रविवार, 30 जुलाई 2017

सत्ताच्युत राजनेताओं को पढऩी चाहिए एक गधे की आत्मकथा:


कामधाम है नहीं तो ठाले बैठे मशहूर लेखक कृश्रचन्द्र की यह किताब ही पढ़लें:

व्यंग्य- करणीदानसिंह राजपूत -


एक गधे की आत्मकथा उर्दू के लेखक कृश्रचन्द्र ने 1968 के आसपास लिखी थी। यह किताब राजनीति पर तगड़ा व्यंग था। किताब बहुत चर्चित हुई। उस समय चारों ओर कांग्रेस का राज था। राजनेताओं ने छिप छिप कर भी पढ़ी। जो भी पढ़ता उसे यह लगता कि किताब तो उसी पर ही लिखी गई है। हर जगह किताब के चर्चे लोगों का ध्यान आकृषित करते। किताब के हाथों हाथ बिकने के कारण कई संस्करण छपे। इसका हिन्दी संस्करण लोगों को बहुत भाया। बाद में इसके कई भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हुए। इस किताब का शीर्षक एक गधे की आत्मकथा आज भी प्रसिद्धि पर है। पुस्तक का वृतांत आज भी राजनेताओं पर सटीक बैठता है। आज भी सटीक बैठने का एक महत्वपूर्ण कारण है कि इतने सालों बाद भी हमारे राजनेता और राजनैतिक दल अपने आप को बदल नहीं पाए। सत्ता में होते हैं तब सत्ता को कायम रखने में ही सोचते हैं और उसी सोच के अनुरूप कार्य करते हैं। सत्ता विहीन होते हैं तब केवल सत्ता प्राप्ति की ही सोचते हैं। दोनों काल में जनता के प्रति कोई वफादारी नहीं होती। इसी कारण सारी योजनाएं धरी रह जाती है और उन पर लगाया गया करोड़ों रूपया व्यर्थ हो जाता है,या योजना का कार्य इतना विलंब ले लेता है कि उसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता।

इस किताब का महत्व आज भी कायम है  इसलिए कह रहा हूं कि सत्ता विहीन राजनेताओं को और उन दलों के कार्यकताओं को इसे पढऩा चाहिए। सत्ता में होते हैं तब समय नहीं होता इसलिए भी यह सलाह है कि सत्ता से बाहर होने पर समय ही समय है।

यह सोच कर भी पढ सकते हैं कि वे आदमी हैं और सत्ताधरी को पढ़ रहे हैं।



पहली बार लिखा गया 24-10-2016.

अपडेट 30-7- 2017.










शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

विधायक राजेन्द्र भादू की कोठी सड़क पर अतिक्रमण:बसपा की प्रेसवार्ता:



बसपा नेता डूंगर राम गेदर ने दावा किया था कि कोठी की शिकायत की जाएगी:



विधायक भादू के 2 सालों की उपलब्धियों को बसपा ने झूठा बताया था:

- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 24 दिसम्बर 2015.  
UP DATE 15-6-2016
Up date 8-5-2017.
 अपडेट  28-7-2017.

भाजपा विधायक राजेन्द्र भादू के 2 सालों के राज में सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में करवाए गए विकास कार्यों के दावों को बसपा पे्रसवार्ता में डूंगर राम गेदर ने झूठ का पुलिंदा बताया। बसपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डूंगर राम गेदर ने कहा कि विधायक ने भू माफिया पर नकेल कसने का दावा किया है लेकिन सच्च यह है कि विधायक का खुद का मकान सड़क पर अतिक्रमण करके बनाया हुआ है।
सवालों के जवाब में गेदर ने कहा कि बसपा इसकी शिकायत कर जाँच करवाएगी। शिकायत का भी स्पष्ट पूछा गया कि केवल ज्ञापन ही दिया जाएगा या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त को शिकायत की जाएगी? उन्होंने कहा कि ज्ञापन नहीं कार्यवाही के लिए कदम उठाया जाएगा।
विदित रहे कि भादू की कोठी की शिकायत वसुंधरा राजे को व विभागों को पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु 15 नवम्बर को कर चुके हैं। यह प्रकरण करीब तीन सालों से जनता में छाया हुआ है तथा बार बार अखबारों में उठ चुका है। पूर्व विधायक गंगाजल मील भी किसान मजदूर मोर्चा आंदोलन में उपखंड के आगे हुई एक प्रेस वार्ता में भादू की कोठी पर सवाल दाग चुके हैं।
अभी तक गंगाजल मील व कांग्रेस ने कोई शिकायत कोठी जाँच के लिए नहीं दी है। मील ने भादू के दावों को झूठा बतलाते हुए प्रेस बयान तो दिया है कि जल्दी ही भादू की पोल खोलेंगे। मील कब पोल खोलते हैं उस दिन का इंतजार है। मील इस स्पष्ट प्रकरण को न्यायालय मे ले जाने का दावा नहीं कर रहे। मील से यह सवाल तीन सालों से पूछा जा रहा है कि अदालत में कब जाओगेï?

कांग्रेस लुंज पुंज हो जाएगी लोकसभा चुनाव के बाद


- करणीदानसिंह राजपूत-

भाजपा और मोदी। मोदी और भाजपा।
दोनों ही आक्रामक है। जब जब ऐसी स्थितियां इतिहास में आई हैं तब तब आक्रामक की फतह यानि कि जीत हुई है। आक्रामक पूरे जोश में होता है तथा बचाव का रूख अपनाते हुए युद्ध करने वाला कमजोर होता है।
यह हालत लोकसभा के वर्तमान चुनाव युद्ध में दृष्टिगोचर हो रही है।
मोदी की ललकार के आगे राहुल का जवाब मिमयाता हुआ सा लग रहा है। एक दिन में यह नतीजा नहीं निकाला गया है। कई दिनों से चैनलों पर मोदी का आक्रामण शेर का शिकार पर होता है वैसा लग रहा है। राहुल के जवाब में ललकार नहीं मिलती। राहुल की आवाज खरखराहट से भरी हुई दबी दबी सी लगती है।
राहुल की आवाज से यह मतलब निकलता सा लगता है कि...मैं अकेला लड़ तो रहा हूं...आखिर कितना लड़ूं...बाकी ने तो मलाई खा खाकर स्वास्थ्य को इतना बेकार कर लिया है कि लडऩे के काबिल ही नहीं रहे हैं।
सच तो यह है कि जब सामने पराजय नजर आने लगे तो हालत ऐसी हो ही जाती है। राहुल को साफ साफ पराजय दिखाई पडऩे लगी है। लेकिन चुनाव का युद्ध तो लडऩा ही होगा। उससे भाग कर भी कहां जाऐं?
राहुल ने अभी कुछ दिन पहले रेलवे के कुलियों से,मजदूरों से,खान मजदूरों से,कहीं किसानों से बात की है। कांग्रेस नें उसका लाइव प्रसारण करवाया। जिन लोगों ने भी देखा। वे सभी मेरे दावे की सत्यता की पुष्टि करेंगे।
एक छोटा बच्चा जैसे अपने बाप या दादा से बार बार पूछता है यह क्या है?
वह बार बार जवाब देता है कि यह कौवा है....यह कौवा है....यह कौवा है..।
यहां इस उदाहरण को देने का मतलब है।
बेचारे राहुल...कांग्रेेस के उपाध्यक्ष। इतने अनजान बन पूछ रहे थे मानो उनको सच्च में ही मालूम नहीं कि भारत में गरीबों की मजदूरों की यह दुर्दशा है कि उनके पास खाने को आज भी दो वक्त का अनाज नहीं होता। उनके पास रहने को मकान नहीं है। उनके बच्चे आज भी स्कूलों में नहीं जाते। उनके पास चिकित्सा के लिए भी दो पैसे नहीं है।
यह सब सच्च है। यह सारा सच्च सामने आ रहा है तो यह भी सच सामने आ रहा होगा कि आजादी के इतने साल बाद भी भारत में ऐसे हालात क्यों हैं?
देश में राज तो सबसे ज्यादा कांग्रेस का ही रहा था। कांग्रेस में भी राज जवाहर लाल नेहरू का,इंदिरा गांधी का, राजीव गांधी का रहा। कौन थे ये लोग? राहुल गांधी के क्या लगते थे?
अब राहुल के मिमियाते बयानों से जर जर बीमार हुई कांग्रेस ठीक होने वाली नहीं है।


यह रपट दिनांक  29~3~2014  को लिखी गई थी।
अपडेट 28-7-2017.

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सोमवार, 24 जुलाई 2017

राष्ट्रीय उच्च मार्ग के सीमा में पट्टे शुदा भवनों को तोड़ने का अधिकार नगर पालिका को नहीं है

- करणी दान सिंह राजपूत-

 राष्ट्रीय उच्च मार्ग की तय सीमा में आने वाले पट्टे सुदा भवनों को अतिक्रमण मानने व तोड़ने का अधिकार नगरपालिका के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। 

राष्ट्रीय उच्च मार्ग की सीमा में किसी प्रकार से पट्टे शुदा भवन आता है तो उस पर कोई कार्यवाही करने व तोड़ने का अधिकार केवल राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथोरिटी को ही है। 

राष्ट्रीय उच्च मार्ग भूमि एवं आवागमन अधिनियम 2002 के अनुसार राष्ट्रीय उच्च मार्ग में जो भूमि आती है और उसका मालिकाना अधिकार किसी निजी क्षेत्र में निहित है​, तो सबसे पहले उसका अधिग्रहण किया जाना व मुआवजा चुकाना जरुरी है। बिना अधिग्रहण के कोई भी मकान आदि ध्वस्त नहीं किए जा सकते, इसके बिना कोई भी कार्यवाही गैरकानूनी है।


 सूरतगढ़ में से राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 निकल रहा है।इसके आसपास के जो भवन निर्धारित मार्ग सीमा में आते हैं तो उनका अधिग्रहण किया जाना जरूरी है, लेकिन सूरतगढ़ के इन भवनों का अधिग्रहण  राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथोरिटी  ही कर सकता है।अधिग्रहण के पश्चात मुआवजा भी दिया जाना जरूरी होता है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथॉरिटी को जब टाइटल मिल जाता है यानी की मालिकाना अधिकार मिलता है,उसके बाद में ही वह कोई कार्यवाही कर सकता है। मालिकाना अधिकार से पहले वह भी कोई कार्यवाही करने का हक नहीं रखता। सूरतगढ़ में तो अभी अधिग्रहण की कार्यवाही भी नहीं हुई है।


