Monday, October 9, 2017

चाहे देश गर्त में जाये हम इसका गुणगान करे



मंहगाई की मार बढे या रोज़गार कम हो जाएं 

हमको तो निज नेता के टीवी पर दर्शन हो जाएं 

नहीं मिलेगा ऐसा लीडर झुक कर इसे सलाम करें 

चाहे देश गर्त में जाये हम इसका गुणगान करे


निकला था काला धन लाने कर्जा लेकर घर आया
अच्छे दिन की बातें कह कर सबको कैसे भरमाया
भ्रष्टाचार हटाऊंगा,कह कुर्सी तो वो हथिया ली है
क्या कारण है तीन साल से लोकपाल का पद खाली है
भ्रष्टाचार मिटेगा कैसे? इसका क्यों संज्ञान करें?
चाहे देश गर्त में जाये हम उनका गुणगान करें

अब उनके भक्तों को देखो क्या उनको नादान कहें?
इनकी माने तो सभी इन्हें बुद्ध और भगवान कहें
फिक्र नहीं है राशन पानी कितना महंगा हो जाये
चीनी चावल दाल देख लो कहीं किचन से खो जाए
किसी भाव पेट्रोल मिले हम इसको वरदान कहें
चाहे देश गर्त में जाये हम उसका गुणगान करें

देखो दुश्मन देशों क्या वो थर थर कांप रहे है ?
पाक चीन बेहोश हो रहे लोग सभी ये भांप रहे है ?
काश्मीर से आतंकी क्या अब डर डर भाग रहे हैं ?
क्या दाऊद मरणासन्न हो गया?वाड्रा मॉफी मांग रहा है ?
जो कमाल दिखलाया है ,आओ इसका सम्मान करें
चाहे देश गर्त में जाये , हम उनका गुणगान करें

बहुमत दिया देश ने उनको ,मनचाहा वो काम करें
मंदिर के सब दर्शन कर लें, देश गाय के नाम करें
उनकी मर्जी है जब चाहें ,हिन्दुमुस्लिम की बात करें
नाम गरीबों का लेकर  वो धन वालों का पेट भरें
साथ अडानी को रक्खें या अम्बानी से बात करें
कितने ही वो देश घूम ले घूम घूम कर थक जाएँ
हमको इससे क्या मतलब ?सवाल नहीं नादान करें
चाहे देश गर्त में जाये , हम उनका गुणगान करें


रमेश छाबड़ा
सूरतगढ़

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