शनिवार, 19 नवंबर 2016

सूरतगढ़ में कौन लोग और राजनीति हो सकते हैं काला धंधा धनकुबेर बेनामी संपत्तियों के मालिक

 - करणीदान सिंह राजपूत -
प्रधानमंत्री ने काला धन बालों का पता करने के लिए पहले 500 और हजार रुपए के नोटों की बंद की घोषणा की और अब बेनामी संपत्तियों के मालिकों का मालूम करने के लिए आयकर विभाग को खोजबीन में लगा दिया गया है। आयकर विभाग को विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर और महत्वपूर्ण स्थलों पर खोज करने का निर्देश दिया गया है। सूरतगढ़ अनेक प्रकार से महत्वपूर्ण है तथा यहां की जमीनों की कीमतें  अन्य स्थानों से अधिक रही है राष्ट्रीय उच्च मार्ग और अनेक मुख्य स्थलों पर तथा नगरपालिका की कीमती जमीन पर धन्ना सेठों राजनेताओं और भूमाफियों के कब्जे हैं अधिकांश कब्जों को नगर पालिका मिली भक्ति से  पट्टे जारी कर चुकी है। लोकायुक्त को शिकायत हुई थी तब पहली सूची में 137 नाम आए थे जो घटते-घटते या नगरपालिका ने अपने स्तर पर प्रभाव से मेलजोल से हटा दीजिए। अधिकांश मामलों में शिकायत के बावजूद और अब चर्चा है कि केवल 17 मामले बचे हैं। इन पर भी अतिक्रमणों को हटाने की कार्यवाही नहीं की जा रही। पालिका अध्ययक्ष इन को हटवाने के लिए जेसीबी मशीन और स्टाफ भेजना नहीँ चाहती। शहर में बनी हुई कई कालोनियां काले धंधे के कुबेरों की है और नगर पालिका ने उनको पूर्ण निर्माण के बावजूद अपने अधिकार में ले लिया। सूरतगढ़ के आसपास कृषि भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण गैर कानूनी रुप से धन्ना सेठों ने अपने पैसे के बलबूते पर करवाया जिनमें कुछ की जांच भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में चल रही है मगर उसे रेंगना कहना चाहिए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास स्टाफ नहीं है और वह किसी पर अभियोजन स्वीकृति मांगता है तो उस विभाग के उच्च अधिकारी खासकर जयपुर स्वायत्त शासन निदेशालय के अधिकारी मंजूरी नहीं देते बिना मंजूरी के अदालत में चालान नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में अनेक लोगों ने अधिकारियों ने राजनेताओं के बलबूते पर बेनामी संपत्तियों का कब्जा कर रखा है। शहर में और आवासन मंडल में अनेक भूखंड नीलामी में लेकर 10- 15 साल से खाली छोड़ रखे हैं। यह सब भूखंड बड़े-बड़े काला धंधा करने वालों के हैं। नियम तो यह है कि दो-तीन साल में भूखंडों पर दुकान या मकान का निर्माण हो जाना चाहिए लेकिन उनके निर्माण न करने के बावजूद सरकारी अधिकारी भूखंडों का निरस्तीकरण नहीं करते जबकि कानून उन को यह अधिकार देता है।
 प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए हैं देखना है कि उनके तहत सूरतगढ़ में कितने लोग सरकार की लिस्ट में दर्ज होते हैं।
करणी प्रेस इंडिया में  तीन-चार सालों में ऐसे अनेकों भूखंडो कॉलोनियों आदि का वर्णन है। अनेक मुख्यय सङकों के नाम हैं जहां पर धनकुबेरों ने अपने काले धन से निर्माण कर रखे हैं। जरुरत हुई और हमारे सामने नाम आए तब हम जनता के सामने रखने का पूरा प्रयास करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें