है. कृपया गुजरात के बारे में भी कुछ बोलिए. राहुल का इशारा साफ तौर पर प्रधानमंत्री के कल के बयान की तरफ था जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान गुजरात विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है और मणिशंकर अय्यर के ‘नीच’ वाले बयान से एक दिन पहले अय्यर के आवास पर उस देश के कुछ वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की बैठक हुई थी. कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अपने भाषणों में प्रधानमंत्री ने अपना आधा वक्त कांग्रेस की आलोचना में बिताया है.कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठकर मोदी जी बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं. मोदी जी चिंतित, हताश और गुस्से में हैं. ऐसे बयान में कोई सच्चाई या तथ्य नहीं है और यह झूठ पर आधारित है. ऐसा व्यवहार प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता. मोदी ने आरोप लगाया था कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अय्यर ने भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त और एक पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री से हाल में अय्यर के आवास पर मुलाकात की थी. सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘पूरा देश जानता है कि पाकिस्तान से किसे प्यार है और कौन अलगाववादियों को संरक्षण प्रदान कर रहा है.’’ उन्होंने मोदी से सवाल किया कि क्या उन्होंने पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर ही चुनाव लड़ने की योजना बनाई है और अगर ऐसा है तो उन्हें गुजरात के लोगों को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने ‘‘पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भरोसा क्यों किया और उसे जांच के लिए पठानकोट एयरफोर्स बेस में दाखिल क्यों होने दिया ?’’ कांग्रेस प्रवक्ता ने ‘‘गुरदासपुर और उधमपुर में पाकिस्तान प्रायोजित हमलों के तुरंत बाद’’ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पोती की शादी में ‘‘बगैर किसी पूर्व योजना’’ के मोदी के जाने पर सवाल उठाए 

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में पार्टी के जोरदार नतीजों का पूर्वानुमान जाहिर करते हुए कहा है कि, “राज्य में बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त लहर है।” 14 दिसंबर को होने जा रहे दूसरे चरण के मतदान के लिए चल रहे प्रचार के आखिरी दिन राहुल ने दावा किया कि लोगों के मूड में बड़ा बदलाव आया है और समाज के सभी तबके बीजेपी से नाराज हैं। राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने पाकिस्तान के साथ मिलकर गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। राहुल ने कहा कि यह आरोप स्वीकार नहीं किया जा सकता।


राहुल ने कहा, “किसी चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि मोदीजी ने भ्रष्टाचार के बारे में और किसानों के बारे में कुछ नहीं बोला। बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त लहर है। चाहे पाटीदार हों, ओबीसी हों, दलित हों या किसान हों, सभी नाराज हैं। लोगों के मूड में भारी बदलाव आया है। कांग्रेस चुनाव जीतेगी, नतीजे जबरदस्त होंगे।” कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के बाद पहली बार प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि अपनी नई भूमिका में वह देश में “विकृत” हो चुके राजनीतिक विमर्श की प्रकृति में बदलाव का प्रयास करेंगे।

राहुल ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ लगे आरोपों पर मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। राहुल ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार इस मुद्दे को उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राफेल लड़ाकू विमान करार में भी अनियमितताएं हुईं। गुजरात चुनावों में पाकिस्तान की कथित दखलंदाजी की बाबत मोदी के बयान पर राहुल ने कहा, “मैंने पहले दिन से ही कथनी और करनी में अपना रुख साफ कर दिया है। मोदी जी हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं। मणिशंकर अय्यर ने कुछ कहा और मैंने साफ कर दिया कि मैं यह बर्दाश्त नहीं करूंगा। आपने कार्रवाई देखी है।”


उन्होंने कहा, “लेकिन मोदी जी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में जो कुछ कहा है वह स्वीकार्य नहीं है। मनमोहन सिंह जी भी इस देश के प्रधानमंत्री थे, उन्होंने देश की सेवा की और त्याग किया।” रविवार को गुजरात के पालनपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने यह बताने की कोशिश की थी कि पाकिस्तान राज्य में विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।



मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

प्रधान सेवक हैं या देश के बाप? रवीश कुमार की पीएम से सवाल पूछती जबरदस्त रिपोर्ट



प्रधान सेवक हैं या देश के बाप? रवीश कुमार की सवाल उठाती जबरदस्त रिपोर्ट

दी वायर में रवीश कुमार की रिपोर्ट छपी है जो करती प्रेस इंडिया ब्लाग के विचार वान पाठकों के समक्ष पेश है।

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आपने कहा था आप प्रधान सेवक हैं, संबित कह रहे आप देश के बाप हैं

- रवीश कुमार -

मैं गुजरात चुनाव का नतीजा आने से पहले लिख रहा हूं. आप भले चाहें जितना चुनाव जीतें, लेकिन आप अपने भाषणों में हर दिन हार रहे हैं.