 सूचना है कि पूर्व में राष्ट्रीय​ उच्च मार्ग के मध्य से भवन सीमा दोनों और 75-75 फुट रखी हुई थी जिसके अनुसार भवन बनाए गए।

सूरतगढ़ के मास्टर प्लान में यह सीमा दोनों और 100 -100 रखी गई है, लेकिन आस-पास के जो भवन इस 25 फुट अधिक के दायरे में आते हैं उनका अधिग्रहण किया हुआ नहीं है। नगरपालिका सूरतगढ़ के क्षेत्राधिकार में नहीं है कि वह पट्टे शुदा मकानों को तोड़े। 

सूचना है कि  एक भवन मालिक श्री निश्चल सिडाना ( पट्टे शुदा) ने राष्ट्रीय उच्च मार्ग भूमि एवं आवागमन अधिनियम 2002 की प्रति सहित एक पत्र नगरपालिका को दिया है। जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि नगरपालिका के क्षेत्राधिकार में यह कार्य नहीं आता। नगरपालिका राष्ट्रीय उच्च मार्ग की सीमा में आने वाले पट्टे शुदा किसी भी भवन को एवं उसकी चारदीवारी को तोड़ने का अधिकार नहीं रखती है। 

सूरतगढ़ में सूरतगढ़ PG कॉलेज, शेरवुड स्कूल,सन सिटी रिसोर्ट, निरंकारी भवन आदि राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास में सटे हैं और ये पट्टे शुदा खातेदारी जमीन पर बने हुए हैं। 


नगर पालिका ने पहले इंदिरा सर्कल के आगे मीणा पेट्रोल पंप के पास से उन अतिक्रमणों को हटाया जिनके पास पट्टे नहीं थे । नगर पालिका ने शनिवार रविवार के अवकाश के बाद अब  24 जुलाई को आगे अतिक्रमण तोड़ने की कार्यवाही राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर शुरू कर दी है। पालिका उन अतिक्रमणों को तोड़ रही है जिनके पास में पट्टे नहीं है।



शनिवार, 22 जुलाई 2017

सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास पट्टे शुदा भवनों पर खतरा


करणीदानसिंह राजपूत

राष्ट्रीय उच्च मार्ग की चौड़ाई 150 फुट तय की गई थी। मार्ग के मध्य से 75 की दूरी के हिसाब से लोगों ने अपने व्यावसायिक एवं आवासीय निर्माण करवा लिए थे। अब राष्ट्रीय उच्च मार्ग की  चौड़ाई  200 फुट की जाने से पूर्व में बने भवनों पर खतरा मंडरा रहा है।

 अब मध्य से 100 फुट की दूरी के बाद ही कोई निर्माण होने  चाहिए।  पूर्व में बने भवन 25 फुट की चौड़ाई में तोड़े जाते हैं तो उनका स्वरूप बिगड़ कर मिट्टी के मोल पर जा सकता है। यानि कि 25 फुट तोड़े जाने के बाद पीछे उपयुक्त जगह ही न बचे। भवन के आगे का भाग बहुत अच्छा लुक देने वाला बनाया जाता है। पूर्व में बने करोड़ों रुपए के पट्टे शुदा भवनों​ पर खतरा मंडरा रहा है।

राष्ट्रीय उच्च मार्ग जहां शहर के बीच में से निकल रहे हैं वहां पर यह खतरा पैदा हुआ है।

‌ सूरतगढ़ में भी यह खतरा मंडरा रहा है। पूर्व में बने भवनों को बचाने के वास्ते और संपदा का करोड़ों रुपए मुआवजा चुकाने से बचने के लिए सरकार चाहे तो शहर के बीच में मार्ग पूर्व निर्धारित चौड़ाई रख सकती है।सूरतगढ में बाई पास की मांग है व बाई पास वास्ते जमीन भी है। पूर्व में बने भवनों और जमीन का मुआवजा देने के बजाय तो बाई पास का बनाना बुद्धिमानी  हो सकता है। लेकिन आजकल बिना दबाव के कुछ भी संभव नहीं हो सकता।

‌ भवन मालिकों​ के पास फिलहाल उच्च न्यायालय में पेश होने का ही  एक रास्ता बचा है।





शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

गांधी ने आजादी के बाद कांग्रेस को बिखेरने का कहा था :आज कांग्रेसी खुद यह कर रहे हैं- अमित शाह

 भाजपा ने सत्ता में आने के बाद  परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण जैसे 3 नासूरों को उखाड़ फेंका है। 

 अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का गठन आजादी के लिए हुआ था। उस समय कांग्रेस पार्टी में सभी विचारधाराओं​  के लोग शामिल थे। इसकी स्थापना अंग्रेज ने की थी और गांधी जी ने आजादी के बाद कहा था कि कांग्रेस को बिखेर दो, जो आज कांग्रेस के लोग ही कर रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक अमित शाह अपने तीन दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान आज 21जुलाई को  जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित प्रबद्ध सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा समेत कुछ ही पार्टियां है जिनमें आंतरिक लोकतंत्र है।

इसका उदाहरण उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं को बताया। दोनों ने ही अपना सफर एक साधारण कार्यकर्ता से शुरू किया और अपनी मेहनत एवं तेजस्विता के बल पर इतने बड़े पदों पर पहुंचे। देश में 1670 राजनीतिक दल हैं और इनमें से सिद्धांतों और आंतरिक लोकतंत्र केवल भाजपा समेत कुछ दलों में है। इसकी बदौलत एक साधारण सा कार्यकर्ता इस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बनता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एवं अन्य दलों की तरह भाजपा परिवारवाद, जातिवाद या क्षेत्रवाद के आधार पर नहीं चलती। शाह ने कहा कि उनकी जाति सुपारी के आकार से भी छोटी है। परिवार में कोई राजनीति में नहीं था। मैं पोस्टर लगाता था और बूथ नंबर 297 का एक साधारण सा कार्यकर्ता था।

उन्होंने कहा कि आज मैं दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। इसी तरह चाय बेचने वाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना।  यह  भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र और सिद्धांतों की वजह से संभव हुआ।


सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर अतिक्रमण हटाए गए

- करणीदान सिंह राजपूत-

सूरतगढ़ 21 जुलाई 2017.

 नगर पालिका ने आज 21 जुलाई से राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया। 

 यह अभियान राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 पर शुरू किया गया। राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62  पालिका क्षेत्र के अंदर से निकलता है।वर्षों से यहां व्यावसायिक रूप में बड़े-बड़े शोरूम कारखाने दुकानें आदि चल रही थी जिनका प्रतिवर्ष लाखों का टर्न ओवर था। काफी समय से आवाज उठ रही थी इन अतिक्रमणों को हटाने की। आज अतिक्रमण हटाने वाले स्थल पर प्रभावशाली लोगों के चेहरे नजर आए क्योंकि बहुत बड़े-बड़े अतिक्रमण शोरूम और दुकानों में राजनीतिज्ञों की और पैसे वालों की मालकियत थी। नगरपालिका की दो जेसीबी मशीनें अतिक्रमण तोड़ने में लगी थी, वहां पर अतिक्रमण वालों की ओर तमाशबीनों की भारी भीड़ थी। अनेक लोगों ने अपने अतिक्रमण खुद हटाने शुरू कर दिए ताकि जो सामग्री है वह नगरपालिका वाले ने ले जा सके। नियम के हिसाब से नगरपालिका कब्जा हटाती है तो सामग्री जप्त करके नीलाम करती है और कब्जा तोड़ने का सारा पैसा कब्जेदारी से ही वसूल किया जाता है। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए 10 दिन काम समय दिया गया है। यह समय दुकानदारों ने लिया है लेकिन यह निश्चित है कि अतिक्रमण किसी भी हालत में बचाए नहीं जा सकेंगे चाहे वह कितने ही प्रभावशाली व्यक्ति के हों,अगर अतिक्रमण बचाने में नगरपालिका के स्टाफ ने कोई कोताही की तो अधिशासी अधिकारी और कार्य प्रभारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के सहायक अभियंता तरसेम अरोड़ा पर ड्यूटी में कोताही बरतने की शिकायत हो सकेगी। बीकानेर रोड पर बड़े-बड़े लोगों के कब्जे हैं और लोगों की निगाहें बीकानेर रोड, महाराणा प्रताप चौक छवि सिनेमा रोड आदि के ऊपर लगी हुई है।





       





 

अस्पतालों का कचरा बायोवेस्ट जानलेवा :मानव स्वास्थ्य के लिए हर समय खतरा


श्रीगंगानगर, 20 जुलाई। अस्पतालों का कचरा  जानलेवा भयानक प्रदूषण फैलाता है और मानव स्वास्थ्य के लिए हर समय खतरा है।आश्चर्य है कि श्रीगंगानगर जिले में 107 चिकित्सालयों का कचरा नहीं उठाया जा रहा। वह कहां फेंक रहे हैं यह कचरा?

