Sunday, November 26, 2017

पानी संघर्ष:मरूप्रदेश बनादो-हरचंदसिंह ने पीएम को लिखा 8 साल पहले

मरूप्रदेश बनाओ:




रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत:  

 सूरतगढ़  19 जनवरी 2013.

उतरी पश्चिमी राजस्थान की उपेक्षा का आरोप:सिंचाई पानी को तरसते रहे

कृषि जगत में पहचान दिलाने वाले सिखों को लगातार धत्ता:यह राजनीति कभी भयानक लपटें बन जाऐंगी

राजस्व मंडल और उच्च न्यायालय की बैंचे बीकानेर में क्यों नहीं बनाई गई?

पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने 16-12-2009 को यह पत्र प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को लिखा था


राजस्थान के उतरी पश्चिमी क्षेत्र की निरंतर उपेक्षा के कारण इस इलाके के लोगों का विकास नहीं हो रहा है तथा मरू प्रदेश की मांग एक बार पुन: उठ खड़ी हुई है। 

पानी के मामले में किसान मजदूर व्यापारी आंदोलन निरंतर चल रहा है। 

ऐसे मौके पर लोगों के सामने पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु का तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को लिखा पत्र सामने रखना उचित है, ताकि लोग सोच सकें कि उनके विकास को किस तरह से अवरूद्ध करके रख दिया गया।

सिद्धु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं व 2 बार विधायक रह चुके हैं,इसलिए उनके पत्र में  लिखे बिंदुओं का तथ्यों का बड़ा महत्व है। 

सिद्धु के पत्र का महत्व इसलिए भी है कि राजस्थान विकास का मतलब केवल जयपुर क्षेत्र होकर रह गया है और उतरी पश्चिम राजस्थान धूल में मिल रहा है।


माननीय प्रधानमंत्री महोदय,

राजस्थान राज्य का विभाजन करके मरू प्रदेश का गठन करने के संबंध में।

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारतवर्ष का सबसे बड़ा प्रांत है। पश्चिम भू भाग रेगिस्तानी,दक्षिणी भाग पहाड़ी,पूर्वी उतरी भाग मैदानी है। रहन सहन,भाषाएं, रीति रिवाज भिन्न भिन्न हैं। हर भाग की समस्याएं भी भिन्न भिन्न हैं, लेकिन उनका समाधान एक ही तरह के निर्णय से संभव नहीं हो सकता। प्रशासनिक विसंगतियां बनी हुई है।

राजस्थान प्रदेश का गठन 30 मार्च 1948 को हुआ। राजधानी जयपुर,उच्च न्यायालय जोधपुर,राजस्व मंडल अजमेर को दिया गया।

उसके बाद राजस्थान का नेतृत्व मोहनलाल सुखाडिय़ा के हाथों में रहा। उस कारण एकांकी विकास उदयपुर संभाग का हुआ और पश्चिम उतरी भाग नजरोन्दाज किया गया।

बीकानेर राज्य की जीवन दायिनी गंगनहर का निर्माण तमाम भूमि खरीद कर किया गया था। नहर निर्माण के लिए पंजाब के गिदड़बाहा में बीकानेर राज्य की 2 कॉलोनियों का निर्माण हुआ जहां से निर्माण का संचालन हुआ। उनके लिए ईंट भट्ठे लगाए गए। फरीदकोट में स्टाफ के लिए नहर के संचालन वास्त विश्रामगृह बनाया गया। पंजाब में इस प्रकार की (बीकानेर की जो अब राजस्थान की) संपत्तियां हैं,उन पर पंजाब सरकार ने अनाधिकृत कब्जा जमाया हुआ है। गंगनहर संरक्षित नहर थी,मगर पंजाब ने उसमें से 90-90 क्यूसेक की दो नहरें अनाधिकृत निकाल ली। यह श्रीगंगानगर जिले के अधिकार का हनन किया गया,मगर राज्य सरकार ने इसका किसी भी स्तर पर विरोध नहीं किया। यह इसलिए हुआ कि राजस्थान की राजनैतिक हस्तियों ने बीकानेर एवं पश्चिम राजस्थान के भाग की अनदेखी की।आज श्रीगंगानगर जिला,हनुमानगढ़ जिला बीकानेर जेसलमेर रेगिस्तान में परिवर्तित हो रहा है। भाखड़ा नहर के साथ भी यही हुआ। इस क्षेत्र में भूजल खारा है,जिसका उपयोग सिंचाई में नहीं हो सकता।