2014 में प्रधानमंत्री मोदी का जो भाषण उनके विजय रथ का सारथी बना वही भाषण 2017 तक आते-आते उनका विरोधी हो गया है. अपने भाषणों से मात देने वाले प्रधानमंत्री अपने ही भाषणों में मात खा रहे हैं.

कम बोलना अगर समस्या है तो बहुत ज़्यादा बोलना भी समस्या है. बोलना सबको अच्छा लगता है लेकिन कुछ भी बोल देना किसी को अच्छा नहीं लगता है.

प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कुछ भी बोलने लगे हैं. इसलिए उनकी सभाओं की चर्चा ख़ाली कुर्सियों के कारण हो रही है. गुजरात चुनावों की मुख्य तस्वीरों में से एक ये है कि प्रधानमंत्री को सुनने कम लोग आ रहे हैं.

तीन साल पहले की बात है. प्रधानमंत्री के भाषणों के आगे कांग्रेस को बोलने का मौका नहीं मिल पाता था, आज उन्हीं भाषणों ने कांग्रेस को बोलने का मौक़ा दे दिया है.

राहुल गांधी ने कहा कि बोलते-बोलते प्रधानमंत्री के पास कुछ बचा नहीं है. सच्चाई ने उन्हें घेर लिया है इसलिए नरेंद्र मोदी जी अब नरेंद्र मोदी जी पर ही भाषण दे रहे हैं. किसने सोचा था कि मोदी का यह मज़बूत हथियार उन्हीं के ख़िलाफ़ इस्तेमाल होने लगेगा.

2014 का साल अलग था. मनमोहन सिंह आकर्षक वक्ता नहीं थे और न ही आक्रामक. 2009 में मनमोहन सिंह के सामने भाजपा का कमज़ोर प्रधानमंत्री का नारा नहीं चला था, 2014 में मनमोहन सिंह के सामने भाजपा का मज़बूत प्रधानमंत्री का नारा चल गया. चला ही नहीं, आंधी-तूफान में बदल गया.

2009 में मनमोहन सिंह के कमज़ोर प्रधानमंत्री के सामने ख़ुद के महामज़बूत होने का दावा करने वाले आडवाणी 2014 के बाद मनमोहन सिंह से भी कमज़ोर साबित हुए.

आडवाणी की चुप्पी इस तरह की हो चुकी है जैसे उन्होंने कभी माइक और लाउडस्पीकर भी नहीं देखा हो. वक़्त का पहिया कैसे घूमता है.

नोटबंदी पर मनमोहन सिंह का बयान मोदी सरकार पर जा चिपका. वही मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि ग़रीब तो मैं भी था मगर मैं नहीं चाहता कि देश मुझ पर तरस खाए.

फिर भी किसने सोचा था कि उनकी इस ग़रीबी का जवाब मनमोहन सिंह से आएगा जो ख़ुद भी बेहद ग़रीब परिवार के थे मगर अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों तक पहुंचे और प्रधानमंत्री भी हुए.

मनमोहन सिंह अपनी पृष्ठभूमि पर बात नहीं करना चाहते, प्रधानमंत्री मोदी इसके बिना कोई भाषण ही नहीं देते हैं. राहुल गांधी ने सही कहा है कि मोदी सिर्फ मोदी पर बात करते हैं.

मोदी को इसने कहा, उसने कहा. मोदी ने ख़ुद दूसरों को क्या कहा, कैसे कहा. मोदी की पूरी सेना राहुल गांधी को क्या-क्या कहती रहती है, कभी राहुल को रोते नहीं सुना कि मोदी ने मुझे पप्पू कहा. मुग़ल कहा तो उनके लोगों ने हिंदू होने पर भी शक़ किया.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की जीत सिर्फ भाषण के कारण नहीं थी. भाषण भी बड़ा कारण था. लोगों को लगा कि कोई बोलने वाला नेता भी होना चाहिए, मोदी ने लोगों ने यह इच्छा पूरी कर दी.

मगर प्रधानमंत्री कभी नहीं समझ पाए कि अच्छे वक्ता की चाह रखने वाले लोग अच्छे भाषण की भी चाह रखते होंगे.

प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस कसौटी पर फेल होते चले जा रहे हैं. कभी ख़ुद को नसीब वाला कहा तो कभी किसी का डीएनए ही ख़राब बता दिया.

दिल्ली से लेकर बिहार तक में देखा था कि लोग कैसे एक अच्छे वक्ता के ख़राब भाषण से चिंतित थे. प्रधानमंत्री मोदी वक्ता बहुत अच्छे हैं मगर भाषण बहुत ख़राब देते हैं.

एक कद्दावर नेता के लिए चुनावी जीत ही सब नहीं होता है. आख़िर वे इतनी जीत का करेंगे क्या? एक दिन यही जीत उनके भाषणों पर मलबे की तरह पड़ी नज़र आएगी.

