Wednesday, May 10, 2017

महिला बीडियो करे न काम, सत्तापार्टी की महिला प्रधान बेबस लाचार

प्रधान बिरमादेवी नायक की पुकार नहीं सुनते विधायक और मंत्री- 2 मार्च से धरने की धमकीः

विकास अधिकारी रोमा सहारण पर कार्यवाही हुई तो दूसरे पक्ष की चेतावनीः

प्रधान और बीडियो की खटपट का सच क्या है?


- टिप्पणी करणीदान सिंह राजपूत 

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25-2-2017.

Update 10-5-2017.

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सूरतगढ़ 25 फरवरी 2017़ सूरतगढ़ पंचायत समिति का प्रधान का पद आरक्षित है जिस पर भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती बिरमा देवी नायक पदासीन हैं। उन्हें इस पद पर निर्वाचित कराने में विधायक राजेंद्र सिंह भादू और पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया का पूर्ण सहयोग रहा था।श्रीमती बिरमा देवी नायक ने 23 फरवरी को बीडियो पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह चेतावनी तक दे डाली कि बहुत आहत हो चुकी हैं तथा 2 मार्च को पंचायत समिति के समक्ष धरना शुरू कर देंगी।

बिरमा देवी ने 23 फरवरी विशेष दिन चुना जिस दिन राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ है। बिरमा देवी ने बीडियो पर जातिगत भेदभाव, अशिष्ट व्यवहार  व आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया है। प्रधान ने यह गंभीरता दर्शाई है की बीडियो के व्यवहार से पंचायत समिति क्षेत्र में विकास कार्य ठप हैं, योजनाओं के लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे हैं । 2 माह से स्टैंडिंग कमेटी की बैठक नहीं हुई और वह खुद पिछले डेढ़ महीने से पंचायत समिति में अपने कार्यालय में नहीं जा रही हैं। सत्ताधारी प्रधान का प्रेस के माध्यम से कुछ कहना यह साबित करता है कि मामला गड़बड़ जरूर है। प्रधान ने यहां तक कहा है कि विधायक व पंचायतीराज मंत्री को अवगत कराते हुए बीडियो के स्थानांतरण की मांग की गई लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। यह आश्चर्यजनक है जिस विधायक ने बिरमा देवी को प्रधान बनाते हुए दिन रात एक किया वह बिरमा देवी की आरोप और मांग पर आखिर बीडियो का स्थानांतरण क्यों नहीं करवा रहे? पंचायती राज मंत्री को भी सूचित किया गया।

आखिर सत्ताधारी पार्टी की प्रधान लाचारी में कितने दिन व्यतीत करे? जब सुनवाई नहीं हुई तब आखिरी कदम उठाया और अपनी बात को प्रेस के माध्यम से सबके बीच में रखा। 

दोनों के बीच खटपट क्यों हुई? कब से शुरु हुई?  प्रधान ने विधायक और पंचायती राज मंत्री को सबसे पहले कब अवगत करवाया? इसमें निश्चित है कि विधायक को सबसे पहले अवगत कराया होगा। वैसे भी गांव में कार्य नहीं हो तो प्रधान पर आरोप लगते हैं और उनसे पूछा भी जाता है कि काम क्यों नहीं हुए? यह एक प्रधान का सवाल नहीं है सभी प्रधानों से जनता पूछती रहती है। सूरतगढ  पंचायत समिति का सारा क्षेत्र सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आता है, तो निश्चित है कि विधायक राजेंद्र सिंह भादू को हर एक बात का मालूम है। विधायक को अगर मालूम नहीं तो बिरमा देवी के कहने के बाद आरोप लगाने के बाद उनको तथ्यों की जांच करते हुए सच्चाई का पता अवश्य लगाना चाहिए था। जब उनके द्वारा निर्वाचित करवाई गई प्रधान करीब डेढ़ माह से कार्यालय में नहीं जाए इससे बड़ी और गंभीर बात सत्ताधारी पार्टी के लिए कोई दूसरी नहीं हो सकती। निर्वाचित प्रधान कोई भी कार्य  करवाना होगा तो विकास अधिकारी को ही निर्देशित करेगी। हरेक कार्य लिखित में दिया जाना संभव भी नहीं हो सकता।

यहां स्पष्ट करना चाहूंगा कि कोई भी निर्वाचित पदाधिकारी चाहे प्रधान हो या अन्य पद पर हो,वह हाथ जोड़कर तो काम करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी को नहीं कहेगा। बिरमा देवी के साथ सच में क्या हुआ? क्या व्यवहार उसके साथ किया गया? वह व्यवहार जातिगत था या नहीं था? इन सबका मालूम करना विधायक का पहला कर्तव्य था।

