Monday, November 21, 2016

जहर खाने को पैसे नहीं है:मोदी ने इस कहावत को सच कर डाला:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सालों से यह कहावत सुनते आ रहे थे कि जहर खाने को पेसे नहीं हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी दीन हालत गरीब दशा को किसी दूसरे के सामने प्रगट करता था तब कहता था कि जहर खाने को पैसे नहीं है। मतलब हालत इतनी दयनीय हो गई है और इतना परेशान हो चुका हूं कि जहर के पैसे हो तो जहर खाकर मर जाऊं। कई बार पैसे होते हुए भी लोग परेशानी में यही कहते थे।
यह कहावत हर व्यक्ति ने सुनी होगी। कोई बिरला होगा जो कहेगा कि उसके सुनने में नहीं आई।
मोदी ने नोट बंदी का निर्णय देकर ऐसे हालात पैदा कर डाले हैं कि लोग जहर खाकर तो नहीं मर रहे मगर बैंको की लाइन में लग कर मर रहे हैं। बात वही है कि पैसा होता तो बैंक की लाइन में नहीं लगना पड़ता। जो पैसा है वह पैसा रहा नहीं सो पैसा बनाने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है और मरना पड़ रहा है। जो नोट हैं घर में उनसे जहर तो क्या कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता।
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