लोगों का जीवन चुनावी जीत से नहीं बदलता है. अगर बदल पाए होते तो गुजरात में 22 साल का हिसाब दे रहे होते. बता रहे होते कि मैंने 50 लाख घर बनाने का दावा किया था, यह रही चाभी, सबको दे दिया है.

बता रहे होते कि कैसे शिवराज सिंह चौहान से लेकर रमन सिंह की सरकारों ने शिक्षा और अस्पताल के अनुभव बदल दिए हैं. रोज़गार के मायने बदल दिए.

किसी और ने भी नहीं किए होंगे मगर क्या अब आप यह भी कह रहे हैं कि मैंने भी नहीं किए और मैं करूंगा भी नहीं. आप ही नहीं किसी भी दल के पास जीवन बदलने का आइडिया नहीं है. यह संकट आपके पास ज़्यादा है क्योंकि आप सबसे अधिक दावा करते हैं.

प्रधानमंत्री के भाषण में कुछ जवाब होने चाहिए जो नहीं होते हैं. वे बहुत आसानी से कह देते हैं कि कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण के नाम पर मुसलमानों को ठगा है. ख़ुद नहीं बताते कि वे और उनकी पार्टी मुस्लिम आरक्षण का नाम सुनते ही किस तरह हंगामा कर देते हैं. विरोध करते हैं.

कांग्रेस पर उनका हमला सही भी है मगर अपनी बात वो ग़ायब कर देते हैं. वे यह बात शायद मुसलमानों को बता रहे थे कि कांग्रेस ने उन्हें ठगा है.

यूपी, हरियाणा और राजस्थान के जाट भी उनसे यही पूछ रहे हैं कि जाट आरक्षण पर हमसे किए गए वादे का क्या हुआ. क्या भाजपा ने वैसे ही जाटों को ठगा है जैसे कांग्रेस ने मुसलमानों को ठगा है.

महीने भर से गुजराती में भाषण दे रहे प्रधानमंत्री को अपने बोलने पर बहुत यकीन हो चुका है कि वे कुछ भी बोल देंगे, लोगों को सुनना पड़ेगा.

इस तरह का गुमान केसी बोकाडिया और राज सिप्पी को होता था कि कोई सी भी पिक्चर बना देंगे, हिट हो जाएगी. राजकुमार को रख लेने से हर फिल्म हिट हो जाएगी, तब भी ज़रूरी नहीं था. अब भी नहीं है.

प्रधानमंत्री विपक्ष के गंभीर सवालों का जवाब कभी नहीं देते हैं. बेतुकी बातों को लेकर बवाल मचा देते हैं. सारे मंत्री जुट जाते हैं, आईटी सेल जुट जाता है और गोदी मीडिया के एंकर हफ्तों के लिए एजेंडा सेट कर देते हैं.

आज न कल प्रधानमंत्री मोदी को इस गोदी मीडिया से छुटकारा पाना ही होगा. कई बार वो अपनी ग़लतियों को तुरंत सुधार लेते हैं, गुजरात चुनावों के कारण उन्हें जीएसटी की हकीकत दिख गई, सुधार किया, उसी तरह किसी चुनावी मजबूरी के कारण ही प्रधानमंत्री को अपनी गोद से इस मीडिया को उठाकर फेंकना होगा वरना यह मीडिया एक दिन उनके भाषणों की तरह उन्हीं को निगलने लगेगा.

कोई भी सक्रिय समाज मीडिया को सरकार की गोद में लंबे समय तक देखना बर्दाश्त नहीं कर सकता है.

प्रधानमंत्री ने ख़ुद भी किस तरह की राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया है. उनके नेतृत्व में तीन साल से किस भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, वे चाहें तो किसी भी भाषाविद से अध्ययन करा सकते हैं.

आईटी सेल और ट्रोल संस्कृति के ज़रिये जो हमले होते रहे, झूठ का प्रसार होता रहा, ये सब जानना हो तो उन्हें ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है.

बस ऑल्ट न्यूज़ की वेबसाइट पर जाना है, काफी कुछ मिल जाएगा. उनके कार्यकाल का मूल्याकंन क्या सिर्फ चुनावी जीत से होगा या राजनीतिक संस्कृति से भी होगा.

15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता को मिटाना है लेकिन उनके भाषणों में मुग़ल ख़ानदान औरंगज़ेब या उनके प्रवक्ताओं की ज़ुबान पर ख़िलजी का ज़िक्र किस संदर्भ में आता है?

सांप्रदायिकता की बुनियादी समझ रखने वाला भी इसका जवाब दे सकता है. वे बेहद चालाकी से सांप्रदायिक सोच को समर्थन देते हैं.

