Friday, November 3, 2017

विश्वेश चौबे उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक


श्रीगंगानगर, 2 नवम्बर। श्री विश्वेश चौबे, महाप्रबंधक मेट्रो रेलवे, कोलकाता ने महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे  के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वे श्री आर. के. कुलश्रेष्ठ का स्थान लेंगे जो दक्षिण रेलवे, चेन्नई के महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार संभालेंगे। ये 1980 बैच के आइ.आर.एस.इ. अधिकारी हैं। इन्होंने इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोल जील जी, बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय से सिविलइंजीनियरिंग में बी.टेक एवं आई.आई.टी. दिल्ली से स्ट्रक्चरइंजीनियरिंग  में एम. टेक. किया है।
ये भारतीय रेलवे के प्रतिष्ठित सिविल इंजीनियरिंग संस्थान (इरिसेन), पुणे, जो सरकारी एवं निजी क्षेत्रा से संबंधित विशेषकर रेल परिवहन एवं संबद्ध क्षेत्रा को प्रशिक्षण प्रदान करता है, के निदेशक रह चुके हैं।

 श्री विश्वेश चौबे के प्रबंधन में इरिसेन ने सावित्राीबाई फूले पुणे विश्वविद्यालय के सहयोग से एम.टेक पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। इन्होंने विभिन्न तकनीकी स्थायी समितियों में जैसे ट्रैक स्टैन्डर्ड कमिटी, व्रिज स्टैन्डर्ड कमिटी एवं वर्क स्टैन्डर्ड कमिटी जो डिजाइन निर्माण मेन्टेनेंश एवं रेल रोड एवं संबद्ध क्षेत्रों के नीतियों एवं प्रक्रियाओं का पूर्ण स्वर परिसर (गैमट) में भी अध्यक्ष के रूप में सेवाएं प्रदान की है।
इन्होंने उत्तर रेलवे के महत्वपूर्ण पदों पर जैसे मुख्य ट्रैक इंजीनियर
एवं मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर के रूप में भी कार्य किया है। मंडल रेल प्रबंधक फिरोजपुर के सेवाकाल के दौरान आपने यातायात सुविधा एवं 33 स्टेशनों के निर्माण कार्य के दौरान नॉन  इंटरलॉकिंग कार्य  जैसे विभिन्न कार्यों को पूरा किया है। 2010 में कश्मीर घाटी में उग्रवादी गतिविधियों एवं पंजाब के अनेक किसान आंदोलनों के दौरान रेल संचालन कार्य को सफलतापूर्वक संभाला। मंडल रेल प्रबंधक के रूप में सेवा अवधि के दौरान काश्मीर घाटी के आंदोलनकारियों द्वारा रेलवे सम्पदा को तहस-नहस करने के बाद विपरीत परिस्थितियों में रेल सेवा को दक्षतापूर्वक बहाल किया।
रेलवे बोर्ड में कार्यपालक निदेशक/सिविल इंजीनियरिंग(परियोजना) के अपने कार्यकाल में उन्होंने रेल-सड़क रख-रखाव के लिए नीति निर्माण में अपना सहयोग दिया तथा भारतीय रेलवे में उच्चतर एक्सेल भार के क्रियान्वयन की देख-रेख में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।
पश्चिम रेलवे में मुख्य इंजीनियर/निर्माण के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने पश्चिम रेलवे में 500 किलोमीटर से अधिक नवनिर्मित रेलवे लाइनों को चालू किया। उनके द्वारा अवसंरचनात्मक विकास की कई नयी परियोजनाओं का निष्पादन किया गया। निर्माण, परिचालन अंतरण (बीओटी) आधार पर पश्चिम रेलवे में पहली परियोजनावीरमगाम  -मेहसाना गेज परिवर्तन परियोजना उनके द्वारा परिकल्पित एवं पूरी की गई। वे सुरेंद्रनगर-पिपावाव रेलवे लाइन योजना से भी निकटता से जुड़े थे जो संयुक्त उद्यम विशेष उद्देश्य यान (एसपीवी) द्वारा पीपीपी आधार पर निष्पादित एक अन्य परियोजना थी।
रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल), भारतीय रेलवे की एक कंपनी, के प्रथम एवं संस्थापक निदेशक के रूप में उन्होंने मुख्यतः गैर-बजटीय वित्तीय स्रोतों एवं एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), निर्माण परिचालन अंतरण (बीओटी) के निजी भागीदारी मोडल के प्रयोग, रणनीतिक एवं वित्तीय निवेशकों द्वारा इक्विटी भागीदारी के साथ संयुक्त उद्यम एसपीवी एवं बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से ऋण जैसे बाह्यबहुमुखी एजेंसियों से निधि जमा करने के कई विकल्पों के प्रयोग द्वारा विभिन्न परियोजनाओं की सफलतापूर्वक एवं शीघ्र क्रियान्वयन हेतु विभिन्न प्रक्रियाओं एवं प्रत्यायोजनों का विनिर्धारण किया। आधुनिक समय में रेलवे के क्षेत्रा में पहली बार उनके द्वारा बड़े मूल्य के संविदाओं का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। उनके प्रबंधकीय क्षमता में यहां भी कई रेलवे परियोजनाओं को सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया।
उन्होंने आरडीएसओ में संयुक्त निदेशक के रूप में कार्य किया जहां उन्होंने रेलवे की थियुनी-गेज नीति के तीव्र क्रियान्वयन हेतु बड़ी लाइन गाडि़यों के वहन के लिए विद्यमान मीटर गेज पुलों को मजबूत करने हेतु तकनीकी निर्देशन भी प्रदान किए। कमजोर रेलवे निर्माण को मजबूती प्रदान करने के लिए कार्य पद्धति के सुझाव के संबंध मेंकई रिपोर्टें उनके नाम हैं। उन्होंने पश्चिम, पश्चिम मध्य, पूर्व मध्य एवंपूर्वोत्तर रेलों के कई मंडलों में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। उन्होंने यूएसए, इटली, सिंगापुर, मलेशिया एवं जर्मनी की रेलवे प्रणाली का दौरा किया एवं टेपर स्कूल ऑफ बिजनेस, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी, पिट्सबर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
वे भारतीय रेलवे में ट्रैक प्रौद्योगिकी के अन्य कई प्रमुख विशेषज्ञों के साथ ‘हैंडबुक फॉर ट्रैक मेंटेनेन्स’ तथा ‘इंट्रोड्यूसिंग सेकेंड फेज ऑफ मॉडर्नाइजेशन ऑफ ट्रैक’ पर रिपोर्ट के सह-लेखक भी हैं। उनकी कई पेपर विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स  में प्रकाशित हो चुके हैं। 

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