Saturday, January 7, 2017

देशभर में पशुओं के लगेंगे टैग मिलेंगे यूनिक आईडी नंबरः

पशुओं को लावारिस छोड़ ना संभव नहीं होगा:

- करणीदानसिंह राजपूत -

भारत सरकार ने नए साल 2017 पर देशभर में मवेशियों के कान पर पॉलीयूरेथेन टैग लगाने के आदेश दिए हैं।  इससे हर मवेशी को एक यूनिक आईडी नंबर मिलेगा। केंद्र सरकार की सोच है कि मवेशियों की दशा को सुधारा जाए। इससे हर मवेशी की उचित देख रेख करवाना संभव हो सकेगा।
मेरी सोच यह भी है कि इससे एक बड़ा लाभ और भी होगा कि लोग दुधारू पशु काे दूध मिलने के बाद लावारिस भी नहीं छोड़ पाएंगे। सरकार ने अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं की है लेकिन लावारिस छोड़ते ही उसका मालूम हो जाएगा।  संभव है कि  बाद में कार्यवाही की जाने के नियम भी बन जाएं।

केंद्र सरकार निर्देश दिए हैं उसके अनुसार देश भर में 8 करोड़ 80 लाख  मवेशियों के  यह  टैग लगाया जाएगा। इस टैग के साथ 12 डिजिट का एक यूनिक पहचान नंबर होगा। इस काम को इसी साल 2017 में पूरा करने के लिए राज्य की सरकारों को टारगेट दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में हर महीने 14 लाख  मवेशियों के टैग लगाए जाएंगे।
मध्यप्रदेश में हर महीने 7 लाख 50 हजार मवेशियों के टैग लगाए जाएंगे।

केंद्र सरकार के  अनुसार 8 करोड़ 80 लाख  मवेशियों के टैग लगाए जाएंगे। उनमें 4 करोड़ 10 लाख भैंसे हैं और 4 करोड़ 70 लाख गायें हैं।

 मवेशियों की संख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है जहां 1 करोड़ 60 लाख मवेशी हैं। उसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर है जहां 9 लाख मवेशी हैं। राजस्थान तीसरे नंबर पर है जहां 84 लाख मवेशी हैं। गुजरात में 62 लाख। मवेशी हैं। आंध्र प्रदेश में 54 लाख मवेशी हैं।
 मवेशियों के लगाया जाने वाला टैग पीले रंग का दो टुकड़ों में होता है। इसे मवेशी के कान में एक उपकरण की मदद से लगाया जाता है। इस टैग ।की कीमत 8 रूपये और वजन 8 ग्राम है। टैग टैंपर  प्रूफ है और इसे दोबारा खोलना संभव नहीं है।
अभी 50 हजार टैग एप्लीकेटर टैग  लगाने वाले उपकरण हैं और इतने ही टैबलेट हैं। टैबलेट के जरिए नेशनल ऑनलाइन डेटाबेस पर यूनिक नंबर को अपडेट किया जाता रहेगा। केंद्र सरकार की योजना है कि 2022 तक डेयरी किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाए। असल में टैग लगाने का यह कार्य इसलिए कराया जा रहा है कि मवेशियों की उचित देख रेख हो सके।

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