 जिले में कुल 87 सरकारी अस्पताल और 86 प्राइवेट अस्पतालों ने यानि कुल 173 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों ने सीटीएफ के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, जिनमें से अब 66 ही वेलिड है 107 के रजिस्ट्रेशन एक्सपायर हो चुके हैं। इनका नवीनीकरण नहीं करवा गया है।

बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर गठित जिला स्तरीय  मॉनिटरिंग कमेटी की पहली बैठक 20 जुलाई 2017 में यह गंभीर तथ्य सामने आए। यह बैठक जिला कलक्टर ज्ञानाराम की अध्यक्षता में जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिला कलक्टर ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण मामले को गंभीर मानते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को जिला मुख्यालय पर जल्द ही रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण का शिविर लगाने के निर्देश दिए। ताकि जिन हॉस्पिटल ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया हुआ है वो रजिस्ट्रेशन करवा सकें और जिनका रजिस्ट्रेशन खत्म हो रहा है वो नवीनीकरण करवा सके। समिति के सदस्य सचिव सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल ने बताया कि जिला कलक्टर ने इसे गंभीर मानते हुए जिले की सभी अस्पतालों को इसमें जोड़ने के निर्देश देते हुए इसकी सूची बनाने के निर्देश दिए। सीटीएफ प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधियों को जिले की सभी अस्पतालों की सूची चिकित्सा विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्यों को देने के निर्देश दिए। ताकि अन्य अस्पतालों को भी जोड़ा जा सके। 


                                      बैठक में सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल और डिप्टी सीएमएचओ डॉ अजय सिंगला ने बताया कि सीटीएफ प्रदाता कंपनी ऑन रोड़ पीएचसी का कचरा तो उठा लेती है लेकिन इंटीरियर में स्थित पीएचसी का बायो मेडिकल वेस्ट नहीं उठाते। इस पर जिला कलक्टर ने कंपनी के साथ हुए एग्रीमेंट को देखने के निर्देश देते हुए कहा कि अगर एग्रीमेंट में इंटीरियर में स्थित पीएचसी से कचरा उठाने का उल्लेख है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ डीएलबी को लिखा जाए। इसके अलावा जिला कलक्टर ने हनुमानगढ़ में बाइपास रोड़ पर स्थित प्लांट का भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को निरीक्षण करने के निर्देश दिए कि वहां बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नियमानुसार होता है या नहीं। बैठक में सीएमएचओ और डिप्टी सीएमएचओ ने बताया कि सीटीएफ के 75 किलोमीटर के रेडियस में जितने भी अस्पताल आते हैं उनका बायो मेडिकल वेस्ट सीटीएफ प्रदाता कंपनी को उठाना जरूरी है चाहे वो इंटीरियर में आए या रोड़ पर। इसको लेकर संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए। 


                              सीएमएचओ और डिप्टी सीएमएचओ ने बताया कि राजकीय चिकित्सा संस्थानों में बीएमडब्ल्यू सेगरिगेशन है। बीएमडब्ल्यू मद में निदेशालय को बजट मांग भिजवाई गई है। कार्मिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही जिन संस्थानों में सीटीएफ द्वारा कचरा नहीं उठाया जा रहा वहां बैरल पिट्स का उपयोग किया जा रहा है।  जिला कलक्टर ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर गठित  जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक प्रत्येक तीन महीने में एक बार बुलाने के निर्देश दिए। 


                         बैठक में जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम के अलावा सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल, पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, पीआरओ श्री सुरेश बिश्नोई, पीएचईडी के सहायक अभियंता श्री मक्खन सिंह, प्रदूषण निंयत्राण बोर्ड बीकानेर के प्रतिनिधि श्री दारा सिंह श्योरान और श्री ए.के. जेलिया, सीटीएफ प्रदाता प्रतिनिधि श्री घनश्याम राजपुरोहित और श्री कविन्द्र खन्ना उपस्थित थे।

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित

नई दिल्‍ली :20 जुलाई 2017. एक ऐतिहासिक दिन एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्‍ट्रपति चुन लिए गए हैं. उन्होंने यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत से अधिक वोट से हराया. राष्ट्रपति चुने जाने के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा, "मुझे समर्थन देने के लिए सभी दलों का धन्यवाद, ये मेरे लिए भावुक पल है. मेरा चयन लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है. राष्ट्रपति के तौर पर चयन बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनना मेरा लक्ष्य नहीं था. मुझ पर भरोसा जताने के लिए सभी का आभारी हूं." कोविंद ने ये भी कहा कि वे सर्वे भवंतु सुखिन: के सिद्धांत पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के लिए काम करेंगे.17 जुलाई को भारत के 14वें राष्ट्रपति के लिए हुए मतदान के नतीजों के लिए गुरुवार सुबह 11 बजे से संसद भवन में मतगणना शुरू हुई थी. नया राष्‍ट्रपति चुनने के लिए करीब 99 फीसदी मतदान हुआ था. मतगणना में कोविंद को 65.65 फीसदी वोट मिले, जबकि मीरा कुमार को करीब 34.35 फीसद मतदान मिले हैं. रामनाथ कोविंद को 7 लाख 2 हजार 44 वोट वैल्यू मिले. वहीं मीरा कुमार को 3 लाख 67 हजार 314 वोट वैल्यू मिले.पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद को शुभकामनाएं दी.

रामनाथ कोविंद की जीत पर प्रधानमंत्री ने उनके साथ की दो तस्वीर भी ट्विटर पर साझा की. एक साथ साझा की गई इन दोनों तस्वीरों में से एक तस्वीर 20 साल पहले की तस्वीर थी और एक तस्वीर वर्तमान की है. चुने हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बारे में ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि चाहे 20 साल पहले की बात हो या आज की, उनके साथ हमेशा गर्व की अनुभूति हुई. पीएम मोदी ने यूपी प्रत्याशी मीरा कुमार को लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव प्रचार के लिए शुभकामनाएं दी. मतगणना के पहले और दूसरे राउंड में रामनाथ कोविंद ने विपक्ष की मीरा कुमार से काफी बढ़त बनाई हुई थी. पहले राउंड में कोविंद को जहां 60683 वोट वैल्‍यू मिले थे, वहीं मीरा कुमार के खाते में 22941 वोट वैल्‍यू गए हैं. पहली राउंड के आंकड़ों के मुताबिक एनडीए उम्‍मीदवार रामनाथ कोविंद को 552 सांसदों ने वोट दिया है. जबकि मीरा कुमार के पक्ष में 225 सांसदों के वोट गए हैं.रामनाथ कोविंद की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों ने मनाया जश्न (फोटोः पीटीआई) आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती है. राष्‍ट्रपति वहीं बनता है, बल्कि राष्ट्रपति वही बनता है जो सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल वेटेज का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल कर ले और रामनाथ कोविंद ऐसा कर पाने में सफल रहे. 25 जुलाई को नए राष्‍ट्रपति शपथ लेंगे.

यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा "आज 20 जुलाई 2017 को मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहती हूं, विचारधारा को लेकर मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, ये जारी रहेगी"

ऐसी रही मतगणना की प्रक्रिया- सबसे पहले संसद भवन की मतपेटी खोली गई और फिर राज्यों से आई मतपेटियों को वर्णमाला के आधार पर खोला गया.- वोटों की गिनती चार अलग- अलग मेजों की गई, यानी चार जगह पर एक साथ वोटों की गिनती हुई.- राष्‍ट्रपति चुनाव की मतगणना आठ चरणों में की गई इसमें कुल साढ़े दस लाख वोट रहे.

- राष्ट्रपति चुने जाने के लिए कुल वोटों के आधे से एक वोट अधिक हासिल करना ज़रूरी था.

- इस समय राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए कुल वेटेज 10,98,882 है. यानी जीत के लिए उम्‍मीदवार को 5,49,442 वोट हासिल करने थे.


जीवन के ये 37 साल बेमिसाल: अपनी बात-करणीदानसिंह राजपूत


20 जुलाई 1980 से शुरू हुआ सफर 20 जुलाई 2017 तक के 37 सालों में बेमिसाल रहा। वैवाहिक बंधन शब्द इस सफर के लिए जंचता नहीं। यह तो संग संग चलने का एक अनूठा संकल्प था जो संघर्षों में कठिनाईयों में सुख और दु:ख में निरंतर कुछ न कुछ उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। समय अच्छा बुरा दोनों ही प्रकार का आता रहा लेकिन उस पर कुछ कहने के बजाय सीख के रूप में ग्रहण करते हुए आनन्द के साथ कदम दर कदम चलते रहे।

इस साथ चलने की कल्पना नहीं की जा सकती मगर कर्म को महान मान कर चलने का मार्ग तय कर आगे बढते रहे।

मेरी माँ हीरा और पिता रतन ने हीरा रतन के रूप में जो शिक्षा दी थी वह अतुल्रीय थी। उस पर मैं चल रहा था।

विवाह के बाद जब विनीता का संग भी शुरू हुआ तब माँ और पिता ने  माना कि विनीता बहुत समझदार है।

मैं माँ को बहुत समझदार मानता था कि उनकी हर बात में सहजता के साथ परिवार उत्थान झलकता था।

पत्नी विनीता ने अपने तोमर परिवार की सीख के साथ यहां आने के बाद बैंस परिवार की सीख को भी आत्मसात कर लिया। मां को लगने लगा कि विनीता भी बहुत समझदार है। कुशलता भरा हर कदम होता है। 


लोग आजकल कहने लगे हैं' कन्या बचाओ' लेकिन हमारे बैंस परिवार में तो कन्या सदा सर्वदा पूजनीय रही।अपने घर का नाम पुत्री के नाम पर हो तो इससे बड़ा प्रेरणादायी और कुछ नहीं हो सकता।

विनीता को अपने घर की चाह थी। कुछ साल पहले अपने घर का निर्माण हुआ। 

यह अपना घर पुत्री विजयश्री के नाम पर विजयश्री करणी भवन किया गया। सूर्याेदय नगरी में भवन के प्रवेश पर यही नाम विजयश्री करणी भवन लिखा हुआ दिल को हर्षाता है। प्रथम संतान पुत्री ही थी जो अब संसार में नहीं है। वह दिव्य संदेश देकर अनन्त में विलीन हो गयी। मगर उसकी तस्वीर उस पूजा स्थान पर है जहां सभी सुबह शाम पूजा अर्चना करते हैं। इसे भावना कह सकते हैं जो पूरे परिवार में समाई है। 

बड़ा पुत्र योगेन्द्र प्रतापसिंह तो नमन करता है सुबह शाम। विजयश्री ने अपनी तीन साल की आयु में योगेन्द्र का नाम रखा था बंटी। आज भी घर पर यही नाम चल रहा है। मेरे व विनीता के इस बेमिसाल सफर में योगेन्द्र प्रतापसिंह का विवाह रीतिका भाटी से 3 दिसम्बर 2014 में हुआ। बहु रूप में आई रीतिका  बेटी के रूप में आनन्दित है। 

