मंगलवार, 14 मार्च 2017

सूरतगढ़ पालिका ठेकेदारों के अच्छे दिन बहुत दूर: अटके लाखों रू कौन दिलाए


-  करणीदान सिंह राजपूत  -

 सूरतगढ़।

 नगर पालिका सूरतगढ़ में विकास कार्य करने वाले ठेकेदारों के अच्छे दिन बहुत दूर हैं। ठेकेदारों के लाखों रुपए  पालिका में अटके पड़े हैं और कोई तिथि तय नहीं है कि उनका भुगतान कब होगा? ठेकेदारों को बाजार से यत्र तत्र विभिन्न सामग्री उधार लेनी पड़ती है जिसका भारी भरकम व्याज भी लग रहा है

ठेकेदारों के पास ऐसा कोई मजबूत जैक नहीं है जो नगरपालिका प्रशासन पर खासकर पालिका अध्यक्ष पर दबाव बनाकर  अपना रुका हुआ लाखों रुपए का भुगतान ले सके।

 ठेकेदारों में एकता नहीं है। हर ठेकेदार चाहता है कि उसका भुगतान पहले मिल जाए। नगर पालिका में करीब 20 पार्षद मित्रों रिश्तेदारों के नाम से ठेकेदारी में गुप्त रूप से जुड़े हुए हैं। जो निर्माण कार्यों पर उपस्थित मिलते हैं। इस प्रकार के सभी ठेकों का भुगतान वक्त पर हो रहा है।लेकिन जो असल में बिना पार्षदों के ठेकेदारी कर रहे हैं उनका निर्माण का भुगतान बाकी है जो लाखों रुपए बनता है।

 इन ठेकेदारों के अच्छे दिन बहुत दूर हैं। कोई अच्छा जैक मिले तो भुगतान मिल जाए अन्यथा अच्छे दिनों का न जाने कितने समय तक इंतजार करना होगा?

 भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में दिल्ली में खुशियां मना रही है उत्तर प्रदेश की जीत की। सारा देश यत्र तत्र खुशियां मना रहा है। सूरतगढ़ में भी गुलाल खेला गया है लेकिन ठेकेदारों के पास कोई जैक नहीं जो भुगतान दिलवा सके और उनके लिए भी अच्छे दिन ला सके।

 नगर पालिका बोर्ड यहां भारतीय जनता पार्टी का है जिसमें अध्यक्ष पद श्रीमती काजल छाबड़ा के पास है। नगर पालिका बोर्ड को गठन हुए ढाई साल बीत चुके हैं। नए नियमों के अनुसार तीन चौथाई संख्या में पार्षद होने पर तख्ता पलटा जा सकता है लेकिन यहां इतने पार्षद जुटाना बहुत मुश्किल है। यहां काजल छाबड़ा सहित 35 पार्षद हैं और काजल को हटाने के लिए 26 पार्षद चाहिए। इस हालत में काजल छाबड़ा का तख्तापलट नहीं हो सकता। काजल छाबड़ा को खुद सहित 10 पार्षद चाहिए। मतलब कि उनके पास 9 पार्षद हों तो कोई भी कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। काजल छाबड़ा के पास करीब 30 पार्षद माने जाते हैं। उनका राज 5 साल का बिना किसी बाधा के पूरा होगा। 

पालिकाध्यक्ष की ऐसी मजबूत स्थिति में नगर पालिका में ठेकेदारों का अटका हुआ भुगतान कैसे मिले, और ठेकेदारों के अच्छे दिन कैसे आए? भाजपा नगर मंडल में कोई पावरफुल नेता पदाधिकारी नहीं है जो पालिका प्रशासन पालिका अध्यक्ष को दबाव से भुगतान का कह सके। ऐसी स्थिति में ठेकेदारों को ही पावरफुल जैक की तलाश करनी होगी,जिसके कहते ही या ईशारा करते ही अटका हुआ रूपया तुरंत मिल जाए। तब अच्छे दिन आ पाएंगे।



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