Wednesday, November 8, 2017

धुंध के खतरे में सूरतगढ़ थर्मल एसटी डीएवी स्कूल के बच्चे! प्रबंधन समिति होगी जिम्मेदार!

- करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ थर्मल का DAV स्कूल जिला कलेक्टर के आदेश पालन नहीं करता।

जिला कलेक्टर श्रीगंगानगर ने जिले में स्कूलों के खुलने और छुट्टी का समय सुबह 9:30 से 3:40 तक निर्धारित किया हुआ है। इसके साथ में सख्त चेतावनी दी हुई है कि अगर कोई किसी प्रकार की अनहोनी हुई तो स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार होगा। 

इस चेतावनी के बावजूद सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की आवासीय कॉलोनी प्रभात नगर में स्थापित  ST DAV स्कूल ( हिंदी माध्यम) के प्रिंसिपल और प्रबंधन समिति को छोटे छोटे बच्चों की परवाह नहीं है। भयानक धुंध में सुबह जल्दी पहुंचने में हर समय जान जोखिम में रहती है।

 यह स्कूल निर्धारित समय से   एक घंटा पहले सुबह 8:30 बजे प्रारंभ हो जाता है। इस स्कूल में केजी से लेकर 12वीं तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। केजी कक्षा में बहुत छोटे बच्चे जिनकी संख्या करीब 30 है और कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक करीब 200 विद्यार्थी हैं। प्राइमरी कक्षाओं तक के विद्यार्थियों की उम्र  अधिक में करीब 10 या 11 वर्ष तक माने। ये छोटे बच्चे जो स्कूल वाहिनी में आते हैं अपने घरों से गांव से 7:00 बजे के करीब निकलना शुरू होते हैं। वाहिनी जानलेवा धुंध में ही चलाई जाती है। स्कूल वाहिनी में भी क्षमता से अधिक बच्चे होते हैं।

DAV स्कूल में प्रिंसिपल शिमला शर्मा है और इसकी प्रबंधन समिति में चेयरमैन पद पर थर्मल पावर के मुख्य अभियंता एम.एल.शर्मा है।

 आश्चर्य और क्षोभ का विषय यह है कि उच्च कोटि के शिक्षित पदाधिकारी प्रबंधन समिति में होते हुए भी यहां जिला कलेक्टर के आदेशों का पालन नहीं हो रहा। 

इस थर्मल पावर स्टेशन के डीएवी स्कूल में आसपास के गांवों के बच्चे भी काफी संख्या में पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। इन दिनों भयानक धुंध इलाके में छाई हुई है और बच्चों की सुरक्षा को पूर्ण रुप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सूरतगढ़ के क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी को तुरंत व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर इस विद्यालय को कानून की सीख देनी चाहिए। अगर इस धुंध में किसी प्रकार का कोई हादसा हुआ या बच्चे बीमार हुए तो प्रबंधन समिति पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगी।

कोहरे में धुंध में जिस प्रकार के हादसे होते हैं उसकी कल्पना नहीं की जा सकती इसलिए इस स्कूल के प्रबंधन समिति के चेयरमैन और प्रिंसिपल को सरकारी नियमों का पालन करते हुए विद्यालय सुबह 9:30 बजे से पहले नहीं लगाना चाहिए।

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