छोटा पुत्र रविप्रतापसिंह सोफ्टवेयर इंजीनियर है। उसका विवाह सोफ्टवेयर इंजीनियर साक्षी अरोड़ा संग हुआ है। पुत्रों के विवाह के बाद मेरे और विनीता के  संग संग उठ रहे कदमों को और अनूठी कल्पनाएं और शक्ति मिली है।

पत्रकारिता और लेखन ईश्वरीय देन है जो सन 1966 से जारी है। यह कर्म करते 52 वर्ष हो गए हैं।

 समय बलवान होता है। समय की महानता को सभी ने स्वीकार किया है,मगर सब कुछ ईश्वर के हाथ में है।

उसी ईश्वर को परम ब्रह्म को नमन।

बुधवार, 19 जुलाई 2017

मात्र बयानों से कैसे हो पाक सफाया-कविता: कविराज मुंशीराम कम्बोज

अमरनाथ के संघ के ऊपर जो हुई गोलाबारी

आंतक की निंदा करते हैं हम सब बारी बारी  

👍 ब्यानवीरो का बयां सुना तो मेरा मन हरसाया।

 मात्र बयानों से कैसे हो पाक का यारो सफाया।

 भारत
मां का सीना छलनी हुआ है कितनी बारी।

 आतंक की  निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

👍सबक सिखाने की चर्चा,हम सुन चुके कई बार,

क्या देश को कुछ बताएंगेये देश के खेवनहार

तोड़ क्यों  नही देते हो तुम शत्रु की नाडी नाडी

आंतक की निंदा करते हैं हम सब बारी बारी।

👍कश्मीर सुलगता देखा हमने, धधका कोना कोना,

दिए ब्यान,कुछ किया क्यों नही,यही है भाई रोना।

भारत बोला सबक सिखाओ,यही है रायशुमारी।

आंतक की निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

अमरनाथ का तीर्थ हो या अन्य कोई शिवाला।

दुश्मन से नही,भारतवासी कोई भी डरने वाला।

पाक हमेशां लेता आया, हमसे राड उधारी।

आतंक की निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

बातों और बयानों से होते देखे बड़े धमाके।

कितने सिर लाये हो भैया,जाना जरा बताके।

हैं हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,भारत की फुलवाड़ी।

आतंक की निंदा करते हैं, हम सब बारी बारी।

मुंशी मेरे मुख मण्डल पे, छाई रही उदासी।

बिना वजह मरते देखे हैं,जब से भारतवासी।

पाकिस्तान की मार मार के,कर दो हालत माडी।

आतंक की निंदा करते हैं, हम सब बारी बारी।

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कविराज मुंशीराम कम्बोज,

गांव मानेवाला,

सूरतगढ़ ,श्रीगंगानगर, राजस्थान।

मो 9783792692,7568915504



गुलाबेवाला में नशामुक्ति कार्यशाला:



श्रीगंगानगर, 18 जुलाई। राजकीय उच्च माध्यमिक  विद्यालय 25एफ गुलाबेवाला मे मंगलवार को जिला पुलिस अधीक्षक श्री हरेन्द्र कुमार के निर्देशानुसार स्वास्थ विभाग के सहयोग से पुलिस थाना केसरीसिहपुर क्षेत्र मे नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला मे छात्र छात्रा व अध्यापक सहित ग्रामीण व जनप्रितनिधी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के मुख्य व्यक्ता डॉ0 रविकान्त गोयल ने जन समुह को सम्बोधित करते कहा कि नशा एक सामाजिक​ बुराई है इससे तन मन और धन तीनों का नाश होता है। नशेड़ी से व्यक्ति के परिवार में हर दिन अशान्ति, झगड़ा​ फसाद और मारपीट रोजमर्रा का हिस्सा होता है। व्यक्ति पशु जैसा नारकीय जीवन जीने को मजबूर होता है। कोई भी व्यक्ति नशेड़ी बनने के लिए नशा नहीं करता परन्तु एक बार भी व्यक्ति नशे की चपेट मे आने पर हमेशा के लिए नशे का गुलाम हो जाता  है। परन्तु दृढ़ इच्छाशक्ति  से नशा छोड़ा जा सकता है। डॉ0 गोयल ने विद्यार्थियों​ व उपस्थित जनसमुह को नशा ना करने व नशा छुड़वाने की सामुहिक शपथ दिलवाई।


कार्यक्रम में समाजसेवी नशामुक्ति उत्प्रेरक श्री बनवारी लाल जी शर्मा ने कहा कि नशा करना बुरी आदत है। वैज्ञानिक कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों के मानस पर यह प्रभाव अंकित किया कि बढते हुए अपराध के पीछे नशे की मुख्य भूमिका होती है। नशा ना करने से समाज का सर्वांगीण विकास होता है।

कार्यक्रम के दौरान जीतराम एसआई पुलिस थाना केसरीसिहपुर ने नशा नही करने के जनजागृति अभियान की सफलता के लिए जनसमुदाय की सहभागिता पर बल दिया । सरपंच श्रीमती कर्मजीतकौर ने भी युवापीढी को नशा करने की सलाह दी।

कार्यक्रम मे कार्यवाहक प्रधानाचार्य श्री संतोष सिह ने कार्यशाला की अभिशंशा की और कहा कि नशा प्रवृति आज एक विश्व समस्या का रुप ले चुकी है। जिसके दुष्परिणाम स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे है। प्रत्येक व्यक्ति, संघ,  गुट, संस्था, आदि को नशे पर काबू पाने हेतु समुह बनाकर गंभीरता से प्रयास करने चाहिये । जिससे मानव को नशे से बचाया जा सके। इस अभियान मे भारी संख्यां में ग्रामीण, अध्यापक, अध्यापिका, छात्र-छात्राओ सहित जसविन्द्रसिंह सरपंच पति,श्री हरेन्द्रसिंह, जसप्रीतसिंह आदि भी मोजूद थे । सफल मंच संचालन वरिष्ठ अध्यापक (पंजाबी)  श्री कृष्णसिंह द्वारा किया गया ।


मंगलवार, 18 जुलाई 2017

भाजपा विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व कांग्रेसी विधायक गंगाजल मील में दोस्ताना व्यवहार जनता हैरान

विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व विधायक गंगाजल मील की कुश्ती बंद:


कासनिया की स्कूली जमीन प्रकरण को हाई कोर्ट में ले जाने वाला मील भादू की कोठी कटलों पर चुप्प:
मील के प्रकरणों पर भादू का मौन: 
भाजपा कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं।  

विशेष रपट- करणीदानसिंह राजपूत

गंगाजल मील ने रामप्रताप कासनिया की स्कूली जमीन का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश किया लेकिन भादू परिवार के कटलों कोठियों के तथ्य खुल जाने के बाद उस पर मौन है और कोई भी कार्यवाही नहीं करने जैसी चर्चाएं आम हैं। रामप्रताप कासनिया परिवार द्वारा संचालित स्कूल जाखड़ावाली में सेम में आ गया। मंडी समिति ने उसके लिए स्थानान्तरण में सूरतगढ़ कस्बे में अपने मंडी क्षेत्र में भूखंड आवंटित करने का निर्णय किया। उस स्थान पर अतिक्रमण होने की वजह से फिर बदलाव चाहा गया। नई धान मंडी व आवासन मंडल कॉलोनी के बीच की कीमती जमीन चिन्हित की गई और नगरपालिका द्वारा कार्यवाही की जाने वाली थी। उस समय स्कूल के 2 लाख रूपयों के बदले में जो जमीन दी जाने वाली थी,उसकी कीमत करीब 2 करोड़ रूपए के लगभग मानी जा रहा थी।
नगरपालिका में इस भूमि को देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद गंगाजल मील ने 1 साल बाद प्रेस वार्ता बुलाई जिसमें कासनिया परिवार पर भूमि लेने के आरोप लगाए। कागजात भी बांटे। पत्रकारों के प्रश्र उठाए जाने पर मील ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रकरण पेश किया जाएगा। मील ने बाद में बताया कि प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
अब मील आरोपों और सवालों के घेरे में इसलिए है कि स्कूल की जमीन जो उस समय लगभग 2 करोड़ की मानी जा रही
थी उसके लिए तो विरोध किया लेकिन भादू परिवार के कोठी कटले जो कई कई करोड़ रूपयों के हैं तथा उनके अनेक तथ्य सामने आ जाने के बाद भी मील कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं?
राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास कर रहे हैं वह सड़क पर बनी होने का आरोप है और ऐसा दिखाई भी देता है। इसके अलावा प्रधानजी बीरबल की कोठी में आसपास की सड़कें शामिल किए जाने के आरोप व नक्से तक छप चुके हैं। मनफूलसिंह भादू के परिवार वाले सिनेमा व आवास का मामला भी आरोपों में घिरा है। इसके भी अनेक प्रमाण सामनें आ चुके हैं।
कासनिया परिवार की स्कूली जमीन के प्रकरण पर बोलने वाले मील साहेब अब कोमा में चले जाने जैसी चुप्पी साध गए हैं।
एक ही वर्ग के दो दिग्गज राजनेताओं में कुछ तो है। न तुम बोलो न मैं बोलूं। इसके पीछे कुछ और भी पक रहा है।
पीलीबंगा में गंगाजल मील कासनिया और भादू में चुनावी घमासान होता है। एक ही वर्ग के तीनों में से कोई एक तो जीतना ही था। कासनिया जीत गए। इसके बाद सूरतगढ़ में घमासान हुआ। मील साहेब जीते विधायक बने। वर्ग की जीत कायम रहनी ही थी। इसके बाद फिर चुनाव हुए और राजेन्द्र भादू विधायक बने। यही वर्ग मुख्य रूप में खड़ा था सो एक तो जीतना ही था। यहां इस वर्ग की आलोचना करना विषय नहीं है। यह वर्ग राजनीति में सूझबूझ से सदा बने रहने के लिए अपने ही वर्ग को पक्ष विपक्ष में रखता रहा है। कोई भी जीते। लोगों को अन्य वर्गों को लगता है कि ये लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं। लेकिन जो सच्च है वो भी सामने है कि मील भादू दोनों चुप्प हैं। 
भादू काल में सामने आए प्रकरणों पर कोई कार्यवाही नहीं हो और आगे और भी प्रकरण हों तो भी कोई कार्यवाही न हो। यह राजनैतिक खेल बड़ी चतुराई से चल रहा है। मील व भादू दो प्रतिद्वंदी नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों एक जोड़ी के रूप में नजर आ रहे हैं। अपनी अपनी संपत्तियों और जमीनों की सुरक्षा का ध्येय साफ झलक रहा है।

