Monday, November 21, 2016

मोदी राज लेकर भी घर छोडऩे की छाती पीट रहे हैं,महावीर व बुद्ध ने राज भी छोड़ दिया था:

- नरेन्द्र मोदी बार बार दुहरा रहे हैं कि उन्होंने देश के लिए अपना घर बार सब छोड़ा -
- भारत का इतिहास तो भरा पड़ा है: ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं:
- करणीदानसिंह राजपूत -

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार भाषणों में दुहरा चुके हैं कि उन्होंने देश के लिए अपना घर बार सब कुछ छोड़ दिया। यह कहते हुए वे रोते भी हैं। वे भावुक हो जाते हैं या फिर देश को भावुकता में बहाने के लिए ऐसा करते हैं। देश के लिए क्या पहले किसी ने अपना घर बार सब कुछ नहीं छोड़ा? क्या केवल मोदी जी ने ही ऐसा किया?
मोदी जी के भाषणों के बाद देश भर में लोगों ने टिप्पणियां की हैं तेज भी और तीखी भी। मोदी भक्तों को वे तीखी टिप्पणियां सुहाती नहीं और उनको अपने कलेजे पर चोट करती हुई लगती है।
भारत का इतिहास घर बार राजपाट त्यागने वालों से भरा पड़ा है। घर बार तो महावीर और बुद्ध ने भी छोड़ा था,मगर उन्होंने छाती नहीं पीटी किसी को कहा नहीं कि तुम्हारे लिए या जनता के लिए घर बार छोड़ दिया।
महावीर और बुद्ध ने अपना घर बार संसार छोड़ा तब राजपाट त्याग दिया था।
मोदी जी ने अपना घर बार सब छोड़ कर राज प्राप्त किया है। महावीर व बुद्ध के त्याग के बिल्कुल उलट। जब राज मिलता है या प्राप्त किया जाता है तो उसमें अपना घर बार सब निहीत ही होता है। मोदी जी ने सत्ता प्राप्त की है तो उसमें फिर घर बार अलग नहीं होता।
मोदी के घर बार सब कुछ त्याग में राजनीति है लेकिन महावीर व बुद्ध के त्याग में राजनीति और कोई लालसा नहीं थी। बड़ा अंतर है इस त्याग में।
मोदी जी घरबार छोड़ कर और राज प्राप्त करके भी अहसास करवाने में लगे हुए हैं, लेकिन महावीर और बुद्ध ने इसका कहीं जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने तो अपने परिवार से ममता तक छोड़ दी थी। सच्च में वह त्याग ही त्याग था जिसे लोग अब तक याद करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। उनके त्याग में बदले की भावना नहीं थी।
मोदी जी का यह त्याग तो बदले की भावना से भरा पड़ा है।
सेनानी को अपने राष्ट की रक्षा संप्रभुता के लिए दुश्मनों पर कार्यवाही करनी चाहिए लेकिन कोई अपनी ही प्रजा को बदले की भावना से कष्ट में डाले यह मोदी जी ने किया है।

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