एशिया की सबसे बड़ी इंदिरागांधी नहर परियोजना में 60 प्रतिशत राशि राजस्थान की लगी हुई है, उसमें इतने प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का होना चाहिए था। परन्तु राज्य सरकार की कमजोर और भेदभावी नीति के कारण पश्चिम भू भाग के हितों की अनेक समझौतों में बलि चढ़ा दी। 

यही कारण है कि उतरी पश्चिमी भाग पानी के लिए आंदोलित रहता है। राज्य सरकार इस मांग के प्रति उदासीन बनी रहती है। इसी कारण पंजाब व हरियाणा ने इसमें से 52 मोघे अवैध निकाल लिए और उनसे लाभ ले रहे हैं। राजस्थान के उतरी पश्चिमी भाग के अधिकारों का हनन हुआ। लेकिन राज्य सरकार को इसकी परवाह ही नहीं है।

यह क्षेत्र स्थाई रूप से अकालग्रस्त क्षेत्र बन गया है। इसी उदासीनता के कारण यहां औद्योगिक विकास नहीं हुआ जैसा पूर्वी क्षेत्र में कोटा और अलवर में हुआ है।

 राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कारण लोगों का जीवनयापन हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह इलाका पिछड़ा हुआ है।

प्रशासनिक भेदभाव के कारण जब राजस्थान के 25 जिलों का पुन:गठन हुआ तब दौसा,करौली,राजसमंद,प्रतापगढ़ का गठन हुआ तब हनुमानगढ़ को भी जिला बनाया गया। परंतु तथ्यों को नजरोन्दाज किया गया। 

बीकानेर राज्य में सूरतगढ़ महत्वपूर्ण जिला था। गंगनहर के आने के बाद सूरतगढ़ को जिला तोड़ कर उपखंड बना दिया गया। महाजन के लोगों को तहसील स्तरीय सुविधा के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।

    राज्य सरकार की नीति के कारण उच्च न्यायालय की बैंच व राजस्व मंडल अजमेर की बैंच बीकानेर में नहीं खोली गई। श्रीगंगानगर के लोगों को काफी फासला तय करना पड़ता है। इसलिए अब समय आ गया है कि राजस्थान राज्य का विभाजन करके मरूप्रदेश का गठन किया जाए।

    राजस्थान में पनप रही जातिवादी राजनीति राजस्थान को तबाह कर देगी। इसमें बड़ी जातियां लाभ उठा रही हैं। छोटी जातियों का स्तर नीचे जा रहा है। इससे असंतोष बढ़ रहा है, जो कभी भयंकर लपटों का रूप ले लगा।

 बीकानेर संभाग को कृषि जगत में पहचान दिलाने वाली सिख जाति अपने आपको हर स्तर पर उपेक्षित महसूस कर रही है। आक्रोश फैल रहा है। सत्ता में भागीदारी के नाम पर सिख जाति को हमेशा धत्ता बताया गया है। यह अच्छे संकेत नहीं हैं। मैं सिख होने के कारण विरोध नहीं कर रहा हूं,यह मानवता के कारण लिख रहा हूं।

    इसलिए निष्पक्ष भाव से राज्य पुन: गठन आयोग का गठन करके संभावित राज्यों की विवेचना की जाए और निर्माण​ किए जाएं।

( पूर्व विधायक स. हरचंद सिंह सिद्धू ने यह पत्र 16.12.2009 को लिखा था। पानी आंदोलन अभी कुछ सालों से चलता हुआ 2017 में भी चल रहा है।
वर्तमान में केंद्र और राजस्थान में भाजपा की सरकारें हैं।
किसान मजदूर व्यापारी सभी परेशान हैं।)

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