 राजेन्द्र भादू ने मील की संपत्तियों निर्माणों आदि पर कोई कार्यवाही शुरू नहीं करवाई है और मील ने राजेन्द्र भादू की संपत्ति व कोठी कटलों जमीनों पर कोई शिकायत या प्रकरण कहीं दर्ज नहीं करवाया है। दोनों की ओर से पहले नूरा कुश्ती चलने के जो संकेत थे अब वे भी खत्म हो गए हैं। नूरा कुश्ती भी बंद हो गई है। अब दिखावटी लड़ाई भी नहीं करेंगे।
यह गौर करने वाले तथ्य हैं कि मील और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भादू व भाजपा के मामले में समझौता जैसी प्रणाली से चल रहे हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील, शहर  ब्लॉक अध्यक्ष,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र गगनदीप आदि किसी ने भी विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के निवास और भादू परिवार के कटलों के प्रकरण सामने आने के बाद कोई मामली विरोध तक दर्ज नहीं करवाया कहीं बयान तक नहीं दिया। 

सत्ता पक्ष भाजपा के विरूद्ध कार्यवाही हो सकने वाले प्रमाण सामग्री मिलने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं,भाजपा के पक्ष में मौन रहते भाजपा के विधायक के विरूद्ध चुप रहते क्या कांग्रेस हवाई बातों से उभर पाएगी? 

कांग्रेसी नेताओं पदाधिकारियों की शक्ति पर भरोसा ही नहीं होगा तब लोग वोट कांग्रेसी प्रत्याशी को क्यों देंगे? कांग्रेसी
 टिकट वाले क्या कह कर वोट मांगेंगे? नेता  ही आवाज नहीं उठाऐंगे तब आम जनता सत्ताधारी पार्टी भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर बैर क्यों मोल लेगी? 
 कांग्रेस को यह तो दिल दिमाग से निकाल ही देना होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की जीत संभव हो पाएगी।
अभी तो किसी भी वार्ड से कांग्रेस की आवाज ही निकलनी शुरू नहीं हुई है। भादू और मील की चुप्पी का एक असर जरूर सामने आ रहा है। भाजपा के अनेक लोग मील से नाराज थे। मील काल पालिका क्षेत्र में पीड़ाएं झेलने वालों को जबसे मालूम हुआ कि भादू तो मील के विरूद्ध कोई कदम ही नहीं उठा रहा और उठाना चाहता भी नहीं। तब लोगों ने कासनिया की कोठी का रास्ता पकड़ लिया । भाजपा के पुराने नए कार्यकर्ताओं को  वहां देखा जा रहा है। भादू के खास खास लोग तक यह मानने लगे हैं और स्वीकारने लगे हैं कि कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 
कांग्रेसी लोग भी मान रहे हैं कि कासनिया के पास लोगों का आना जाना बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है। बात अकेले शहर की नहीं ग्रामीण लोग भी कहने लगे हैं कि भादू काम ही नहीं करता। भादू ने विधायक सेवा केन्द्र खोला जहां भीड़ छोड़, पांच दस कार्यकर्ता ही बड़ी मुश्किल से सारे दिन में पहुंचते हैं। हां कहीं चुनाव में जीत हो जाए तो पटाखे फोडऩे के लिए फोटो खिंचवाने के लिए कार्यकर्ता जरूर पहंच जाते हैं। 
लोगों को कासनिया की ताकत का अहसास होने के कारण भी लोग भादू के बजाय कासनिया को अहमियत दे रहे हैं। 
-------------प्रथम बार  26-10-2014.
अपडेट 18-7-2017.



अपडेट  18-7-2017

विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व विधायक गंगाजल मील की कुश्ती बंद:


कासनिया की स्कूली जमीन प्रकरण को हाई कोर्ट में ले जाने वाला मील भादू की कोठी कटलों पर चुप्प:
मील के प्रकरणों पर भादू का मौन: 
भाजपा कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 

विशेष रपट- करणीदानसिंह राजपूत

गंगाजल मील ने रामप्रताप कासनिया की स्कूली जमीन का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश किया लेकिन भादू परिवार के कटलों कोठियों के तथ्य खुल जाने के बाद उस पर मौन है और कोई भी कार्यवाही नहीं करने जैसी चर्चाएं आम हैं। रामप्रताप कासनिया परिवार द्वारा संचालित स्कूल जाखड़ावाली में सेम में आ गया। मंडी समिति ने उसके लिए स्थानान्तरण में सूरतगढ़ कस्बे में अपने मंडी क्षेत्र में भूखंड आवंटित करने का निर्णय किया। उस स्थान पर अतिक्रमण होने की वजह से फिर बदलाव चाहा गया। नई धान मंडी व आवासन मंडल कॉलोनी के बीच की कीमती जमीन चिन्हित की गई और नगरपालिका द्वारा कार्यवाही की जाने वाली थी। उस समय स्कूल के 2 लाख रूपयों के बदले में जो जमीन दी जाने वाली थी,उसकी कीमत करीब 2 करोड़ रूपए के लगभग मानी जा रहा थी।
नगरपालिका में इस भूमि को देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद गंगाजल मील ने 1 साल बाद प्रेस वार्ता बुलाई जिसमें कासनिया परिवार पर भूमि लेने के आरोप लगाए। कागजात भी बांटे। पत्रकारों के प्रश्र उठाए जाने पर मील ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रकरण पेश किया जाएगा। मील ने बाद में बताया कि प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
अब मील आरोपों और सवालों के घेरे में इसलिए है कि स्कूल की जमीन जो उस समय लगभग 2 करोड़ की मानी जा रही

थी उसके लिए तो विरोध किया लेकिन भादू परिवार के कोठी कटले जो कई कई करोड़ रूपयों के हैं तथा उनके अनेक तथ्य सामने आ जाने के बाद भी मील कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं?
राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास कर रहे हैं वह सड़क पर बनी होने का आरोप है और ऐसा दिखाई भी देता है। इसके अलावा प्रधानजी बीरबल की कोठी में आसपास की सड़कें शामिल किए जाने के आरोप व नक्से तक छप चुके हैं। मनफूलसिंह भादू के परिवार वाले सिनेमा व आवास का मामला भी आरोपों में घिरा है। इसके भी अनेक प्रमाण सामनें आ चुके हैं।
कासनिया परिवार की स्कूली जमीन के प्रकरण पर बोलने वाले मील साहेब अब कोमा में चले जाने जैसी चुप्पी साध गए हैं।
एक ही वर्ग के दो दिग्गज राजनेताओं में कुछ तो है। न तुम बोलो न मैं बोलूं। इसके पीछे कुछ और भी पक रहा है।
पीलीबंगा में गंगाजल मील कासनिया और भादू में चुनावी घमासान होता है। एक ही वर्ग के तीनों में से कोई एक तो जीतना ही था। कासनिया जीत गए। इसके बाद सूरतगढ़ में घमासान हुआ। मील साहेब जीते विधायक बने। वर्ग की जीत कायम रहनी ही थी। इसके बाद फिर चुनाव हुए और राजेन्द्र भादू विधायक बने। यही वर्ग मुख्य रूप में खड़ा था सो एक तो जीतना ही था। यहां इस वर्ग की आलोचना करना विषय नहीं है। यह वर्ग राजनीति में सूझबूझ से सदा बने रहने के लिए अपने ही वर्ग को पक्ष विपक्ष में रखता रहा है। कोई भी जीते। लोगों को अन्य वर्गों को लगता है कि ये लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं। लेकिन जो सच्च है वो भी सामने है कि मील भादू दोनों चुप्प हैं।
भालू कालू  में सामने आए प्रकरणों पर कोई कार्यवाही नहीं हो और आगे और भी प्रकरण हों तो भी कोई कार्यवाही न हो। यह राजनैतिक खेल बड़ी चतुराई से चल रहा है। मील व भादू दो प्रतिद्वंदी नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों एक जोड़ी के रूप में नजर आ रहे हैं। अपनी अपनी संपत्तियों और जमीनों की सुरक्षा का ध्येय साफ झलक रहा है।

 राजेन्द्र भादू ने मील की संपत्तियों निर्माणों आदि पर कोई कार्यवाही शुरू नहीं करवाई है और मील ने राजेन्द्र भादू की संपत्ति व कोठी कटलों जमीनों पर कोई शिकायत या प्रकरण कहीं दर्ज नहीं करवाया है। दोनों की ओर से पहले नूरा कुश्ती चलने के जो संकेत थे अब वे भी खत्म हो गए हैं। नूरा कुश्ती भी बंद हो गई है। अब दिखावटी लड़ाई भी नहीं करेंगे।
यह गौर करने वाले तथ्य हैं कि मील और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भादू व भाजपा के मामले में समझौता जैसी प्रणाली से चल रहे हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील, शहर  ब्लॉक अध्यक्ष,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र गगनदीप आदि किसी ने भी विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के निवास और भादू परिवार के कटलों के प्रकरण सामने आने के बाद कोई मामली विरोध तक दर्ज नहीं करवाया कहीं बयान तक नहीं दिया। 

सत्ता पक्ष भाजपा के विरूद्ध कार्यवाही हो सकने वाले प्रमाण सामग्री मिलने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं,भाजपा के पक्ष में मौन रहते भाजपा के विधायक के विरूद्ध चुप रहते क्या कांग्रेस हवाई बातों से उभर पाएगी? 