 उसके बाद बात संगठन की आती है तो भाजपा जिसने इलाके में विकास के वादे किए तो उसे एक सूरतगढ़ की ही नहीं कम से कम श्री गंगानगर जिले की सभी पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों पर ध्यान देना रखना चाहिए था। विधायक राजेंद्र सिंह  भादू ने सूरतगढ़ में विधायक सेवा केंद्र स्थापित कर रखा है कि हर व्यक्ति की शिकायत सुनी जाए और उसका निस्तारण किया जाए। ऐसे में यह कितना आश्चर्यजनक लगेगा कि इतनी बड़ी पंचायत समिति की प्रधान लगातार अपनी बात कहे और सुनी नहीं जाए तब आम जनता की बात सुनी जाती हो पर सवाल उठेंगे ही।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रधान क्यों रहे लाचार और क्यों करें विलाप जब कहीं सुनवाई नहीं हो? इस सुनवाई न होने के पीछे भी सवाल पर सवाल उठेंगे।

स्थानीय विधायक सुनना नहीं चाहते तो समझना चाहिए कि वे क्यों नहीं सुन रहे।

 अब बात आती है दूसरे पक्ष की यानी विकास अधिकारी रोमा सहारण सहारण की। उनके पक्ष में प्रतिनिधिमंडल 24 फरवरी को अतिरिक्त जिला कलक्टर से मिला और मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन दिया। 

मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में प्रमुख रुप से कहा गया कि विकास अधिकारी ग्राम पंचायतों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य करवाती है,अगर विकास अधिकारी के विरुद्ध किसी भी तरह की कार्यवाही हुई तो जनप्रतिनिधि सरपंच व स्टाफ की ओर से प्रदर्शन किया जाएगा। यह भी लिखा गया है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से कभी भी बीडियो की शिकायत नहीं हुई न आरोप लगाया गया।  प्रधान की ओर से बार-बार विकास अधिकारी की शिकायत उच्चाधिकारियों से करके चार्ज सीट दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में सरपंच आदि ग्रामसेवक आदि थे। रोमा सहारण पर प्रधान के लगाए आरोप कितने सच और कितने झूठ हैं? यह तो विस्तृत जांच से  ही मालूम होगा व सच्चाई सामने आ जाएगी। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य पेश करना चाहता हूं की रोमा सहारण की शिकायत प्रधान ने तो अब की है लेकिन रोमा सहारण की कार्यशैली ढीली रहने,समय पर काम पूरे नहीं किए जाने के नोटिस जिला प्रशासन पहले काफी महीनों से देता आ रहा है। जिला प्रशासन ने आखिर नोटिस क्यों दिए, अगर रोमा सहारण का कामकाज ठीक होता तो जिला प्रशासन कभी जवाब तलबी नहीं करता? जिला प्रशासन का रिकॉर्ड देखें कि कितनी बार रोमा सहारण को नोटिस दिए गए? रोमा सहारण के कार्यकाल की समीक्षा की जाय तो विकास के दावे सवालों के घेरों में होंगे।

 प्रधान बिरमादेवी और विकास अधिकारी रोमा सहारण के खटपट की जांच की जाए तो उसमें जिला प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिसों और जो जवाब तलब किए गए उन नोटिसों को शामिल अवश्य करना चाहिए।

 सरकारी अधिकारी बहुत ऊंचे पदों पर और बहुत ऊंचे वेतनमानों पर नियुक्त होते हैं लेकिन वह कितना कार्य कर पाते हैं या करते हैं। यह समीक्षा जिला प्रशासन लगभग हर महीने करता है और हर योजना पर करता है। यह जांच निश्चित रूप से समय लेगी इसलिए स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए। बिरमा देवी नायक ने स्पष्ट चेतावनी दी है की बीडियो का स्थानांतरण नहीं हुआ तो पंचायत समिति कार्यालय के आगे धरना शुरू कर देंगी,अगर यह धरना 2 मार्च को शुरू हो गया तो सत्ताधारी पार्टी के विधायक के लिए और सरकार के लिए कितना उचित और अनुचित होगा यह आकलन पहले हो जाना चाहिए।

 टिप्पणी बंद करते हुए यह लिखना चाहता हूं की दोनों पक्ष समझदारी रखें।


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