Sunday, December 4, 2016

नोटबंदी से सूरतगढ़ का आधा करोबार ठप्प:धर्मप्रिय कारोबारी ने कहा कि कारोबार चौथाई रह गया


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। हर मौसम में चमकता जगमगाता खुशहाल कहलाने वाला सूरतगढ़ के बाजार की कारोबारी नोट बंदी की या कहें मोदी की जल्दबाजी नीति की भेंट चढ़ गई। सूरतगढ़ में अनेक विभागों के सर्वाधिक कार्यालय होने के कारण यहां का कारोबार मंदी की मार में भी दौड़ता हुआ चला करता था। किसी भी व्यापारी के चेहरे पर शिकन नहीं होती थी और न कोई परेशानी होती थी। लेकिन अब यहां का व्यापारी व छोटा दुकानदार रेहड़ी वाला आदि सभी परेशान हैं वहीं बड़े व्यापारी भी खाली बैठे हुए मोदी सरकार को कोसते हैं। दुकाने माल से भरी हैं मगर कोई खरीदार नहीं है। अब तक जितना रूपया बैंकों से एटीएम से निकाल सकते थे उतने से तो केवल भोजन ही खरीद सकते हैं या फिर भोजन की सामग्री खरीद सकते हैं। भोजन भी पूरा नहीं जितना उतने रूपयों में मिल सके सप्ताह का दस दिनों का। रसद में ही रूपया चुक जाए व पूरा नहीं पड़े तब अन्य सामग्री तो खरीदी ही नहीं जा सकती। किरयाने की दुकानों पर भी ग्राहक कम और बिक्री आधी रह गई हो तब मनीहारी जनरल स्टोरों की हालत का अनुमान लगाया जा सकता है कि वहां तो ऐसी सामग्री होती जिसके बिना जीवन चलाया जा सकता है। ऐसी दुकानों पर तो बिक्री पचास प्रतिशत से अधिक गिर गई है। व्यापारियों की हालत ऐसी बन गई है कि वे मोदी को अच्छा बुरा बताना ही भूल गए। मतलब संज्ञाशून्य हो चले हैं। भरी हुई दुकानों में घाटा लगने लगे और यह भी तय नहीं हो कि ग्राहकी कब शुरू होगी तब संकट का समाधान ही नहीं निकाला जा सकता। दुकानदारों की हालत से लगता है कि यह संकट कई घरों को बरबाद करके छोड़ेगा। जब काम ही नहीं है तब क्या खरीदें क्या बेचें?
जिन दुकानदारों के पास किराए की दुकानें हैं उनको किराया व स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
किसी को भी पूछ लें जवाब उदासी में मिलेगा कि क्या करें? सब कुछ चौपट हो रहा है।
एक सच्च कहने वाले धर्मप्रिय कारोबारी ने कहा कि कारोबार चौथाई रह गया है। वह भाजपा से जुड़ा हुआ है और परिवार और पेट उनके भी है।

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