Wednesday, June 28, 2017

यह घोटाला नगरपालिका ईओ की सहमति से ही संभव: एसीबी में घिर सकता है मामला

_ करणीदानसिंह राजपूत _

सूरतगढ़ नगरपालिका के शहरी अभियान शुरू हो जाने के कुछ दिन बाद  शुरू आती तिथि से प्रचार के विज्ञापन अखबारों में छपे हैं,जिन पर जारी करने की तिथि और क्रमांक नहीं है। सरकारी विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं तब उनके साथ ही उनका क्रमांक और जारी करने की दिनांक दोनों ही छापना अनिवार्य है और उसके बिना छापे विज्ञापन का भुगतान नहीं किया जा सकता।


 नगरपालिका सूरतगढ़ का शहरी वार्ड वाइज अभियान शुरू हुआ तो उसका प्रचार समाचार पत्रों में शुरू होने के पहले होना चाहिए था,लेकिन मिलीभगत से विज्ञापन बाद में छपे अंकों में प्रकाशित हुए। उनका भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं हो सकता। विज्ञापन बिना क्रमांक और बिना तारीख के छपने का स्पष्ट भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है कि अभियान शुरू होने के बाद विज्ञापन मिलीभगत से जारी हुआ और उसमें जारी करने की तिथि और क्रमांक आम जनता से छुपाए ताकि चहेते अखबार के मालिक प्रकाशक को भुगतान आसानी से किया जा सके।


 नगरपालिका सूरतगढ़ में ऐसे अनेक विज्ञापनों का भुगतान हुआ है,जिसमें पालिका को  हजारों रुपए का नुकसान हुआ है।

अगर विज्ञापन अभियान से पहले जारी हुआ और अभियान शुरू हो जाने के बाद विज्ञापन छपा गया तब भी उसका भुगतान करना अवैध और भ्रष्टाचार की संज्ञा में आता है।

इस प्रकार के घोटाले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सीधे पकड़ में आते हैं अगर कोई भी व्यक्ति इसकी जानकारी ब्यूरो को दे देता है। एक खास बात और है कि इस प्रकार के विज्ञापन उन अखबारों में छपे हैं जिनका आम जनता में कोई अस्तित्व नहीं है तथा वे केवल सौ पचास फाइल कॉपियां ही छापते हैं।

अगर कोई अखबार मालिक प्रकाशक अपने अखबार में बिना आदेश के अपनी मनमर्जी से  दूसरे समाचार पत्रों में छपा विज्ञापन अपने अखबार में प्रकाशित करता है तो वह भी अपराध की श्रेणी में आता है। इस प्रकार के विज्ञापन छपने के बाद नगरपालिका प्रशासन को ऐसे अखबारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और सरकार को लिखना चाहिए।

ऐसे प्रकाशित विज्ञापन सामने आने और सूचना लगने के बाद पालिका प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है तो यह प्रशासनिक बहुत बड़ी गलती नहीं बल्कि घोटाले बाज अखबार मालिक व प्रकाशक के  प्रति एक प्रकार की सहमति ही होती है। ऐसी सहमति से बच कर अखबार के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। किसी प्रकार की हिचकीचाहट नहीं होनी चाहिए।

ऐसे तो अखबार का मालिक अपनी मनमर्जी से चाहे जो छाप देगा और कह देगा कि उसने भुगतान नहीं लिया है। लेकिन सच्चाई है कि सरकारी सूचना विज्ञापन आदि कोई भी अखबार बिना आदेश के नहीं छाप सकता।

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