Sunday, October 15, 2017

तो क्या 2019 में आम चुनाव हार जाएंगे मोदी? जनसत्ता में मोदी की कार्यप्रणाली पर सटीक लेख

कारोबारियों की नोटबंदी व जीएसटी से तबाही के दुष्प्रभाव सेे मोदी की छवि में पतन पर जनसत्ता  रविवार 15.10.2017 को प्रकाशित तवलीन सिंह का लेख।



राजनीति में मौसम इतनी जल्दी बदल जाता है कि कई बार जाने-माने राजनीतिक पंडित और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री भी हैरान रह जाते हैं। सो, दो महीने पहले सब मानते थे कि नरेंद्र मोदी को 2019 में हराना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है और आज हाल यह है कि वही राजनीतिक पंडित कहने लगे हैं कि शायद गुजरात में भी भारतीय जनता पार्टी का हाल अच्छा नहीं है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के शब्दों में, ‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हम गुजरात जीत रहे हैं, लेकिन अगर हमारी दस सीटें भी ज्यादा आ गर्इं, तो हम इसको जीत मानेंगे। यकीन मानो कि इससे भी ज्यादा आ सकती हैं सीटें, क्योंकि राहुल गांधी को इस दौरे में रेसपांस ऐसा मिल रहा है कि लाखों लोग आ रहे हैं उनकी आम सभाओं में।’ नेताजी अभी गुजरात से वापस दिल्ली आए थे। मैंने जब उनसे पूछा कि उनकी नजर में इस परिवर्तन की वजह क्या है, तो उन्होंने फौरन कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से चोट सबसे ज्यादा उन छोटे कारोबारियों को लगी है, जो भारतीय जनता पार्टी के सबसे कट्टर समर्थक रहे हैं दशकों से। तो क्या 2019 में आम चुनाव हार सकते हैं मोदी? इस सवाल पर नेताजी ने कहा कि सब अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। मंदी दूर कर पाते हैं मोदी अगले कुछ महीने में, तो फिर से हवा का रुख उनके पक्ष में हो सकता है और अगर मंदी रहती है और बेरोजगारी बढ़ती है, तो हार सकते हैं। जाहिर है कि ऐसी खबरें प्रधानमंत्री के दफ्तर तक पहुंच चुकी हैं, सो उन्होंने अपने आर्थिक सलाहकारों के साथ पिछले हफ्ते मुलाकात भी की। इस भेंट के बाद इन सलाहकारों द्वारा दिए गए सुझाव अखबारों में छपे और उनको पढ़ कर मुझे ताज्जुब हुआ कि पर्यटन में निवेश करने की बात तक नहीं इन विशेषज्ञों ने छेड़ी। कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के सुझाव दिए, लेकिन पर्यटन के क्षेत्र में नहीं।

अजीब लगी यह बात, क्योंकि मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पर्यटन को एक शक्तिशाली आर्थिक औजार के रूप में देखा है। अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में उन्होंने कई बार कहा भी कि विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जिस व्यवस्था की जरूरत है, उसमें निवेश करना चाहिए। फिर अपनी इस बात को जैसे भूल से गए मोदी, सो आज भी स्थिति यह है कि पूरे भारत में सिर्फ अस्सी लाख विदेशी पर्यटक आते हैं हर साल, जबकि अकेले बैंकाक शहर में तीन करोड़ से ज्यादा आते हैं। थाईलैंड की इस राजधानी में कुछ खास नहीं है देखने को। थाई राजाओं की प्राचीन राजधानी आयुध्या (अयोध्या) है, कुछ सुंदर महल हैं, एक-दो बड़े मंदिर हैं और कुछ बौद्ध विहार हैं। लेकिन पर्यटकों के लिए पांच सितारा होटल हैं, बेहतरीन रेस्तरां हैं, शॉपिंग करने के लिए बहुत सारे आधुनिक मॉल हैं, जहां दुनिया भर की चीजें मिलती हैं। कोई पंद्रह साल पहले एयरपोर्ट से शहर में आना बहुत मुश्किल होता था, क्योंकि एक ही पुरानी सड़क थी। आज हाइवे बन गया है और एयरपोर्ट पर भी व्यवस्था इतनी अच्छी है कि वीजा भी मिल जाता है पर्यटकों को, वहां पहुंचने के बाद।


थाईलैंड के मुकाबले भारत के हर राज्य में इतना कुछ है देखने को कि विदेशी पर्यटक जब आते हैं एक बार, तो दुबारा आने का फौरन फैसला कर लेते हैं। दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर देख कर दंग रह जाते हैं, राजस्थान के महल और गढ़ देख कर मानते हैं कि इतनी आलीशान इमारतें शायद ही किसी दूसरे देश में देखने को मिलती हैं और ऊपर से हैं हमारे पास हिमालय के महान पर्वत और भारत के हर छोर पर ऐसे समुद्र तट, जिन्हें देख कर विकसित पश्चिमी देशों से आए पर्यटक पागल हो जाते हैं, क्योंकि उनके देशों में एक भी खाली बीच नहीं मिलती है।इन सारी चीजों के बावजूद विदेशी पर्यटक अगर उस तादाद में नहीं आ रहे हैं, जितना थाईलैंड जैसे छोटे देश में जाते हैं, तो इसलिए कि हमारे देश में यातायात की व्यवस्था बहुत कमजोर है। हमारी सड़कें अक्सर इतनी टूटी-पुरानी हैं कि घंटों लग सकते हैं सौ किलोमीटर की यात्रा तय करने में। अच्छे एयरपोर्ट दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में बन गए हैं, लेकिन छोटे शहरों में अगर हैं तो बहुत पुराने। ऊपर से कोई बीमार पड़ जाए तो आसपास अच्छा अस्पताल नहीं मिलता, सो इन सब बातों को ध्यान में रख कर विदेशी पर्यटक जब पूरब का रुख करते हैं, तो जाते हैं दक्षिण-पूर्वी देशों की तरफ, चीन की तरफ और सिंगापुर, हांगकांग की तरफ, जहां शॉपिंग के अलावा कुछ नहीं है।


पिछले दो वर्षों में भारत की पर्यटन-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत कुछ कर सकते थे मोदी, क्योंकि अब तकरीबन हर बड़े राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं। कुछ हुआ नहीं है अगर तो शायद इसलिए कि मोदी के मुख्यमंत्री गौमाता को बचाने में लगे रहे हैं, हिंदुत्व की सेवा में लगे रहे हैं। सो, पर्यटन व्यवस्था में निवेश करने के बदले शिवाजी और भगवान राम की विशाल मूर्तियां बन रही हैं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में। इनको देखने भी अगर आते हैं विदेशी पर्यटक, तो पहले वे सुविधाएं मांगेंगे, जिनके बिना उनका गुजारा नहीं होता है। ऊपर से नई समस्या यह है कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में प्रतिबंध लग रहे हैं खाने-पीने पर। इन पाबंदियों को देख कर कौन-से विदेशी पर्यटक भारत आने वाले हैं? वैसे मोदी अगर चाहें तो अब भी अर्थव्यवस्था में सुधार ला सकते हैं पर्यटन में निवेश करके। व्यवस्था के निर्माण में भी रोजगार के लाखों अवसर हैं और निर्माण के बाद भी नए अवसर रोज पैदा होते रहते हैं।

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