शनिवार, 10 दिसंबर 2016

सूरतगढ सांसी मोहल्ले की महिलाओं को खुले में जाना पड़ता है शौच:


हालात अध्यक्ष को बर्खास्त करने जैसे हैं:पूरे शहर में गंदगी कचरे का नरक:
नगरपालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा की अनदेखी और पालिका प्रशासन का निकम्मापन:
राजस्थान सरकार मना रही है 3 साल पूर्ण होने का उत्सव:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 10 दिसंबर 2010.
भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार अपने 3 साल पूर्ण होने को उत्सव के रूप में मनाने वाली है। प्रदेश में खासकर बीकानेर संभाग मुख्यालय और श्रीगंगानगर में उत्सव पर समस्त विभाग लगे हुए हैं वहीं सूरतगढ़ के हालात नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही और पालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा की अनदेखी के कारण सारा शहर गंदगी कचरे का बदबू मारता ढेर बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों की फौज यहां पर मौजूद है मगर नागरिकों की मांग और ज्ञापनों पर अधिकारी अपने कमरों से बाहर निकल कर हालात देखने को नहीं पहुंचे हैं।



सूरतगढ़ में नगरपालिका का बोर्ड भारतीय जनता पार्टी का है जिसकी अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा हैं और वे भी कभी शहर के बदतर होते हालात को देखने नहीं पहुंची।
इन हालातों के कारण सूर्याेदय नगरी के वार्ड नं 22 के सांसी मोहल्ले की महिलाओं व लड़कियों को खुले में शौच के लिए घरों से दूर जाना पड़ रहा है। महिलाओं व लड़कियों को रात के अँधेरे का इंतजार करना पड़ता है। वे अँधेरा होने पर अपने घरों से निकलती हैं और रेल सीमा में रेल पटरियों के पास पहुंचती हैं। रेल की पटरियों के पास में शौच करना खतरे भरा होता है।
सांसी मोहल्ले की औरतों व लड़कियों को खुले में शौच करने के लिए जाने की मजबूरी नगरपालिका के कारण है। घरों में शौचालय बनाने के आवेदन पालिका में पड़े हैं मगर किसी को भी परवाह नहीं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत स्वच्छता अभियान को बताते हुए वार्ड 22 के पार्षद ओम अठवाल से जब इन हालात पर पूछा गया तब उन्होंने जो जानकारी दी वह हैरान करने वाली थी। पार्षद ने बताया कि घरों में शौचालय बनाने के लिए करीब 60 आवेदन सांसी मोहल्ले के नगरपालिका में दिए हुए हैं और उनको दिए हुए करीब छह माह बीत चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि इतने महीने क्यों बीते? नगरपालिका की अध्यक्ष काजल छाबड़ा को भी कोई परवाह नहीं है। उनको मालूम नहीं कि पालिका में कितने आवेदन बस्तों बंद पड़े हैं।
नगरपालिका का एक महिला मूत्र स्थल सुभाष चौक पर बना हुआ है जिसके पास महिलाओं का पहुंचना भी नहीं हो पाता। अनेक बार लिखा गया मगर पालिका अध्यक्ष को परवाह नहीं हुई। इस सुभाष चौक वाले स्थान पर गंदगी कचरा पसरा रहता है तथा शाम को चार बजे से लेकर रात के 9 बजे तक रेहड़ी खोमचे वाले घेरा बना लेते हैं। वहां तक ऐसी स्थिति में महिलाएं व लड़कियां कैसे पहुंचे?
नगरपालिका अध्यक्ष को मालूम नहीं होने का लापरवाही में रहने का एक प्रमुख कारण है कि उनके पति सुनील छाबड़ा ही पालिका में मौजूद रहते हैं और वही शासन चलाते हैं। उनके मोबाइल कॉल से प्रमाण मिल सकता है और पालिका में लगातार देखने से मालूम पड़ सकता है।
ये बिगड़े हुए हालात विधायक राजेन्द्रसिंह भादू को भी मालूम हैं लेकिन उन्होंने भी कभी मोदी के स्वच्छता अभियान को देखने की और पालिका की शिकायतों पर गौर नहीं किया। उनके विधान सभा क्षेत्र का ही भाग है यह सूरतगढ़ लेकिन उन्होंने भी छप रही खबरों पर गौर नहीं किया। नगरपालिका की लापरवाही के कारण सीवरेज का निर्माण घटिया हो रहा है तथा उसकी लगातार शिकायतें सामने आ रही है। लोग ज्ञापन दे रहे हैं मगर पालिका के ईजीनियरों की ड्यूटी निरीक्षण के लिए नहीं लगाई जा रही।
नगरपालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा को तो मुख्यमंत्री के आदेश निर्देश की भी परवाह नहीं है। विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने मुख्यमंत्री को यहां करीब ढाई साल पहले शिकायत की थी मनीषा के अवैध पट्टे की। उस पर तत्कालीन पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल को सस्पैंड तक कर दिया गया था लेकिन काजल छाबड़ा ने वहां पर आलीशान हॉस्पीटल बनवा दिया जिसका नाम नीलकंठ हॉस्पीटल है। वह पट्टा तो निरस्त होना चाहिए था लेकिन न जाने कौनसी डील समझौता हुआ कि इतने गंभीर मामले में विधायक भी चुप्प हो गए।

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