Thursday, August 24, 2017

बाबा को शक्ति दिखाने की चाहत लगती है, भक्तों को घर लौटने का आदेश नहीं दे रहे

- करणीदानसिंह राजपूत-

बाबा चाहते तो पहले ही आदेश दे देते की सभी भक्त अपने अपने निवास वाले शहरों गांवों कस्बों में रहेंगे।कोई भी हरियाणा-पंजाब पंचकूला आदि में नहीं आएगा, लेकिन ऐसा आदेश हुआ नहीं। पंचकूला में भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच गई है और वहां से कोई हटने का नाम नहीं ले रहा है। बाबा जी भी भक्तों को अपने-अपने घरों को लौट जाने का आदेश नहीं दे रहे हैं। बाबाजी का बयान आया है कि शांति बनाए रखें ईश्वर पर भरोसा है।  बाबा जी शांति बनाए रखने का कह रहे हैं तब घर लौटने का कहने में क्या अड़चन है? घर लौटने का नहीं कहने के पीछे क्या कारण है?भक्तों की भीड़ को जमाई रखने के पीछे एक ही कारण हो सकता है वह है इनके बलबूते शक्ति का प्रदर्शन करना। बाबा जी आखिर क्या करना चाहते हैं? खबरें आ रही है वह अच्छे संकेत नहीं दे रही?कुछ भी हो सकता है ? पांच प्रदेशों में अलर्ट होना और पंजाब हरियाणा के अनेक शहरों का छावनी जैसे हालात में तब्दील हो जाना क्या संकेत दे रहा है? राजस्थान के श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों की सीमाएं भी पंजाब हरियाणा से लग रही हैं। इन दोनों जिलों में भी पुलिस और प्रशासन अलर्ट है।

 पंजाब हरियाणा के उच्च न्यायालय ने सेना तक का प्रबंध रखने का निर्देश दिया है। 

बाबा के भक्तों में हजारों लोग मेहनत मजदूरी और सामान्य व्यापार करके अपने परिवारों का पालन पोषण करने वाले हैं। हालात बिगड़े तो इन लोगों का क्या होगा?किसी प्रकार की दुर्घटना का शिकार हो गए तो उनके परिवारों का क्या होगा? मुकदमों में फंसे तब क्या होगा? बाबा जी को इन भक्तों की चिंता क्यों नहीं है? 

यहां यह कहना उचित होगा कि जो कुछ तैयारियां हो रही हैं,उससे लगता है कि किसी दूसरे देश से युद्ध की तैयारी चल रही है। बाबाओं का कार्य देश में विकास को गति देना हो सकता है लेकिन सरकार से किसी भी रूप में भक्तों के माध्यम से संघर्ष करना नहीं हो सकता। आशा की जानी चाहिए कि  जो भी फैसला हो उसके बाद भक्त शांति बनाए रखें और अपने अपने घरों को लौट जाएं।

 अच्छा तो यह होगा कि फैसला सुनाए जाने से पूर्व ही बाबाजी को भगवान कोई दृष्टि दे दे और बाबाजी लोगों को अपने घरों को लौट जाने का कह दें।

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