सोमवार, 31 जुलाई 2017

मोदी सरकार द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के विवरण तैयार करने के निर्देश:15 अगस्त बाद कार्यवाही:

नरेंद्र मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर से सख्त हो गई है। मोदी सरकार ने सर्तकता विभाग को अधिकारियों के डोजियर ( व्यक्ति गत आचरण विवरण) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ 15 अगस्त के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ये निर्देश सभी मंत्रायलयों के विजलेंस डिपार्टमेंट्स को दे दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के जुड़े दस्तावेज तैयार कर लें। बताया जा रहा है कि सरकार के निर्देशों पर विजिलेंस अधिकारियों ने अपने विभागों को कहा है कि वे अपनी 5 अगस्त तक पूरी कर लें, ताकि कार्रवाई में पूरा समय मिल सके।


ये डोजियर अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, जांच रिपोर्ट, आचरण व अन्य तथ्यों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे​। साथ ही इस तथ्य का  ध्यान रखा जाएगा कि उन पर कोई बड़ा या मामूली जुर्माना तो नहीं लगा है।



रविवार, 30 जुलाई 2017

सत्ताच्युत राजनेताओं को पढऩी चाहिए एक गधे की आत्मकथा:


कामधाम है नहीं तो ठाले बैठे मशहूर लेखक कृश्रचन्द्र की यह किताब ही पढ़लें:

व्यंग्य- करणीदानसिंह राजपूत -


एक गधे की आत्मकथा उर्दू के लेखक कृश्रचन्द्र ने 1968 के आसपास लिखी थी। यह किताब राजनीति पर तगड़ा व्यंग था। किताब बहुत चर्चित हुई। उस समय चारों ओर कांग्रेस का राज था। राजनेताओं ने छिप छिप कर भी पढ़ी। जो भी पढ़ता उसे यह लगता कि किताब तो उसी पर ही लिखी गई है। हर जगह किताब के चर्चे लोगों का ध्यान आकृषित करते। किताब के हाथों हाथ बिकने के कारण कई संस्करण छपे। इसका हिन्दी संस्करण लोगों को बहुत भाया। बाद में इसके कई भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हुए। इस किताब का शीर्षक एक गधे की आत्मकथा आज भी प्रसिद्धि पर है। पुस्तक का वृतांत आज भी राजनेताओं पर सटीक बैठता है। आज भी सटीक बैठने का एक महत्वपूर्ण कारण है कि इतने सालों बाद भी हमारे राजनेता और राजनैतिक दल अपने आप को बदल नहीं पाए। सत्ता में होते हैं तब सत्ता को कायम रखने में ही सोचते हैं और उसी सोच के अनुरूप कार्य करते हैं। सत्ता विहीन होते हैं तब केवल सत्ता प्राप्ति की ही सोचते हैं। दोनों काल में जनता के प्रति कोई वफादारी नहीं होती। इसी कारण सारी योजनाएं धरी रह जाती है और उन पर लगाया गया करोड़ों रूपया व्यर्थ हो जाता है,या योजना का कार्य इतना विलंब ले लेता है कि उसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता।

इस किताब का महत्व आज भी कायम है  इसलिए कह रहा हूं कि सत्ता विहीन राजनेताओं को और उन दलों के कार्यकताओं को इसे पढऩा चाहिए। सत्ता में होते हैं तब समय नहीं होता इसलिए भी यह सलाह है कि सत्ता से बाहर होने पर समय ही समय है।

यह सोच कर भी पढ सकते हैं कि वे आदमी हैं और सत्ताधरी को पढ़ रहे हैं।



पहली बार लिखा गया 24-10-2016.

अपडेट 30-7- 2017.










शनिवार, 29 जुलाई 2017

दुकानों मकानों के आगे पट्टे से अधिक भूमि पर निर्माण अतिक्रमण हटाने ही होंगे

- करणी दान सिंह राजपूत -

दुकानों मकानों के आगे या साइड में पट्टे से अधिक भूमि पर बनी पेड़ियां चबूतरे स्लोप अतिक्रमण ही हैं। फुटपाथों​ को ऊंचा निर्माण कर लिया जाना भी अतिक्रमण है। ऊंची दुकान में प्रवेश के लिए दो से अधिक पेड़िया भी अतिक्रमण है। दुकान से अधिक अंडरग्राउंड निर्माण भी अतिक्रमण है।बनाते वक्त सोचा कि अंदर घुस कर कौन देखेगा? दाब लो फुटपाथ के नीचे सड़क हक की जमीन। पेड़ियां स्लोप चौकी के अतिक्रमण से आगे भी सामान सड़क पर रखकर बेशर्मी से कब्जा करना भी अधिकार बन गया।जिसकी जितनी पहुंच उसने उस हिसाब से अतिक्रमण किया। 

बाजारों के आसपास की छोटी सड़कों में गलियों में अतिक्रमणों का यह हाल रहा है कि कई सड़कें तो कोठियों में शामिल कर ली गई। सत्ताधारी और पैसे वाले लोग इस बेशर्मी में सबसे आगे रहे और अब भी वे सड़कों को मुक्त करना नहीं चाहते​, कारण स्पष्ट है कि कोई संगठन व्यक्ति राजनीतिक दल राजनीतिक नेता ऐसी सड़कों को मुक्त करने की मांग भी नहीं करता। अब अतिक्रमण हटाओ अभियान में पालिका प्रशासन और अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभारी अधिकारी प्रभावशाली नेताओं के अतिक्रमण हटा पाते हैं या नहीं यह उनकी नौकरी पर सवाल उठाने वाले होंगे। 


इसबार राजस्थान में अतिक्रमण हटाने का निर्देश राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से दिया गया है राजस्थान पत्रिका के ग्रुप के संपादक माननीय गुलाब  कोठारी के पत्र को रिट मानते हुए उच्च न्यायालय ने आदेश दिए है। 

संपूर्ण राजस्थान में यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। अनेक नगरपालिकाओं ने विधिवत मुनियादी करवाकर समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करवाकर अतिक्रमण हटाए जाने की घोषणा की है। 

सूरतगढ़ में बाजारों में दुकानों के आगे Footpath ऊंचा कर पेड़ियां बनाकर स्लोप बनाकर अतिक्रमण किए गए हैं। कई भवन भी 10-11 फुट सड़क हक की भूमि पर बनाए गए हैं, बीकानेर रोड पर ये अतिक्रमण हैं। इसकी लिंक सड़कों पर भी है। नगरपालिका को ऐसे अतिक्रमण हटा कर सड़कें मुक्त कराने की चर्चा चल रही है कि मुख्य बाजार में 3 फुट की जगह से आगे का अतिक्रमण दुकानदार हटा लें लेकिन यह 3 फुट की छूट किसने दी है?नगर पालिका प्रशासन यह छूट दे नहीं सकता किसके पास यह लिखित में है कि 3 फुट की जगह छोड़कर अतिक्रमण हटा लिया जाए। 3 फुट की जगह छोड़ने की बात कही जा रही है वह भी तो अतिक्रमण है,जब अभियान अतिक्रमण हटाने का है तब 3 फुट अतिक्रमण रखने की छूट नगर पालिका प्रशासन का कोई भी अधिकारी नहीं दे सकता। कोई सत्ताधारी भी ऐसा निर्देश या छूट नहीं दे सकता।दुकान मकान के आगे पट्टे से अधिक की 3 फुट जमीन उन्हें मिल गई है और वह खुद अतिक्रमण हटाते समय यह 3 फुट का अतिक्रमण मौजूद रख रहे हैं। यह गलत फहमी है। 

नगरपालिका को यह अतिक्रमण हर हालत में हटाना ही होगा। नगरपालिका को चाहिए की सड़कों की चौड़ाई को देखते हुए किनारों पर एक ऊंचाई (एक फुट) के फुटपाथ बनाए ताकि वृद्ध महिलाएं बच्चे आदि आसानी से चल सकें।

सूरतगढ़ से रवाना होने वाली प्रातः कालीन गाड़ियों में सफाई पानी की व्यवस्था नहीं

‌ सूरतगढ़ 29 जुलाई 2017.

 माडल रेलवे स्टेशन सूरतगढ़ से रवाना होने वाली रेलगाड़ियों में सफाई और पानी की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

सूरतगढ़ से अनूपगढ़ प्रातः 4-25 की यात्री गाड़ी, सूरतगढ़ से जयपुर प्रातः 6:00 बजे वाली गाड़ी, सूरतगढ़ से श्रीगंगानगर 7:45 वाली गाड़ी, सूरतगढ़ से अनूपगढ़ 8:20 वाली गाड़ी में न सफाई होती है और न पानी की व्यवस्था होती है। डिब्बों में गंदगी पड़ी रहती है। इसके अलावा इन गाड़ियों में डिब्बों की संख्या कम होने से भी यात्रियों को भेड़ बकरियों की तरह ठूंसे हुए रूप में यात्रा करनी पड़ती है।

 नागरिक संघर्ष समिति रेल के संयोजक लक्ष्मण शर्मा के नेतृत्व में आज बीकानेर के सहायक मंडल प्रबंधक को ज्ञापन दिया गया। इस ज्ञापन में लिखा गया है कि पिछले 11 माह से रेलवे के मुख्य द्वार पर काम अधूरा पड़ा है जिससे मलबे की गंदगी पसरी हुई है, आने जाने वाले यात्रियों को चोटें लगती रहती है ।

 पशु रेल के परिसर में घूमते हैं व यात्रियों को चोटें पहुंचाते हैं। 

एक दिन पहले 18 घंटे तक रेल स्टेशन पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी।प्लेटफार्मों पर बिना पानी के यात्रियों की परेशानी से हाहाकार मचा हुआ था।

 सहायक मंडल प्रबंधक से पानी व अन्य समस्याओं का निराकरण जल्दी करवाने का कहा गया।

इस प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट विष्णु शर्मा, ज्ञान बजाज,अमर सिंह राजपुरोहित, विमल सिंह राजपूतों​, मनीराम सिंगीकाट, कस्तूरी लाल, महेशी, राजेश,सिंधदिनेश आदि लोग शामिल थे। सहायक मंडल रेल प्रबंधक सुरेश चंद्रा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने के लिए आए हुए थे।

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

विधायक राजेन्द्र भादू की कोठी सड़क पर अतिक्रमण:बसपा की प्रेसवार्ता:



बसपा नेता डूंगर राम गेदर ने दावा किया था कि कोठी की शिकायत की जाएगी:



विधायक भादू के 2 सालों की उपलब्धियों को बसपा ने झूठा बताया था:

- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 24 दिसम्बर 2015.  
UP DATE 15-6-2016
Up date 8-5-2017.
 अपडेट  28-7-2017.

भाजपा विधायक राजेन्द्र भादू के 2 सालों के राज में सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में करवाए गए विकास कार्यों के दावों को बसपा पे्रसवार्ता में डूंगर राम गेदर ने झूठ का पुलिंदा बताया। बसपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डूंगर राम गेदर ने कहा कि विधायक ने भू माफिया पर नकेल कसने का दावा किया है लेकिन सच्च यह है कि विधायक का खुद का मकान सड़क पर अतिक्रमण करके बनाया हुआ है।
सवालों के जवाब में गेदर ने कहा कि बसपा इसकी शिकायत कर जाँच करवाएगी। शिकायत का भी स्पष्ट पूछा गया कि केवल ज्ञापन ही दिया जाएगा या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त को शिकायत की जाएगी? उन्होंने कहा कि ज्ञापन नहीं कार्यवाही के लिए कदम उठाया जाएगा।
विदित रहे कि भादू की कोठी की शिकायत वसुंधरा राजे को व विभागों को पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु 15 नवम्बर को कर चुके हैं। यह प्रकरण करीब तीन सालों से जनता में छाया हुआ है तथा बार बार अखबारों में उठ चुका है। पूर्व विधायक गंगाजल मील भी किसान मजदूर मोर्चा आंदोलन में उपखंड के आगे हुई एक प्रेस वार्ता में भादू की कोठी पर सवाल दाग चुके हैं।
अभी तक गंगाजल मील व कांग्रेस ने कोई शिकायत कोठी जाँच के लिए नहीं दी है। मील ने भादू के दावों को झूठा बतलाते हुए प्रेस बयान तो दिया है कि जल्दी ही भादू की पोल खोलेंगे। मील कब पोल खोलते हैं उस दिन का इंतजार है। मील इस स्पष्ट प्रकरण को न्यायालय मे ले जाने का दावा नहीं कर रहे। मील से यह सवाल तीन सालों से पूछा जा रहा है कि अदालत में कब जाओगेï?

