Wednesday, June 14, 2017

बींटा गोल कर देंगे किसान समझती नहीं भाजपा वसुंधरा की सरकार

 - करणीदान सिंह राजपूत -

बींटा गोल कर देंगे। पुरानी मगर लोकप्रिय चेतावनी है जो श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों के किसान लगातार अपनी मांगों के जरिए, प्रदर्शनों के जरिए,जिला कलेक्टरों को ज्ञापन देने के जरिए दे रहे हैं। राजस्थान की भाजपा वसुंधरा राजे की सरकार इस पर गौर नहीं कर रही है। इस इलाके के मंत्री डॉ रामप्रताप सुरेंद्र पाल सिंह टीटी तथा विधायक  गण किसानों की मांगों को समझते हुए,जानते हुए भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। वसुंधरा राजे को बताने से डर रहे हैं। श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले जब एक थे तब 1969 मैं किसान आंदोलन मोहनलाल सुखाड़िया की सरकार को भारी पड़ा था।

राजस्थान की सारी जेलें श्रीगंगानगर जिले के किसानों से भर गई थी। सरकार को किसानों की मांगे माननी पड़ी और भूमि नीलामी को रोककर आगे भूमि का आवंटन करना पड़ा।

वसुंधरा राजे के पिछले कार्यकाल में श्रीगंगानगर के सीमांत इलाके घड़साना रावला में पानी आंदोलन चला जो ऐतिहासिक बना  लेकिन सरकार उससे भी कोई सीख नहीं ले पाई। सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए लाठी गोली का इस्तेमाल किया। आंदोलन में 6 किसान शहीद हुए।  सरकार ने अजमेर जेल में बंद किसान नेताओं को बाहर निकालकर वार्ता की। वह आंदोलन किसी तरह से शांत हुआ लेकिन किसानों की पानी की मांग का कोई स्थाई हल वसुंधरा सरकार नहीं निकाल पाई।

 उस समय के भाजपा मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने कोई नीति बनाने की कोशिश नहीं की। उसके बाद 2008 से 2013 तक कांग्रेस की सरकार राजस्थान में आई मगर उसने भी श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के किसानों को सिंचाई पानी वितरण के मामले में स्थाई नीति नहीं बनाई । सन 2013 में भारतीय जनता पार्टी के वसुंधरा राजे की सरकार दोबारा बनी लेकिन 3 साल पूरे होने पर किसानों के प्रति न कोई नीति है ना कोई हमदर्दी है। किसानों को कुचलने की उनपर सख्ती करने की पुरानी परिपाटी अभी भी कायम है।

समझ में नहीं आता कि सरकार अपने 3 साल को बेमिसाल बताते हुए समारोह आयोजित कर रही है और उस पर जन धन को लगाया जा रहा है। नोट बंदी के बाद हर जगह के लोग त्रस्त हैं,परेशान हैं। उसी में श्री गंगानगर हनुमानगढ़ के किसान सरकार के द्वारा दी जा रही चोटों से परेशान हैं।

 सिंचाई पानी की मांग आखिर किसान क्यों करें? सबसे बड़ा सवाल यह है। सरकार को खुद आगे बढ़कर सिंचाइ पानी का बंदोबस्त करना चाहिए क्योंकि खेतों में पैदा होने वाली उपज किसान अपने घर में नहीं रखता। वह उत्पादन राष्ट्रीय उत्पादन है। राष्ट्रीय उत्पादन अधिक हो उसके लिए सरकार को ही उचित प्रबंध आगे बढ़कर करना चाहिए। किसान पानी के लिए आंदोलन करें प्रदर्शन करें मांग पत्र दे और अपना समय खेतों के बजाय सरकारी कार्यालयों में गंवाएं। इससे बड़ा दुर्भाग्य और कोई नहीं हो सकता। किसानों को उत्पादन के लिए स्वतंत्र करना चाहिए ताकि वह दिन रात अपने खेतों काम कर सके।
किसान जो मेहनत करता है वह राष्ट्र के विकास में काम आए। देश को अनाज के लिए दूसरे देशों की तरफ देखना न पड़े। आज किसान की हालत स्वतंत्र नहीं है। उसका अधिक समय खेतों के बजाय सरकारी कार्यालयों में या बीज खाद प्राप्त करने में बीत जाता है।
 मैं श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के किसानों पर फिर लौट रहा हूं की सरकार इनको कमजोर न समझें । इनके आंदोलन से सरकार के बींटे गोल हो जाएंगे। बींटे  गोल होने का यह वाक्य पुराना है मगर आम जनता इसे भलीभांति समझती है और यह कार्य करके भी दिखा देगी।

राजस्थान सरकार के इलाकाई मंत्रियों डॉक्टर रामप्रताप सुरेंद्र पाल सिंह टीटी और विधायकों को समझना चाहिए।विशेषकर डॉ रामप्रताप जल संसाधन मंत्री हैं। वे हनुमानगढ़ से विधायक बनते हैं  और उसके बाद मंत्री बनते हैं। वर्तमान में श्रीगंगानगर के प्रभारी मंत्री भी हैं।

 मैं एक बार फिर यह लिखलरहा हूं कि सरकार किसानों की सिंचाई पानी की मांग को समझे और उसका निस्तारण बिना विलंब के करे। किसानों को पुलिस हिरासत में लिया जाना अन्य स्थानों पर ले जाकर के छोड़ना अनुचित कार्यवाहियां हैं। सरकार को यह समझना चाहिए किआंदोलनकारी और संघर्ष करने वाले किसान इस प्रकार की कार्यवाहियों से डरने वाले नहीं हैं, जो किसान सरकार की लाठी और गोली से नहीं डरे वे अब भी डरने वाले नहीं हैं।
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लिखा गया 19-12-2016.
अपडेट      14-6-2017.
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