रविवार, 26 फ़रवरी 2017

सूरतगढ़ के फर्जी अखबार और मालिक भी फंसेंगे


- करणीदान सिंह राजपूत -

भारत सरकार  ने शिकायतें  मिलने और जांच के बाद 277 अखबारों की मान्यता रद्द कर दी है जो असल में छपते ही नहीं थे केवल विज्ञापन के लिए फाइल कॉपीयां छापते थे। इनसे वसूली की कार्यवाही भी होने की संभावना है। सूरतगढ़ में भी अखबार और मालिक विज्ञापनों के लिए फर्जी प्रतियां बहुत अधिक दिखाने का अपराध करने में लगे हुए  हैं। 

पिछले कई सालों से यह हो रहा है प्रेस के फर्जी बिल, कागज के फर्जी बिल,कागज की ढुलाई के फर्जी बिल।अन्य खर्चों के फर्जी बिल। वितरण एजेंसीयों के नाम फर्जी।सब कूट रचित होते हैं। ऐसे अखबारों के मालिकों पर कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और सरकार को धोखा देने व आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में  मुकदमा चल सकता है। भारतीय दंड संहिता के अनुसार 7 साल से अधिक की कड़ी सजा मिल सकती है। सूरतगढ़ में लोगों को मालूम नहीं कि कितने साप्ताहिक अखबार पाक्षिक अखबार यहां से छप रहे हैं और सरकारों से विज्ञापन भी ले रहे हैं।दैनिक अखबार हैं वे भी हजार दो हजार प्रतियां छापते हैं लेकिन कई गुना, 40से  50 गुना अधिक प्रतियां दिखाते हैं। सच्चाई यह है कि उनके पास स्टाफ तक नहीं।सूरतगढ़ के अखबारों पर यह कार्यवाही कब होती है? कार्यवाही होना तो निश्चित है। एक अखबार के विरुद्ध शिकायत हुई थी जिसको अभी तक जांच के दौर से गुजरना पड़ रहा है।

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