Saturday, July 8, 2017

अतिक्रमणों​ से रोती बीकानेर रोड: कब्जे हटेंगे वक्त आ ही गया:

- करणीदानसिंह राजपूत-

सूरतगढ।

एकमात्र मुख्य सड़क बीकानेर रोड दुकानदारों के अतिक्रमण से पिछले कई सालों से रो रही है।इसका विलाप दुकानदारों ने नहीं सुना। कुछ लोगों ने आवाज उठाई,समाचार दिए, प्रशासन को लिखित में शिकायतें की मगर हालात बद से बदतर होते रहे। नगरपालिका की मिलीभगत अनदेखी और भाई भतीजावाद के कारण दुकानदार फुटपाथों पर काबिज हुए। किसी ने फुटपाथ चार पांच फुट ऊपर उठाकर के सामान रखा और कुछ ने दुकानें ही बना लीं।यह खेल सब देख रहे थे और आज भी देख रहे हैं।हालात यह हो रहे हैं कि फुटपाथ पर तो कब्जा किया ही उसके आगे भी स्लोप बनाकर कब्जा कर लिया जिस पर कोई आवागमन नहीं कर सकता।  अगर और छूट दे दी जाए तो दुकानदार पगडंडी का रुप बना करके दिखा देंगे। जितना अधिक पैसे वाला और जितना अधिक पढ़ा हुआ है उसका उतना ही अधिक लंबा चौड़ा कब्जा देखा जा सकता है। नगरपालिका की मिलीभगत से यह खेल चलता रहा।आगे भी इन कब्जों को कोई हटाने वाला नहीं था लेकिन अब वक्त आ गया। विधायक व सानिवि  अधिशाषी अभियंता ने समझाइश कर ली, लेकिन अतिक्रमण करने वाले कभी नहीं समझते व अपनी सहमति नहीं देते। जिस दिन फाइनल आर्डर जारी होगा, उसके बाद देखते रहना कौन-कौन व्यक्ति जो अपने आप को बड़ा कहते हैं वह खुद लगेंगे कब्जा हटाने या मजदूरों को लगाएंगे कब्जा हटाने के लिए। यह वक्त आ गया है। गौरवपथ का निर्माण मामूली बात नहीं, वह हर हालत में किया जाएगा और उसकी चौड़ाई जितनी है,उतने में ही वह निर्माण होगा। किसी दुकानदार के कहने से उसकी चौड़ाई कम नहीं होगी। दुकानदारों की इच्छा को मानें तो सच में वह कहेंगे की पगडंडी से काम चल जाएगा। सालों से यह स्थिति देखी जा रही है।अनेक बार फोटो सहित समाचार छपे हैं, लेकिन अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों को सड़क पर तरस नहीं आया और पैदल चलने वालों पर तरस नहीं आया। फुटपाथ का मतलब ही पैदल चलने वालों के लिए जगह है लेकिन वह जगह जबरदस्ती कब्जे में कर ली गई।हो ना तो यह चाहिए के सबको एक बार कहा जाए और बाद में नहीं हटाए कब्जे तो पालिका प्रशासन कब्जे हटाए और साथ में सड़क पर अतिक्रमण करने का मुकदमा भी कायम करें। ऐसा ही नियम है रास्ता कोई भी व्यक्ति चाहे कितना ही प्रभावशाली हो वह रोक नहीं सकता चाहे सड़क को चाहे Footpath हो। यहां पर चित्र दिए जा रहे हैं।देखें बीकानेर रोड को रोते हुए।मामूली बात नहीं लाखों रुपए की दुकान बनाते हैं, शोरूम बनाते हैं तो उसमें घुसने के लिए प्रवेश के लिए ग्राहक को अच्छी सीढ़ियां अच्छा फुटपाथ दिया जाना चाहिए लेकिन अतिक्रमण करके फुटपाथ गायब कर दिए गए।यहां तक कि फुटपाथों के नीचे अंडर ग्राउंड दुकानें  बना ली गई। अब वक्त आ गया है। ये सब अति क्रमण हटेंगे हटेंगे और हटेंगे।

नगरपालिका ने अतिक्रमणों को हटाने का प्लान बना कर निदेशालय को भिजवा दिया है।

लिखा गया 18-4-2017.

अपडेट   8-7-2017.


















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