कांग्रेसी नेताओं पदाधिकारियों की शक्ति पर भरोसा ही नहीं होगा तब लोग वोट कांग्रेसी प्रत्याशी को क्यों देंगे? कांग्रेसी
 टिकट वाले क्या कह कर वोट मांगेंगे? नेता  ही आवाज नहीं उठाऐंगे तब आम जनता सत्ताधारी पार्टी भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर बैर क्यों मोल लेगी? 
 कांग्रेस को यह तो दिल दिमाग से निकाल ही देना होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की जीत संभव हो पाएगी।
अभी तो किसी भी वार्ड से कांग्रेस की आवाज ही निकलनी शुरू नहीं हुई है। भादू और मील की चुप्पी का एक असर जरूर सामने आ रहा है। भाजपा के अनेक लोग मील से नारा
ज थे। मील काल पालिका क्षेत्र में पीड़ाएं झेलने वालों को जबसे मालूम हुआ कि भादू तो मील के विरूद्ध कोई कदम ही नहीं उठा रहा और उठाना चाहता भी नहीं। तब लोगों ने कासनिया की कोठी का रास्ता पकड़ लिया । भाजपा के पुराने नए कार्यकर्ताओं को  वहां देखा जा रहा है। भादू के खास खास लोग तक यह मानने लगे हैं और स्वीकारने लगे हैं कि कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 
कांग्रेसी लोग भी मान रहे हैं कि कासनिया के पास लोगों का आना जाना बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है। बात अकेले शहर की नहीं ग्रामीण लोग भी कहने लगे हैं कि भादू काम ही नहीं करता। भादू ने विधायक सेवा केन्द्र खोला जहां भीड़ छोड़, पांच दस कार्यकर्ता ही बड़ी मुश्किल से सारे दिन में पहुंचते हैं। हां कहीं चुनाव में जीत हो जाए तो पटाखे फोडऩे के लिए फोटो खिंचवाने के लिए कार्यकर्ता जरूर पहंच जाते हैं। 
लोगों को कासनिया की ताकत का अहसास होने के कारण भी लोग भादू के बजाय कासनिया को अहमियत दे रहे हैं। 
प्रथम 26-10-2014.
अपडेट  18-7-2017.

हम चाहती थीं, पंख लगा कर,आकाश में उडऩा,तुमने छीन लिया, हम से संसार


मैं बेटी हूं ,मुझे भी जीने का अधिकार दो - मंजु रांगेरा

देव भूमि भारत में कन्याओं की भ्रूण में हत्या होना चिंताजनक

सेठ राम दयाल राठी राजकीय उ.मा. विद्यालय में गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन

करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 13 अगस्त। सेठ राम दयाल राठी राजकीय उ.मा. विद्यालय में गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से  भ्रूण में हत्या रोकने पर विचार गोष्ठी का आयेजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रधानाचार्य पृथ्वीराज धांधल ने की। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने खुले रूप में विचार रखते हुए हत्या के अपराध में कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।

    छात्र देवेन्द्र ने अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की। अजय ने एक कविता सुनाई जिसके बोल थे, मत मारो कन्या को। सुनील ने कन्या हत्या को रोकने पर सुझाव दिए। दीपचंद ने एक कविता सुनाई, नन्ही बेटी को जीवन का वरदान दो। छात्र पूनम पूनिया ने देव भूमि भारत में कन्याओं की हत्या पर चिंता प्रगट की। छात्र हरप्रीत सिंह ने अग्रेजी कविता के माध्यम से कन्या को बचाने का आह्वान किया। 



छात्र बबलू ने  एक कवित सुनाई जो कन्या के बोल पर थी। जिसके बोल थे- हम चाहती थीं, पंख लगा कर,आकाश में उडऩा,तुमने छीन लिया, हमसे संसार।



    विनय वधवा ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या का एक कारण दहेज की कुप्रथा है, मगर कोई बड़ी समस्या नहीं है कि, समाज चाहे और वह खत्म ना हो सके। व्याख्याता जयसिंह शेखावत ने कहा कि सबसे अधिक भ्रूण हत्याएं भारत में हो रही है, जबकि कन्या की मानसिक शक्ति लडक़े के मुकाबले में कई गुना अधिक होती है।

    व्याख्याता मंजु रांगेरा ने कविता के माधम से कहा कि, मैं बेटी हूं ,मुझे भी जीने का अधिकार दो। समिति के सदस्य हेमंत चांडक ने कहा कि जिस घर में बेटी ना हो उस घर का पानी तक पीना पाप समझा जाता है। मुरलीधर पारीक ने छात्रों को कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संकल्प दिलवाया। समिति के अध्यक्ष परस राम भाटिया ने कन्या भ्रूण हत्या रोक पर हो रहे कार्य का विवरण दिया। व्याख्याता प्रवीण भाटिया ने इस कार्यक्रम का संयोजन किया।



प्रथम प्रकाशन 13-8-2011. कार्यक्रम 11-8-2011

अपडेट 18-7-2017

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रविवार, 16 जुलाई 2017

तुम लिपटकर मेरे तन से,चढ़ जाती शिखर- कविता


तुम लता होती और मैं हरियाला पेड़

तुम लिपटकर मेरे तन से,चढ़ जाती शिखर पर,

मैं कोशिश कर तुम्हें दिखलाता नीलगगन

 और दूर की पर्वत श्रृंखला।

तुम्हारे मद मस्त पुष्पों को छूने का

मेरा मन करता।

मेरे छूने की अभिलाषा

तुम्हारे लोच से रह जाती अपूर्ण।

मगर,मैं तुम्हारे पुष्पों की 

मधु गंध को खींच लेता

श्वास से भीतर अंतर मन तक।

तुम सावन की बादली सी

उड़ती निकल जाती।

मगर मैं तृप्त हो जाता

मोती सरीखी बूंदों से,

यह भीगना और सुगंध से

भीतर तक गद गद होना

मेरा तुम्हारा मिलन ही कहलाता।

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करणीदानसिंह राजपूत,

 पत्रकार,सूरतगढ़।

9414381356.

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शनिवार, 15 जुलाई 2017

सीता के मन भाए गौरी पुत्र गणेश-गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा




प्रेरणा नई दिशा:सड़कें साफ और शुद्ध पर्यावरण


- करणीदानसिंह राजपूत -

 गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा ताकि  पर्यावरण रह सके शुद्ध और सभी को मिलें साफ सुथरे मार्ग और शुद्ध वातावरण-

गणेश छपे निमंत्रण पत्र ही नहीं कोई भी निमंत्रण पत्र सड़कों पर न फेंके। उनको विभिन्न रूप देकर घर को सजाएं।
     बीकानेर के जूनागढ़ के सामने मुख्य डाक घर के पीछे पुरबिया राजपूत मोहल्ले में रहने वाली सेवा निवृत अध्यापिका सीता देवी जनवार को पिछले कुछ वर्षों से एक अजीब लगन लगी है। वे ब्याह शादियों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों को एकत्रित करती हैं और उनको कार्ड शीट पर चिपका कर सजा कर नयनाभिराम नया रूप प्रदान कर देती हंै। कितनी ही फाईलें बनाई जा चुकी हैं जिनमें कितने ही रूप रंग के गणेश सजाए हुए हैं। दीवारों पर टांगने वाली झालरें भी आकर्षक लगती हैं।
सीता देवी इसे कला का ही एक रूप मानती हैं, जो आत्म सुख प्रदान करता है व अन्य लोगों को साफ सुथरे जीवन की प्रेरणा देता है।
शादियों व अन्य समारोहों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों पर गणेश की तस्वीर प्राय: होती है। लोग कुछ दिन तक इन निमंत्रण पत्रों को संभाल कर रखते हैं और बाद में सड़कों पर या कचरे में फेंक देते हैं।
सीता देवी के सामने निमंत्रण पत्र सड़क पर फेंके जाने की एक घटना हुई। उन्होंने जिस खिड़की से निमंत्रण फेंका गया था उधर देखा लेकिन वह बंद हो चुकी थी। उन्होंने निमंत्रण पत्र उठाया और अपने मस्तक से लगाया तथा अपने घर ले आई। उसको आदर के साथ रखा। यह आध्यात्मिक पक्ष था। प्रथम पूज्य गणेश छपे कार्ड को फेंका क्यों जाए?
सीतादेवी ने विचार किया कि गणेश की तस्वीर को सजाया जाए और शीट पर नाना रूप दिए जाएं। बस। जब यह विचार आया तब वे शिक्षिका थी और जूनून में लग गई समाज को नई दिशा देने में। ज्यों ज्यों यह कार्य आगे बढ़ता गया त्यों त्यों मालूम पड़ता गया कि गणेश छपे कार्डों ïïको सड़कों पर फेंके जाने से बचाने के पीछे तो अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
सीतादेवी का अनुभव बताता है कि अध्यापिका सेवानिवृति के बाद के जीवन में गणेश के कार्ड एकत्रित करने में टहलने से और सजाने के कार्य में लगे रहने से उनका स्वास्थ्य ठीक ठाक है। किसी प्रकार की चिंता नहीं। मन में विचार आते हैं तो गणेश छपे कार्डों को सड़कों से उठाने के आते हैं।


देश भर में स्वच्छता का अभियान चल रहा है। उसमें इसका लाभ मिल सकता है कि लोग किसी भी प्रकार का निमंत्रण पत्र सड़कों पर नहीं फेंके और उनसे सजावट की वस्तुएं बनाएं।
सीता देवी का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को प्रेरित किया जाए तो वे कितनी ही प्रकार की सामग्री बना सकेंगे।
सीतादेवी ने पेंसिल तराशने से बनते छिलकों से और चूडिय़ों से भी गणेश की तस्वीरें बनाकर घर में सजा रखी हैं।


 

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

सूरतगढ़ में गोयल कॉम्लेक्स दुकानों का निर्माण अवैध: पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा का नाम घपले में क्यों आने लगा?


पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा के नाम एक दुकान के तीन हिस्सों में से एक रजिस्ट्र्ड हिस्सा होने से ही -इसका अवैध निर्माण सीज नहीं हुआ? जबकि  करणी प्रेस इंडिया में निर्माण के दौरान ही समाचार छप गये थे। अब सारा निर्माण हो चुका है तथा सभी में शो रूम वह दुकानें चल रही हैं।

- करणीदानसिंह राजपूत -


सूरतगढ़ 4 अक्टूबर 2016.



अपडेट 14 जुलाई 2017.



