Wednesday, August 30, 2017

हिमाचल के पुलिस आई जी सहित 8 पुलिसकर्मी गुड़िया रेप केस जांच में गिरफ्तार



हिमाचल प्रदेश की सरकार सवालों में घिरी है।

बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और कत्ल के मामले में  चौंकाने वाला मोड़ आया है। सूरज लॉकअप हत्याकांड मामले में सीबीआई ने आईजी एस. जहूर जैदी और ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया।


ऐसा हिमाचल के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी मामले में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस समेत इतने पुलिस वाले फंसे हैं।


सीबीआई के इस कदम से राज्य सरकार कटघरे में खड़ी हो गई है क्योंकि आईजी जैदी के नेतृत्व में ही गुडिया मामले की जांच चल रही थी। सीबीआई ने ये गिरफ्तारी मंगलवार को शिमला में रेलवे बोर्ड बिल्डिंग स्थित शाखा में लंबी पूछताछ के बाद की है।

सीबीआई का आरोप है कि सूरज हत्याकांड को पुलिस कर्मियों ने ही अंजाम दिया और इस मामले की जांच को बनाई गई एसआईटी के प्रमुख आईजी जैदी ने न केवल असलियत को छिपाने में अहम भूमिका निभाइ बल्कि हत्या का इलजाम एक दूसरे आरोपर पर थोप दिया।

गिरफ्तारी के बाद इन आठों पुलिस कर्मियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई को उम्मीद है कि आईजी समेत पुलिस वालों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इसलिए कोर्ट ने सीबीआई के आग्रह पर इन आठों को चार सितंबर तक रिमांड पर भेज दिया है।

सीबीआई ने जिन आठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को गिरफ्तार किया है, उनमें आईजी दक्षिणी रेंज रहे एस. जहूर जैदी, ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई पुलिस थाने के पूर्व एसएचओ राजेंद्र सिंह, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एएसआई दीप चंद, इसी पुलिस स्टेशन में एचएचसी रहे सूरत सिंह, मोहन लाल, हेड कांस्टेबल रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत स्ट्रेटा शामिल हैं।

ये गिरफ्तारियां 18 जुलाई की रात को कोटखाई थाने में हुए लॉकअप हत्याकांड में की गई हैं। शिमला के कोटखाई थाने के लॉकअप में गुड़िया दुराचार मामले में पुलिस की ओर से बनाए गए आरोपी नेपाली सूरज सिंह की हत्या कर दी गई थी। पुलिस की एसआईटी ने इस मामले की जांच के बाद गुड़िया मामले में बनाए प्रमुख आरोपी राजू को ही हत्यारा करार देते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिया था।


हालांकि, बाद में जब गुड़िया दुराचार एवं कत्ल मामले की जांच सीबीआई को दी गई तो इसकी छानबीन में ये बात सामने आई है कि सूरज की हत्या राजू ने नहीं की है बल्कि पुलिस की ही इसमें भूमिका रही है।


सीबीआई को पुलिस के इस हत्याकांड में शामिल होने के ठोस सबूत मिले बताए जा रहे हैं। सीबीआई मुख्यालय दिल्ली के प्रवक्ता आरके गौड़ ने आईजी एस जहूर जैदी समेत आठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की।बीती छह जुलाई को शिमला के कोटखाई क्षेत्र के दांदी जंगल में दसवीं कक्षा की एक छात्रा का दुराचार के बाद शव फेंका मिला था। इस मामले में हिमाचल पुलिस ने पांच लोगों को पकड़कर मामला सुलझाने का दावा किया। इनमें से एक आरोपी सूरज की गुडिया की मौत के चौदह दिन बाद कोटखाई थाने के लॉकअप में हत्या कर दी गई थी।


पुलिस ने हत्या का आरोप दूसरे मुलजिम पर लगाया था। इस पर गुस्साए लोगों ने थाने समेत कई गाड़ियां फूंक दीं। जनता का कहना था कि पुलिस पैसा लेकर मामले को घुमा रही है। बाद में इस मामले की जांच हिमाचल हाईकोर्ट ने सीबीआई को दे  दी थी।

6 जुलाई : कोटखाई के जंगल में गुड़िया का मिला शव

7 जुलाई : पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दुराचार का हुआ खुलासा
8 जुलाई : पुलिस दरिंदों तक नहीं पहुंची, जनाक्रोश भड़का
9 जुलाई : सीबीआई जांच की उठी मांग
10 जुलाई : सरकार ने एसआईटी की गठित
11 जुलाई : पीड़ित परिवार को पांच लाख मुआवजा
12 जुलाई : सीएम के फेसबुक पर फोटो हुईं वायरल
13 जुलाई : एसआईटी ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया
14 जुलाई : ठियोग थाने पर पथराव, सीबीआई जांच की संस्तुति
15 जुलाई : सीबीआई जांच के लिए पीएम को पत्र लिखा
17 जुलाई : राजभवन पहुंची भाजपा ने सरकार की बर्खास्तगी की मांग उठाई
18 जुलाई : सरकार ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए दाखिल किया आवेदन
19 जुलाई : कोटखाई थाने में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या
23 जुलाई : सीबीआई ने दर्ज किए दो मामले
24 जुलाई : सीबीआई पहुंची शिमला, जांच शुरू
02 अगस्त : हाईकोर्ट में पुलिस ने सौंपी स्टेट्स रिपोर्ट, दो सप्ताह का समय मांगा
03 अगस्त : कस्टडी में मौत पर पुलिस अधिकारियों से पूछताछ
07 अगस्त : गुड़िया की बहनों ने पहनाई सीबीआई के अफसरों को राखियां
14 अगस्त : कोटखाई थाने में तैनात संतरी के हुए बयान
17 अगस्त : सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार, मांगा दो सप्ताह का समय
21 अगस्त : सीबीआई ने कई रईसजादों के घरों पर छापे मारे।

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