Saturday, March 25, 2017

गंगाजल मील को ही सूरतगढ़ से तीसरी बार कांग्रेस टिकट संभावित

करणीदानसिंह राजपूत  - 

जयपुर से आ रही राजनीति की हवा से लग रहा है कि कांग्रेस की ओर से सूरतगढ़ सीट पर आगामी 2018 के चुनाव में गंगाजल मील को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारने की प्रबल संभावना है। 


सूरतगढ़ में भाजपा के राजेंद्र सिंह भादू को पटखनी देने में गंगाजल मील को ही मजबूत माना जा रहा है।

उच्चस्तरीय नेताओं में माना जा रहा है कि गंगाजल मील का दबदबा पब्लिक टच के सूरतगढ़ के सरकारी विभागों में कम नहीं हुआ है। राजस्व,  पुलिस और नगर पालिका में  गंगाजल मील का कहना चल रहा है।

 गंगाजल मील की पुलिस राजस्व और नगर पालिका में अभी भी अच्छी पकड़ है।

 अधिकारी और कर्मचारी मील के निर्देश पर काम करते हैं और काम इधर उधर भी कर देते हैं। 

भारतीय जनता पार्टी के इन सवा तीन साल के शासन में कांग्रेस की ओर से जितने प्रदर्शन हुए हैं वे मील के बिना संभव नहीं हुए। कांग्रेस पार्टी का संचालन सूरतगढ सीट पर मील ही कर रहे हैं।

गंगाजल मील के अलावा पार्टी में ऐसा व्यक्ति नजर नहीं आ रहा जिसे भाजपा को हराने की ताकत वाला माना जाए।

गंगाजल मील  2008 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उन्होंने निर्दलीय रूप से चुनाव में उतरे राजेंद्र भादू को और भाजपा के रामप्रताप कासनिया को पराजित किया था। राजेंद्र भादू उस चुनाव में दूसरे नंबर पर और भाजपा के कासनिया तीसरे क्रम पर रहे थे। हालांकि 2013 के चुनाव में मील राजेंद्र भादू से पराजित हुए तीसरे क्रम पर पहुंच गए थे। इसके बावजूद

गंगाजल मील का दबदबा सरकारी कार्यालयों में कम नहीं होना बहुत बड़ी ताकत माना जा रहा है। उक्त चुनाव में बसपा के डूंगरराम गेदर दूसरे क्रम पर रहे थे लेकिन सरकारी विभागों में ताकतवर पकड़ नहीं है इसलिए सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस को ही ताकत माना जा रहा है। गंगाजल मील के अलावा जयपुर में किसी अन्य राजनीतिक नेता का संपर्क नहीं है। गंगाजल मील को फिर से सूरतगढ़ सीट पर उतारे जाने की संभावना में ये संपर्क एक ताकत के रूप में काम आ रहे हैं।

कांग्रेसी नेताओं का यह मानना है कि भारतीय जनता पार्टी जनता से दूर हो रही है और उस को पराजित करना अधिक कठिन नहीं है,मगर राजेंद्र भादू ने 2013 के चुनाव में जीतने के बाद सूरतगढ़ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों पर अपनी राजनीतिक सूझबूझ से कार्यकर्ताओं की ऐसे टोलियां बना ली हैं जो भादू के लिए चुनाव में पूरा जोर लगाएंगे।

भाजपा की ओर से राजेंद्र भादू को ही सीेटिंग एमएलए मानते हुए टिकट दी जाएगी। इसलिए भादू का मुकाबला करने के लिए मील को ही सशक्त माना जा रहा है।

 आने वाले डेढ़ साल में राजनीतिक उठा पटक कांग्रेस पार्टी में होने की कोई संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही। कांग्रेस पार्टी के उच्च स्तरीय नेता मील को अलग करने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस को मील के अलावा कोई अन्य मजबूत नेता नजर नहीं आ रहा। 

मील के पास अभी भी हर  सहयोग करने के लिए सशक्त मीडिया भी है जो चुनाव में मील को विजयी बनाने में पूरी ताकत लगा देगा।

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