गोयल कॉम्लेक्स दुकानों के अवैध निर्माण में पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा का नाम क्यों आने लगा है? मुख्य बाजार में इस निर्माण में एक



नहीं कई  घपले हैं और सड़क की करोड़ों रूपए की जमीन हथिया ली जाने के बाद अब फुटपाथ भी नहीं छोड़ा गया । इस घोटाले में  इसका निर्माण नहीं रोका जाना और निर्माण को सीज नहीं किया जाना एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। इस निर्माण को काजल छाबड़ा की अध्यक्षता में इस तरह से बेरोकटोक बनवाया जा रहा  मानों काजल छाबड़ा का खुद का कोई हिस्सा हो? ( यह सच है)जो भी घपला है वह सामने तो आकर रहेगा। यह घपला जिस तरह से किया गया है उससे तो पालिकाध्यक्ष का पद भी खतरे में पड़ सकता है और पालिकाध्यक्ष सस्पैंड तक हो सकती है। आखिर पालिकाध्यक्ष की कोई जिम्मेदारी होती है।

इस जगह का एक पट्टा यहां पर एक बार फिर दे रहे हैं। यह पहले कई बार छापा जा चुका है। महाजन डेरे के नाम से यह भूखंड था।

इसमें से आधा हिस्सा श्रीमती गोयल व आधा  डागा ने खरीदा। गोयल व डागा दोनों सड़क की तरफ करीब 10 फुट आगे बढ़ गए। इनको सड़क की भूमि खांचा भूमि के नाम से भी किसने दी? सड़क की जमीन तो किसी भी रूप में दी ही नहीं जा सकती। अब देखिए कि जहां इनकी आगे बढ़ी हुई दुकानें थी उसके आगे पुुटपाथ पर पेडिय़ां बना दी गई है। मतलब की सड़क को और अधिक कब्जे में ले लिया गया है। पालिकाध्यक्ष का इसमें हिस्सा है तभी तो पालिका की ओर से सीज नहीं किया गया।

 

श्रीमती काजल छाबड़ा पर पद से सस्पेंड होने तथा मुकदमे का खतरा इस अवैध निर्माण को लेकर पैदा हो गया है कोई भी व्यक्ति या दल इस अवैध निर्माण को लेकर कार्यवाही कर सकता है।

 राजनैतिक दलों के मुखिया कार्यकर्ता, वह लोग जो आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, वह लोग तथा संगठन जो अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर प्रशासनिक कार्यालयों के आगे धरणा व प्रदर्शन करते हैं उन सबके चेहरे अवैध निर्माणों पर सीधी कार्यवाही नहीं करने से बेनकाब हो रहे हैं । मुख्य मार्गों पर होते अवैध निर्माण प्रभावशाली लोगों के निर्माण राजनीतिक दलों के मुखिया व कार्यकर्ताओं को दिखाई नहीं पड़ते हैं तो यह मानकर चलना चाहिए कि वह भी भ्रष्टाचार के बढ़ावे में कहीं ना कहीं शामिल है या शह दे रहे हैं।

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नाथवाला में नशा मुक्ति कार्यशाला

 पुलिस विभाग के सहयोग से जिला स्तर पर चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान के अन्तर्गत नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला का आयोजन बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला श्री गंगानगर में पुलिस थाना सदर द्वारा पुलिस चौकी रिको एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालय 2 एम एल के माध्यम से किया गया। 


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ रविकांत गोयल ने उपस्थित विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशे का सेवन मानव के लिए घातक होता है, नशा व्यक्ति की अच्छाईयों को मिटा देता है तथा बुराइयों को पैदा कर देता है। नशे का निरंतर सेवन व्यक्ति को रोगी, असहाय, लाचार तथा कंगाल बना देता है। डॉ रविकांत गोयल ने नशीले पदार्थों के दोषों - दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए नशें से बचने, बचाने , नशा छोडने व छुडवाने के सरल वैज्ञानिक उपायों की जानकरी देते हुए उपस्थित जन सभा को नशा मुक्त जीवन जीने का आह्वान किया ।


इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता इन्द्र मोहन सिंह जुनेजा ने छात्र छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के जीवन से धैर्य , शांति, व्यक्तित्व, उन्नति ,समृद्धि को समाप्त कर देता है। जुनेजा ने पुलिस द्वारा चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान की जानकारी देते हुए इसके महत्व व सफलताओं पर प्रकाश डाला। सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह ने विद्यार्थियों को उदाहरणों के माध्यम से नशे से दूर रहने हेतु प्रेरित किया । 


पुलिस थाना सदर के थानाधिकारी कुलदीप सिंह वालिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशे की एक लत ही व्यक्ति के जीवन को दुश्वार बना देती है , नशा करने वाला व्यक्ति परिवार, समाज और व्यवस्था पर बोझ बन जाता है, जिसका नुकसान अनेकों को उठाना पडता है । 


 इस अवसर पर बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला के प्रधानाध्यापक भूपेन्द्र सिंह सोनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नशे का सेवन व्यक्ति की सोच को नकारात्मक बना देता है, नशा करने वाला व्यक्ति अन्य दुख तो भोगता ही है, साथ ही जीवन में पिछड़ जाता है। नशे से बचना ही व्यक्ति के जीवन के लिए उत्तम है । 


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महन्त बाबा शुभनाथ जी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन अनमोल है, यह जीवन व्यर्थ ही नशे, कुरीतियों व अन्य बुराइयों में न गवा कर अपने कर्तव्य का पालन करते हुए, सदकर्म व परहित करते हुए समाज में व्याप्त नशे व अन्य समस्याओं को मिटाने में अपना हरसंभव सहयोग देना चाहिए । 


कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती दर्शना देवी ने अपने विचार  व्यक्त करते हुए कहा कि नशे का प्रकोप महिला वर्ग को ही मारपीट, गाली-गलोच, अपमान, आर्थिक तंगी व परिवार के बिखरने के रूप में झेलना पडता है। अतः महिलाओं को आगे आकर नशे को मिटा देना चाहिये, जिससे पूरा समाज लाभान्वित हो सके। कार्यक्रम में राजकिय माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती अनीता चड्ढाअपने विचार व्यक्त किये। पुलिस चौकी रिको के प्रभारी बलवंत राम ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने हेतु पेरित किया। कार्यक्रम में बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला व राजकीय माध्यमिक विद्यालय 2 एम एल के विद्यार्थियों, अध्यापक गणों व ग्रामवासियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी ने जीवन भर नशा न करने की शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम का मंच संचालन सीता राम गक्खड व.अ. व दिनेश वर्मा ने किया। डॉ गोयल द्वारा नशे के आदी रोगियों की मोके पर ही जांच कर परामर्श प्रदान किया गया। 


मंगलवार, 11 जुलाई 2017

आय से अधिक संपत्ति: 2 मामले: एसीबी कोर्ट से सालों बाद सजा

- करणीदान सिंह राजपूत  -

नगरपालिका बिजली बोर्ड पुलिस और राजस्व विभाग के सर्वाधिक मामले रिश्वत लेते आय से अधिक संपत्ति के दर्ज होते हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की  अदालत के दो फैसलों से रिश्वतखोरों को अकल आ जानी चाहिए कि सालों बाद ढलती उम्र में भी कठोर सजा भुगतनी पड़ जाती है। फर्जी परीक्षा, फर्जी डिग्री, फर्जी प्रमाण पत्र के मामले भी सालों बाद जेल में पहुंचा सकते हैं।


पढ़ें दो फैसले।


कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत ने आज 11जुलाई 2017 को एक फैसले में आय से अधिक सम्पत्ति रखने के 25 साल पुराने मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता को पांच साल के कठोर कारावास ओर 20 लाख रूपए जुर्माने से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक अहसान अहमद ने बताया की आरोपी मोहनदास मरचुनिया 1992 में नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत था। जिसने अपने कार्यकाल के दौरान आय से अधिक संपत्ति इकठ्ठी कर ली थी। जिसपर एसीबी ने कार्रवाही की थी। कोर्ट में आरोपी के खिलाफ केस चल रहा था। वहीं कोर्ट ने सजा ओर जुर्माने के साथ आरोपी की संपत्ति कुर्क कर करोड़ों रूपए वसुलने के भी आदेश दिए है। विशिष्ट लोक अभियोजक का कहना है की ये राजस्थान का पहला मामला है जिसमें कोर्ट ने करोड़ों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए हैं। मोहन दास मरचूनिया की उम्र 82 साल है  व 25 साल पुराने मामले में आज 11 जुलाई 2017 को फैसला आया है जिसके बाद उसे अब बुढ़ापे में जेल की हवा खानी पड़ेगी। 

विशिष्ट लोक अभियोजक एहसान अहमद खान ने बताया कि मामला साल 1992 का है, जब आरोपी मोहनदास मरचुनिया नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर तैनात था। उस दौरान एसीबी ने आय से 23 लाख रुपए अधिक पाए जाने पर केस दर्ज किया था। 

 अदालत ने 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी की संपति से चक्रवृद्धि ब्याज सहित तकरीबन 80 लाख रुपए की राशि वसूलने के भी आदेश दिए हैं।

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इससे पहले 6-6-2017 को भी हुआ एक फैसला: अधीक्षण अभियंता को हु सजा


कोटा की एसीबी कोर्ट ने मंगलवार 

6- 6-2017 को 18 साल पुराने आय से अधिक सम्पति रखने के मामले में फैसला सुनाते हुए विद्युत विभाग के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता को 4 साल कैद की सजा सुनाई  व साथ ही 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया। मामला सन 1999 का था जब आरोपी आंनदी लाल माथुर ने बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर रहते हुए इन्द्रसिंह नाम के ठेकेदार से 3 हजार रूपए  कमीशन के रूप में रिश्वत ली थी। एसीबी ने माथुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद घर पर दबिश के दौरान एसीबी को आय से अधिक सम्पति भी मिली थी।जिसके बाद से मामला कोर्ट में विचाराधीन था अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने आय से अधिक सम्पति मामले 4 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई  और 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया । यहीं नहीं कोर्ट ने चल अचल संपति 11 लाख 96 हजार 459 रूपए भी जमा कराने के आदेश दिए।

आरोपी आनंदी लाल को सजा सुनाएं जाने के बाद जेल जाया जा रहा था तब वे लड़खड़ाते हुए पुलिस वाहन में बैठे।  रिश्वत के मामले में पूर्व में हो चुके हैं दोषमुक्त सरकारी वकील अहसान अहमद ने बताया कि 1999 में रिश्वत के मामले में एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट ने आरोपी आनंदी लाल माथुर को रिश्वत लेने के आरोप में दोषमुक्त कर दिया था लेकिन 18 साल तक कोर्ट में आय से अधिक सम्पति रखने का मामला चला, जिसमें कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।

भादू परिवार के कटलों कोठियों भूखंडों का राज? विधायक राजेन्द्र भादू निवास सड़क पर होने का आरोप:अपडेट

 पहले यह रिपोर्ट 10-8-2014 को दी गई थी।
 अपडेट 8-12-2015.
अपडेट 15-6-2016.
अपडेट 19-7-2016.
अपडेट 24-11-2016
अपडेट 6-5-2017.
अपडेट 11-7-2017.


विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत


गंगाजल मील,पृथ्वीराज मील व बनवारीलाल मेघवाल तो नहीं बोले और भादू पर जबानी आरोप लगा कर चुप हो गए।


पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शिकायत की और उसके बाद अभी तक सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की। 

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माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र जी मोदी ने काले धन व भ्रष्टाचार पर पर रोक लगाने व कालाबाजायिों भ्रष्टाचारियों को दंडित करने की घोषणा की है। बेनामी और नियम विरूद्ध प्राप्त या कब्जेशुदा जमीनों पर भी कार्यवाही करने की घोषणा है।
भादू परिवार की इन संपत्तियों का जो विवरण उपलब्ध है वह सामने हैं।
सवाल केवल इतना है कि चाहे जो कानून हो,चाहे सशक्त लोकपाल बना दिया जाए जाँच कार्यवाही तो तभी शुरू होगी जब कोई शिकायत करेगा।
भाजपा के विरूद्ध कांग्रेस है। कांग्रेस बसपा माकपा आप जमींदारा सभी खामोश हैं।


सोमवार, 10 जुलाई 2017

आदमी हो तो सोचो: किसकी गलती है ओर सजा कौन भुगत रहा है: पशु मुकद्दमा करते तो क्या होता

 खुली सड़कों पर ही बची है जगह- फोटो करणीदानसिंह राजपूत

खुली सड़कों पर ही बची है जगह- फोटो करणीदानसिंह राजपूत

जरा बचके : कोई गौ वंश चपेट में आ गया तो लेने के देने देने पड़ जाएंगे- आदमी भी मौत के मुंह में जा सकता  है- राजपूत

सावधानी से चलो-करणीदानसिंह राजपूत

आदमी हो तो सोचो: किसकी गलती है और सजा कौन भुगत रहा है: पशु मुकद्दमा करते तो क्या होता?

गौ वंश का सड़कों पर आराम : ना जाने कब हो जाए दुर्घटना : दुर्घटना पर हो जाती है भीड़: पहले कोई करता नहीं उपाय
नगरपालिका प्रशासन की ड्यूटी में आता है कि वे इन असहाय गौ वंश की सुरक्षा करें और किसी स्थान पर रखें
इनको आवारा पशु भी क्यों कहा जाता है? ना किसी को छेड़ा ना कोई आवारागर्दी की, उल्टे इनके चारागाह और गुवाड़ पर तो आदमी ने कब्जे कर लिए।
करणीदानसिंह राजपूत
 11~10~2014
अपडेट 10-7-2017.
शहर में असहाय छोड़ा हुआ गौ वंश रात को सड़कों को आराम दायक मानता हुआ, उस पर विचरण करता है, खड़ा रहता है और सोता है।

 गौ वशं तो आराम करता है मगर उनके इस तरह से सड़कों के बीच में आराम करने और टहलने से वाहन चालकों की नींद हराम रहती है। ना जाने कब कोई गौ वंश चपेट में आ जाए या उसकी चपेट में पैदल चलता या वाहन चलाता नआदमी आ जाए,और लेने के देने पड़ जाए।

गौ वंश के चोट लग जाए तो उन हालातों में पुलिस मामलों से बचना कठिन होता है और भीड़ जो ना करे वो थोड़ा। आदमी की जान जाना वाहन का क्षतिग्रस्त हो जाना भी संभव। ऐसा हो भी रहा है।



यहां पर सवाल यह भी पैदा होता है कि आखिर गो वंश कहां जाए? ग्रामों में चारागाह नहीं रहे। जहां थे वहां प्रभावशाली लोगों ने खुद के अतिक्रमण करवा लिये और सांझे में बड़े बड़े नेताओं के परिवारों के भी कब्जे करवा दिए। वहां पर चरने की कोई जगह नहीं रही। खेती के लिए और बढ़ते शहरों के लिए जमीनें बिकती रहीं। शहर में भी गुवाड़ नहीं रहे। 

गो वंश को खासकर बैल को नाकारा मान कर खिलाना पिलाना बंद करके शहर में ला कर छोडऩा शुरू कर दिया 
गया। इन गौ वंश को शहर में भी जगह नहीं मिलती। तो ये सड़क को खुली पाकर पसर जाते हैं। 

शिक्षित लोग, प्रशासन आदि इन गौ वंश को आवारा कहते हैं। 

सवाल यह पैदा होता है कि आवारा कैसे हुए? इन्होंने तो किसी को छेड़ा नहीं कोई आवारागर्दी की नहीं। इनको तो लोगों ने ही असहाय हाल में छोड़ दिया। इनके लिए शासन प्रशासन ने क्या किया है? 

रविवार, 9 जुलाई 2017

वसुंधरा का राजस्थान में 2018 के चुनाव का नारा: होगी नैया पार!



राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले साल है। भाजपा ने नया नारा दिया है, हर बूथ भाजपा को, हर वोट भाजपा का। साथ ही तीन सी के साथ एक सी और जोड़ा है। इसका मतलब है कांग्रेस को हटाना। 

जयपुर में इंद्रलोक सभागार में  भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति पर विचार हुआ। दिनभर चले इस कार्यक्रम में मुख्य फोकस कांग्रेस मुक्त राजस्थान रहा। समापन सत्र में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि प्रदेश में तीन ‘सी’ के साथ काम करके चौथे ‘सी’ यानि काँग्रेस को हटाना है। ये तीन ‘‘सी’’ है कनेक्शन (यानि आपसी जुड़ाव), को-ऑपरेशन (यानि सहयोग) और कनवेन्स (यानि समझाईश) यही मूल मंत्र है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आम जन तक पहुंचने का आह्वान किया। राजे ने इस मौके पर ‘हर बूथ भाजपा का, हर वोट भाजपा का नारा दिया। 

इससे पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि जनहित के लिए काम करने वाली सरकार जनसाधारण के दिल में जगह बना चुकी है और सभी को यह स्वीकार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुप्रचार को सुप्रचार में बदलना ही भाजपा कार्यकर्ता का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर दुष्प्रचार का आरोप लगाते इन्हें साबित करने की चुनौति दी।  भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि विपक्षी नेताविहीन, मुद्दाविहीन एवं दिशाविहीन है। केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का जनता में सुप्रचार से मुद्दाविहीन व दिशाविहीन विपक्षी जीरो पर आ जाएगा।


शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

फर्जी प्रमाणपत्र से प्राप्त नौकरी कानून की नजरों में वैध नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार   6-7-2017 को दिए फैसले में कहा है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण लेकर ली गई सरकारी नौकरी या दाखिले को कानून की नजरों में वैध नहीं ठहराया जा सकता। 

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। इसमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से नौकरी कर रहा है और बाद में उसका प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो उसे सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है। 

महाराष्ट्र में जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मी का जाति प्रमाणपत्र अवैध पाया गया, तो उसकी सरकारी नौकरी चली जाएगी। चाहे उसने 20 साल की सेवा क्यों न की हो। उसके अवैध प्रमाणपत्र पर शिक्षा और डिग्री भी रद्द हो जाएगी।

( टिप्पणी-फर्जीवाड़ा किसी भी स्तर का हो और चाहे कितने भी साल बीत जाए मगर जब भी पकड़ा जाता है तब नौकरी जाती है और फर्जीवाड़ा मुकदमे में जेल मिलती है अक्सर लोग फर्जीवाड़ा करते समय यही सोचते हैं कि किसी को भी मालूम नहीं पड़ेगा और वह नौकरी करते जाते हैं। बचने के लिए नाम बदल कर दूसरा नाम धारण कर लेते हैं लेकिन यह कटु सत्य है कि 20 -25 साल बाद भी फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता है।चाहे नौकरी करने वाला ऊंचे पद पर बैठ गया हो चाहे एसडीएम बन जाए चाहे कलेक्टर बन जाए चाहे पुलिस का अधिकारी बन जाए। चाहे नाम बदल ले।वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता।)


आनंदपाल की पत्नी ने एनकाउंटर फर्जी होने के आरोप में FIR दर्ज करने का आवेदन थाने में दिया

- करणीदानसिंह राजपूत-

 आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर में हत्या किए जाने के आरोप में उस- करणीदानसिंह राजपूत-

 आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर में हत्या किए जाने के आरोप में उसकी पत्नी ने राजस्थान और हरियाणा पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध रतनगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्द करने का आवेदन पत्र दिया है। उसमें आरोप लगाया गया है कि आनंदपाल सिंह के सरेंडर किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई। उसे राजनीतिक कुचक्र का शिकार बनाया गया।

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम लिखे गए हैं तथा यह लिखा गया है कि अनुसंधान में जिन राजनीतिज्ञों के नाम हैं उन्हें भी अपराधियों में जोड़ दिया जाए यह आवेदन पत्र 6 जुलाई को पुलिस थाने में दिया गया।की पत्नी ने राजस्थान और हरियाणा पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध रतनगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्द करने का आवेदन पत्र दिया है। उसमें आरोप लगाया गया है कि आनंदपाल सिंह के सरेंडर किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई। उसे राजनीतिक कुचक्र का शिकार बनाया गया।

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम लिखे गए हैं तथा यह लिखा गया है कि अनुसंधान में जिन राजनीतिज्ञों के नाम हैं उन्हें भी अपराधियों में जोड़ दिया जाए।यह आवेदन पत्र 6 जुलाई को पुलिस थाने में दिया गया।



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