स्कूल बस में बच्चों का दम घुटने लगा:चालक की लापरवाही

आप स्कूल संचालक हैं तो सावधान हो जाइए।अपनी स्कूल की बसें और बच्चों के लाने और पहुंचाने के मामले में कोई लापरवाही नहीं हो।

एक स्कूल बस चालक की लापरवाही आज मासूमों पर भारी पड़ गई। बस के शीशे बंद होने से उसमें बैठे बच्चों का दम घुटने लगा और उनकी तबीयत बिगड़ गई। घटना राजस्थान के भरतपुर की है। मिली जानकारी के अनुसार, एक निजी स्कूल की बस 28 जुलाई सुबह बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। यह बस जब डीग बहताना मार्ग से गुजर रही थी तो अचानक इसमें बैठे बच्चे एक-एक बेहोश होने लगे। इससे बस में हड़कम्प मच गया। बच्चे रोने लगे और चीख पुकार मच गई।

ड्राइवर ने जब बस रोकी तब तक करीब आधा दर्जन बच्चे बेहोश हो चुके थे। इस पर ग्रामीणों की मदद से इनमें कुछ बच्चों को भरतपुर अस्पताल पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि उमस भरा मौसम होने और बस के शीशे बंद होने से इन बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों छोटे होने से वे अपनी तबीयत बिगड़ने की बात नहीं कह सके। यह भी सामने आ रहा है कि इस स्कूल बस में क्षमता से अधिक बच्चे थे। इस कारण ये दम घुटने से यह बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। 


कांग्रेस लुंज पुंज हो जाएगी लोकसभा चुनाव के बाद


- करणीदानसिंह राजपूत-

भाजपा और मोदी। मोदी और भाजपा।
दोनों ही आक्रामक है। जब जब ऐसी स्थितियां इतिहास में आई हैं तब तब आक्रामक की फतह यानि कि जीत हुई है। आक्रामक पूरे जोश में होता है तथा बचाव का रूख अपनाते हुए युद्ध करने वाला कमजोर होता है।
यह हालत लोकसभा के वर्तमान चुनाव युद्ध में दृष्टिगोचर हो रही है।
मोदी की ललकार के आगे राहुल का जवाब मिमयाता हुआ सा लग रहा है। एक दिन में यह नतीजा नहीं निकाला गया है। कई दिनों से चैनलों पर मोदी का आक्रामण शेर का शिकार पर होता है वैसा लग रहा है। राहुल के जवाब में ललकार नहीं मिलती। राहुल की आवाज खरखराहट से भरी हुई दबी दबी सी लगती है।
राहुल की आवाज से यह मतलब निकलता सा लगता है कि...मैं अकेला लड़ तो रहा हूं...आखिर कितना लड़ूं...बाकी ने तो मलाई खा खाकर स्वास्थ्य को इतना बेकार कर लिया है कि लडऩे के काबिल ही नहीं रहे हैं।
सच तो यह है कि जब सामने पराजय नजर आने लगे तो हालत ऐसी हो ही जाती है। राहुल को साफ साफ पराजय दिखाई पडऩे लगी है। लेकिन चुनाव का युद्ध तो लडऩा ही होगा। उससे भाग कर भी कहां जाऐं?
राहुल ने अभी कुछ दिन पहले रेलवे के कुलियों से,मजदूरों से,खान मजदूरों से,कहीं किसानों से बात की है। कांग्रेस नें उसका लाइव प्रसारण करवाया। जिन लोगों ने भी देखा। वे सभी मेरे दावे की सत्यता की पुष्टि करेंगे।
एक छोटा बच्चा जैसे अपने बाप या दादा से बार बार पूछता है यह क्या है?
वह बार बार जवाब देता है कि यह कौवा है....यह कौवा है....यह कौवा है..।
यहां इस उदाहरण को देने का मतलब है।
बेचारे राहुल...कांग्रेेस के उपाध्यक्ष। इतने अनजान बन पूछ रहे थे मानो उनको सच्च में ही मालूम नहीं कि भारत में गरीबों की मजदूरों की यह दुर्दशा है कि उनके पास खाने को आज भी दो वक्त का अनाज नहीं होता। उनके पास रहने को मकान नहीं है। उनके बच्चे आज भी स्कूलों में नहीं जाते। उनके पास चिकित्सा के लिए भी दो पैसे नहीं है।
यह सब सच्च है। यह सारा सच्च सामने आ रहा है तो यह भी सच सामने आ रहा होगा कि आजादी के इतने साल बाद भी भारत में ऐसे हालात क्यों हैं?
देश में राज तो सबसे ज्यादा कांग्रेस का ही रहा था। कांग्रेस में भी राज जवाहर लाल नेहरू का,इंदिरा गांधी का, राजीव गांधी का रहा। कौन थे ये लोग? राहुल गांधी के क्या लगते थे?
अब राहुल के मिमियाते बयानों से जर जर बीमार हुई कांग्रेस ठीक होने वाली नहीं है।


यह रपट दिनांक  29~3~2014  को लिखी गई थी।
अपडेट 28-7-2017.

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नवाज शरीफ को पाकिस्तान प्रधानमंत्री पद से हटाया: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला


पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2017 को एक ऐतिहासिक फैसले में पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दोषी करार दिया। इसके साथ ही उन्हें जीवन भर के लिए प्रधानमंत्री पद के अयोग्य भी घोषित कर दिया गया। देश की सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नवाज का राजनीतिक भविष्य खत्म सा हो गया है। पाक की शीर्ष अदालत ने शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ मामले दर्ज करने के भी आदेश दिए हैं।

प्रधानमंत्री के तौर पर नवाज का यह तीसरा कार्यकाल था। तीनों बार वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए । पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम संख्या 1 में पांच-सदस्यों की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पांचों जजों ने सर्वसम्मति से नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया। साथ ही, उन्हें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का अध्यक्ष पद छोड़ने को भी कहा गया है। कोर्ट ने कहा कि नवाज पार्टी अध्यक्ष होने के योग्य नहीं हैं। मालूम हो कि 14 अगस्त को पाकिस्तान की स्थापना के 70 साल पूरे हो जाएंगे, लेकिन इतने सालों में लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया पाकिस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।

फैसला सुनाते हुए जजों ने कहा कि नवाज पाकिस्तानी संसद और अदालतों के प्रति ईमानदार नहीं रहे हैं और इसीलिए वे PM पद पर नहीं  रह सकते हैं। पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 62 और 63 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट बेंच ने 5-0 बहुमत से नवाज को PM पद के लिए अयोग्य घोषित किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 जुलाई को की गई टिप्पणी में ही इस फैसले का संकेत मिल गया था। कोर्ट ने नवाज के सामने 2 विकल्प रखे थे- एक तो यह है कि इस केस से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट खुद फैसला सुनाए या फिर यह मामला नैशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (NAB) को सौंप दिया जाए।  जस्टिस एजाज अफजल खान ने फैसला सुनाते कहा, 'नवाज शरीफ अब पाकिस्तानी संसद के ईमानदार और समर्पित सदस्य होने के योग्य नहीं हैं। उन्हें प्रधानमंत्री का पद छोड़ना होगा।' पाकिस्तान चुनाव आयोग ने तत्काल नवाज की योग्यता को खारिज करने का आदेश दिया है। आयोग कोर्ट ने मरियम, हसन, हुसैन और इसाक डार के खिलाफ दायर मामलों की जांच का काम NAB को सौंपा है। NAB पाकिस्तान की सबसे बड़ी भ्रष्टाचार निरोधी संस्था है। यह एक स्वायत्त और संवैधानिक बॉडी है, जिसका काम भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करना है। जस्टिस एजाज ने कहा कि JIT द्वारा इस केस से जुड़ी जो भी चीजें जमा की गई हैं उन्हें 6 हफ्तों के भीतर NAB के पास भेजा जाए। नवाज के खिलाफ दायर मामलों में आगे की जांच भी NAB को सौंपी गई है। कोर्ट ने NAB को सुनवाई शुरू होने के 30 दिनों के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मरियम नवाज (शरीफ की बेटी), कप्तान मुहम्मद सफदर (मरियम के पति), हसन और हुसैन नवाज (प्रधानमंत्री शरीफ के बेटों) के साथ-साथ प्रधानमंत्री शरीफ के खिलाफ मामलों पर कार्रवाई होनी चाहिए और 30 दिनों के भीतर कोई फैसला सुनाया जाएगा। 

अभी यह साफ नहीं हो सका है कि अगला चुनाव होने तक सत्ता की बागडोर किसे सौंपी जानी है। पाकिस्तान में अगले साल आम चुनाव होने हैं। जानकारों का मानना है कि नवाज के जाने का असर भारत पर पड़ेगा। सुरक्षा संबंधी मामलों में यह असर ज्यादा महसूस किया जा सकेगा। सत्ता में परिवर्तन का मतलब है कि इस्लामाबाद में नए 'खिलाड़ी' और नए मुद्दे होंगे। गवर्नेंस और विदेशी नीति का काम रावलपिंडी में सेना के हवाले हो जाएगा। सेना को गवर्नेंस में आगे लाना जाहिर तौर पर भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। पाकिस्तानी सेना किस तरह भारत के खिलाफ पूर्वाग्रहों से भरी है, यह तथ्य किसी से भी नहीं छुपा। इस फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए गुरुवार 27 जुलाई रात से ही इस्लामाबाद और रावलपिंडी को एहतियातन हाई अलर्ट पर रखा गया। सुप्रीम कोर्ट और पाकिस्तानी संसद के बाहर ही काफी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।

 किसी भी अप्रिय वारदात की स्थिति से निपटने के लिए कोर्ट के बाहर करीब 3,000 पुलिसकर्मियों व अर्धसैनिक बलों को ड्यूटी पर लगाया गया था। 27 जुलाई शाम सुप्रीम कोर्ट ऑफिस ने 28 जुलाई की कार्य सूची के अंतर्गत पनामागेट पर फैसला सुनाए जाने की जानकारी दी थी। इससे पहले बताया गया था कि फिलहाल अगले 2 हफ्तों तक इस केस पर सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष असमा जहांगीर ने अदालती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे 'अस्वभाविक और अनुचित' बताया। उन्होंने कहा कि JIT द्वारा जमा की गई रिपोर्ट पर दोनों पक्षों की दलीलों को 3 जजों की बेंच ने सुना, लेकिन निर्णायक फैसला सुनाने के लिए 5 सदस्यों की खंडपीठ गठित की गई। जस्टिस आसिफ सईद खोसा के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यों की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। खोसा ने इससे पहले 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के दौरान नवाज को पाकिस्तान के प्रति ईमानदारी न दिखाने का दोषी मानते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए 'अयोग्य' बताया था। खोसा ने पाकिस्तान चुनाव आयोग को भी नवाज की अयोग्यता पर नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया था। पैनल में शामिल जस्टिस गुलजार अहमद ने भी जस्टिस खोसा के साथ सहमति जताई थी। इन दोनों के अलावा इस खंडपीठ में शामिल बाकी तीनों जज नवाज और उनके बच्चों को अपनी सफाई पेश करने के लिए एक और मौका देने के पक्ष में थे। बाद में इन्हीं तीन जजों की बेंच को इस मामले की जांच के लिए गठित JIT के कामकाज पर नजर रखने की जिम्मेदारी मिली। JIT ने 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि शरीफ और उनके बच्चों का रहन-सहन उनके आय के ज्ञात स्रोतों के मुकाबले काफी अच्छा है। रिपोर्ट में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का नया मामला दर्ज करने का भी सुझाव दिया गया था। JIT की रिपोर्ट को देखने-पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट बेंच ने 21 जुलाई को इस मामले में चल रही कार्यवाही बंद कर दी। नवाज पर प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान लंदन में बेनामी संपत्ति बनाने के आरोप हैं। इसका खुलासा पिछले साल पनामा पेपर लीक में हुआ था। लंदन में शरीफ परिवार द्वारा खरीदे गए फ्लैट्स के लिए पैसे कहां से आए, इसपर नवाज और उनकी टीम द्वारा दिए गए जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं था। जजों ने कहा था कि अगर शरीफ परिवार ने लंदन के फ्लैट्स की खरीद के समय सभी जरूरी कागजात लिए होते तो यह विवाद खड़ा ही नहीं होता। JIT ने अपनी रिपोर्ट में नवाज और उनके परिवार पर धोखाधड़ी, फर्जी कागजात बनाना, अपने आय के स्रोतों को छुपाना और आय से कहीं ज्यादा आलीशान जीवन जीने जैसे कई संगीन आरोप लगाए थे। इस मामले में शुरू से ही नवाज विपक्षी दलों के निशाने पर थे। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) तो लंबे समय से नवाज पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही थी। 

पनामागेट मामले की सुनवाई पाकिस्तान की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना है। पिछले कुछ समय से पूरा देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा था। कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अफवाहों का दौर भी जारी था। कोर्ट के निर्णायक फैसले को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या नवाज प्रधानमंत्री की अपनी कुर्सी बचा पाएंगे? और अगर उन्हें इस पद के लिए अयोग्य ठहरा दिया जाता है, तो इस स्थिति में उनकी जगह कौन लेगा? 

