Sunday, December 18, 2016

आप किसी को क्यों नहीं पकड़वा रहे? भाजपा नेताओं पदाधिकारियों से सवाल:


- करणीदानसिंह राजपूत -
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काला धन,भ्रष्टाचार व जमीन हथियाने वालों के विरूद्ध अभियान छेड़ा है मगर भाजपा के किसी भी नेता ने पदाधिकारी ने कार्यकर्ता ने अभी किसी को भी नहीं पकड़वाया है।


तो कारण जानिए आखिर आपके इलाके के काला धन कुबेर,भ्रष्टाचारी व जमीन हथियाने वाले एक भी पकड़ में क्यों नहीं आए हैं और भाजपा वाले उनको क्यों नहीं पकड़वा रहे?
अच्छा तो आप भाजपा के नेता हैं और आप दूसरे नेता को कैसे पकड़वा सकते हैं?
अच्छा तो आप तो भाजपा के पदाधिकारी हैं और आप दूसरी पार्टी के पदाधिकारी को कैसे पकड़वा सकते हैं?
अच्छा तो आप मनोनीत अध्यक्ष हैं और आप तो मनोनयन से बड़े हो गए आप कैसे पकड़वा सकते हैं?
अच्छा तो आप जिलाध्यक्ष हैं नगर मंडल अध्यक्ष देहात अध्यक्ष हैं आप भी महान हो गए तब आप कैसे पकड़वा सकते हैं?
अच्छा तो आप मोर्चों के अध्यक्ष हैं जब अन्य कोई भी पकड़वाने में आगे नहीं आ रहा है तब आप भी यह काम क्यों करें?
आप कहीं न कहीं स्वायत्त शासन सत्ता नगर निगम,नगर परिषद आदि में मेयर हैं,अध्यक्ष हैं तो यह काम आभी क्यों करें? आप के नीचे तो ठेकेदारी चल रही है और ठेकेदार मालामाल हो रहे हैं। आपको भी चुंगी मिल रही है तो आप तो पकड़वाऐंगे ही क्यों? अगर पकड़ धकड़ कभी किसी ने करवाई तो आप में से तो कई कानून के घेरे में होंगे।
आप जिला प्रमुख हैं या फिर किसी पंचायत के प्रधान या सरपंच तो आप भी क्यों पकड़वाऐंगे? आप में से भी अनेक नप जाऐंगे अगर सही जाँच हुई या पकड़ धकड़ हुई तब।
आप और अन्य सभी किसी न किसी पद पर हो गए बड़े आदमी हो गए इसलिए अब यह पकड़वाने का काम आप तो कराऐंगे नहीं। यह काम तो कोई छोटा कार्यकर्ता या सदस्य करवाए।
बड़ों की बड़ों से दोस्ती मित्रता हाथ मिलाई। बस ऐसे ही मंत्री की,विधायक की और चुने हुए जन प्रतिनिधि की हैसियत। कोई भी कयों किसी को पकड़वाए?
सबकी सबसे यारी।
आपकी नीयत में कोई खोट नहीं । एकदम साफ सुथरी नीयत।
आप उनको नहीं पकड़वाओ और वे आपके विरूद्ध कोई ऐसा मोर्चा नहीं खोलेंगे न तुम्हारी कहीं पर शिकायत करेंगे।
एक कहावत है कि शराब खानों में वैश्यालयों में जाने वालों की यारी इतनी पक्की होती है कि उसे कोई भी तोड़ नहीं सकता।
बस ऐसी ही पक्की होती है नेताओं की यारी।
जब तेरा राज आए तूं खा पी मौज उड़ा और जब मेरा राज हो तो मैं भी खाऊं पीऊं मौज उड़ाऊं।
और जनता तो कल भी भेड़ थी आज भी भेड़ है और कल भी भेड़ ही रहेगी।
ऐसा चमत्कार नहीं होने वाला कि भेड़ के पेट से कभी शेर पैदा हो जाए।
 

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