Wednesday, August 9, 2017

अशोक नागपाल भूकंप सूरतगढ़ गंगानगर में कहां आएगा


- करणीदान सिंह राजपूत- 

( 9 अगस्त 2017.को राधेश्याम गंगानगर के पोते की गिरफ्तारी के बाद मची हलचल में राजनीति में नए समीकरण निश्चित ही बनेंगे) 

अशोक नागपाल को भाजपा विस्तार कार्यक्रम में पार्टी में पुनः प्रवेश कराए जाने के बाद से भूकंपीय हलचल मची है। एक दम शांत चल रही  हलचल भूकंप के रूप में 2018 के शुरुआत में सूरतगढ़ या श्रीगंगानगर मैं विस्फोट करेगी।

भूकंप धरती के भीतर चट्टानों के खिसकने से आता है और उसका पूर्वानुमान अभी तक असंभव रहा है।नागपाल का पुनः प्रवेश राजनीतिक हलचल मचाए हुए है लेकिन यह हलचल ऊपर दिखाई नहीं दे रही। फिलहाल अनुमान लगाया जा रहा है की यह भूकंप सूरतगढ़ या श्री गंगानगर में एकदम से प्रकट होगा।

 अशोक नागपाल का निष्काशन हुआ तब बहुत ही विस्फोटक रूप में हुआ और समाचार तिरस्कार के रूप में जारी हुए और पढ़े गए।जिला अध्यक्ष पद से सीधा पार्टी से बाहर कर दिया गया। नागपाल का स्पष्टीकरण तक नहीं लिया गया।  बहुत बड़ा षड्यंत्र नागपाल के विरुद्ध हुआ और षड्यंत्रकारियों ने जयपुर में मामले को इस तरह से पेश किया कि अकेला नागपाल दोषी सिद्ध हो जाए। घटनाक्रम जिसमें नागपाल को आरोपित किया गया उस समय अशोक नागपाल अपने एकमात्र पुत्र के जीवन को बचाने के लिए जयपुर और बाद में दिल्ली गए हुए थे।  समय बड़ा विकट था। नागपाल को मालूम नहीं था कि कोई गहरा षड्यंत्र खेला जा रहा है। यह षड्यंत्र कोई दूसरी पार्टी के नेताओं ने नहीं खेला भाजपा के जिन नेताओं ने षड्यंत्र रचने में भूमिका निभाई वह इसी जिले के लोग हैं।नागपाल ने पार्टी का निर्णय शिरोधार्य किया और इतना ही कहा कि उनके पास बहुत कुछ मैटर है जो पार्टी के सामने रखेंगे।

 भाजपा नेताओं ने एक प्रकार से यह निर्णय भविष्य के चुनाव को देखते हुए शीघ्र ले लिया यह अच्छी बात है। नागपाल एकदम चुप और शांत है।

नागपाल ने अपने निष्काशन काल में जो मानसिक पीड़ाएं भोगी वह भुलाई नहीं जा सकती लेकिन राजनीति में अच्छा और बुरा समय आता जाता रहता है। नागपाल संघर्षशील जुझारु नेता रहे हैं। उनकी गहन चुप्पी आगे जारी रहेगी लेकिन राजनीतिक जानकारों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी में 2018 के चुनाव के वक्त महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत हैं।

 नागपाल का आगमन यह संकेत दे रहा है इसे अनुभव किया जा सकता है लेकिन लिखा  नहीं जा सकता,

 पढ़ा हीं जा सकता है  और  न प्रचारित किया जा सकता है। नागपाल की चुप्पी कुशल नेता होने का बड़ा संकेत है।

पहले लिखा गया 8-5-2017.

अपडेट 9-8-2017.







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