Sunday, November 5, 2017

वसुंधरा सरकार की हालत डाक्टरों सामूहिक इस्तीफों से बिगड़ जाएगी: पूरी रिपोर्ट

राजस्थान में मलेरिया डेंगू जैसी बीमारियां फैली हुई है। संपूर्ण प्रदेश  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्यंत दयनीय हालत में है । ऐसे में राजस्थान भर में सरकारी चिकित्सकों की 6 नवंबर को सामूहिक इस्तीफा देने और काम नहीं करने से हड़ताल जैसे हालात न जाने किस स्तर पर नीचे पहुंच जाएं। 

10 हजार डॉक्टरों ने पिछले दिनों अपनी कोर कमेटी को अपना इस्तीफे दे दिया है। जबकि कोर कमेटी ने सरकार को चेतावनी दे रखी थी।

एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के डॉक्टर सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे। अखिल राजस्थान राज्य सेवारत चिकित्सा संघ के आह्वान पर डॉक्टरों ने ये फैसला किया है। जिसके बाद प्रदेश के 10 हजार सेवारत चिकित्सक सोमवार   6 नवंबर को सरकार को अपना इस्तीफे सौपेंगे और हड़ताल शुरू करेंगे। जबकि इसे लेकर सेवारत चिकित्सकों और सरकार के बीच दो दौर की वर्ता भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। रविवार को भी हुई वार्ता में डॉक्टरों की मांगों पर कोई सहमति नहीं बनी।

डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे के कारण प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा जाएगी। जहां अस्पतालों आने वाले मरीजों को अपने इलाज को लेकर काफी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अस्पतालों में मरीजों का दबाव भी बढ़ेगा। बता दें कि अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 10 हजार डॉक्टरों ने पिछले दिनों अपनी कोर कमेटी को अपना इस्तीफे दे दिया है। जबकि कोर कमेटी ने सरकार को चेतावनी दे रखी थी, कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना तो वो सभी 6 नवंबर को ये इस्तीफे राज्य सरकार को सौप देंगे।

गौरतलब है कि शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री ने काफी देर तक डॉक्टरों से वार्ता की लेकिन डॉक्टरों की मांगों पर कोई हल नहीं निकला। रविवार को फिर से स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव गृह दीपक उप्रेती, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य रेणू गुप्ता और वित्त सचिव मंजू राजपाल के साथ सेवारत चिकित्सकों की वार्ता हुई। देर रात तक हुई वार्ता कोई समाधान नहीं निकला। उधर डॉक्टरों की मांग है कि एक हाई पावर समिति बन जाए जो पूरे मामले को देखे। वैसे तो डॉक्टर 33 जिलों की 33 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन मुख्य मांग में अतिरिक्त निदेशक राजपत्रित के पद पर डॉक्टर को लगाने और समय पर डीएसी कराना है।

आपको बता दें कि प्रदेश में करीब दस हजार सेवारत चिकित्सक कार्यरत हैं। पीएचसी, सीएचसी, डिस्पेन्शरी व जिला अस्पतालों में इन चिकित्सकों की संख्या काफी ज्यादा है। एेसे में डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से यहां की व्यवस्था पूरी तरह से लचर जाएगी। यहां आने वाले मरीजों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले डॉक्टरों ने अपनी बात रखते हुए राज्य के स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए बनाए गए इस 33 सूत्री श्वेत पत्रिका का जल्द क्रियान्वयन की बात कही, जिससे कि प्रदेश के लोगों को सोमवार से होने वाली कठिनाईयों से बचाया जा सके।

डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा सौंपते हुए सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। अपनी 33 सूत्रीय मांगों को लेकर करीब 3 महीने से आंदोलन कर रहे राजस्थान के सेवारत ​चिकित्सकों ने जयपुर में सरकार से वार्ता विफल होने के बाद सामूहिक इस्तीफा सौंपकर अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है।

जानकारी के अनुसार शनिवार को सरकार से वार्ता विफल होने के बाद करीब 8911 सेवारत चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफा सौंपा जिसके बाद सरकार ने मेडिकल स्टूडेंट्स से व्यवस्थाएं संभालने की अपील की है। राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर अजय चौधरी ने बताया कि संगठन के पास इन डॉक्टर्स के इस्तीफे पहले से ही पहुंच चुके थे और सरकार से वार्ता विफल हो जाने के बाद ये तय था कि सरकार को इस्तीफे सौंप दिए जाएंगे।

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सूत्रों के अनुसार शनिवार रात को राजधानी जयपुर में चिकित्सा भवन में मंत्री कालीचरण सराफ और सेवारत ​डॉक्टर्स के बीच वार्ता का दौर जारी था मगर, सेवारत डॉक्टर्स वरिष्ठ चिकित्सक के पद पर एक आरएएस अधिकारी को लगाने से भी नाराज थे। मंत्री से वार्ता के दौरान सेवारत डॉक्टर्स बार बार एक ही मांग कर रहे थे कि सरकार जल्दी जल्दी से आरएएस अधिकारी को हटाकर इस पद पर किसी वरिष्ठ चिकित्सक को ही लगाए।

बताया गया कि 33 सूत्रीय मांगो को लेकर चिकित्सा मंत्री से बात आगे बढ़ ही रही थी और इस दौरान ​सराफ ने डॉक्टर्स से कहा कि उपचुनावों के बाद उनकी सभी मांग मान ली जाएंगी कि अचानक उप सचिव बीच में बोल पड़े और उन्होनें कहा कि 'इनका फैसला तो अब अगली सरकार में ही होगा' इतने में सेवारत चिकित्सक भड़क उठे और वार्ता बीच में ही छोड़कर चले गए। 


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