पाकिस्तान में पहले भी कई प्रधानमंत्रियों को पद से हटाया जा चुका है और कई प्रधानमंत्रियों ने खराब से खराब स्थितियों का सामना कर वापसी की है, लेकिन इससे पहले किसी भी पाकिस्तानी PM पर भ्रष्टाचार से जुड़े इस तरह के मामले में जनता और कानून का इतना दबाव नहीं पड़ा। इस पूरे मामले के कारण पहली बार एक सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री और उसके परिवार को अपनी संपत्ति और आय के स्रोतों पर जनता के सामने सफाई देनी पड़ी। लोगों को उम्मीद है कि इस मामले के बाद पाकिस्तान में नेताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच पारदर्शिता कायम करने के लिए दबाव बढ़ेगा।  नवाज का नाम पनामा पेपर में आया था। यह मामला 1990 के दशक में उस वक्त धनशोधन के जरिए लंदन में सपंत्तियां खरीदने से जुड़ा है जब शरीफ दो बार प्रधानमंत्री बने थे। शरीफ के परिवार की लंदन में इन संपत्तियों का खुलासा पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले से हुआ। इन संपत्तियों के पीछे विदेश में बनाई गई कंपनियों का धन लगा हुआ है और इन कंपनियों का स्वामित्व शरीफ की संतानों के पास है। इन संपत्तियों में लंदन स्थित चार महंगे फ्लैट शामिल हैं।

– नवाज शरीफ पनामा के बैंक में कालाधन जमा करने मेंके दोषी

– नवाज की बेटी और दामाद भी दोषी करार

– नवाज के भाई शाहबाज बन सकते हैं पीएम

– शाहबाज शरीफ अभी पंजाब के सीएम हैं

– इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने दी थी याचिका।

इस्पात कारोबारी-सह-राजनीतिज्ञ शरीफ पहली बार 1990 से 1993 के बीच प्रधानमंत्री रहे। उनका दूसरा कार्यकाल 1997 में शुरू हुआ जो 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद खत्म हो गया। 

सर्वोच्च न्यायालय ने शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए इसी साल मई में संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया था। जेआईटी ने गत 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी। इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाने वाली पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा ने की, जिन्होंने 20 अप्रैल के फैसले में मारियो पुजो के उपन्यास ‘द गॉडफादर’ के वाक्यांश का हवाला देते हुए राष्ट्र के प्रति ईमानदार न होने के लिए शरीफ को ‘अयोग्य’ घोषित किया।

बुधवार, 26 जुलाई 2017

किसानों को वर्षों पहले दी जमीनों का आवंटन रद्द करने का तानाशाही आदेश हुआ था

किसानों को वर्षों पहले दी जमीनों का आवंटन रद्द करने का  आदेश हुआ था
सूरतगढ़ में भी 3 सौ से अधिक किसानों की टीसी खारिज करदी गई थी

भू राजस्व तहसीलदार हर्षवर्धनसिंह राठौड़ का पत्र जो जिला कलकटर को लिखा गया था में उल्लेख किया गया है कि भ्रमण के दौरान उनकी जानकारी में आया कि टीसी जमीनों का गैर कृषि कार्यों में उपयोग किया जा रहा है सो जमीनें निरस्त कर दी गई और अतिक्रमण ना हो इसके लिए पालिका को सौंप दी गई।

किसानों को वर्षों पहले दी जमीनों का आवंटन रद्द करने का तानाशाही आदेश हुआ था 

सूरतगढ़ में भी 3 सौ से अधिक किसानों की टीसी खारिज करदी गई थी

किसानों से छीनी गई मगर नगरीय विकास के बजाय सारी जमीन पर माफिया काबिज हो गए

राजस्व और नगरपालिका अधिकारियों का भू माफिया को संरक्षण

करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 17 जून 2011.

अपडेट.   26 जुलाई 2017.




शहरों के विकास के लिए चिपती हुई राजस्व भूमि नागरपालिका आदि को सौंपने के लिए राजस्थान सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसकी भाषा से वह आदेश तानाशाही आदेश लगता है, जिसके तहत किसानों वर्षों पहले आवंटित टीसी जमीनें खरिज कर दी गई और किसान संगठित नहीं होने के कारण उस आदेश के विरूद्ध कुछ भी नहीं कर पाए तथा रोजी रोटी से वंचित हो गए। इस आदेश से ही सूरतगढ़ के नगरपालिका से चिपते हुए क्षेत्र के किसानों को टीसी पर आवंटित बारानी भूमि का आवंटन निरस्त कर दिया गया। 3 सौ से अधिक किसान एक दो माह की कार्यवाही में अपनी रोजी रोटी से वंचित कर दिए गए। किसान संगठित और अधिक पढ़े लिखे ना होने के वजह से इस आदेश की साफ साफ लिखी खारिज करने की इबारत को समझ नहीं पाए। किस तरह की जमीन को खारिज किया जाना था तथा पालिका को सौंपा जाना चाहिए था।
    यह आदेश राजस्थान सरकार के राजस्व ग्रुप -6 की ओर से दिनांक 8 फरवरी 2006 को जारी किया गया था। इसमें साफ साफ ही लिखा था कि आवंटन निरस्त करना ही है तथा पट्टे की अवधि को बढ़ाना नहीं है। इस आदेश की फोटो प्रति यहां पर प्रकाशित की जा रही है ताकि पढ़ कर जाना जा सके कि किस तरह से तानाशाही की गई।
    इस आदेश से तो यही लगता है कि किसानों की रोजी रोटी की चिंता तक नहीं की गई। शहरी विकास के नाम पर यह लागू किया गया।  तीस चालीस सालों से जो किसान इस जमीन की सार संभाल कर रहे थे तथा खातेदारी मिलने का इंतजार कर रहे थे, उनको मालूम नहीं था कि उनकी वृद्धावस्था में यह तानाशाही वाला आदेश लागू किया जाएगा। अगर वे लोग किसी और कार्य में लगे होते तो वह संपति छीनी तो नहीं जाती।
    सरकार यह कह सकती है कि जमीन केवल एक वर्ष के लिए ही आवंटित की गई थी तब हर साल बाद उसका नवीनीकरण क्यों किया जाता रहा? सरकार का एक बहाना यह भी रहा है कि खेती नहीं कर रहे थे, इसलिए जमीनें निरस्त कर दी गई। सभी जानते हैं कि बारानी भूमि में वर्षा होने पर ही खेती होती है और पांच सात साल बाद जा कर खेती के लायक वर्षा होती है तो किसान खेती करता ही है, लेकिन वषा्र नहीं होने पर पेट पालने के लिए उसको अन्य रोजगार करने को मजबूर होना ही पड़ता है। अपने ही खेत में या उसमें बनी ढ़ाणी में किसान ने कोई कारखाना अथवा फेकटरी तो लगाई नहीं थी कोई छोटा काम जरूयर किया होगा जो किसी न किसी रूप में किसान व खेती से जुड़ा हुआ ही होगा।
    जो भी रहा हो, 3 सौ से अधिक किसानों की जमीनें निरस्त की गई जिसका मतलब यह निकलता है कि एक के साथ 5 का परिवार माने तो 1500 सौ से ज्यादा लोगों की रोटी छीनी गई।
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस विकास के लिए जमीनें ली गई वह तो एक ईंच में भी नहीं हो पाया। प्रभावशाली राजनीतिज्ञों के चहेते भू माफिया ने सारी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया। भू माफिया जमीनें आगे से आगे बेचते रहे माला माल होते रहे। भू माफिया का अतिक्रमण एक एक दो दो बीघों में अभी भी हैं, मगर किसी भी राजस्व अधिकारी यानि की एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार की तथा नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी की हिम्मत नहीं हो रही है कि एक सिरे से लग कर दूजे सिरे तक अतिक्रमण हटवा दें। अधिकारी अतिक्रमण स्थल पर जाते हैं तथा वहां पर किसी गरीब की झुग्गी या कच्चा कोठा जेसीबी से हटवा कर अखबारों में छपवा कर रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करते हैं। वे अतिक्रमण कारियों की कोठियों को ध्वस्त करने की हिम्मत नहीं करते?   
    एक तहसीलदार भू राजस्व हर्षवर्धनसिंह राठौड़ का पत्र जो जिला कलकटर को लिखा गया था में उल्लेख किया गया है कि भ्रमण के दौरान उनकी जानकारी में आया कि टीसी जमीनों का गैर कृषि कार्यों में उपयोग किया जा रहा है सो जमीनें निरस्त कर दी गई और अतिक्रमण ना हो इसके लिए पालिका को सौंप दी गई। सवाल यह है कि अभी तक जमीनें किसके अधिकार क्षेत्र में है यह भी साफ नहीं हो रहा है। कृषि के लिए आवंटित जमीनें अगर उस समय दुरूपयोग की जा रही थी तो अब अतिक्रमण से उनका कौनसा सदुपयोग होता हुआ प्रशासन देख रहा है।
    जब ये जमीनें किसानों के पास में थी तब इन पर कब्जे नहीं थे। पालिका को कागजों में जमीनें सौंपी गई थी उसका ब्यौरा है जिसमें अतिक्रमणों का ब्यौरा भी है। मिलान करके देखा जा सकता है कि इन कागजातों के तैयार किए जाने के बाद में कितने कब्जे हुए और कितने क्षेत्र पर हुए। तानाशाही वाला आदेश संभव है किसानों को उस समय  मिला नहीं  हो। यह आदेश यहां प्रकाशित किया गया है, जिसकी प्रतिलिपि सरकार से अधिकृत रूप में प्राप्त भी की जा सकती है।
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सोमवार, 24 जुलाई 2017

राष्ट्रीय उच्च मार्ग के सीमा में पट्टे शुदा भवनों को तोड़ने का अधिकार नगर पालिका को नहीं है

- करणी दान सिंह राजपूत-

 राष्ट्रीय उच्च मार्ग की तय सीमा में आने वाले पट्टे सुदा भवनों को अतिक्रमण मानने व तोड़ने का अधिकार नगरपालिका के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। 

राष्ट्रीय उच्च मार्ग की सीमा में किसी प्रकार से पट्टे शुदा भवन आता है तो उस पर कोई कार्यवाही करने व तोड़ने का अधिकार केवल राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथोरिटी को ही है। 

