Tuesday, November 14, 2017

राजस्थान में धर्म बदल विधेयक लाने की तैयारी-महत्वपूर्ण खबर

राजस्थान की भाजपा सरकार ऐसा विधेयक लाने की तैयारी में है, जिसके तहत धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित जिला कलक्टर की अनुमति लेनी होगी। अब भाजपा राज में राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिल सकती है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पूर्व में भाजपा के सदस्य रहे हैं इसलिए विधेयक को मंजूरी मिलना संभव माना जा रहा है।


राजस्थान की भाजपा सरकार ने कुछ माह पहले ही इस धर्म स्वातंत्र्य विधेयक

 को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा है। इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट भी केंद्र को भेजी है। जिसमें विधेयक  को पूरी तरह से संविधान के अनुरूप होना बताया है। इसके अलावा एटार्नी जनरल की आपत्तियों को भी दूर कर सुधार किया गया है। यदि  विधेयक पारित होने पर कोई व्यक्ति कलेक्टर की अनुमति के बिना धर्म परिवर्तन करेगा तो अपराध की श्रेणी में आएगा। जिसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान रहेगा।


हाल ही जोधपुर​ जिले में 22 वर्षीय लड़की का एक मुस्लिम युवक से शादी कर धर्म परिवर्तन करने का मामला सामने आया था। कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या धर्म परिवर्तन का कोई नियम है? या ऐसी कोई गाइडलाइन जो नियम तय करती हो।


हम पूरे अध्ययन के बाद ही  विधेयक रहे हैं - गुलाबचंद कटारिया


जानकारी के अनुसार इससे पहले भी भाजपा सरकार ने वर्ष 2006 में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लाने का भरसक प्रयास किया था। लेकिन कांग्रेस के जबर्दस्त विरोध की वजह से यह  विधेयक अटक गया था। सरकार संशोधन के बाद फिर राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008 को लाने का प्रयास कर रही है।

 विधेयक लेकर कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल पुरजोर विरोध में जुट गए हैं। वहीं, प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने पत्रकारों से कहा कि हम पूरे अध्यययन के बाद इस कानून को लेकर आ रहे हैं। कटारिया ने कहा कि राजस्थान से पहले कई राज्यों में पहले भी यह विधेयक आ चुका है। इसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन को रोकना है।


गौरतलब है कि कई बार एक धर्म के युवक-युवतियों का दूसरे धर्म के युवक-युवतियों से शादी करने के बाद धर्म परिवर्तन की जानकारी सामने आई है। इसका लव जिहाद नाम देकर कुछ राजनीतिक-सामाजिक संगठन विरोध भी करते हुए नजर आए हैं।


कलक्टर करेगा धर्म परिवर्तन के कारणों की जांच

विधेयक मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो चाही गई अनुमति से 30 दिन पहले कलेक्टर को जानकारी देनी होगी। अन्यथा जानकारी नहीं देने पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।


वहीं, कलेक्टर धर्म परिवर्तन के कारणों की बारीकी से पड़ताल करने के बाद ही धर्म परिवर्तन की अनुमति देगा और कलेक्टर अनुमति के बगैर ही शादी करने पर इसे गैर कानूनी मानते हुए दोषी व्यक्ति को पांच साल तक की सजा देने का प्रावधान रखा गया है। यह भी बताया जा रहा है कि यह विधेयक के दायरे में है।

5 बिंदुओ में पूरा विधेयक


1. जबरन धर्म बदलवाने पर..?

जबरन धर्म बदलवाना, लालच देकर या फिर धोखे से धर्म बदलवाने के मामले में आरोपियों को एक से तीन साल की सजा हो सकेगी साथ ही 25 हजार रुपए जुर्माना किया जा सकेगा।


2. बच्चों/महिला/एससी-एसटी मामलों में सजा?

18 साल से कम उम्र के बच्चों या महिला या एससी-एसटी कैटेगरी के शख्स का धर्म बदलवाने पर दो से 5 साल की सजा और  50 हजार तक जुर्माना होगा।


3. संगठन दोषी हुआ तो...?


