Saturday, August 12, 2017

विकास के दावों में सूरतगढ़ का हैरान करने वाला सच



- करणीदानसिंह राजपूत,- 

देश की आजादी के इतने सालों बाद विकास की गंगा बहाने के दावों में विख्यात शहर सूरतगढ़ में शुद्ध पानी की तलाश निरंतर जारी है।पेयजल की शुद्धता के सारे दावे खोखले हैं और लाइनपार का क्षेत्र जो सूर्योदय नगरी कहलाता है उसके सभी वार्डों में पानी एक दिन छोड़कर वितरित किया जा रहा है। सूर्योदय नगरी के लोग पहले प्रतिदिन नलों में पानी पाते थे। विधायक गंगाजल मील का कार्यकाल साढ़े तीन साल  पर अचानक  लोगों को 1 दिन छोड़कर पानी मिलने लगा, जिसका कोई समय नहीं और कभी चूक जाए तो वह भी किसी को परवाह नहीं। गंगाजल मील का कार्यकाल जैसे-तैसे झेलते हुए लोगों ने पूरा किया। लोगों को लगा कि राज बदलने के बाद निश्चित रूप से पानी रोजाना मिलेगा और शुद्ध मिलेगा लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। कांग्रेस का राज गया और  भारतीय जनता पार्टी का राज आया। सूरतगढ़ से विधायक राजेंद्र सिंह भादू बने जिन्होंने चुनाव से पहले न जाने कितने वादे किए थे। चुनाव की सभाओं में बैठकों में राजनीतिक दल प्रत्याशी और पार्टी के लोग अपने भाषणों में न जाने कितने दावे करते हैं, लेकिन पानी जैसा दावा भी सही रूप में पूरा ना हो पाए। सूर्य उदय नगरी में 1 महीने में 15 दिन पानी आता है। 15 दिन लोग किस प्रकार से बिताते हैं?जिन घरों में स्थाई नलों की व्यवस्था नहीं है उन लोगों का हाल तो बहुत ही बुरा होता है। सूर्योदय नगरी के पानी के संकट के समाचार अनेक बार छपे हैं लेकिन जलदाय विभाग को सही स्थिति का मालूम करने की फुर्सत नहीं है। एक दिन छोड़कर जो पानी दिया जा रहा है वह भी गंदा मटमैला और जिन बर्तनों में भरा जाता है उसके तल में मिट्टी। सूर्योदय नगरी में आधा शहर बसता है जहां राजनीतिक दलों के नेता हैं, कार्यकर्ता भी है,वार्ड पार्षद भी है लेकिन आजाद भारत में उन सभी की बोलती बंद है।पानी जैसी समस्या पर भी नेता बोलना नहीं चाहते। विधायक बनने की आशा तो करते हैं लेकिन समस्याओं पर कभी एक पत्र संबंधित विभाग को देने में भय खाते हैं। सूर्य उदय नगरी में वर्तमान राज्य के गुणगान करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है। मोदी जी का नाम आए तो वसुंधरा जी का नाम आए तो ढोल पीटने लगते हैं,एकांतरे पानी मिलने पर और अशुद्ध पानी मिलने पर भाजपा के चाटुकार एकदम मौन हैं।  भाजपा कार्यकर्ताओं को ऐसा लगता है कि अगर पानी की मांग की तो यह भादू का विरोध माना जाएगा। पानी की समस्या का कोई हल भारतीय जनता पार्टी के साढे तीन साल के राज में भी निकल नहीं पाया तो इस राज को सिर पर ढोने का क्या लाभ है?केवल वजन उठा कर चलने का तो कोई लाभ मिलने वाला नहीं है ?

