Monday, May 1, 2017

विधायक राजेंद्र सिंह भादू के सरकारी कानूनों के विपरीत मांगों का उद्देश्य क्या है


करणीदान सिंह राजपूत

श्रीगंगानगर, 30 अप्रेल।
सूरतगढ़ विधायक राजेंद्र सिंह भादू ने आज प्रभारी मंत्री की बैठक में एक ऐसी मांग रखी जो सरकारी तीन कानूनों​ के विरुद्ध और उच्च न्यायालय आदेश के विपरीत है।भादू ने बैठक में कहा कि जोहड़ पायतन, गोचर भूमि और वन विभाग की आरक्षित जमीनों पर जिन लोगों ने मकान बना लिए हैं उनको पट्टे दिए जाएं। प्रश्न है कि इन स्थानों पर कब्जेधारियों को पट्टे क्यों दे दिए जाएं और सरकार ने कब अपने नियमों का परिवर्तन कर लिया है?
सरकार ने स्पष्ट रूप से कानून बना रखा है कि जोहड़ पायतन के अतिक्रमण होने नहीं दिए जाएं और उन्हें खाली कराया जाए।
 एक तरफ जल संसाधन का अभियान है कि प्राकृतिक जल्द संसाधनों जोहड़ों आदि की सुरक्षा की जाए। इ इससे ग्रामीण क्षेत्रों को पानी उपलब्ध होता है और भूमि में भी पानी रिचार्ज होता है। सरकार ने जोड़ों की खुदाई पर पिछले कई सालों से करोड़ों रुपए खर्च किए हैं जोहड़ पायतन अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रशासन के पास अनेक गांव के लोगों के मांगपत्र पड़े हैं लोग जोड़ों की सुरक्षा चाहते हैं वहां पर अक्षर अतिक्रमण वे क्यों निश्चित रूप से इसमें 5-10 गरीब लोगों की आड़ में अनेक भू माफिया ने कब्जे कर रखे हैं जिनका सत्ताधारियों से किसी ने किसी प्रकार का लिंक रहता आया है।यही कारण है कि कब्जे होते हैं और प्रशासन जानबूझकर हटाने की कार्यवाही नहीं करता।

 सरकार गौरक्षा के लिए अभियान चलाए और भादु बाबूजी मांग करें कि गोचर भूमि पर जिन लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है मकान बना लिए हैं उनको पट्टे दे दिया जाए गांव में वैसे भी चारागाहों की निरंतर कमी रहती आ रही है चारागाह विकसित नहीं हो रहे हैं पशुधन के लिए चारागाह का और जीव जंतुओं के लिए चारागाह का होना बहुत जरूरी है।
वन विभाग की आरक्षित भूमि पर भी अतिक्रमण कर मकान बनाने वालों को भी पट्टे दिए जाने की मांग की है।
एक विचारणीय बिंदु है कि वन संरक्षण क्षेत्र केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के अधीन होता है। वन भूमि पर वन विभाग ने अनदेखी कर के अतिक्रमण क्यों होने दिए।जो अधिकारी जिम्मेवार रहे हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही भी होनी चाहिए। र राजस्थान में वैसे भी वन क्षेत्र बहुत कम है और इन को सुरक्षित रखने के लिए अनेक बार निर्देश जारी किए हुए हैं।

वन विभाग की जमीन का खेती के लिए आवंटन कर देने के एक प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सूरतगढ़ के तहसीलदार SDM हर्षवर्धन सिंह के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया जो अदालत में विचाराधीन एक मामला दिल्ली का है वन विभाग की जमीन पर बाघ लगाया हुआ 10 साल बाद पुलिस की मदद से खत्म करवाया गया था।

इससे किन लोगों को लाभ पहुंचाने की योजनाएं है? ग्रामीण इलाके के लोग प्रशासन को बार-बार मांग करते रहे हैं कि जोहड़ पायतन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए ऐसे में इस मांग का जिला स्तरीय मीटिंग में रखना पूर्ण रुप से गलत है। सूरतगढ़ में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ओर से एक स्वतंत्र मंच बनाकर आंदोलन किया गया था जिसमें मांग की गई थी कि जोहड़ पायतन की जमीन ने खाली करवाई जाए और उसके बाद एक समझौता हुआ था।।
 आखिर इन मांगों के पीछे भादू किन खास लोगों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं?
तीनों विभागों के लिए आरक्षित जमीन पर किसी भी हालत में अतिक्रमण नहीं होना चाहिए स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन के यह प्रथम ड्यूटी बनती है लेकिन आश्चर्य है कि विधायक प्रस्ताव रखे और वह प्रस्ताव सरकार को भेजा जाए सरकार ने अंबेडकर दिवस पर पट्टे या भूखंड नहीं होने वालों को पट्टे देने की योजना शुरू की इस योजना में इस प्रकार का कोई कथन राज्य सरकार की ओर से पहले जारी नहीं किया गया था इस तरह से तो गांव में गरीबों के चक्कर में जमीनों पर कब्जे करते रहेंगे।

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