राष्ट्रीय उच्च मार्ग भूमि एवं आवागमन अधिनियम 2002 के अनुसार राष्ट्रीय उच्च मार्ग में जो भूमि आती है और उसका मालिकाना अधिकार किसी निजी क्षेत्र में निहित है​, तो सबसे पहले उसका अधिग्रहण किया जाना व मुआवजा चुकाना जरुरी है। बिना अधिग्रहण के कोई भी मकान आदि ध्वस्त नहीं किए जा सकते, इसके बिना कोई भी कार्यवाही गैरकानूनी है।


 सूरतगढ़ में से राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 निकल रहा है।इसके आसपास के जो भवन निर्धारित मार्ग सीमा में आते हैं तो उनका अधिग्रहण किया जाना जरूरी है, लेकिन सूरतगढ़ के इन भवनों का अधिग्रहण  राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथोरिटी  ही कर सकता है।अधिग्रहण के पश्चात मुआवजा भी दिया जाना जरूरी होता है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग अथॉरिटी को जब टाइटल मिल जाता है यानी की मालिकाना अधिकार मिलता है,उसके बाद में ही वह कोई कार्यवाही कर सकता है। मालिकाना अधिकार से पहले वह भी कोई कार्यवाही करने का हक नहीं रखता। सूरतगढ़ में तो अभी अधिग्रहण की कार्यवाही भी नहीं हुई है।


 सूचना है कि पूर्व में राष्ट्रीय​ उच्च मार्ग के मध्य से भवन सीमा दोनों और 75-75 फुट रखी हुई थी जिसके अनुसार भवन बनाए गए।

सूरतगढ़ के मास्टर प्लान में यह सीमा दोनों और 100 -100 रखी गई है, लेकिन आस-पास के जो भवन इस 25 फुट अधिक के दायरे में आते हैं उनका अधिग्रहण किया हुआ नहीं है। नगरपालिका सूरतगढ़ के क्षेत्राधिकार में नहीं है कि वह पट्टे शुदा मकानों को तोड़े। 

सूचना है कि  एक भवन मालिक श्री निश्चल सिडाना ( पट्टे शुदा) ने राष्ट्रीय उच्च मार्ग भूमि एवं आवागमन अधिनियम 2002 की प्रति सहित एक पत्र नगरपालिका को दिया है। जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि नगरपालिका के क्षेत्राधिकार में यह कार्य नहीं आता। नगरपालिका राष्ट्रीय उच्च मार्ग की सीमा में आने वाले पट्टे शुदा किसी भी भवन को एवं उसकी चारदीवारी को तोड़ने का अधिकार नहीं रखती है। 

सूरतगढ़ में सूरतगढ़ PG कॉलेज, शेरवुड स्कूल,सन सिटी रिसोर्ट, निरंकारी भवन आदि राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास में सटे हैं और ये पट्टे शुदा खातेदारी जमीन पर बने हुए हैं। 


नगर पालिका ने पहले इंदिरा सर्कल के आगे मीणा पेट्रोल पंप के पास से उन अतिक्रमणों को हटाया जिनके पास पट्टे नहीं थे । नगर पालिका ने शनिवार रविवार के अवकाश के बाद अब  24 जुलाई को आगे अतिक्रमण तोड़ने की कार्यवाही राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर शुरू कर दी है। पालिका उन अतिक्रमणों को तोड़ रही है जिनके पास में पट्टे नहीं है।



शनिवार, 22 जुलाई 2017

सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास पट्टे शुदा भवनों पर खतरा


करणीदानसिंह राजपूत

राष्ट्रीय उच्च मार्ग की चौड़ाई 150 फुट तय की गई थी। मार्ग के मध्य से 75 की दूरी के हिसाब से लोगों ने अपने व्यावसायिक एवं आवासीय निर्माण करवा लिए थे। अब राष्ट्रीय उच्च मार्ग की  चौड़ाई  200 फुट की जाने से पूर्व में बने भवनों पर खतरा मंडरा रहा है।

 अब मध्य से 100 फुट की दूरी के बाद ही कोई निर्माण होने  चाहिए।  पूर्व में बने भवन 25 फुट की चौड़ाई में तोड़े जाते हैं तो उनका स्वरूप बिगड़ कर मिट्टी के मोल पर जा सकता है। यानि कि 25 फुट तोड़े जाने के बाद पीछे उपयुक्त जगह ही न बचे। भवन के आगे का भाग बहुत अच्छा लुक देने वाला बनाया जाता है। पूर्व में बने करोड़ों रुपए के पट्टे शुदा भवनों​ पर खतरा मंडरा रहा है।

राष्ट्रीय उच्च मार्ग जहां शहर के बीच में से निकल रहे हैं वहां पर यह खतरा पैदा हुआ है।

‌ सूरतगढ़ में भी यह खतरा मंडरा रहा है। पूर्व में बने भवनों को बचाने के वास्ते और संपदा का करोड़ों रुपए मुआवजा चुकाने से बचने के लिए सरकार चाहे तो शहर के बीच में मार्ग पूर्व निर्धारित चौड़ाई रख सकती है।सूरतगढ में बाई पास की मांग है व बाई पास वास्ते जमीन भी है। पूर्व में बने भवनों और जमीन का मुआवजा देने के बजाय तो बाई पास का बनाना बुद्धिमानी  हो सकता है। लेकिन आजकल बिना दबाव के कुछ भी संभव नहीं हो सकता।

‌ भवन मालिकों​ के पास फिलहाल उच्च न्यायालय में पेश होने का ही  एक रास्ता बचा है।





स्वदेसी बोफोर्स तोप वास्ते जर्मनी के बताकर चीन के पुर्जे सप्लाई

नई दिल्ली 22-7-2017. 

स्वदेशी बोफोर्स तोपों के लिए चीन में बने कल-पुर्जाे की आपूर्ति 'मेड इन जर्मनी' बताकर कर दी गई। सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली आधारित एक कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।'सिद्ध सेल्स सिंडीकेट' के अलावा सीबीआई ने धनुष तोपों के लिए चीन में बने नकली कल-पुर्जे की बतौर 'मेड इन जर्मनी' आपूर्ति किए जाने को लेकर 'गन्स कैरिज फैक्टरी' (जीसीएफ) जबलपुर के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है। धनुष बोफोर्स तोप का स्वदेशी संस्करण है। बोफोर्स तोपों ने 1999 के कारगिल के युद्ध में शानदार प्रदर्शन किया था। सीसीआई सीसीआ में में आपूर्तिकर्ता ने धनुष तोपों के विनिर्मार्ण में इस्तेमाल के लिए नकली कल-पुर्जे की आपूर्ति को लेकर अज्ञात जीसीएफ अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश रची। जांच एजेंसी ने प्राथमिकी में कहा, "जीसीएफ के अज्ञात अधिकारियों ने चीन में बने 'वायर रेस रोलर बियरिंग्स' को स्वीकार कर लिया। इसकी आपूर्ति सिद्ध सेल्स सिंडिकेट की ओर से 'सीआरबी-मेड इन जर्मनी' के तौर पर की गई थी।" प्राथमिकी में कहा गया है कि ऐसी चार बियरिंग के लिए निविदा जारी की गई थी। 2013 में 35.38 लाख रुपए मूल्य का ऑर्डर सिद्ध सेल्स सिंडिकेट को दिया गया। सात अगस्त, 2014 को ऑर्डर बढ़ाकर छह बियरिंग का कर दिया गया जिसका मूल्य 53.07 लाख रूपए हो गया। कंपनी ने सात अप्रैल, 2014 और 12 अगस्त, 2014 के बीच तीन मौकों पर दो-दो बियरिंग की आपूर्ति की गई।


भारतीय सेना के पास गोला बारुद अपर्याप्त: कैग की रिपोर्ट

नई दिल्ली 22-7-201 युद्ध कालीन हालात में भारत की सेना के पास लगातार दस दिन तक लड़ने के लिए पर्याप्त गोला बारूद नहीं है। यह अति गंभीर रिपोर्ट भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने 21 जुलाई को संसद में पेश की है जिसमें भारतीय सेना के पास पर्याप्त गोला-बारूद नहीं होने की बात बताई गई है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ बताया है कि पड़ोसी मुल्कों से जंग की स्थिति में भारत के पास 10 दिन लगातर लड़ने के लिए नाकाफी आर्मामेंट हैं। सीएजी सरकारी खातों का लेखा-जोखा रखने का काम संभालती है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय सेना के पुराने आर्मोमेंट रिकॉर्ड को बताते हुए रिपोर्ट को पेश किय। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मी हेडक्वॉर्टर ने 2009 से 2013 के बीच खरीदारी के जिन मामलों की शुरुआत की, उनमें अधिकतर जनवरी 2017 तक पेंडिंग थे। 2013 से ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की ओर से सप्लाई किए जाने वाले गोला-बारूद की गुणवत्ता और मात्रा में कमी पर जोर दिया, लेकिन बेहद सोचनीय स्थिति ये है कि इतनी बड़ी लापरवाही पर सेना का कोई ध्यान नहीं गया। वहीं उत्पादन लक्ष्य में भी कोई खास तरक्की देखने को नहीं मिली। किसी काम ना आने वाले या रद्द किए हुए गोला-बारूद को लेकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सेना के आर्मामेंट डिपो में एक बड़ी लापरवाही ये भी देखने को मिली है कि डिपो में अग्निशमनकर्मियों की भारी कमी है। आयुद्ध भंडार में किसी भी वक्त बड़े हादसे होने का खतरा बना रहता है।  रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर डाला गया है कि इस साल जनवरी में सेना के आर्मोमेंट प्रबंधन का पूरा फॉलोअप एडिट किया गया। बताया  गया है कि ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से सेना में वॉर वेस्टेज रिजर्व रखा जाता है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से इसे 40 दिन की मंजूरी मिली थी। वहीं, सेना ने 1999 में यह तय किया की ये अवधि सिर्फ 20 दिन की ही हो। लेकिन सितंबर 2016 की रिपोर्ट से सामने आया है कि केवल 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर फिट बैठे। वहीं, 55 प्रतिशत आर्मामेंट 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम आंके गए। इसमें प्रगति देखी गई लेकिन एक फायर पावर को मजबूत बनाए रखने के लिए  बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरत से कम रहे। में आगे बताया गया कि रक्षा मंत्रालय ने 2013 में रोडमैप को मंजूरी दी थी जिसमें इस बात पर फैसला हुआ कि 2019 तक पूरी तरह से फिट कर दिया जाए।  2013 में जहां 10 दिन की अवधि के लिए 170 के मुकाबले 85 गोला-बारूद ही (50 फीसदी) उपलब्ध थे, अब भी यह 152 के मुकाबले 61 (40 फीसदी) ही उपलब्ध हैं। 

(अमर उजाला)

शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

गांधी ने आजादी के बाद कांग्रेस को बिखेरने का कहा था :आज कांग्रेसी खुद यह कर रहे हैं- अमित शाह

 भाजपा ने सत्ता में आने के बाद  परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण जैसे 3 नासूरों को उखाड़ फेंका है। 

 अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का गठन आजादी के लिए हुआ था। उस समय कांग्रेस पार्टी में सभी विचारधाराओं​  के लोग शामिल थे। इसकी स्थापना अंग्रेज ने की थी और गांधी जी ने आजादी के बाद कहा था कि कांग्रेस को बिखेर दो, जो आज कांग्रेस के लोग ही कर रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक अमित शाह अपने तीन दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान आज 21जुलाई को  जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित प्रबद्ध सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा समेत कुछ ही पार्टियां है जिनमें आंतरिक लोकतंत्र है।

इसका उदाहरण उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं को बताया। दोनों ने ही अपना सफर एक साधारण कार्यकर्ता से शुरू किया और अपनी मेहनत एवं तेजस्विता के बल पर इतने बड़े पदों पर पहुंचे। देश में 1670 राजनीतिक दल हैं और इनमें से सिद्धांतों और आंतरिक लोकतंत्र केवल भाजपा समेत कुछ दलों में है। इसकी बदौलत एक साधारण सा कार्यकर्ता इस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बनता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एवं अन्य दलों की तरह भाजपा परिवारवाद, जातिवाद या क्षेत्रवाद के आधार पर नहीं चलती। शाह ने कहा कि उनकी जाति सुपारी के आकार से भी छोटी है। परिवार में कोई राजनीति में नहीं था। मैं पोस्टर लगाता था और बूथ नंबर 297 का एक साधारण सा कार्यकर्ता था।