कब्रिस्तान हो या औरंगज़ेब हो यह सारे उनकी शानदार जीत के पीछे मलबे के ढेर की तरह जमा है. वे चाहें तो टीवी खोल कर अपने प्रवक्ताओं की भाषा का भी अध्ययन कर सकते हैं.

विरोधी दलों ने वाकई उनके ख़िलाफ़ कई बार ख़राब भाषा का इस्तेमाल किया है मगर क्या वे हर बार इसी से छूट लेते रहेंगे कि उन्हें ऐसा बोला गया है, क्या वे कभी भी नई लकीर नहीं खीचेंगे?

क्या वे कभी इसका जवाब नहीं देंगे कि वे भी इसी तरह से बोलते रहे हैं? चुनावों के समय विरोधियों की सीडी बनवाना, स्टिंग करवाना यह सब उनके ख़िलाफ़ भी हुआ और आप भी दूसरों के ख़िलाफ़ खुलकर किए जा रहे हैं.

नरेंद्र मोदी ख़ुद को गाली दिए जाने को लेकर मुद्दा बनाने लगते हैं, मगर उनके नेतृत्व में नेहरू के ख़िलाफ़ किस तरह का अभियान चलाया जा रहा है?

आपकी विश्वसनीयता या लोकप्रियता चाहे जितनी हो, आपके लोगों को भी पता है चुनाव आयोग से लेकर तमाम संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ी नहीं है बल्कि पहले जैसी है या उससे भी घट गई है.

सिर्फ आप ही नहीं, किसी भी राज्य में किसी भी नेता के सामने यही संकट है. संस्थाओं की विश्वसनीयता गिराते रहने से कोई नेता अपनी विश्वसनीयता के शिखर पर अनंत काल तक नहीं रह सकता है.

न्यूज़ 18 के चौपाल कार्यक्रम में संबित पात्रा कन्हैया से कह रहे थे कि आप वंदे मातरम नहीं बोलते हैं, कन्हैया वंदे मातरम भी बोलते हैं, भारत की माता की जय भी बोलते हैं, फिर संबित से पूछते हैं कि अब आप बोलो गांधी को पूजते हैं या गोडसे को.

संबित इस सवाल का जवाब नहीं देते हैं, कन्हैया लेनिन ज़िंदाबाद, स्टालिन मुर्दाबाद बोल रहे हैं, संबित जवाब नहीं देते हैं कि गांधी की पूजा करते हैं या गोडसे की पूजा करते हैं. अंत में बात इस पर ख़त्म होती है कि मोदी इस देश के बाप हैं.

मैं सन्न रह गया जब पात्रा ने कहा कि मोदी इस देश के बाप हैं. संबित को किसने कहा कि आप इस देश के बाप हैं.

मुमकिन है आप भारत का कोई भी चुनाव नहीं हारें, लेकिन उन तमाम जीत से पहले और जीत के सामने मैं यह कहना चाहता हूं कि जनता इस देश की बाप है. आप इस देश के बाप नहीं है.

इतनी सी बात संबित पात्रा को मालूम होनी चाहिए. इस देश में दरोगा, जांच एजेंसी के दम पर कोई भी कुछ करवा सकता है, यह पहले भी था और आपके राज में भी है, थाना पुलिस के दम पर या भीड़ के दम पर दम भरना बहुत आसान है.

मोहल्ले का दादा और देश का बाप ये सब क्या है. आपने 2014 में कहा था कि आप भारत के प्रधान सेवक हैं, तीन साल बाद 2017 में संबित पात्रा कह रहे हैं कि आप इस देश के बाप हैं.

मजबूरी में कोई किसी को बाप बना लेता है, यह मुहावरा सबने सुना है. क्या संबित आपको मजबूत नेता से मजबूरी का नेता बना रहे हैं?

विरोधियों को कोई क्लिनचिट नहीं दे रहा है, मगर प्रधानमंत्री को सत्ता में बिठाने में लोगों ने क्या कोई कमी की है जिसका बदला ऐसी ख़राब राजनीतिक संस्कृति के ज़रिये लिया जा रहा है.

प्रधानमंत्री चाहें तो अपने इन प्रवक्ताओं को कुछ दिन टीवी से दूर रखें, ये तो नेता हैं नहीं, जो नेता हैं, उन्हीं का प्रभाव कमज़ोर कर रहे हैं.

यह प्रधानमंत्री मोदी का प्रभाव ही है कि नतीजा आने से पहले कोई नहीं लिखता है कि गुजरात में मोदी हार सकते हैं.

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हार हुई तो वही संपादक और एंकर लिखने लगेंगे कि भाषणों से लग रहा था कि मोदी हार रहे हैं.

मैं नतीजा आने से पहले लिख रहा हूं. आप भले चाहें जितना चुनाव जीतें, लेकिन आप अपने भाषणों में हर दिन हार रहे हैं.

 (दी वायर का आग्रह )

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