Monday, October 23, 2017

सिनेमा घरों में राष्ट्र गान बाबत केंद्र सरकार विचार करे-उच्चत्तम न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए वह राष्ट्रीय ध्वज संहिता में संशोधन करने पर विचार करे। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी, तब तक सिनेमाघरों में राष्ट्रीय गान बजाना जारी रहेगा। सीजेआई दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में उसके पहले के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ही इस पर विचार करना होगा। 


देशभक्ति साबित करने के लिए हर वक्त बाजू में पट्टा लगाकर घूमने की जरूरत नहीं


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी को भी देशभक्ति साबित करने के लिए उसे हर वक्त बाजू में पट्टा लगाकर घूमने की जरूरत नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशभक्त होने के लिए राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है। ये टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष नवंबर 2016 में दिए उस अंतरिम आदेश में में डिफेंडिंग बढबदलाव के संकेत दिए हैं जिसमें देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने और दर्शकों को उस दौरान खड़े होने के लिए कहा गया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान न गाने और उस दौरान खड़े न होना राष्ट्रविरोधी नहीं है। किसी को भी देशभक्ति का प्रमाण देने के लिए बाजू में पट्टा लगाकर घूमने की जरूरत नहीं है। 

पीठ अपने 1 दिसंबर 2016 में दिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के आदेश को वापस लेने के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है और एकरूपता लाने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संविधान में अनुच्छेद 51 ए, जिसमें राष्ट्रीय कर्तव्य लिखे हैं, उन्हें देखते हुए सुप्रीम कोर्ट इस तरह का आदेश दे सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि कोर्ट आदेश में संशोधन कर राष्ट्रीय गान बजाने के आवश्यक निर्देश को स्वेच्छा से बजाने के निर्देश में बदल सकता है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि आप ही क्यों नहीं इस मामले में फैसला लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस बारे में विचार करेगी और कोई न कोई रास्ता निकालेगी।


आदेश में सुधार के संकेत दिए 

पीठ ने संकेत दिया कि वह 1 दिसंबर, 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकती है। इसी आदेश के तहत देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने के मकसद से सिनेमारों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले राष्ट्रगान बजाना और दर्शकों के लिए इसके सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य किया गया था। पीठ ने कहा था कि जब राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान दर्शाया जाता है तो यह मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाता है। कोर्ट ने सभी सिनेमारों में फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने के निर्देश के लिए श्याम नारायण चोक्सी की जनहित याचिका पर यह निर्देश दिए थे। 

 23.10.2017.


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