Tuesday, June 27, 2017

पालिका बाबू सुरेश गुप्ता के साथ कौन अध्यक्ष अधिशासी अधिकारी भी नपेंगे

- करणी दान सिंह राजपूत -

नगर पालिका कर्मचारी सुरेश चंद्र गुप्ता के नौकरी लगाने और पदोन्नति देने में कौन अधिशाषी अधिकारी व अध्यक्ष  शामिल रहे हैं?भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो संपूर्ण जांच व सही जांच करता है तो पालिका के अधिशाषी अधिकारियों और पालिका अध्यक्षों​ पर भी तलवार लटकना निश्चित होगा।

 गुप्ता पर आरोप है कि उसने पालिका प्रशासन की मिलीभगत करके फर्जी रूप से नौकरी प्राप्त की व उसमें फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। सुरेश चंद्र गुप्ता की सेवानिवृत्ति में कुछ महीने बाकी हैं। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप में जांच शुरू हुई है, इसीलिए कहा जाता है कि फाइल में दबा हुआ भ्रष्टाचार कभी भी राक्षसी रूप में अचानक प्रकट होता है तब सब कुछ तहस-नहस कर सकता है। सालों का खाया पिया और कमाया खतरे में डाल देता है।

 सुरेश चंद्र गुप्ता पर भ्रष्टाचार के आरोप कई सालों से लगते रहे हैं लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। 

सुरेश चंद्र गुप्ता पर आरोप है कि वह सच में अपंग नहीं है। उसकी केवल दो अंगुलियां ही आपस में जुड़ी हुई हैं।इसी का अपंगता प्रमाण पत्र पेश करके और नगर पालिका प्रशासन से मिलीभगत करके नौकरी प्राप्त की।आरोप यह है कि अपंगता का प्रमाण पत्र फर्जी  दिया गया था जो यूपी से प्राप्त किया दर्शाया गया। नगरपालिका सूरतगढ़ में कोई पद नहीं था फिर भी उसे नौकरी दी गई,स्थाई किया गया। गुप्ता  के विरोध में पत्रकार  कृष्ण सोनी आजाद ने एसीबी में शिकायत की है लेकिन कोई  व्यक्ति अकेला, अपने आप खुद नौकरी प्राप्त नहीं कर सकता,प्रशासन की मिलीभगत से ही फर्जी रूप से नौकरी प्राप्त की जा सकती है। नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका अध्यक्ष के हस्ताक्षरों से ही नौकरी और पदोन्नति मिल सकती है और वेतन दिया जा सकता है। गुप्ता के मामले में भी यही हुआ है। नगरपालिका में यह होता रहा है कि जो बाबू चेयरमैन का खास  होता है उसे लूट-खसोट में आगे और कमाई वाली सीट पर लगाया जाता है।  प्रशासनिक अधिकारी उसे लूट की छूट देते हैं ताकि उन्हें भी गड्डियां मिलती रहें। 

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बीकानेर टीम के एडिशनल SP रजनीश पूनिया के नेतृत्व में 23 जून 2017 को नगर पालिका से रिकॉर्ड जब्त किया  गया है। आरोप लगाने वाले पत्रकार कृष्ण सोनी 'आजाद' के बयान लिए गए हैं, वहीं सुरेश चंद्र गुप्ता के बयान लिए गए। इस प्राथमिक जांच की प्रक्रिया के जल्दी ही पूरी होने की संभावना है और उसके बाद पक्का मुकदमा।एसीबी की यही प्रक्रिया है। इस प्रकरण में केवल रिकॉर्ड है जो जब्त किया जा चुका उसकी जांच महीने 2 महीने में पूरी की जा सकती है। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार निरोधक विभाग इस जांच को कितनी जल्दी निपटा कर मुकदमा दर्ज करेगा। जांच में अधिशासी अधिकारियों व पालिका अध्यक्षों के भी बंधने की संभावना है,क्योंकि सुरेश चंद्र गुप्ता को नौकरी व पदोन्नति दी गई उसमें अधिशासी अधिकारी के साथ पालिका अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी हुए हैं। इन दोनों के हस्ताक्षरों के बिना कोई कार्यवाही पूरी नहीं होती।



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