सूर्योदय नगरी में घोषणाओं और मांग के बाद शहरी चिकित्सालय डिस्पेंसरी शुरू की गई लेकिन उसमें  स्थाई रूप से न डॉक्टर दिया गया न अन्य स्टाफ। उस डिस्पेंसरी को खोलने का जो लाभ मिलना चाहिए था वह लाभ नहीं मिल पाया। सूर्योदय नगरी के लिए मास्टर प्लान में पशु चिकित्सालय के पास रेलवे ओवरब्रिज बनना चाहिए था जो एकदम सही स्थिति में था लेकिन मील राज में सोचते समझते हुए गलत बनाया गया। बडोपल रोड से बसंत विहार कॉलोनी में उतारा गया। अब अंडर पास बनाए जा रहे हैं ध्यान से देखने पर मालूम पड़ता है कि इन की चौड़ाई बहुत कम है और गुफा जैसे लगते हैं। जब यह आवागमन के लिए शुरू किए जाएंगे तब इनके निर्माण की खामी का लोगों को मालूम पड़ेगा। विकास की बहती गंगा मैं एक महत्वपूर्ण तथ्य रखना चाहता हूं की सूरतगढ़ में स्वतंत्रता दिवस समारोह और गणतंत्र दिवस समारोह रोडवेज बस स्टैंड के परिसर में क्यों मनाए जाते हैं? यह शहर बुद्धिजीवियों का शहर कहलाता है​। कोचिंग सेंटरों वाले कहते हैं कि प्रशासनिक अधिकारी पैदा करते हैं लेकिन एक भी व्यक्ति ऐसा सुशिक्षित पैदा नहीं किया गया जो यह सवाल करता कि इस शहर में लाखों रुपए लगा कर स्टेडियम का निर्माण किया गया है, उस स्टेडियम की हालत क्या है? उस स्टेडियम के अंदर राष्ट्रीय पर्व क्यों नहीं मनाए जाते?

 पूरा शहर सीवरेज की खुदाई और त्रुटिपूर्ण निर्माण से तंग है। यह परेशानी कई महीनों से चल रही है। हर समय दुर्घटना का खतरा है,मगर विकास के दावे करने वालों का हाल चाबी वाले खिलौने जैसा है।

 मोदी जी ने स्वच्छता का नारा दिया झाड़ू लेकर फोटो खिंचवाए। कुछ दिनों तक नाटक किया गया लेकिन आज शहर में भयानक गंदगी पड़ी है।एक जगह से गंदगी उठाई जाती है और कच्ची बस्तियों के गड्ढों में भर्ती के रूप में डाल दी जाती है।गंदगी और कचरे का विधिवत निस्तारण किया जाना चाहिए जो आबादी क्षेत्र के बाहर होना चाहिए लेकिन किसी को भी कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों की परवाह नहीं है कि इस गंदगी से वह लोग बीमार होते हैं और उन लोगों को मालूम नहीं पड़ता कि यह नगर पालिका की फैलाई गंदगी से बीमारियां फैल रही हैं।नगर पालिका के पास जमीन की कोई कमी नहीं है। गंदगी और कचरे का निस्तारण हर हालत में आबादी के बाहर होना चाहिए लेकिन विकास के दावे करने वालों का मुंह पकड़ने वाला कोई नहीं।नगरपालिका के कार्यालय से सटा हुआ पार्क बना हुआ है जो आधे से अधिक कबाड़ घर के रूप में बना दिया गया है।नगर पालिका के पास बहुत जमीन है तो वह कबाड़ घर या स्टोर अन्यत्र बना सकती है लेकिन सोच की कमी के कारण और अधिकारियों की लापरवाही के कारण अच्छे खासे पार्क को लाखों रुपए लगाने के बाद कबाड़ घर बना दिया गया है। पालिका अध्यक्ष पालिका उपाध्यक्ष और पार्षद यह स्थिति देख कर भी चुप हैं।

 चौराहों का रूप पोस्टरों से विकृत कर दिया गया है। जिला कलेक्टर बार-बार कह रहे हैं कि गंदगी फैलाने वालों पर मुकदमा दर्ज करवाया जाए लेकिन यहां नगरपालिका की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही। नगरपालिका का आयुर्वेदिक औषधालय भगु वाले कुएं के पास में है उस पूरे भवन पर कोचिंग सेंटरों के पोस्टर चिपका दिए हुए हैं या धार्मिक कार्यक्रमों के बड़े-बड़े बैनर लगा दिए गए हैं और हालत यह बना दी गई है कि औषधालय नजर ही नहीं आता।

