Friday, December 9, 2016

भ्रष्टाचार में भारत दुनिया में किस रैंक पर है।

:  करणीदान सिंह राजपूत  :
भारत में भ्रष्टाचार के कारण हर देशभक्त नागरिक दुखी और प्रताड़ित है। उसकी परेशानी का इलाज इसलिए संभव नहीं हो रहा है कि कम पढ़े-लिखे लोग डरते हैं और अधिक पढे लिखे लोग भ्रष्टाचार में शामिल हो जाते हैं,सहयोग करते हैं। आज करोड़ों रुपए का काला धन किसी गरीब के पास नहीं जो लोग सत्ताधारियों से निकटता रखते हैं उनके पास में मौजूद है।

 भ्रष्टाचार मैं भारत दुनिया में 169 वे क्रम पर है। हमारे देश से अधिक भ्रष्टाचार अन्य देशों में है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अन्य देशो के मुकाबले में भ्रष्टाचार कम मानकर चुप रहें। हमारे देश में भ्रष्टाचार है तो उसका कारण यही है कि हम भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज नहीं उठाना चाहते। हम केवल देखते  रहते हैं।

ऐसा नहीं है कि हम भ्रष्टाचारी के बर्ताव से बच जाएंगे या बचते रहे हैं। हम भ्रष्टाचारी के शिकार होते रहे हैं और चुप्पी रहने पर आगे भी भ्रष्टाचार के शिकार होते हुए अपनी संतति को भी परेशानी में डालते रहेंगे।
 दुनिया में भ्रष्टाचार से सभी देश पीड़ित हैं और भ्रष्टाचार मुक्त होना चाहते हैं। भ्रष्टाचार किस देश में कितना है इसकी  खोजबीन आदि होती रहती है। ताजातरीन रिपोर्ट्स के आधार पर डेनमार्क क्रम में सबसे ऊपर अर्थात एक नंबर पर है। न्यूजीलैंड 2 नंबर पर सिंगापुर सात नंबर पर और पावरफुल अमेरिका 17 नंबर पर आंके गए हैं। दुनियाभर में राज कर चुका इंग्लैंड भ्रष्टाचार में 78  वें क्रम पर है।
 नेपाल का स्थान 85 वें नंबर पर है। वामपंथी चीन  87 वें नंबर पर है।
लंका 90 नंबर पर है। भारत का क्रम 169 पर है और अफगानिस्तान जो इस समय विश्व में समाचारों में छाया हुआ है उस का क्रम 172 में पर है।

यह कुछ देशों की स्थिति है लेकिन भ्रष्टाचार अनेक रूपों में सभी देशों में छाया हुआ है। हम अपने देश की बात करें तो एक बात सामने आती है की भ्रष्टाचार से दुखी सभी हैं और मुक्त होना चाहते हैं मगर इसके लिए हमारी सोच यही है की भगत सिंह जैसा आजाद जैसा सुखदेव जैसा क्रंतिकारी दूसरे के घर में पैदा हो। हम किसी भी प्रकार की मामूली सी परेशानी भी लेना नहीं चाहते।

 यदि हमारे आसपास का कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त है तो वह व्यक्ति दन दनाता हुआ सामने से निकलता है।
 वह शक्तिशाली होने का दिखावा करता हमारे सामने से निकलता है और हम पिद्दी बने हुए रहते हैं। आज हर शहर में हर गांव में शिक्षा का स्तर बहुत ऊंचा हुआ है लेकिन शिक्षा लेने वाले और शिक्षा देने वाले भ्रष्टाचार के मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई करना नहीं चाहते। यही सोच प्राय सभी लोगों की है। कोई बुरा बनाना नहीं चाहता तब भ्रष्टाचार कैसे खत्म होगा। अच्छा हो कि भ्रष्टाचार के विरोध में संघर्ष करते रहें। इस समय देश की यह पहली आवश्यकता है।

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