बुधवार, 9 अगस्त 2017

भारत मां की शान: कविता- मुंशीराम कम्बोज-





हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई  भारत मां की शान

इसलिये तो दुनियाँ में है ऊंचा अपना नाम


एक बाग के फूल हमीं सब एक हमारा माली

करता देखा  भारत मां की हर मानव रखवाली

ये नन्हे मुन्ने बच्चे हैं इस बगिया की मुस्कान

इसलिये तो दुनियाँ में है ऊंचा हमारा नाम


वैर विरोध का नाम मिटाना पहला काम हमारा

गूंज सकेगा तभी दोस्तो जय भारत का नारा

दुश्मन का हम मिल के कर दें खाना पीना हराम

इसलिये तो दुनियाँ में है ऊंचा अपना नाम


नेकी करना कर्म कमाना और प्यार से रहना

यही हमारा धन दौलत है यही है गहना

हमको शिक्षा देते आये यही तो राम रहमान

इसीलिए तो दुनियां में है ऊंचा अपना नाम


मानवता की मूर्त है हम सारे भारतवासी

खुशियां हों मुखड़े की रौनक  कभी न आये उदासी

मुन्शी अपने पूर्वजों का यही तो है फरमान

इसीलिए तो दुनियाँ में है ऊंचा अपना नाम

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कविराज मुंशीराम कम्बोज,

 गांव- मानेवाला  

तहसील - सूरतगढ़(राजस्थान)

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