Sunday, October 29, 2017

मौत की गुफा रेलवे अंडर ब्रिज में सावधान रहें


- करणीदानसिंह राजपूत +

सूरतगढ़ का यह रेलवे अंडर ब्रिज मौत की गुफा बना हुआ है। यह सेठ राम दयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय  और बड़ोपल रोड के चरण सिंह चौक पर मेल करता है। 

यह अंडर ब्रिज हालात से मौत की गुफा बना हुआ है।इसकी चौड़ाई कम है तथा पैदल के लिए दोनों तरफ फुट पाथ नहीं हैं। वाहनों के आमने-सामने होने पर रोशनी से चालकों की आंखें चुंधिया जाती हैं और खुल नहीं पाती। ऐसी हालत में ट्क्टरों जीपों भारवाहनों का आना जाना मौत के संकट को पक्का बनाता है।

यह रेलवे अंडर ब्रिज इसकी बनावट के अनुसार चार पहिया वाहन के लिए नहीं है। मगर इसके अंदर से चार पहिया वाहन ट्रैक्टर ट्राली सहित जीप कार व अन्य भार वाहन शोर करते हुए निकलते हैं आने जाने के वक्त बहुत बार बीच में दो वाहन आमने सामने होते हैं तो निकलते वक्त साइड में मामूली सी जगह बचती है। उस जगह पर कोई पैदल निकलने वाला होता है तो वह भयानक संकट में होता है। उसे दीवार के साथ चिपक कर खड़ा होना पड़ता है। पैदल की सुरक्षा के लिए कोई फुटपाथ प्लेटफार्म नहीं है कोई भी वाहन अनियंत्रित हुआ तब सर्वाधिक घायल होने वालों में पैदल चलने वाले और दुपहिया पर चलने वाले होंगे।किसी की जान चली गई तो कौन होगा जिम्मेदार? ऐसे हालात हैं दुपहिया वाहन भी हॉर्न बजाते हुए बहुत तेज गति से निकलते हैं।अंडर ब्रिज में कान फोड़ शोर होता है। अंदर रोशनी नहीं है वाहनों की रोशनी आमने सामने होती है तब टक्कर हो जाने की स्थिति अधिक होती है। 

निर्माण के होते ही 17 अक्टूबर 2017 को धनतेरस के दिन जल्दबाजी में इस का लोकार्पण विधायक राजेंद्र सिंह भादू और नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा के द्वारा किया गया। आश्चर्य यह है कि इस रेलवे अंडर ब्रिज की  सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। अंडर ब्रिज की छत का पलस्तर कुछ स्थानों से उखड़ कर गिर गया। एक दीवार में काफी लम्बी दरार पड़ गई।ऐसा घटिया निर्माण कैसे हुआ?

 यह केवल जांच का विषय नहीं है बल्कि लोकार्पण करने वालों को मौके पर पहुंचकर खुद अपनी आंखों से यह हालात देखने चाहिए। उनकी जिम्मेदारी बनती है। केवल वक्तव्य देने से काम नहीं चल सकता। जहां दुर्घटना का खतरा हो और मानव की जान जा सकती हो, नुकसान हो सकता हो, वहां वक्तव्य काम नहीं देते। 

विधायक राजेंद्र सिंह भादू को खुद मौके पर जाकर के देखना और जांच खुद करनी चाहिए कि इतना घटिया निर्माण क्यों हुआ? उन्होंने खुद ने बिना जांचे परखे क्यों इसका लोकार्पण किया? सूरतगढ़ के लोगों को,राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को,सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं को अपनी आंखों से देखना चाहिए कि यह अंडर ब्रिज मौत की गुफा जैसा क्यों बना? 

इसके भीतर से निकलने के 5- 10 सेकंड का समय कितना खतरनाक हालत में है और इस खतरे से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?

  यहां पर कुछ तस्वीरें दे रहा हूं जो आंखें खोल देने वाली है और इस अंडर ब्रिज को मौत की गुफा शीर्षक देने के लिए प्रमाणिक है। एक तस्वीर में तो दो वाहन निकल रहे हैं और एक महिला को दीवार के साथ मजबूरी में अपने बचाव के लिए खड़ा होना पड़ा है। टूटी हुई सड़क का फोटो भी है।पूरी सड़क टूटी हुई है। अंडर ब्रिज में दो वाहन निकलते हैं तब जगह नहीं बचती। चार पहिया वाहनों को प्रवेश निषेध है मगर ट्रैक्टर ट्राली सहित भरे हुए निकल रहे हैं।

 



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