Sunday, October 29, 2017

पुलिस कर्मी आतंकी बन गया-इस पर किससे मांगा जाए इस्तीफा?




यहाँ समाचार पत्रों की  एक छोटी सी खबर की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा । खबर ये है कि श्रीनगर में एक पुलिस कर्मी अपनी  सरकारी नौकरी छोड़ कर एक आतंककारी बन गया।पता चला है कि श्रीमाल गांव का निवासी अशफाक अहमद नाम का यह युवक अपनी पुलिस की नौकरी छोड़ कर लश्करे तैयबा में भर्ती हो गया । वहां उसका कोड नाम अबू अकरम है जिसकी फोटो एके 47 के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी है।पुलिस कह रही है कि मामले की जाँच की जा रही है।इससे मिलती जुलती दूसरी बड़ी खबर गुजरात से आयी है जिसके अनुसार गुजरात में दो आतंकी एटीएस द्वारा पकड़े गए हैं।खबर बड़ी इसलिए क्योंकि इनमें से एक व्यक्ति एक अस्पताल जो अहमद पटेल का बताया गया, में टेक्नीशियन के पद पर काम कर चुका था।खबर इतनी बड़ी थी की मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को तुरंत एक प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी देनी पड़ी।रूपाणी ने बताया कि वो  आतंकी जिस अस्पताल में नौकरी कर रहा था वो कांग्रेस नेता और सोनिया गांधी के नजदीकी अहमद पटेल की है।रूपाणी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आतंकियों को शह देती है व उन्होंने अहमद पटेल से इस कारण राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने की मांग की है । जबकि उस अस्पताल की तरफ से लिखित प्रेस नोट द्वारा सफाई दी गयी है कि अहमद पटेल या उनके परिवार का कोई  सदस्य इस अस्पताल के किसी लाभ के पद पर नहीं है।अहमद पटेल ने स्वयं भी कहा है कि इस अस्पताल के वे सन 2014 तक ट्रस्टी रहे है व 2014 में उन्होंने ये पद छोड़ दिया था।एटीएस की कार्रवाई की तारीफ करते हुए अहमद पटेल ने उक्त आतंकी को सख्त सजा देने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीती न करने की अपील की है।लेकिन बीजेपी को इससे कोई मतलब नहीं है उसे तो अहमद पटेल का इस्तीफा चाहिए चाहे उसका यहाँ कोई अर्थ हो या न हो ।अब देखिये कश्मीर में एक पुलिस कर्मी अशफाक अहमद आतंकी बन गया तो किससे इस्तीफा लिया जायेगा? क्या कश्मीर के गृहमंत्री देंगे इस्तीफा?बीजेपी के आई टी सेल का अध्यक्ष ध्रुव सक्सेना जब पाकिस्तान को सेना की ख़ुफ़िया जानकारियां देता पकड़ा गया तो बीजेपी के किस नेता का इस्तीफा मांगा गया ?मतलब साफ है जब राजनीतिक हित साधना हो तो देश की बात कौन करे? बड़ी मुश्किल से एक मुद्दा हाथ लगा है और वो भी अहमद पटेल का जो कांग्रेस से हैं और मुस्लिम  है तथा जिसने हाल के राज्य सभा चुनाव में बीजेपी को पटकनी दी है। इसलये उसे कैसे छोड़ा जाएँ? यह आम तौर पर देखा गया है कि राजनीतिक दल अपनों और दूसरों के लिए अलग अलग मानदंड रखते है।यहाँ गुजरात चुनाव सर पर है!विपक्ष हावी हो रहा है।बीजेपी से गुजरात मॉडल और विकास का जवाब नहीं बन रहा।ऐसे  ऐसा लगता है कि बीजेपी एक आतंकी का सहारा लेकर वो हिन्दू मुस्लिम का सवाल खड़ा करके राजनितिक हित साधने की कोशिश कर रही है।कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही है । कुल मिला कर बात यही क़ि  राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलो पर राजनीती न करने की बात करने वाले अवसर पर हकीकत और व्यवहार में  वो सब नहीं करते जिसकी दुहाई देते है।



रमेश छाबड़ा

सूरतगढ़



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