गैर कानूनी तरीके से धर्म बदलवाने का काम करते पाई जाने वाले ऑर्गनाइजेशन का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।


4. खुद धर्म बदल रहे हैं तो ?

खुद धर्म बदल रहे हैं तो कलेक्टर को 30 दिन में जानकारी देनी होगी। ऐसा न करने पर 1000 जुर्माना लगाया जा सकेगा। कलेक्टर जांच करने के बाद ही धर्म परिवर्तन की इजाजत देंगे।


5. धर्म में वापस लौटना है तो..?

- कोई शख्स मूल धर्म में वापस लौटता है तो उसे इसकी सूचना जिला मजिस्ट्रेट को नहीं देनी होगी। मूल धर्म में लौटना कोई गुनाह नहीं माना जाएगा।


11 साल क्यों अटका: कांग्रेस लगातार विधेयक विरोध कर रही है

- अप्रैल 2006 में जब पहली बार विधेयक विधानसभा ने पास किया तो कांग्रेस ने इसका विरोध किया। प्रॉविजंस के गलत इस्तेमाल की आशंका को लेकर कांग्रेसी उस वक्त की राज्यपाल प्रतिभा पाटील से मिले।


- राज्यपाल ने विधेयक सरकार को लौटा दिया था। राज्य सरकार ने जून 2006 में बिल दोबारा राज्यपाल को भेजा, जिसे राजभवन ने जून 2007 में राष्ट्रपति को भेज दिया।

- मार्च 2008 में राज्य सरकार नया विधेयक लाई, जिसे राष्ट्रपति को भेजा गया है। फिलहाल बिल गृह मंत्रालय में अटका है। 


मध्य प्रदेश के कानून से 5 गुना कठोर

- राजस्थान सरकार का दावा है कि धर्म परिवर्तन को लेकर बनाए गए विधेयक के प्राॅविजन मध्य प्रदेश के धर्म परिवर्तन काननू से पांच गुना सख्त हैं।


- मध्य प्रदेश में माइनर की मैक्सिमम एज 8 साल मानी गई है। यहां विधेयक बिल में 18 से कम को माइनर माना है। यानी 18 साल तक के बच्चे का धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता।


- मध्य प्रदेश में जबरन, लालच देकर या धोखे से धर्म परिवर्तन पर एक साल की सजा और पांच हजार रुपए जुर्माने का प्रॉविजन है। यहां एक से तीन साल की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माना रखा गया है।

- एमपी में बच्चों, महिला, एससी-एसटी के शख्स के धर्म परिवर्तन पर दो साल की सजा और 10 हजार का जुर्माना, लेकिन राजस्थान के विधेयक में दो से पांच साल की सजा और 50 हजार जुर्माना।

- धर्म परिवर्तन में लगी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का प्रॉविज है, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं।


बीजेपी v/s कांग्रेस

कांग्रेस तो हमेशा से ही सरकार का विरोध करती आई है: परनामी

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा, " विधेयक स्टेटस मुझे पता नहीं है। रही बात कांग्रेस के विरोध कि तो वह हमेशा ही सरकार का विरोध करती आई है।" 



 

 लेने के बाद ही कुछ कहूंगा : सचिन पायलट


कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा, "राष्ट्रपति को भेजे गए  विधेयक लेकर मुझे जानकारी नहीं है। यह जानकारी होने के बाद भी कुछ कहना मुमकिन होगा।" 


धर्म परिवर्तन के सवाल पर मंगलवार को HC में सुनवाई 


- बिना किसी नियम-कानून के धर्म परिवर्तन हो सकता है या नहीं, इस पर राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को बहस होगी।


- यह प्वॉइंट पायल सिंघवी उर्फ आरिफा के धर्म परिवर्तन कर फैज मोहम्मद से निकाह करने के मामले की सुनवाई में सामने आया था, जिसमें सरकार ने जवाब दिया था कि राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008 बनाया गया था, लेकिन यह लागू नहीं हो पाया।


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