Friday, June 2, 2017

दिल्ली में भूकंप केंद्र हुआ तो 90% आबादी खतरे में समा जाएगी







नई दिल्ली,2-6-2017.
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में आज भोर में भूकंप आया जिसका केंद्र बिंदु हरियाणा में था। रिएक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5 मापी गई। यह सूचनाएं भी आ रही है कि अगर रिएक्टर स्केल पर छह से अधिक आया तो दिल्ली पर भयानक खतरा होगा जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन कुछ सालों से जो रिपोर्ट भूगर्भ विशेषज्ञों की आ रही है उन पर गौर करना बहुत जरूरी है। दिल्ली में रहने वाले हों या दिल्ली आते-जाते रहने वाले लोगों को इस खतरे को समझना चाहिए। भूकंप कब लपेटे में ले ले इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।
मतलब यह है कि हर समय खतरा मंडराता रहेगा और दिल्ली वासी हर समय खतरे में ही रहेंगे क्योंकि जो बहुमंजिला भवन बन गए हैं उनका पुनर्निर्माण तो संभव नहीं है।
दिल्ली में तेज भूकंप आया तो यहां पर जान माल की भारी क्षति होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेज भूकंप की स्थिति में दिल्ली में करीब 90 प्रतिशत लोग अपनी जान गंवा देंगे।
इस रिपोर्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही फटकार लगा चुका है।
अप्रैल महीने में आए भूकंप के बाद आई रिपोर्ट के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निगमों की जमकर खिंचाई की थी। कोर्ट ने कहा था कि क्या तीनों किसी बड़ी आपदा का इंतजार कर रहे हैं? कोर्ट ने रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा था कि दिल्ली में सिर्फ 15 फीसदी इमारतों का निर्माण ही नियमों के मुताबिक किया गया है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बदर अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की पीठ ने कहा था कि एक हलफनामे के जरिए खतरनाक हालात का खुलासा हुआ कि दिल्ली नगर निगमों के इलाकों में 25 फीसदी इमारतें नियोजित या स्वीकृत इलाकों में आती हैं जबकि 75 फीसदी इलाका अनियोजित एवं अनधिकृत है।
 एक बार फिर शुक्रवार 2 जून तड़के करीब 4.26 बजे भूकंप के झटकों से दिल्ली-एनसीआर हिल गया। इसके साथ ही हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कुछ इलाकों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
यूएस जिअलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई है। भूकंप का केंद्र हरियाणा के गोहाना में जमीन से 22 किलोमीटर नीचे था। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए।
गौर करें कि भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तर-पूर्व के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से सीसमिक जोन-5 में आते हैं। उत्तराखंड के कम ऊंचाई वाले हिस्से, उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से और दिल्ली सीसमिक जोन-4 में आते हैं​।

बार-बार आ रहे भूकंप के झटके इस बात के सबूत हैं कि किसी-न-किसी दिन दिल्ली को भयावह भूकंप का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, 6 से ज्यादा की तीव्रता वाले भूकंप को दिल्ली झेल नहीं सकेगी और केवल 15 सेकेंड भी भारी तबाही के लिए काफी हो सकते हैं।

दिल्ली एनसीआर सीसमिक जोन 4 में आने
व भूकंप के खतरे की वजह थी कि पहले दिल्ली में बहुमंजिली इमारतें नहीं बनाई जाती थीं।

अब ऊंची ऊंची गगनचुंबी इमारतें भूंकप के खतरे को देखते हुए बेहद डरावनी नजर आती हैं। पूरा दिल्ली-एनसीआर का इलाका नियम कायदों को ताक पर रखे गए निर्माण की वजह से भूकंप के खतरों के करीब आ चुका है।
एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि हिमालय में एक बड़ा भूकंप आना तय है। हिमालय की हलचल वाली रेंज से दिल्ली केवल ढाई सौ किमी दूर है। अगर हिमालय में 7-8 की तीव्रता का भूकंप आता है तो फिर दिल्ली में तबाही को कोई नहीं रोक सकता​।

राजधानी दिल्ली और एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई स्‍थानों पर तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए।

पिछले एक-दो सालों के दौरान भूकंप की बढ़ती घटनाओं से पूरे दिल्ली-एनसीआर में चिंता की लकीरें गहराती जा रही हैं।

ऐसे में यह सवाल यह उठता रहा है कि अगर बड़ा भूकंप दिल्ली-एनसीआर में आया तो दिल्ली जैसे शहरों पर कितना असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों की मानें तो सिस्मिक ज़ोन-4 में आने वाले देश के सभी बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में भूकंप की आशंका ज्यादा है।
मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर सिस्मिक ज़ोन-3 की श्रेणी में आते हैं, ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक स्थिति है।

भूगर्भशास्त्री भी मानते हैं कि दिल्ली की दुविधा यह भी है कि वह हिमालय के निकट है जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था। ऐसे में धरती के भीतर की प्लेटों में होने वाली हलचल का खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दिल्ली में भूकंप के साथ-साथ कमज़ोर इमारतों से भी खतरा है। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली की 70-80% इमारतें भूकंप का औसत से बड़ा झटका झेलने के लिहाज़ से डिज़ाइन ही नहीं की गई हैं।
पिछले कई दशकों के दौरान यमुना नदी के पूर्वी और पश्चिमी तट पर बढ़ती गईं इमारतें ख़ास तौर पर बहुत ज़्यादा चिंता की बात है क्योंकि अधिकांश के बनने के पहले मिट्टी की पकड़ की जांच नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि ऐसी सभी इमारतें जिनमें 100 या उससे अधिक लोग रहते हैं, उनके ऊपर भूकंप रहित होने वाली किसी एक श्रेणी का साफ़ उल्लेख होना चाहिए। बावजूद इसके इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

दिल्ली की परेशानी का एक बड़ा कारण

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की एक बड़ी समस्या आबादी का घनत्व भी है। तकरीबन दो करोड़ की आबादी वाली राजधानी दिल्ली में लाखों इमारतें दशकों पुरानी हैं और तमाम मोहल्ले एक दूसरे से सटे हुए बने हैं। ऐसे में बड़ा भूकंप आने की स्थिति में जानमाल की भारी हानि होगी।

वैसे भी दिल्ली से थोड़ी दूर स्थित पानीपत इलाके के पास भूगर्भ में फॉल्ट लाइन मौजूद है जिसके चलते भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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