उन्होंने कहा कि आज मैं दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। इसी तरह चाय बेचने वाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना।  यह  भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र और सिद्धांतों की वजह से संभव हुआ।


अमित शाह के दौरे में छिपा है वसुंधरा राजे का भविष्य और आगामी चुनाव की रणनीति

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के राजनीतिक मायनों को लेकर प्रदेश भाजपा में सुगबुगाहट जोर पकड़ रही है। उनके इस दौरे के बाद भाजपा में चल रही गुटबाजी पर भी लगाम लगने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। अमित शाह आज जयपुर पहुंचे। यहां पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत  हुआ। शाह का यह दौरा राजस्थान के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव है और इन चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति भी शाह के इस दौरे के दौरान तय होगी। 2018 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की केंद्रीय इकाई ने पदाधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों को बूथ लेवल तक पहुंचने का कार्यक्रम तय किया है। इस दिशा में शाह ने यहां के मंत्रियों और विधायकों से अलग-अलग बैठक कर फीडबैक लिया और उन्हें चुनाव के लिए अभी से कमर कसने के निर्देश दिए। भाजपा में एक गुट सीएम राजे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है और इसमे शामिल कद्दावार नेता अपनी बात शाह तक पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रहे है। राजे विरोधी ये तीखे तेवर शाह के साथ बैठकों में सामने आ सकते है। वसुंधरा राजे के खिलाफ खुलकर बोलने वाले वरिष्ठ विधायक घनश्या​म तिवाड़ी आज शाह के साथ विधायकों की बैठक में नहीं पहुंचे। वे सीएम पर सिविल लाइंस का बंगला हड़पने जैसा आरोप लगा चुके है। उनके खिलाफ प्रदेश इकाई ने केंद्रीय अनुशासन समिति को भी शिकायत भेज रखी है, जिस पर अभी निर्णय होना बाकी है। रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा भी कई बार प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ अपना दर्द जता चुके हैं। इस तरह कुछ और विधायक और नेता है, जो राजे और प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के खिलाफ हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई या फिर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की बात पर शाह के इस दौरे के बाद मु​हर लग सकती है। अमित शाह के करीबी माने जाने वाले ओमप्रकाश माथुर का प्रदेश की राजनीति में भविष्य भी इस दौरे से तय हो सकता है। राजपा से विधायक और मीणा समाज के कद्दावर नेता किरोड़ीलाल मीणा की भाजपा में वापसी को लेकर भी चर्चाएं गरम हैं।

सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर अतिक्रमण हटाए गए

- करणीदान सिंह राजपूत-

सूरतगढ़ 21 जुलाई 2017.

 नगर पालिका ने आज 21 जुलाई से राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया। 

 यह अभियान राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 पर शुरू किया गया। राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62  पालिका क्षेत्र के अंदर से निकलता है।वर्षों से यहां व्यावसायिक रूप में बड़े-बड़े शोरूम कारखाने दुकानें आदि चल रही थी जिनका प्रतिवर्ष लाखों का टर्न ओवर था। काफी समय से आवाज उठ रही थी इन अतिक्रमणों को हटाने की। आज अतिक्रमण हटाने वाले स्थल पर प्रभावशाली लोगों के चेहरे नजर आए क्योंकि बहुत बड़े-बड़े अतिक्रमण शोरूम और दुकानों में राजनीतिज्ञों की और पैसे वालों की मालकियत थी। नगरपालिका की दो जेसीबी मशीनें अतिक्रमण तोड़ने में लगी थी, वहां पर अतिक्रमण वालों की ओर तमाशबीनों की भारी भीड़ थी। अनेक लोगों ने अपने अतिक्रमण खुद हटाने शुरू कर दिए ताकि जो सामग्री है वह नगरपालिका वाले ने ले जा सके। नियम के हिसाब से नगरपालिका कब्जा हटाती है तो सामग्री जप्त करके नीलाम करती है और कब्जा तोड़ने का सारा पैसा कब्जेदारी से ही वसूल किया जाता है। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए 10 दिन काम समय दिया गया है। यह समय दुकानदारों ने लिया है लेकिन यह निश्चित है कि अतिक्रमण किसी भी हालत में बचाए नहीं जा सकेंगे चाहे वह कितने ही प्रभावशाली व्यक्ति के हों,अगर अतिक्रमण बचाने में नगरपालिका के स्टाफ ने कोई कोताही की तो अधिशासी अधिकारी और कार्य प्रभारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के सहायक अभियंता तरसेम अरोड़ा पर ड्यूटी में कोताही बरतने की शिकायत हो सकेगी। बीकानेर रोड पर बड़े-बड़े लोगों के कब्जे हैं और लोगों की निगाहें बीकानेर रोड, महाराणा प्रताप चौक छवि सिनेमा रोड आदि के ऊपर लगी हुई है।





       





 

अस्पतालों का कचरा बायोवेस्ट जानलेवा :मानव स्वास्थ्य के लिए हर समय खतरा


श्रीगंगानगर, 20 जुलाई। अस्पतालों का कचरा  जानलेवा भयानक प्रदूषण फैलाता है और मानव स्वास्थ्य के लिए हर समय खतरा है।आश्चर्य है कि श्रीगंगानगर जिले में 107 चिकित्सालयों का कचरा नहीं उठाया जा रहा। वह कहां फेंक रहे हैं यह कचरा?

 जिले में कुल 87 सरकारी अस्पताल और 86 प्राइवेट अस्पतालों ने यानि कुल 173 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों ने सीटीएफ के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, जिनमें से अब 66 ही वेलिड है 107 के रजिस्ट्रेशन एक्सपायर हो चुके हैं। इनका नवीनीकरण नहीं करवा गया है।

बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर गठित जिला स्तरीय  मॉनिटरिंग कमेटी की पहली बैठक 20 जुलाई 2017 में यह गंभीर तथ्य सामने आए। यह बैठक जिला कलक्टर ज्ञानाराम की अध्यक्षता में जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिला कलक्टर ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण मामले को गंभीर मानते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को जिला मुख्यालय पर जल्द ही रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण का शिविर लगाने के निर्देश दिए। ताकि जिन हॉस्पिटल ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया हुआ है वो रजिस्ट्रेशन करवा सकें और जिनका रजिस्ट्रेशन खत्म हो रहा है वो नवीनीकरण करवा सके। समिति के सदस्य सचिव सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल ने बताया कि जिला कलक्टर ने इसे गंभीर मानते हुए जिले की सभी अस्पतालों को इसमें जोड़ने के निर्देश देते हुए इसकी सूची बनाने के निर्देश दिए। सीटीएफ प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधियों को जिले की सभी अस्पतालों की सूची चिकित्सा विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्यों को देने के निर्देश दिए। ताकि अन्य अस्पतालों को भी जोड़ा जा सके। 


                                      बैठक में सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल और डिप्टी सीएमएचओ डॉ अजय सिंगला ने बताया कि सीटीएफ प्रदाता कंपनी ऑन रोड़ पीएचसी का कचरा तो उठा लेती है लेकिन इंटीरियर में स्थित पीएचसी का बायो मेडिकल वेस्ट नहीं उठाते। इस पर जिला कलक्टर ने कंपनी के साथ हुए एग्रीमेंट को देखने के निर्देश देते हुए कहा कि अगर एग्रीमेंट में इंटीरियर में स्थित पीएचसी से कचरा उठाने का उल्लेख है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ डीएलबी को लिखा जाए। इसके अलावा जिला कलक्टर ने हनुमानगढ़ में बाइपास रोड़ पर स्थित प्लांट का भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को निरीक्षण करने के निर्देश दिए कि वहां बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नियमानुसार होता है या नहीं। बैठक में सीएमएचओ और डिप्टी सीएमएचओ ने बताया कि सीटीएफ के 75 किलोमीटर के रेडियस में जितने भी अस्पताल आते हैं उनका बायो मेडिकल वेस्ट सीटीएफ प्रदाता कंपनी को उठाना जरूरी है चाहे वो इंटीरियर में आए या रोड़ पर। इसको लेकर संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए। 


                              सीएमएचओ और डिप्टी सीएमएचओ ने बताया कि राजकीय चिकित्सा संस्थानों में बीएमडब्ल्यू सेगरिगेशन है। बीएमडब्ल्यू मद में निदेशालय को बजट मांग भिजवाई गई है। कार्मिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही जिन संस्थानों में सीटीएफ द्वारा कचरा नहीं उठाया जा रहा वहां बैरल पिट्स का उपयोग किया जा रहा है।  जिला कलक्टर ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर गठित  जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक प्रत्येक तीन महीने में एक बार बुलाने के निर्देश दिए। 


                         बैठक में जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम के अलावा सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल, पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, पीआरओ श्री सुरेश बिश्नोई, पीएचईडी के सहायक अभियंता श्री मक्खन सिंह, प्रदूषण निंयत्राण बोर्ड बीकानेर के प्रतिनिधि श्री दारा सिंह श्योरान और श्री ए.के. जेलिया, सीटीएफ प्रदाता प्रतिनिधि श्री घनश्याम राजपुरोहित और श्री कविन्द्र खन्ना उपस्थित थे।

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

श्रीगंगानगर जिले में निराश्रित पशुओं की समस्या एक माह में दूर होगी- विशेष समाचार


लावारिश पशुओं को लेकर जिले की सभी 336 ग्राम पंचायतों पर 20 तारीख को होगी बैठक

ब्लॉक स्तर पर सभी एसडीएम महीने में एक बार इस समस्या को लेकर करेंगे बैठक

श्रीगंगानगर, 20 जुलाई। जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने कहा है कि जिले में लावारिश पशुओं की समस्या को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए इसके नियंत्रण को लेकर कई उपाय किए जा रहे हैं। करीब एक महीने के अंदर जिले में इस समस्या पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया जाएगा। जिला कलक्टर ने सीईओ जिला परिषद श्री विश्राम मीणा के साथ चर्चा करने के बाद बताया कि कई गौशालाओं की शिकायत मिल रही है कि कैपेसिटी होने के बावजूद वो पशु लेने से मना कर देते हैं। लिहाजा जिले में जितनी भी गौशालाएं हैं उनकी कैपेसिटी चेक करवाई जा रही है साथ ही ये भी चैक करवाया जा रहा है कि संबंधित गौशाला को कितने पशुओं का अनुदान मिलता है ताकि जिस भी गौशाला में कैपेसिटी से कम पशु हैं वहां इन लावारिश पशुओं को भेजा जा सके। अगर कोई गौशाला कैपेसिटी होने के बावजूद पशु लेने से मना करेंगी तो उसका अनुदान रोकने की कार्रवाई की जाएगी। जिला कलक्टर ने कहा कि जितने भी पशु गौशाला में होंगे उनके अनुरूप नियमानुसार गौशालाओं को अनुदान भी दिलवाया जाएगा।  जिला कलक्टर ने बताया कि जिला परिषद सीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि आवारा पशुओं के नियंत्रण को लेकर महीने की  प्रत्येक 20 तारीख को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सरंपच की अध्यक्षता में बैठक बुलाई जाए। कलक्टर ने बताया कि प्रत्येक महीने की 5 और 20 तारीख को ग्राम पंचायत की बैठक बुलाई जाती है 20 तारीख वाली ग्राम पंचायत बैठक के तुरंत बाद लावारिश पशुओं की समस्या को लेकर सरपंच की अध्यक्षता में बैठक होगी जिसमें लावारिश पशुओं की समस्या को लेकर चर्चा होगी और उसके समाधान भी सुझाए लिए जाएंगे। इसके अलावा ब्लॉक लेवल पर सभी एसडीएम महीने में एक बार लावारिश पशुओं की समस्या को लेकर बैठक लेंगे। नगर निकाय इलाकों में भी नंदीशाला को शुरू करवाया जाएगा। साथ ही जिला कलक्टर ने इस मामले में जिले के एनजीओ, व्यापार मंडल इत्यादि को सहयोग करने की बात कही है। गौरतलब है कि जिला कलक्टर ने शहर में आवारा पशुओं की समस्या के निस्तारण को लेकर नगर परिषद को भी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।


रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित

नई दिल्‍ली :20 जुलाई 2017. एक ऐतिहासिक दिन एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्‍ट्रपति चुन लिए गए हैं. उन्होंने यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत से अधिक वोट से हराया. राष्ट्रपति चुने जाने के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा, "मुझे समर्थन देने के लिए सभी दलों का धन्यवाद, ये मेरे लिए भावुक पल है. मेरा चयन लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है. राष्ट्रपति के तौर पर चयन बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनना मेरा लक्ष्य नहीं था. मुझ पर भरोसा जताने के लिए सभी का आभारी हूं." कोविंद ने ये भी कहा कि वे सर्वे भवंतु सुखिन: के सिद्धांत पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के लिए काम करेंगे.17 जुलाई को भारत के 14वें राष्ट्रपति के लिए हुए मतदान के नतीजों के लिए गुरुवार सुबह 11 बजे से संसद भवन में मतगणना शुरू हुई थी. नया राष्‍ट्रपति चुनने के लिए करीब 99 फीसदी मतदान हुआ था. मतगणना में कोविंद को 65.65 फीसदी वोट मिले, जबकि मीरा कुमार को करीब 34.35 फीसद मतदान मिले हैं. रामनाथ कोविंद को 7 लाख 2 हजार 44 वोट वैल्यू मिले. वहीं मीरा कुमार को 3 लाख 67 हजार 314 वोट वैल्यू मिले.पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद को शुभकामनाएं दी.

