Sunday, June 18, 2017

छिपकली के जननांगों से सैक्स पावर दवाएं: करोड़ों कीमत: भारत से तस्करी


18-6-2017.
मध्य प्रदेश एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो छिपकली के जननांगों का ह्यूमन सेक्स पावर बूस्टर के तौर पर अवैध कारोबार करता था
वन्य प्राणियों की तस्करी में अब एक नए तरह का अवैध कारोबार जुड़ गया है। मध्य प्रदेश एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो छिपकली के जननांगों का ह्यूमन सेक्स पावर बूस्टर के तौर पर अवैध कारोबार करता था। एसटीएफ ने इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
उनमें से एक खरगोन के मशहूर नवग्रह मंदिर का पुजारी लोकेश जागीरदार भी है। उसके पास से 13 छिपकली बरामद की गई।  पुजारी के अलावा छिपकली का कारोबार करने वाले तीन व्यापारी सुमित शर्मा, सचिन शर्मा और फिरोज अली भी एसटीएफ के शिकंजे में फंसे हैं।

ये लोग ऐसी छिपकली जो अक्सर रेगिस्तान, जंगलों और तटीय इलाकों में पाए जाते हैं, उसे पुरुषों का सेक्स पावर बढ़ाने वाला बता कर उसका कारोबार करते थे। इस तरह की छिपकली को  स्थानीय भाषा में ‘हाथा जोड़ी’ कहा जाता है। इसके शरीर पर कांटा होता है। यह आयुर्वेदिक पौधे ‘हाथ जोड़’ की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में होता है।

 एसटीएफ ने 16-17 जून के बीच इंदौर से छिपकली के 68 टुकड़े बरामद किए हैं जो तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक तस्कर छिपकली के जननांगों के एक टुकड़े के एवज में लोगों से 5000 रुपये लेकर 15,000 रुपये तक वसूलते थे।

राज्य के अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) आर पी सिंह ने इंडिया टुडे को बताया कि आरोपी पुजारी लोगों में हाथा जोड़ी छिपकली को लेकर धार्मिक भावना जगाता था और उसकी पूजा करवाता था। ताकि अधिक संख्या में ऐसी छिपकली मंदिर के पास आ सके।

10-3-2017.

 पुलिस ने 20 करोड़ की छिपकली ले जा रहे शख्स को रेलवे स्टेशन से पकड़ा

शनिवार को सप्लायर राजेश पोरवाल को पहले इंदौर में गिरफ्तार किया गया, फिर उसकी निशानदेही पर अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी के अनुसार छिपकली का अधिकांश अंग पश्चिमी मध्य प्रदेश या राजस्थान के रेगिस्तान से लाया गया। इस तरह की छिपकली इकोलॉजिकल बैलेंस के लिए जरूरी होते हैं। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत इनका शिकार करना अवैध और दंडनीय है।
कई प्रजाति की छिपकलियों की कीमत लाखों-करोड़ों रुपए में है। भारत में छिपकलियों की कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। छिपकलियों की ऐसी ही एक प्रजाति है गीको, जो कि चीन में पाई जाती है। इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपए है। इस छिपकली की कई खासियत हैं। इस प्रजाति की छिपकलियां मार्च महीने की शुरुआत में बिहार के किशनगंज में बंगाल सीमा से बरामद की गई थी। इस छिपकली को तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था, तभी एसएसबी और बंगाल पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की और इकरचला काली मंदिर से इसे बरामद कर लिया गया।

पूछताछ में गिरफ्तार किए गए युवक ने बताया था कि इन छिपकलियों को मेघालय से लाया गया था और किशनगंज में किसी को देनी थी। इसके बाद इसे नेपाल के रास्ते चीन भेजना था।
बताया जाता है कि इस छिपकली का इस्तेमाल मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाओं में किया जाता है। गीको छिपकली के मांस  से डायबिटीज, नपुंसकता, एड्स और कैंसर की दवाएं बनाई जाती हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इसकी बेहद मांग है। इसके साथ ही इसकी मांग चीन में भी है। इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाने वाली इस एक छिपकली की कीमत एक करोड़ रुपए तक है।

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