Saturday, February 25, 2017

277 झूठे अखबारों की मान्यता रद्द: राजस्थान में संभावना:

नई दिल्ली 25 फरवरी 2017.

भारत की  केन्द्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश के 277 अखबारों की मान्यता समाप्त कर दी है। मोदी सरकार ने ‘स्वच्छ अखबार’ अभियान के तहत यह बड़ा कदम उठाया है। इस अभियान में उन 277 अखबारों की मान्यता खत्म कर दी गई है, जो केवल विज्ञापन लेने के लिए अखबार प्रकाशित करते थे। पिछले एक साल में इन प्रकाशनों ने करीब दो करोड़ रुपए के विज्ञापन लिए।

एक-एक प्रिंटिंग प्रेस से 70 अखबार छापे जा रहे थे। सरकार केवल आफिस कापी छापने वाले अखबारों से विज्ञापन की राशि वापस लेने की कार्रवाई भी शुरू कर सकती है और उन नौ प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है, जो एक दिन में 70 से अधिक अखबार छाप रहे थे।


गौरतलब है कि सरकार को काफी दिनों से यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ अखबार अधिकारियों की मिलीभगत से केवल सरकारी विज्ञापन के लिए ही अखबार छाप रहे हैं। सामान्य तौर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के विज्ञापन पाने के लिए कुछ लोग प्रिंटिंग प्रेस, डीएवीपी और राज्यों के सूचना निदेशालयों के साथ मिलकर केवल आधिकारिक कापी छापते हैं और उनको दिखाकर विज्ञापन ले लेते हैं। डीएवीपी के नियम के अनुसार प्रत्येक प्रकाशक को हर महीने अपने अंकों को जमा करना होता है। छोटे अखबारों को सीए सर्टिफिकेट देने की भी छूट है। प्रकाशक डीएवीपी में जमा करने लायक ही अखबार छापते हैं और बाजार में उनकी उपस्थिति नहीं होती है। उनका मार्केट में कहीं नामो निशान नहीं होता है। वे केवल सरकारी कागजी कार्यवाही के लिए उतनी ही कापी छापते हैं, जितनी जरूरत है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू के निर्देश पर आरएनआई और डीएवीपी से अधिकारियों ने कुछ प्रिंटिंग प्रेस और अखबारों के कार्यालयों पर छापेमारी की। चार दिल्ली की और चार लखनऊ की प्रिंटिंग प्रेसों से 70-70 अखबार छापे जा रहे थे। एक प्रिंटिंग प्रेस को एक से अधिक अखबार छापना भारी पड़ जाता है। ऐसे में 70 से अधिक अखबार छापने पर डीएवीपी और आरएनआई ने 277 प्रकाशकों और प्रिंटरों को नोटिस भेजा, जिसमें से 118 ने सफाई दी, जबकि 159 ने नोटिस का जवाब ही नहीं दिया। डीएवीपी ने इन अखबारों की मान्यता खत्म कर दी। अब इन अखबारों को विज्ञापन नहीं दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि झूठे काजग-पत्रों के मार्फत इम्पैनलमेंट कराने और विज्ञापन हासिल करने पर इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इनसे विज्ञापन की राशि वापस ली जा सकती है। इन अखबारों ने अकेले वर्ष 2015-16 के दौरान दो करोड़ रुपए के विज्ञापन ले लिए थे। डीएवीपी के जो लोग इस घपले में शामिल हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

भारत सरकार के डीएवीपी ने कुछ महीने पहले सूचनाएं संग्रह करनी शुरू कर दी थी। प्रत्येक अखबार वाले से भी जानकारी ली गई थी कि जहां उनका अखबार छपता है, वहां पर और कौन-कौन से अखबार छपते हैं ?प्रिंटिंग प्रेस की क्षमता कितनी है?

 अभी यह कार्यवाही शुरू होती हुई है। राजस्थान के अखबारों और मुद्रणालयों की भी जानकारी मांगी गई थी। संभावना है कि शीघ्र ही राजस्थान में भी ऐसी ही कार्यवाही होगी। राजस्थान में भी बहुत से अखबार केवल विज्ञापनों के लिए फाइल कॉपियां ही छापते हैं और अनेक दैनिक अखबार  एक हजार दो हजार कोपी छापते हैं तथा विज्ञापनों के लिए सरकार के पास फर्जी दस्तावेज तैयार करके भिजवाते हैं जिनमें 10,000 से लेकर 50 साठ हजार तक प्रतियां दिखाई हुई होती हैं

 उनके पास ना कागज होता है ना कागज रखने के कोई गोदाम होते हैं। उनके पास कर्मचारी भी नहीं हैं। अखबार का अन्य स्टाफ भी नहीं है। सब कुछ फर्जी। इस फर्जीवाड़े पर चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रमाणीकरण कर देते हैं। और p r o  जांच की जीने व सही होने की फर्जी सिफारिश कर देते हैं।  राजस्थान में ऐसे दैनिक और साप्ताहिक अखबारों की भरमार है।।


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