Tuesday, December 20, 2016

भारत के बिगड़े गए हालात पर गुलाब कोठारी का लेख 20 दिसंबर राजस्थान पत्रिका में जरूर पढ़ें करणीदान सिंह राजपूत

 प्रख्यात पत्रकार सामाजिक आध्यात्मिक और आर्थिक चिंतक गुलाब जी कोठारी का एक लेख राजस्थान पत्रिका 20 दिसंबर 2016 के मुखपृष्ठ पर ़़़ अब क्या बचा और दूसरे पेज पर ़़़चक्रव्यूह में फंस रही जनता ़़़ अवश्य पढ़ें।
 मेरी यह अपील भारत के वर्तमान हालात के कारण है। भारत की जो दुर्दशा हुई है। यह प्राकृतिक नहीं बल्कि वर्तमान भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा पैदा की हुई है। भारत इस आपदा से कैसे और कब बचेगा? यह आगे का वक्त बताएगा।

 मैं स्वयं 50 वर्षों से पत्रकारिता में हूं इसलिए आपसे यह अपील कर रहा हूं की गुलाब जी कोठारी का यह लेख खुद पढ़ें और अन्य लोगों को भी पढ़ने के लिए आग्रह करें । जिन लोगों के घरों में और व्यावसायिक केंद्रों पर  राजस्थान पत्रिका नहीं आती हो तो वे इस लेख को पढ़ने के लिए आसपास से पत्रिका को लेकर के पढें।  इस लेख में बहुत कुछ है।
एक पंक्ति जो आखिर में मिल रही है कि देश का युवा जिस दिन जागेगा उस दिन बहुत कुछ बदलाव आ जाएगा।
 गुलाब जी ने क्रांति  का आभास दिया है।

 मैं बड़े विश्वास के साथ यह कहना चाहता हूं कि इस समय भारत के हालात बिगड़े नहीं बिगाड़े जा रहे हैं। हजारों सालों की परंपराओं को वे लोग नष्ट कर रहे हैं जो कभी इन परंपराओं को जीवित रखने का आह्वान किया करते थे। वे दावा किया करते थे कि इन परंपराओं को जब हमारी सरकार आएगी तब जीवित रखेंगे खत्म नहीं होने देंगे। आज केवल एक प्रधानमंत्री के कारण सब कुछ तहस नहस हो रहा है। राजनीतिक दल आरोप प्रत्यारोप लगाते रहेंगे लेकिन भारत के मध्यमवर्ग पिछड़े वर्ग का तो नाश हो ही रहा है हमारे यहां के सारे उद्योग धंधे कारोबार सब चौपट हो रहे हैं।
 क्या हमें फिर से हर वस्तु के लिए विदेशों के आश्रित होना पड़ेगा?

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