Sunday, March 19, 2017

भगवा साधुत्व व केसरिया बलिदानी जीवन को आतंकवाद बताना मूर्खता है


- करणीदान सिंह राजपूत - 


उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद से भगवा आतंक और कट्टर हिंदूवादी आदि शब्दों से बहस चलाई जा रही है।ऐसा लग रहा है की अच्छे अच्छे महान पत्रकार व लेखक भी कल्पना की कथाएं लिख रहे हैं और उनको अपने सपनों के हिसाब से सारांश में आतंकवाद साबित करते हुए पूर्ण कर रहे हैं।

भगवा वस्त्र धारण करना बहुत मुश्किल है। हर कोई भगवा धारण नहीं कर सकता। भगवा धारण करने में वर्ष पर वर्ष बीत जाते हैं और कई सालों बाद व्यक्ति इस गौरवपूर्ण जीवन को अपनाने के लिए तैयार होता है।

 भगवा केवल वस्त्र नहीं है। यह साधुत्व की गौरवगाथा है। आजकल भगवा कृत्रिम रंग से रंग लिया जाता है लेकिन पहले कपड़ों को गेरू से रंगा जाता था। भगवा का एक एक पल साधुत्व की पहचान कराता है । भगवा जीवन को समझना बहुत मुश्किल है। 


भगवा धारण करने वाले को सत्ता में आने पर भगवा आतंकवादी की संज्ञा से विभूषित करना, आलोचना करना, अविश्वास करना केवल मूर्खता का परिचायक है। 

जो लोग इस प्रकार की आलोचना करते हैं,लिखते हैं, या मुंह से बोलते हैं,वे सच में भगवा वस्त्र की व्याख्या ही नहीं जानते।भगवा वस्त्र हजारों सालों से भारत में और अन्य देशों में भी धारण किए जाते रहे हैं लेकिन भगवाधारी कहीं विनाश के दूत बने हों ऐसा इतिहास में नहीं मिलता।  केवल सत्ता में आने से साधुत्व को  आतंकवाद बतलाना बुद्धिहीनता व मूर्खता है। 


भारतवर्ष में कहीं एक भी उदाहरण भगवा आतंकवाद का नहीं मिलता। अभी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुना गया है। उनके कार्यकाल को देखा जाना चाहिए।


 ऐसा लग रहा है की परीक्षक बने लोग उत्तर पुस्तिका को देखे बिना ही परीक्षार्थी को अनुत्तीरण करने में लगे हैं,और शून्य अंक दे कर जोर शोर से प्रचारित भी करने में लगे हैं। अनेक लोग जो खुद को बड़े मीडियाकर्मी पत्रकार बड़े राजनेता राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि मानते हैं वे अपने आप को सबसे बड़ा सबसे अधिक बुद्धि वाला साबित करने के लिए तेज से तेज आवाज में बोलना शुरू कर चुके हैं।उनके अधिक बोलने से जोर जोर से चिल्लाने से अशिष्ट भाषा की शैली में लिखने से भगवा साधुत्व आतंकवाद में परिवर्तित नहीं माना जा सकता।

भगवा हजारों सालों से जीवन देने का पहनावा माना गया है। जो पहनावा जीवन देता है वह कभी किसी के प्राण नहीं लेता। भगवा कभी प्राण लेने की सोच भी नहीं सकता। भगवा राजनीति में आए और सत्ता के शिखर पर पहुंच जाए तब वह अपने संपूर्ण क्षेत्र में जीवनदाता के रूप में सामने आता है। प्रतिपक्षी या आलोचक उसे आतंकवादी के रूप में प्रचारित करें समाज में भय पैदा करें तो वह शोभनीय नहीं कहा जा सकता। इस प्रकार की कार्यवाहियां कभी अधिक समय तक चल नहीं पाती।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का चयन होना कुछ पत्रकारों लेखकों के गले नहीं उतर रहा मगर उनके कहने से लिखने से योगी आदित्य नाथ आतंकवादी नहीं हो सकते। कई सालों का जीवन होता है भगवा वह कुछ पल की सत्ता में आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता। 

भगवे पर भरोसा करना ही अच्छा रहेगा लेकिन जो  भरोसा नहीं करना चाहते उन लोगों को समय की चाल को कुछ  इंतजार करके समझना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ के कार्य को मासिक, 6 माही,सालाना के हिसाब से समीक्षा करके फिर अपने विचार प्रगट करने चाहिए। 

भगवा के साथ केसरिया पर भी बहस चल रही है बहुत कुछ लिखा जा चुका है और आगे ना जाने कितना नासमझ लोग लिखते रहेंगे।

केसरिया पहनावा धारण करना भी आसान नहीं है। केसरिया पहनावा प्राणों का त्याग करने की गारंटी देता है। आज कोई भी व्यक्ति समाज को अपने प्राण त्याग करने की गारंटी नहीं देता। अधिकांश लूटपाट की सोच में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों को मालूम ही नहीं है की केसरिया वस्त्र धारण करना कितना गौरवपूर्ण है। केसरिया धारण करने का मतलब है कि देश के लिए जब जरूरत होगी प्राण त्याग करने में पीछे नहीं हटूंगा।

 इतिहास इसका गवाह है। भगवा और केसरिया को आतंकवाद कहना पूरी तरह से नासमझी और मूर्खता की बात है।जो लोग अपने किन्हीं कारणों से तात्कालिक प्रतिक्रिया में भगवा और केसरिया को आतंकवाद से जोड़ने में लगे हुए हैं उन्हें कुछ समय के बाद यह मालूम होगा की सच में आतंकवाद क्या है? उसके दुष्परिणाम भारत देश कितने सालों से भोग रहा है।

सच में तो यह होना चाहिए कि जो आतंकवाद भारत के लोग किसी न किसी रूप में सहन कर रहे हैं वह सदा सदा के लिए इस धरती से समाप्त हो जाए।


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