 राजनीतिक दलों में कांग्रेस पार्टी है जो यह मानकर चल रही है कि राज बदलेगा और सत्ता पुनः कांग्रेस को मिल जाएगी।  यह पार्टी सत्ता तो प्राप्त करना चाहती है मगर शहर की समस्याओं पर सीधे रुप से कार्यवाही नहीं करना चाहती। इसके नेता यदाकदा केवल भाषण देते हैं। इसके अलावा शहर में बहुजन समाज पार्टी सत्ता की दावेदार है मगर उसके नेता भी समस्याओं पर सीधी टक्कर लेना नहीं चाहते। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आम आदमी पार्टी जमींदारा पार्टी भी यदाकदा  बोलती है। 

शहर का विकास और उसका उचित रखरखाव करने वाली संस्था नगरपालिका है मगर 35 वार्डों की इस संस्था में जो पार्षद हैं वे 10 मिनट में 200 करोड़ का बजट तो पारित कर सकते हैं लेकिन शहर की पालिका से संबंधित समस्याओं पर विधिवत रूप से अपनी बात तथ्यों सहित नगरपालिका में पेश नहीं करना चाहते​ और बोर्ड की बैठक में रखना नहीं चाहते। बोर्ड की बैठक में चर्चा होने में चर्चा करने में नाम लिखा जाता है। कभी किसी पार्षद ने एजेंडे में प्रस्ताव नहीं रखवाया।कभी किसी प्रस्ताव पर विधिवत रूप से कार्यवाही नहीं कराई गई।

 अतिक्रमण हटाने काम काम पूरे राजस्थान में चल रहा है।पहले तो कोई व्यक्तिगत रुप से या संस्था के रुप से शिकायत नहीं कर रहा था लेकिन अब उच्च न्यायालय के आदेश से हो रहा है, फिर भी संशय बना हुआ है।कौन सी सड़क कितनी चौड़ी होगी?उसके आगे का अतिक्रमण एकदम साफ किया जाएगा या तीन चार फीट तक की छूट है? यह छूट किसने दी?कोई पार्षद कोई शहर का नेता नगर पालिका से पूछना नहीं चाहता?कोई पत्रकार भी इस बारे में सवाल नहीं करता? बड़े अखबारों में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।कितने भी समाचार छप गए लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि अतिक्रमण किस हद तक हटाए जाएंगे? शहर में गौरव पथ के निर्माण की चर्चा करीब 2 महीनों से हो रही है। करोड़ों रुपए का बजट लगाकर गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा लेकिन इस पढ़े-लिखे शहर में यह असमंजस बना हुआ है कि गौरव पथ कितनी चौड़ाई का बनाया जाएगा और कहां से कहां बनाया जाएगा?इस पूरे मामले में शहर की नगर पालिका पूर्ण रुप से चुप है। सार्वजनिक निर्माण विभाग भी चुप है और इलाके के विधायक राजेंद्र सिंह भादू की ओर से भी यह नहीं कहा गया कि गौरव पथ निर्माण में लंबाई और चौड़ाई कितनी है? एक तरफ अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है और एक तरफ नगर पालिका से 20 फुट दूर अतिक्रमण हो रहे हैं। 


सूरतगढ़ में अपराधों की संख्या उच्चकों की संख्या बढ़ रही है लेकिन पुलिस प्रशासन प्रत्येक बीट कांस्टेबल के मार्फत अपराधिक तत्वों के बारे में खोजबीन नहीं करवा रहा। यही हाल अवैध रूप से नशे की गोलियां ड्रग बेचने का धंधा चल रहा है जिसे कौन चला रहा है इसका मालूम पुलिस अपने बीट कांस्टेबल के मार्फत करवा सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं।उचक्के मोटरसाइकिल सवारों के बारे में पकड़-धकड़ होनी चाहिए लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

जनता से पूछें  कि पुलिस अधिकारियों को कभी शहर में गस्त करते देखा है तो जवाब ना  है। पुलिस की कार्यवाही अगर सही हो तो नागरिकों के धारणा और प्रदर्शन पुलिस थाने के आगे और पुलिस उप अधीक्षक कार्यालय के आगे नहीं हो सकते।

सूरतगढ़ में सेठ रामदयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है जिसका भवन बहुत बुरी हालत में है जर्जर अवस्था में है जिसके बारे में सचित्र समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं मगर सब चुप हैं।कभी इस भवन के कक्षा कमरों की छतेन गिर गई तो उस हादसे का जिम्मेदार कौन होगा?

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