रामनाथ कोविंद की जीत पर प्रधानमंत्री ने उनके साथ की दो तस्वीर भी ट्विटर पर साझा की. एक साथ साझा की गई इन दोनों तस्वीरों में से एक तस्वीर 20 साल पहले की तस्वीर थी और एक तस्वीर वर्तमान की है. चुने हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बारे में ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि चाहे 20 साल पहले की बात हो या आज की, उनके साथ हमेशा गर्व की अनुभूति हुई. पीएम मोदी ने यूपी प्रत्याशी मीरा कुमार को लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव प्रचार के लिए शुभकामनाएं दी. मतगणना के पहले और दूसरे राउंड में रामनाथ कोविंद ने विपक्ष की मीरा कुमार से काफी बढ़त बनाई हुई थी. पहले राउंड में कोविंद को जहां 60683 वोट वैल्‍यू मिले थे, वहीं मीरा कुमार के खाते में 22941 वोट वैल्‍यू गए हैं. पहली राउंड के आंकड़ों के मुताबिक एनडीए उम्‍मीदवार रामनाथ कोविंद को 552 सांसदों ने वोट दिया है. जबकि मीरा कुमार के पक्ष में 225 सांसदों के वोट गए हैं.रामनाथ कोविंद की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों ने मनाया जश्न (फोटोः पीटीआई) आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती है. राष्‍ट्रपति वहीं बनता है, बल्कि राष्ट्रपति वही बनता है जो सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल वेटेज का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल कर ले और रामनाथ कोविंद ऐसा कर पाने में सफल रहे. 25 जुलाई को नए राष्‍ट्रपति शपथ लेंगे.

यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा "आज 20 जुलाई 2017 को मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहती हूं, विचारधारा को लेकर मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, ये जारी रहेगी"

ऐसी रही मतगणना की प्रक्रिया- सबसे पहले संसद भवन की मतपेटी खोली गई और फिर राज्यों से आई मतपेटियों को वर्णमाला के आधार पर खोला गया.- वोटों की गिनती चार अलग- अलग मेजों की गई, यानी चार जगह पर एक साथ वोटों की गिनती हुई.- राष्‍ट्रपति चुनाव की मतगणना आठ चरणों में की गई इसमें कुल साढ़े दस लाख वोट रहे.

- राष्ट्रपति चुने जाने के लिए कुल वोटों के आधे से एक वोट अधिक हासिल करना ज़रूरी था.

- इस समय राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए कुल वेटेज 10,98,882 है. यानी जीत के लिए उम्‍मीदवार को 5,49,442 वोट हासिल करने थे.


राज्यसभा सदस्य से मायावती का इस्तीफा मंजूर



नई दिल्ली 20जुलाई 2017.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती का इस्तीफा राज्यसभा के सभापति ने मंजूर कर लिया है। इससे पहले उन्होंने सभापति हामिद अंसारी से मुलाकात की और इस्तीफा मंजूर करने की गुजारिश की। हालांकि, इसके लिए मायावती को दोबारा एक लाइन का इस्तीफा तय प्रारूप में देना पड़ा। मंगलवार (18 जुलाई) को उन्होंने तीन पन्ने का इस्तीफा सौंपा था, जिसे सभापति ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस्तीफा तय प्रारूप में नहीं है। राज्यसभा के उप सभापति पी जे कुरियन ने उनसे इस्तीफा वापस लेने का आग्रह भी किया था लेकिन मायावती नहीं मानीं। सहारनपुर हिंसा पर मंगलवार को सदन में बोलने नहीं देने पर आक्रोशित मायावती ने सदन में ही इस्तीफे का एलान कर दिया था।

61 साल की मायावती फिलहाल अपने राजनीतिक जीवन के कठिनतम दिनों से गुजर रही हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में करारी हार के बाद 2017 के यूपी विधान सभा चुनावों में भी मायावती की पार्टी की करारी हार हुई है। उन्हें सिर्फ 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनाव से पहले और बाद में भी मायावती के कई राजनीतिक साथी उनका साथ छोड़ते चले गए। 


जीवन के ये 37 साल बेमिसाल: अपनी बात-करणीदानसिंह राजपूत


20 जुलाई 1980 से शुरू हुआ सफर 20 जुलाई 2017 तक के 37 सालों में बेमिसाल रहा। वैवाहिक बंधन शब्द इस सफर के लिए जंचता नहीं। यह तो संग संग चलने का एक अनूठा संकल्प था जो संघर्षों में कठिनाईयों में सुख और दु:ख में निरंतर कुछ न कुछ उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। समय अच्छा बुरा दोनों ही प्रकार का आता रहा लेकिन उस पर कुछ कहने के बजाय सीख के रूप में ग्रहण करते हुए आनन्द के साथ कदम दर कदम चलते रहे।

इस साथ चलने की कल्पना नहीं की जा सकती मगर कर्म को महान मान कर चलने का मार्ग तय कर आगे बढते रहे।

मेरी माँ हीरा और पिता रतन ने हीरा रतन के रूप में जो शिक्षा दी थी वह अतुल्रीय थी। उस पर मैं चल रहा था।

विवाह के बाद जब विनीता का संग भी शुरू हुआ तब माँ और पिता ने  माना कि विनीता बहुत समझदार है।

मैं माँ को बहुत समझदार मानता था कि उनकी हर बात में सहजता के साथ परिवार उत्थान झलकता था।

पत्नी विनीता ने अपने तोमर परिवार की सीख के साथ यहां आने के बाद बैंस परिवार की सीख को भी आत्मसात कर लिया। मां को लगने लगा कि विनीता भी बहुत समझदार है। कुशलता भरा हर कदम होता है। 


लोग आजकल कहने लगे हैं' कन्या बचाओ' लेकिन हमारे बैंस परिवार में तो कन्या सदा सर्वदा पूजनीय रही।अपने घर का नाम पुत्री के नाम पर हो तो इससे बड़ा प्रेरणादायी और कुछ नहीं हो सकता।

विनीता को अपने घर की चाह थी। कुछ साल पहले अपने घर का निर्माण हुआ। 

यह अपना घर पुत्री विजयश्री के नाम पर विजयश्री करणी भवन किया गया। सूर्याेदय नगरी में भवन के प्रवेश पर यही नाम विजयश्री करणी भवन लिखा हुआ दिल को हर्षाता है। प्रथम संतान पुत्री ही थी जो अब संसार में नहीं है। वह दिव्य संदेश देकर अनन्त में विलीन हो गयी। मगर उसकी तस्वीर उस पूजा स्थान पर है जहां सभी सुबह शाम पूजा अर्चना करते हैं। इसे भावना कह सकते हैं जो पूरे परिवार में समाई है। 

बड़ा पुत्र योगेन्द्र प्रतापसिंह तो नमन करता है सुबह शाम। विजयश्री ने अपनी तीन साल की आयु में योगेन्द्र का नाम रखा था बंटी। आज भी घर पर यही नाम चल रहा है। मेरे व विनीता के इस बेमिसाल सफर में योगेन्द्र प्रतापसिंह का विवाह रीतिका भाटी से 3 दिसम्बर 2014 में हुआ। बहु रूप में आई रीतिका  बेटी के रूप में आनन्दित है। 

छोटा पुत्र रविप्रतापसिंह सोफ्टवेयर इंजीनियर है। उसका विवाह सोफ्टवेयर इंजीनियर साक्षी अरोड़ा संग हुआ है। पुत्रों के विवाह के बाद मेरे और विनीता के  संग संग उठ रहे कदमों को और अनूठी कल्पनाएं और शक्ति मिली है।

पत्रकारिता और लेखन ईश्वरीय देन है जो सन 1966 से जारी है। यह कर्म करते 52 वर्ष हो गए हैं।

 समय बलवान होता है। समय की महानता को सभी ने स्वीकार किया है,मगर सब कुछ ईश्वर के हाथ में है।

उसी ईश्वर को परम ब्रह्म को नमन।

बुधवार, 19 जुलाई 2017

मात्र बयानों से कैसे हो पाक सफाया-कविता: कविराज मुंशीराम कम्बोज

अमरनाथ के संघ के ऊपर जो हुई गोलाबारी

आंतक की निंदा करते हैं हम सब बारी बारी  

👍 ब्यानवीरो का बयां सुना तो मेरा मन हरसाया।

 मात्र बयानों से कैसे हो पाक का यारो सफाया।

 भारत
मां का सीना छलनी हुआ है कितनी बारी।

 आतंक की  निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

👍सबक सिखाने की चर्चा,हम सुन चुके कई बार,

क्या देश को कुछ बताएंगेये देश के खेवनहार

तोड़ क्यों  नही देते हो तुम शत्रु की नाडी नाडी

आंतक की निंदा करते हैं हम सब बारी बारी।

👍कश्मीर सुलगता देखा हमने, धधका कोना कोना,

दिए ब्यान,कुछ किया क्यों नही,यही है भाई रोना।

भारत बोला सबक सिखाओ,यही है रायशुमारी।

आंतक की निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

अमरनाथ का तीर्थ हो या अन्य कोई शिवाला।

दुश्मन से नही,भारतवासी कोई भी डरने वाला।

पाक हमेशां लेता आया, हमसे राड उधारी।

आतंक की निंदा करते हैं,हम सब बारी बारी।

बातों और बयानों से होते देखे बड़े धमाके।

कितने सिर लाये हो भैया,जाना जरा बताके।

हैं हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,भारत की फुलवाड़ी।

आतंक की निंदा करते हैं, हम सब बारी बारी।

मुंशी मेरे मुख मण्डल पे, छाई रही उदासी।

बिना वजह मरते देखे हैं,जब से भारतवासी।

पाकिस्तान की मार मार के,कर दो हालत माडी।

आतंक की निंदा करते हैं, हम सब बारी बारी।

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कविराज मुंशीराम कम्बोज,

गांव मानेवाला,

सूरतगढ़ ,श्रीगंगानगर, राजस्थान।

मो 9783792692,7568915504



गंगानगर जिले में निराश्रित पशुओं बाबत और पैंफलेट चिपकाने वालों पर सख्त कार्यवाही के निर्देश

श्रीगंगानगर, 19 जुलाई। आवारा पशुओं को लेकर कलक्टर ने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या पूरे जिले की समस्या है इसको लेकर महीने भर में जिले भर के आवारा पशुओं को नंदी शाला या गौशाला में शिफ्ट कर दिया जाए।

