Tuesday, October 24, 2017

तानाशाहीपूर्ण कदम है राज्य सरकार का नया अध्यादेश -श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने जताया विरोध


श्रीगंगानगर। राज्य सरकार द्वारा जजों, न्यायिक अधिकारियों, अफसरों और लोक सेवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने से रोकने संबंधी अध्यादेश को श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने तानाशाहीपूर्ण कदम बताया है। मीडिया के लिए प्रस्तावित हिदायतें भी लोकतंत्रात्मक व्यवस्था के खिलाफ हैं। 

श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के मुख्य संरक्षक जयदीप बिहाणी, अध्यक्ष विजय जिन्दल व महामंत्री तेजेंद्रपालङ्क्सह 'टिम्मा' ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह लोकतंत्र के दो स्तंभों न्यायपालिका और मीडिया पर हमला है। मीडिया का गला घोंटा जा रहा है। अगर अदालत को सुनवाई और जांच के आदेश से रोका जा रहा है तो समझा जा सकता है कि लोकतंत्र का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा। लोग कहां फरियाद करेंगे? अध्यादेश के अनुसार अब मजिस्ट्रेट भी बिना सरकार की अनुमति के ऐसे मामलो में जांच का आदेश नहीं दे सकेगा। सरकार का कहना है कि उसे कानून के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। इसके तहत दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता में संशोधन किया जा रहा है। अध्यादेश के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति जजों, अफसरों और लोक सेवको के खिलाफ अदालत के जरिए एफआईआर दर्ज नहीं करा सकेगा। मजिस्ट्रेट बिना सरकार की इजाजत के न तो जांच का आदेश दे सकेंगे, न ही प्राथमिकी का दर्ज कराने का। अध्यादेश के अनुसार अगर कोई नागरिक जजों, लोक सेवकों और अफसरों के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचेगा तो मजिस्ट्रेट बिना सरकार की इजाजत के कार्यवाही नहीं कर सकेंगे। इसमें सरकार अधिकतम 180 दिन में अनुमति दे सकेगी। अगर इस मियाद में सरकार इजाजत न दे तो स्वत: ही इजाजत समझी जाएगी। श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा है कि इसमें अधिनायकवाद की बू आती है।

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