Sunday, February 26, 2017

अखबारों के माध्यम से काला धन सफेद:वित्तमंत्री जेतली को पत्र:खबर अखबारों में नहीं मिलेगी:

अखबारी लाइन में दुकानदार व्यावसायी व राजनैतिक लोग घुस गए:

- करणीदानसिंह राजपूत -


कालाधन अखबारों के माध्यम से सफेद किए जाने का पत्र वित्त मंत्री को भेज कर रोक लगाने की मांग की गई है। अखबारी लाइन में इस पर रोक लगाने के लिए प्रेस में अखबार के  मुद्रण व अखबारी कागज का भुगतान ऑन लाइन किए जाने का आदेश जारी किए जाने का आग्रह किया गया है।
अखबारी लाइन में व्यासायी,दुकानदार व राजनैतिक लोग घुस आए हैं जो सालों से अन्य श्रोतों आए धन को अखबारों की आय बतला कर उजला करने में लगे हुए हैं। अखबारों पर कोई नजर नहीं डालता इसलिए यह धंधा कारगर चल रहा है। इसके लिए अखबारों का कागज का खरीद बिल और प्रेस का मुद्रण बिल दोनों फर्जी तैयार किए जाते हैं। अखबार का वितरण एजेंट तक फर्जी नाम होते हैं।
यह आरोप स्वच्छ पत्रकारिता करने वाले समारोहों में परिचर्चाओं में सालों से लगते रहे हैं,लेकिन किसी ने इस पर कार्यवाही की मांग नहीं की।
भारत सरकार की काला धन रोक वास्ते नोट बंदी किए जाने के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व वित्त मंत्री अरूण जेतली लगातर एक ही बयान दे रहे हैं कि कालाधन खत्म करके ही दम लिया जाएगा। इस पर अखबारी लाइन के इस सच्च को वित्तमंत्री को भेजे गए पत्र में तथ्यों के रूप में बताया गया है। पत्र यहां दिया जा रहा है
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3-12-2016.
up date 26-2-2017..
 
माननीय अरूण जेतली,                                                                                वित्त मंत्री,                                                                                                                    दिनांक 1 दिसम्बर  2016.
भारत सरकार,
नई दिल्ली।

विषय-दैनिक अखबारों के माध्यम से काला धन सफेद होने पर तत्काल रोक लगवाएं।
तरीका- फर्जी अधिक प्रतियां छपना बताया जाता है तथा उसकी आमदनी दिखाई जाती है।
श्रीमानजी,
आपके ध्यान में यह तथ्य इसलिए ला रहा हूं कि इस ओर आजतक कभी ध्यान नहीं दिया गया।
अखबारी लाइन में व्यावसायिक लोग आ गए हैं जो अपने प्रभाव प्रतिष्ठा के साथ अपने काले धन को अखबार की आमदनी से सफेद कर रहे हैं।
1. दैनिक अखबार की 1-2 हजार तक प्रतियां छापी जाती हैं लेकिन 10 हजार से अधिक और 40-50 हजार प्रति दिन तक दिखाई जाती हैं।
2. ये जो  अधिक प्रतियां दिखाई जाती हैं। इनके असल में न ग्राहक होते हैं न इनके वितरक एजेंट होते हैं। लेकिन उनके नाम प्रतियां दिखाई जाती है और वहां से रकम आनी भी बतलाई जाती है। उक्त रकम व्यासायी की अन्य किसी श्रोत से आई हुई होती है।
3. अखबार का मालिक इसके लिए सारा रिकार्ड फर्जी तैयार करता है और चार्टेड एकाऊंटेंट भी मिली भगती के कारण उसको सत्यापित करते हैं।
4. अनेक अखबार मालिकों के पास अपनी प्रेस नहीं है तो वे अन्य प्रेस में छपवाते तो कम हैं तथा उसका रिकार्ड खुद फर्जी तैयार करते हैं। प्रेसवाला अधिक का बिल नहीं देता। इसलिए बड़ा फर्जीवाड़ा होता है।
5. प्रेस का बिल अखबार वाला ही किसी अन्य प्रेस से छपवाता है और उसमें अपनी मर्जी की प्रतियां दिखलाता है। कागज के बिल भी फर्जी खुद ही छापते हैं और उसमें कागज की खरीद फर्जी उसकी ढुलाई का बिल जिसमें ट्रक नम्बर फर्जी होते हैं।
6. आखिर इसका भुगतान नगद कैसे होता है?
अगर ये सारे भुगतान नगद पर प्रतिबंध हो तो प्रेस का बिल कागज का बिल ढुलाई का बिल सभी रूक जाऐंगे।
7. अखबार संचालक मालिक व छापने वाले प्रेस सभी शिक्षित हैं तथा सभी के बैंक में खाते हैं।
8.अखबार वाला केन्द्र सरकार के विज्ञापनों की स्वीकृति/दर वृद्धि के लिए डीएवीपी को जो रिकार्ड भेजता है। वह फर्जी प्रेस बिल,फर्जी कागज बिल फर्जी वितरक से भरा हुआ होता है।
9. इन बिलों में कागज विक्रेताओं के नम्बर ई मेल पते होते हैं तत्काल ही पूछा जा सकता है। प्रेस वाले का एकाऊंट रिकार्ड देखा जा सकता है कि उसे अखबार की ओर से कितना रूपया मिला है और डीएवीपी में कितना दिखलाया है। प्रेस का बिजली का बिल मालूम किया जा सकता है। कागज आया है तो किसी गोदाम में रखा जाता होगा? अखबार की चालीस पचास हजार प्रतियां दिखलाई जाती हे तो वहां काम भी कोई करता ही होगा?
10. अखबारों की जितनी प्रतियां दिखाई जाती है उतना तो कागज ही नही है। सारे भारत में आंकलन करवालें।
11. अधिक प्रतियां दिखलाने से इनको सरकारी विज्ञापन भी फर्जी रिकार्ड से मंजूर करवाते हैं/प्राप्त करते हैं।
अधिक दरों पर दिए जात हैं। करोडों रूपए का यह घोटाला भी पक्का रूक जाएगा।

- ईलाज तत्काल ही लेन देन पर नगदी की रोक। अखबार की ओर से कागज खरीद व प्रेस के मुद्रण बिल का भुगतान केवल ऑन लाइन हो या फिर चैक आदि से हो।
इस कार्यवाही से जो काला धन अखबार के मारफत सफेद हो रहा है और काफी सालों से हो रहा है,उस पर रोक लग जाएगी।
इसकी जाँच भी जरूरी है कि कितने सालों से कितना धन सफेद किया गया?

मैं करीब 50 सालों से पत्रकारिता में हूं।

आपका शुभेच्छु सूचनादाता,
करणीदानसिंह राजपूत,

राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क
सचिवालय से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
कार्यालय-23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़,  जिला श्रीगंगानगर।
राजस्थान.
संपर्क 94143 81356.
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