शहर में सफाई और आवारा पशुओं को हटाने के लिए नगर परिषद सख्त कार्रवाई करे। इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाए। शहर में जगह जगह पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाएं। जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने बुधवार को बिजली पानी, मौसमी बिमारियों को लेकर आयोजित बैठक में ये निर्देश दिए। आवारा पशुओं को लेकर जिला कलक्टर ने कहा कि नगर परिषद ने पिछले दिनों पालतू पशुओं को पकड़ कर अच्छा कार्य किया। अगर इसको लेकर कहीं लॉ एंड आर्डर की स्थिति आए तो प्रशासनिक अधिकारियों को बताएं। लेकिन इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरतें, पेनल्टी लगाएं और सख्त कार्रवाई करें। कलक्टर ने नगर परिषद अधिकारियों को कहा कि नंदीशाला में जब पानी, बिजली का कनेक्शन हो गया है, तो इसे अब जल्द शुरू करवाओ।  एडीएम विजीलेंस इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। शहर की सफाई को लेकर जिला कलक्टर ने कहा कि शहर में सड़क पर डिवाइडरों के दोनों तरफ पोस्टर चिपका रखें हैं। पोस्टर भी जगह जगह चिपका रखे हैं। इनके खिलाफ संपत्ति विरूपण के तहत एफआईआर दर्ज करवाएं।आगामी 15 दिनों में पूरे शहर में डस्टबिन रख दें ताकि गंदगी ना फैले। 


                            राजस्थान संपर्क पोर्टल की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने जल संसाधन विभाग श्रीबिजयनगर के एसई को शिकायतों का निस्तारण नहीं करने पर नोटिस देने के निर्देश दिए। संपर्क पोर्टल पर 30 दिन से ज्यादा के पेंडिंग चल रहे केसेज की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने जल संसाधन विभाग, पीएचईडी और जोधपुर डिस्कॉम की प्रोग्रेस कमजोर देख कर कहा कि जब पंचायती राज विभाग 7 दिन में 74 केसेज से 21 केस पर आ सकता है तो आप क्यों नहीं। इन विभागों को अगली बैठक में संपर्क पोर्टल पर दर्ज केसेज की अच्छी प्रोग्रेस के साथ आने के निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने आगामी 26 जुलाई को दोपहर साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे द्वारा ली जाने वाली ‘‘राजविकास‘‘ वीसी को लेकर विभिन्न विषयों की समीक्षा की। जिसमें मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना, मुख्यमंत्री निशुल्क जीवन रक्षा कोष , पट्टा वितरण अभियान, ग्रामीण गौरव पथ, अन्नपूर्णा योजना, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, राजश्री योजना, अमृत योजना, आरयूआईडीपी  इत्यादि को लेकर समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। 


                            पीएचईडी की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने कहा कि मैं जहां भी रात्रि चौपाल में जाता हूं तो जनता जल योजना को लेकर कहा जाता है टेंडर करवा दिए हैं। टेंडर के अलावा कोई बात नहीं होती। लोगों को इसका आखिर लाभ कब मिलेगा। इसको लेकर संबंधित अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए. जोधपुर डिस्कॉम के अधिकारियों को 26 जीएसएस के प्रोपोजल जमीन चिह्नित कर जल्द भेजने के निर्देश दिए। प्रारंभिक और माध्यमिक की करीब 100 स्कूलों में विद्युत कनेक्शन जल्द करवाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि बारिश का सीजन है इस समय बिजली, पानी, मेडिकल और जल संसाधन विभाग का दायित्व बढ़ जाता है।


                             शिक्षा विभाग की समीक्षा में जिला कलक्टर ने कहा कि पूरे जिले में जिन जिन स्कूलों ने जमीन ठेके पर दे रखी है वो किसके आदेश से दे रखी है कितनी जमीन है क्या उपयोग हो रहा है इसकी पूरी जानकारी डीईओ देंगे। जिला कलक्टर ने कहा कि जो भी करें सक्षम अधिकारी से स्वीकृति तो लें। पिछले चार साल से ये मामला चल रहा है  लोहारा में रात्रि चौपाल के दौरान पता चला कि वहां ठेका तो 30 से 40 हजार में छूटता है लेकिन सरकारी कोष में जमा 5 हजार ही करवाए गए। बाकि पैसा स्कूल विकास में कहां खर्च होता है। इसके अलावा जिला कलक्टर ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन जिन स्कूलों में आंगनबाड़ी केन्द्र चलते हैं वहां से शिकायत आती है कि स्कूल का पानी आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को पीने नही दिया जाता। स्कूल का टॉयलेट यूज नहीं करने दिया जाता। प्रिंसीपल इस तरह की मानसिकता न रखें। इस मामले को लेकर जिला कलक्टर ने डीईओ को साफ निर्देश दिए कि सभी स्कूल प्रिंसीपल को निर्देश दे दें कि जो जो सुविधा स्कूल के बच्चों को मिलती है वो आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को भी मिलेगी। 


                         एमएलए लेड को लेकर जिला कलक्टर ने कहा कि आरयूआईडी, नगर परिषद और यूआईटी के अधिकारी साथ बैठकर इस बात की चर्चा कर लें कि जो कार्य आरयूआईडीपी में होना है वो विधायक मद से नहीं करवाएं। पार्क, नालों के कार्य करवाए जा सकते हैं। 


                     बैठक में जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम के अलावा जिला परिषद सीईओ श्री विश्राम मीणा, एडीएम विजीलेंस श्री वीरेन्द्र कुमार वर्मा, नगर परिषद कमीश्नर सुश्री सुनीता चौधरी, यूआईटी सचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा, डीवाईएसपी श्री चेतराम, सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, पशुपालन के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके मिढ्ढा, एसई सीएडी श्री गोपाल कृष्ण, एसई पीएचईडी श्री ताराचंद कुलदीप, एसई आरयूडीआईपी श्री दलीप कुमार गौड़, पीआरओ श्री सुरेश बिश्नोई, डीटीओ श्री हेतराम, एडीईओ माध्यमिक श्री मनोहरलाल, समेत अन्य विभाग के अधिकारी शामिल थे।

गुलाबेवाला में नशामुक्ति कार्यशाला:



श्रीगंगानगर, 18 जुलाई। राजकीय उच्च माध्यमिक  विद्यालय 25एफ गुलाबेवाला मे मंगलवार को जिला पुलिस अधीक्षक श्री हरेन्द्र कुमार के निर्देशानुसार स्वास्थ विभाग के सहयोग से पुलिस थाना केसरीसिहपुर क्षेत्र मे नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला मे छात्र छात्रा व अध्यापक सहित ग्रामीण व जनप्रितनिधी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के मुख्य व्यक्ता डॉ0 रविकान्त गोयल ने जन समुह को सम्बोधित करते कहा कि नशा एक सामाजिक​ बुराई है इससे तन मन और धन तीनों का नाश होता है। नशेड़ी से व्यक्ति के परिवार में हर दिन अशान्ति, झगड़ा​ फसाद और मारपीट रोजमर्रा का हिस्सा होता है। व्यक्ति पशु जैसा नारकीय जीवन जीने को मजबूर होता है। कोई भी व्यक्ति नशेड़ी बनने के लिए नशा नहीं करता परन्तु एक बार भी व्यक्ति नशे की चपेट मे आने पर हमेशा के लिए नशे का गुलाम हो जाता  है। परन्तु दृढ़ इच्छाशक्ति  से नशा छोड़ा जा सकता है। डॉ0 गोयल ने विद्यार्थियों​ व उपस्थित जनसमुह को नशा ना करने व नशा छुड़वाने की सामुहिक शपथ दिलवाई।


कार्यक्रम में समाजसेवी नशामुक्ति उत्प्रेरक श्री बनवारी लाल जी शर्मा ने कहा कि नशा करना बुरी आदत है। वैज्ञानिक कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों के मानस पर यह प्रभाव अंकित किया कि बढते हुए अपराध के पीछे नशे की मुख्य भूमिका होती है। नशा ना करने से समाज का सर्वांगीण विकास होता है।

कार्यक्रम के दौरान जीतराम एसआई पुलिस थाना केसरीसिहपुर ने नशा नही करने के जनजागृति अभियान की सफलता के लिए जनसमुदाय की सहभागिता पर बल दिया । सरपंच श्रीमती कर्मजीतकौर ने भी युवापीढी को नशा करने की सलाह दी।

कार्यक्रम मे कार्यवाहक प्रधानाचार्य श्री संतोष सिह ने कार्यशाला की अभिशंशा की और कहा कि नशा प्रवृति आज एक विश्व समस्या का रुप ले चुकी है। जिसके दुष्परिणाम स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे है। प्रत्येक व्यक्ति, संघ,  गुट, संस्था, आदि को नशे पर काबू पाने हेतु समुह बनाकर गंभीरता से प्रयास करने चाहिये । जिससे मानव को नशे से बचाया जा सके। इस अभियान मे भारी संख्यां में ग्रामीण, अध्यापक, अध्यापिका, छात्र-छात्राओ सहित जसविन्द्रसिंह सरपंच पति,श्री हरेन्द्रसिंह, जसप्रीतसिंह आदि भी मोजूद थे । सफल मंच संचालन वरिष्ठ अध्यापक (पंजाबी)  श्री कृष्णसिंह द्वारा किया गया ।


मंगलवार, 18 जुलाई 2017

सूरतगढ़ में बसपा की समीक्षा बैठक हुई



सूरतगढ18-7-2017. बहुजन  समाज पार्टी की समीक्षा  बैठक आज  अंबेडकर भवन सूरतगढ़ में संपन्न हुई । 

मुख्य वक्ता  जिला परिषद सदस्य डूंगरराम गेदर ने संगठन की समीक्षा करते हुए सेक्टर व पोलिंग बूथ कमेटियों का नवीनीकरण करने तथा कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन में  जिम्मेदारी से कार्य करने को कहा, गेदर ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता क्षेत्र की समस्याओं को जिम्मेदारी से हल करवाने का भी प्रयास करें,।

 जिलाध्यक्ष लूनाराम मेघवाल ने विधानसभा के पदाधिकारियों को प्रदेश कि मासिक बैठकों में जयपुर पहुंचने का निर्देश दिया। बसपा नेता सुभाष सुथार ने कहा बसपा सर्व समाज में भाईचारे को बढ़ावा देती है.. हमें महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।, विधानसभा अध्यक्ष इंद्राज कालवा ने कहा की कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन का  दिया गया कार्य पुरा करे। बैठक को बसपा के श्रवण सिगाठिया, पंचायत समिति सदस्य सुमित्रा कालवा ने भी संबोधित किया।. केसराराम गोदारा को विधान सभा का महासचिव नियुक्त किया गया।

बैठक में दुलीचंद नायक, रेवंतराम लिखाला, , मनीराम वर्मा, ताराचंद नायक, राजाराम बेनीवाल ,रतन सिंह ,सुरेंद्र नाथ ,मगनाथ... इमिचंद मेघवाल, लक्ष्मण टाक ,गजानंद वर्मा ,राकेश मेघवाल ,सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे... अगली बैठक 3 अगस्त को निर्धारित की गई. ! बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष लूणाराम परिहार ने की !!

