Sunday, May 14, 2017

राधेश्याम का सच उगलता बयान: कार्यकर्ताओं की बेकदरी और चुनाव के वक्त आते हैं याद




- करणीदानसिंह राजपूत-

भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व राज्यमंत्री राधेश्याम गंगानगर ने कार्यकर्ताओं की बेकदरी और चुनाव के वक्त ही कार्यकर्ताओं की याद आने का बयान देकर बहुत बड़ा गोला दाग दिया जिसका किसी के पास में जवाब नहीं था। इसी बैठक में खनन राज्यमंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी ने कहा कि कार्यकर्ता मनमुटाव भुलाकर चुनाव की तैयारियों में लग जाएं। इसी बैठक में जिला प्रभारी जसवीर सिंह ने कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की सीख दी। जिला कार्यसमिति की बैठक में राधेश्याम गंगानगर ने जो बयान दिया वह सब पर भारी है क्योंकि संपूर्ण श्री गंगानगर जिले की हालत यही है। किसी भी स्थान पर कार्यकर्ताओं का मान सम्मान नहीं है और प्रशासन उनके कहने पर बताए जाने पर कोई काम नहीं करता। गली और मोहल्ले में कार्यकर्ता ही आम लोगों से वादा करता है लेकिन कार्यकर्ता बार बार  अपमान सहन करके आख़िर चुप हो करके बैठ जाता है। अनुशासन की तलवार उस पर लटकाई हुई होती है कि वह अपनी बात पार्टी की बैठक में कहेगा लेकिन यह भी सच है कि बैठक जब जहां भी होती है चुने हुए जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के बयान ही होते हैं।कार्यकर्ताओं को बोलने की इजाजत तक नहीं होती ।जब बैठक में उनको बोलने ही नहीं दिया जाता तब वह अपनी पीड़ा किसके आगे रखें। देर सवेर यह पीड़ा कहीं न कहीं उजागर होती है और फिर समाचार बन जाते हैं । उस समय कार्यकर्ता को ही हड़काया जाता है लेकिन वहां के नेताओं को चुने हुए विधायकों को पूछा नहीं जाता की यह स्थिति क्यों आई? कार्यकर्ताओं की पूछ क्यों नहीं हुई। वर्तमान में श्री गंगानगर जिले की 6 विधानसभा सीटों में से 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक है। किसी ने इन विधायकों से यह नहीं पूछा कि उनके क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के कहे अनुसार काम क्यों नहीं होते? कार्यकर्ता नाराज क्यों है? कार्यकर्ता बेकद्री के कारण अपने अपने घरों में जा कर क्यों बैठ गए हैं ? राधेश्याम गंगानगर का यह कहना कि कार्यकर्ता चुनाव के वक्त ही याद आते हैं। यह भी एक महत्वपूर्ण सच है। अब वर्तमान विधानसभा को साढ़े तीन साल बीत चुके हैं व 2018 में चुनाव होंगे इसलिए अब कार्यकर्ताओं की पूछ होने लगी है, कार्यकर्ता याद आने लगे हैं। विधायकों को तो भारी भरकम वेतन-भत्ते आदि मिल जाते हैं,कार्यकर्ता तो अपने घर से रोटी खाते हैं और अपना काम धंधा छोड़कर जनता का कार्य कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। वहां पर बेकदरी हो तो कार्यकर्ता कितने दिन तक खुश रह सकता है?

सुरेंद्र पाल सिंह टीटी ने एक बात कही कार्यकर्ता मनमुटाव बुलाकर चुनाव में जुट जाएं। सुरेंद्र पाल सिंह टीटी के इस बयान पर सवाल पैदा होता है कि कार्यकर्ताओं का मनमुटाव किससे है? कार्यकर्ता दूसरे कार्यकर्ता से नाराज है या चुने हुए जनप्रतिनिधि से कार्यकर्ता नाराज हैं ?इन सवालों का भी उत्तर खोजा जाना चाहिए कि चुने हुए विधायक कब कब कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए और पूछा कि उनके काम हो रहे हैं या नहीं हो रहे? इसमें 5-7 प्रतिशत कार्य कार्यकर्ता के निजी भी हो सकते हैं। आम जनता के कार्य कराने वाले कार्यकर्ता अपने काम क्यों नहीं करवा सकते?वह भी तो जनता का हिस्सा ही होते हैं। कार्यकर्ताओं की नाराजगी मंडल अध्यक्षों मोर्चों के अध्यक्षों आदि से भी हो सकती है क्योंकि जो भी पदों पर बिठाए हुए हैं वे विधायकों की इच्छा से बिठाए हुए हैं तथा विधायकों की सोच के अनुरूप ही कार्य करते हैं।वे भी कार्यकर्ताओं का मान सम्मान नहीं करते। श्रीगंगानगर जिले में संपूर्ण में भाजपा कार्यकर्ताओं की यही स्थिति है जिसे राधेश्याम गंगानगर ने पार्टी की बैठक में साफ-साफ रख दिया। बैठक के बाहर यह बात रखी जाती तो राधेश्याम को विद्रोही कहते हुए भी देरी नहीं की जाती लेकिन यह बात बैठक के अंदर रखी गई। जिला कार्यसमिति की बैठक में श्री गंगानगर जिले की समस्त 6 विधानसभा सीटों पर विजय श्री हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। सवाल यह पैदा होता है कि जब कार्यकर्ता बेकदरी के शिकार हैं उनकी कोई पूछ नहीं है तो यह लक्ष्य गली गली और मोहल्ले मोहल्ले तक आखिर कौन पहुंचाएगा?अभी कुछ समय बाकी है,चुने हुए जनप्रतिनिधियों को विशेष हिदायत दी जानी चाहिए कि वे कार्यकर्ताओं की पूछ करें। बैठक करें तो उसमें खुद का भाषण देने के बजाय कार्यकर्ताओं को खुले रुप से बोलने की इजाजत दी जाए। अभी लक्ष्य कुछ भी रखें लेकिन गंगानगर जिले के किसान बेहद नाराज हैं चाहे वह सिंचित क्षेत्र हो चाहे बारानी टिबा क्षेत्र हो।आम जनता की नाराजगी बढी हुई है और वह छुपाए नहीं छुप रही। ऐसी हालत में जो समय बाकी बचा है उसमें सूझबूझ से पार्टी को काम करना चाहिए अन्यथा दावे कुछ भी होते रहें। 

पिछले चुनाव में श्रीगंगानगर और रायसिंहनगर सीट पर जमींदारा पार्टी ने जीत हासिल की और भारतीय जनता पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी ।इन दोनों सीटों को छोड़ कर एक बार विचार करें कि  अनूपगढ़ सूरतगढ़ सादुल शहर और श्रीकरणपुर के हालात क्या है?करणपुर क्षेत्र तो खनन मंत्री का क्षेत्र है उसमें भी नाराजगी है। सूरतगढ़ सीट पर शहर के कार्यकर्ता और टीबा क्षेत्र के कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं। जनता भी बेहद नाराज है। बाकी का समय बचा है उसी में सब कुछ करना है।

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