Tuesday, November 7, 2017

राजस्थान के 10 संसदीय सचिवों को हटाने वास्ते जनहित याचिका

जयपुर

राजस्थान के 10 संसदीय सचिवों पर तलवार लटक गई है । दिल्ली की केजरीवाल सरकार में संसदीय सचिव बनाने का विरोध कर रही भाजपा की राजस्थान सरकार ने पिछले वर्ष जनवरी और दिसम्बर माह में 10 संसदीय सचिव बनाए। 

अब राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर वसुंधरा सरकार द्वारा बनाए गए संसदीय सचिवों को उनके पदों से हटाने की गुहार की गई है ।


अधिवक्ता दीपेश ओसवाल ने राज्य के मुख्य सचिव और कैबिनेट सचिवालय के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाते हुए  दायर की गई जनहित याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जुलाई,2017 में बिमोलांगशु रॉय बनाम आसाम राज्य के मामले  में दिए गए निर्णय के अनुसार राज्य सरकार को संसदीय सचिव बनाने का अधिकार नहीं है । इसलिए हाईकोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट  के आदेश की पालना करवाते हुए संसदीय सचिव नियुक्त करने की अधिसूचना को रद्द करवाते हुए 10 संसदीय सचिवों को उनके पद से  हटाया जाए ।


वसुंधरा राजे सरकार में दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए राज्य में 10 संसदीय सचिवों को  राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था । उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के मंत्रिमंडलीय सचिवालय ने 18 जनवरी,2016 कोअधिसचूना जारी कर विधायक सुरेश रावत,जितेन्द्र गोठवाल,विश्वनाथ मेघवाल,लादूराम विश्नोई, एवं भैराराम को संसदीय सचिव बनाया था । 

इसके बाद 10 दिसम्बर,2016 को एक अन्य अधिसूचना के माध्यम से शत्रुघन गौतम,ओमप्रकाश हूडला,कैलाश वर्मा,नरेन्द्र नागर,भीमा भाई डामोर को संसदीय सचिव नियुक्त किया । 


कांग्रेस भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति का विरोध कर रही है । राज्य विधानसभा मे कांग्रेस विधायक दल के सचेतक का कहना है कि सरकार ने पिछले विधानसभा सत्र में ही बहुमत के आधार पर संसदीय सचिवों को लाभ के पद से बाहर  मानने वाला विधेयक पारित करवा लिया । हम संसदीय सचिव बनाए जाने के खिलाफ है । उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे सरकार ने संसदीय सचिवों सहित विभिन्न निगमों एवं बोर्ड के चेयरमैन को लाभ के पद से बाहर निकालने को लेकर पिछले विधानसभा सत्र में राजस्थान निर्हरता निवारण विधेयक,2017 पारित करवाया था ।  इस  विधेयक के अनुसार कोई भी विधायक यदि इन पदों पर बैठता है तो उसे लाभ का पद मानते हुए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकेगा । 


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