आनंद पाल सिंह एनकाउंटर की जांच CBI से होगी

जयपुर 18 जुलाई 2017

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच सीबीआई से करवाने की मांग सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई है। राजपूत समाज से वार्ता के बाद सरकार ने  एनकाउंटर की जांच सीबीआई से करवाए जाने पर विचार करने पर सहमति जताई है।  इसके साथ ही अन्य कुछ मांगों पर भी सरकार और समाज के बीच सहमति बनी है।  राजपूत समाज ने वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा भी की।  

सचिवालय में सरकार और राजपूत समाज के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटों की वार्ता के बाद मांगों पर सहमति बनी  है।  सरकार की ओर से​ वार्ता में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया मौजूद रहे।  

वार्ता के बाद कटारिया और राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए सहमति बनी मांगों के बारे में जानकारी दी।  

गृहमंत्री कटारिया ने कहा कि राजपूत समाज की सभी मांगों पर सहमति बन गई है।  उन्होंने कहा कि दोनों एफआईआर के साथ सीबीआई जांच के लिए अनुशंसा की जायेगी।  किसी पर भी द्वेषता पूर्ण कार्रवाई नहीं होगी। 


इधर, वार्ता में सभी मागों पर सहमति बनने के बाद राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।  उन्होंने कहा कि सरकार से हुई वार्ता और मांगों पर सहमति से समाज संतुष्ट है।  जयपुर 18 जुलाई 2017

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच सीबीआई से करवाने की मांग सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई है। राजपूत समाज से वार्ता के बाद सरकार ने  एनकाउंटर की जांच सीबीआई से करवाए जाने पर विचार करने पर सहमति जताई है।  इसके साथ ही अन्य कुछ मांगों पर भी सरकार और समाज के बीच सहमति बनी है।  राजपूत समाज ने वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा भी की।  

सचिवालय में सरकार और राजपूत समाज के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटों की वार्ता के बाद मांगों पर सहमति बनी  है।  सरकार की ओर से​ वार्ता में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया मौजूद रहे।  

वार्ता के बाद कटारिया और राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए सहमति बनी मांगों के बारे में जानकारी दी।  


गृहमंत्री कटारिया ने कहा कि राजपूत समाज की सभी मांगों पर सहमति बन गई है।  उन्होंने कहा कि दोनों एफआईआर के साथ सीबीआई जांच के लिए अनुशंसा की जायेगी।  किसी पर भी द्वेषता पूर्ण कार्रवाई नहीं होगी। 

इधर, वार्ता में सभी मागों पर सहमति बनने के बाद राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।  उन्होंने कहा कि सरकार से हुई वार्ता और मांगों पर सहमति से समाज संतुष्ट है।  ्वह


श्री राजपूत सभा के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा के मुताबिक सरकार से सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच वार्ता हुई। जिसमें गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, केबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ के अलावा डीजी जेल अजीत सिंह शेखावत, एडीजी पीके सिंह समेत राजपूत नेता लोकेंद्र सिंह कालवी, महावीर सिंह सरावड़ी और अन्य नेता अधिकारी मौजूद रहे।

लोटवाड़ा के मुताबिक सरकार से वार्ता ​के बाद जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें आनंदपाल की दुबई में मौजूद बेटी चीनू के राजस्थान में लौटने पर गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। उसे यहां आने में सरकार की ओर से कोई परेशानी नहीं उत्पन्न की जाएगी।


इन मांगों पर भी बनी सहमति 

 आनंदपाल की दम बेटी दंडको भारत आने में कोई कठिनाई नहीं आने दी जायेगी।  

 श्रवण सिंह और उसके परिवारजन नज़रबंद नहीं, कोई भी ज़िम्मेदार व्यक्ति उनके घर को संभाल सकता है।  

- आनंदपाल के परिजनों द्वारा आवेदन करने पर 24 घंटे में ही पहली पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट उपलब्ध करवा दी जायेगी। ( पहले गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने सीबीआई जांच की मांग को स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि एनकाउंटर सही है और सीबीआई जांच करवाने का मतलब होगा मेरी पुलिस का मनोबल गिराना जो मैं गिराना नहीं चाहता। दोनों FIR में पहले FIR सरकार की पुलिस की ओर से दर्ज है और दूसरी सुरेन्दर मौत की  दर्ज की गई थी।आनंदपाल की पत्नी की FIR आवेदन को पूर्व FIR की फाइल में शामिल किया गया था। आनंदपाल की पत्नी ने रतनगढ़ चिकित्सालय से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी तब इंकार कर दिया गया था और कहा गया था कि पुलिस से लिखवाकर लाने पर दी जाएगी।

(समझा जा सकता है कि जयपुर में 22 जुलाई के  राजपूत समाज के आंदोलन और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के जयपुर दौरे को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से राजपूत समाज से वार्तालाप किया गया। जो भी हो इससे राजस्थान में एक बार उत्तेजित माहौल में शांति मिलेगी।

भाजपा विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व कांग्रेसी विधायक गंगाजल मील में दोस्ताना व्यवहार जनता हैरान

विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व विधायक गंगाजल मील की कुश्ती बंद:


कासनिया की स्कूली जमीन प्रकरण को हाई कोर्ट में ले जाने वाला मील भादू की कोठी कटलों पर चुप्प:
मील के प्रकरणों पर भादू का मौन: 
भाजपा कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं।  

विशेष रपट- करणीदानसिंह राजपूत

गंगाजल मील ने रामप्रताप कासनिया की स्कूली जमीन का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश किया लेकिन भादू परिवार के कटलों कोठियों के तथ्य खुल जाने के बाद उस पर मौन है और कोई भी कार्यवाही नहीं करने जैसी चर्चाएं आम हैं। रामप्रताप कासनिया परिवार द्वारा संचालित स्कूल जाखड़ावाली में सेम में आ गया। मंडी समिति ने उसके लिए स्थानान्तरण में सूरतगढ़ कस्बे में अपने मंडी क्षेत्र में भूखंड आवंटित करने का निर्णय किया। उस स्थान पर अतिक्रमण होने की वजह से फिर बदलाव चाहा गया। नई धान मंडी व आवासन मंडल कॉलोनी के बीच की कीमती जमीन चिन्हित की गई और नगरपालिका द्वारा कार्यवाही की जाने वाली थी। उस समय स्कूल के 2 लाख रूपयों के बदले में जो जमीन दी जाने वाली थी,उसकी कीमत करीब 2 करोड़ रूपए के लगभग मानी जा रहा थी।
नगरपालिका में इस भूमि को देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद गंगाजल मील ने 1 साल बाद प्रेस वार्ता बुलाई जिसमें कासनिया परिवार पर भूमि लेने के आरोप लगाए। कागजात भी बांटे। पत्रकारों के प्रश्र उठाए जाने पर मील ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रकरण पेश किया जाएगा। मील ने बाद में बताया कि प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
अब मील आरोपों और सवालों के घेरे में इसलिए है कि स्कूल की जमीन जो उस समय लगभग 2 करोड़ की मानी जा रही
थी उसके लिए तो विरोध किया लेकिन भादू परिवार के कोठी कटले जो कई कई करोड़ रूपयों के हैं तथा उनके अनेक तथ्य सामने आ जाने के बाद भी मील कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं?
राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास कर रहे हैं वह सड़क पर बनी होने का आरोप है और ऐसा दिखाई भी देता है। इसके अलावा प्रधानजी बीरबल की कोठी में आसपास की सड़कें शामिल किए जाने के आरोप व नक्से तक छप चुके हैं। मनफूलसिंह भादू के परिवार वाले सिनेमा व आवास का मामला भी आरोपों में घिरा है। इसके भी अनेक प्रमाण सामनें आ चुके हैं।
कासनिया परिवार की स्कूली जमीन के प्रकरण पर बोलने वाले मील साहेब अब कोमा में चले जाने जैसी चुप्पी साध गए हैं।
एक ही वर्ग के दो दिग्गज राजनेताओं में कुछ तो है। न तुम बोलो न मैं बोलूं। इसके पीछे कुछ और भी पक रहा है।
पीलीबंगा में गंगाजल मील कासनिया और भादू में चुनावी घमासान होता है। एक ही वर्ग के तीनों में से कोई एक तो जीतना ही था। कासनिया जीत गए। इसके बाद सूरतगढ़ में घमासान हुआ। मील साहेब जीते विधायक बने। वर्ग की जीत कायम रहनी ही थी। इसके बाद फिर चुनाव हुए और राजेन्द्र भादू विधायक बने। यही वर्ग मुख्य रूप में खड़ा था सो एक तो जीतना ही था। यहां इस वर्ग की आलोचना करना विषय नहीं है। यह वर्ग राजनीति में सूझबूझ से सदा बने रहने के लिए अपने ही वर्ग को पक्ष विपक्ष में रखता रहा है। कोई भी जीते। लोगों को अन्य वर्गों को लगता है कि ये लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं। लेकिन जो सच्च है वो भी सामने है कि मील भादू दोनों चुप्प हैं। 
भादू काल में सामने आए प्रकरणों पर कोई कार्यवाही नहीं हो और आगे और भी प्रकरण हों तो भी कोई कार्यवाही न हो। यह राजनैतिक खेल बड़ी चतुराई से चल रहा है। मील व भादू दो प्रतिद्वंदी नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों एक जोड़ी के रूप में नजर आ रहे हैं। अपनी अपनी संपत्तियों और जमीनों की सुरक्षा का ध्येय साफ झलक रहा है।

 राजेन्द्र भादू ने मील की संपत्तियों निर्माणों आदि पर कोई कार्यवाही शुरू नहीं करवाई है और मील ने राजेन्द्र भादू की संपत्ति व कोठी कटलों जमीनों पर कोई शिकायत या प्रकरण कहीं दर्ज नहीं करवाया है। दोनों की ओर से पहले नूरा कुश्ती चलने के जो संकेत थे अब वे भी खत्म हो गए हैं। नूरा कुश्ती भी बंद हो गई है। अब दिखावटी लड़ाई भी नहीं करेंगे।
यह गौर करने वाले तथ्य हैं कि मील और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भादू व भाजपा के मामले में समझौता जैसी प्रणाली से चल रहे हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील, शहर  ब्लॉक अध्यक्ष,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र गगनदीप आदि किसी ने भी विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के निवास और भादू परिवार के कटलों के प्रकरण सामने आने के बाद कोई मामली विरोध तक दर्ज नहीं करवाया कहीं बयान तक नहीं दिया। 

सत्ता पक्ष भाजपा के विरूद्ध कार्यवाही हो सकने वाले प्रमाण सामग्री मिलने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं,भाजपा के पक्ष में मौन रहते भाजपा के विधायक के विरूद्ध चुप रहते क्या कांग्रेस हवाई बातों से उभर पाएगी? 

कांग्रेसी नेताओं पदाधिकारियों की शक्ति पर भरोसा ही नहीं होगा तब लोग वोट कांग्रेसी प्रत्याशी को क्यों देंगे? कांग्रेसी
 टिकट वाले क्या कह कर वोट मांगेंगे? नेता  ही आवाज नहीं उठाऐंगे तब आम जनता सत्ताधारी पार्टी भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर बैर क्यों मोल लेगी? 
 कांग्रेस को यह तो दिल दिमाग से निकाल ही देना होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की जीत संभव हो पाएगी।
अभी तो किसी भी वार्ड से कांग्रेस की आवाज ही निकलनी शुरू नहीं हुई है। भादू और मील की चुप्पी का एक असर जरूर सामने आ रहा है। भाजपा के अनेक लोग मील से नाराज थे। मील काल पालिका क्षेत्र में पीड़ाएं झेलने वालों को जबसे मालूम हुआ कि भादू तो मील के विरूद्ध कोई कदम ही नहीं उठा रहा और उठाना चाहता भी नहीं। तब लोगों ने कासनिया की कोठी का रास्ता पकड़ लिया । भाजपा के पुराने नए कार्यकर्ताओं को  वहां देखा जा रहा है। भादू के खास खास लोग तक यह मानने लगे हैं और स्वीकारने लगे हैं कि कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 
कांग्रेसी लोग भी मान रहे हैं कि कासनिया के पास लोगों का आना जाना बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है। बात अकेले शहर की नहीं ग्रामीण लोग भी कहने लगे हैं कि भादू काम ही नहीं करता। भादू ने विधायक सेवा केन्द्र खोला जहां भीड़ छोड़, पांच दस कार्यकर्ता ही बड़ी मुश्किल से सारे दिन में पहुंचते हैं। हां कहीं चुनाव में जीत हो जाए तो पटाखे फोडऩे के लिए फोटो खिंचवाने के लिए कार्यकर्ता जरूर पहंच जाते हैं। 
लोगों को कासनिया की ताकत का अहसास होने के कारण भी लोग भादू के बजाय कासनिया को अहमियत दे रहे हैं। 
-------------प्रथम बार  26-10-2014.
अपडेट 18-7-2017.



अपडेट  18-7-2017

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