Thursday, February 16, 2017

आरएएस बने सूरतगढ़ वासी ने पूर्व में बीएड की डिग्री फर्जी ली


फर्जीवाड़ा 2004-5 का और सरकार से साठ सत्तर लाख वेतन उठा लिया।*
विकास नामक व्यक्ति ने राजकीय महा विद्यालय सूरतगढ़ में  संविदा पर अध्यापन कार्य किया जहां से संविदा का  रुपया लिया, जिस का रिकॉर्ड है। इस व्यक्ति की  हाजिरी संगरीया में भी b.ed कक्षा में लगती रही। वहां पर संगरिया में हाजिरी फर्जी लगी। रिकॉर्ड फर्जी तैयार हुआ और उसके आधार पर b.ed की परीक्षा में बैठा। b.ed में नियमित विद्यार्थी ही परीक्षा देने का पत्र होता है यह सरकारी नियम है जिसने भी भंग किया है फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं वह जानता है कि यह अपराध है क्या योग्यता है? 
कोई भी व्यक्ति सूचना के अधिकार से राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ से रिकॉर्ड प्राप्त कर सकता है।
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अपराध कभी छुपता नहीं।
शशीकला मुख्यमंत्री बनते बनते जेल में पहुंच गई।
आम आदमी पार्टी के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर को जेल के अंदर जाना पड़ा।
तब फर्जी वाडे़ से b.ed की डिग्री लेने वाला और उसके आधार पर व्याखाता बन लाखों रूपए  वेतन लेने वाला कब  तक बाहर रह पाएगा?  चाहे मित्र बधाइयां दें स्वागत करें लेकिन जब भी सरकारी जांच होगी तब हालत शशिकला जैसी हो जाएगी।
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आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर फर्जी डिग्री के मामले में 18 साल बाद पकड़ा गया था और जेल में जाना पड़ा। कानून मंत्री का पद भी नहीं रहा। जितेन्द्र तोमर ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया में सदस्यता के लिए आवेदन किया तब उनकी डिग्री पर एक वकील ने संदेह जताया व फर्जी बतलाया लेकिन उस समय उसकी बात नहीं मानी गई। अठारह साल बाद जितेन्द्र कानून मंत्री बने तब यह प्रकरण दुबारा सामने लाया गया। दिल्ली पुलिस ने मामला किया तब खूब हल्ला मचा कि भाजपा सरकार बदले की कार्यवाही कर रही है लेकिन पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस सही चल रही है। तोमर कभी उन कॉलेजों में गए ही नहीं थे।
1. सवाल यह है कि राजस्थान में एक व्यक्ति का आरएएस में चयन होता है। उस व्यक्ति ने पहले बीएड की डिग्री पात्रता न होते हुए प्राप्त की और उसके लिए दस्तावेज फर्जी तैयार करवाए। ऐसे अपराध प्रकरण देरी से मालूम पड़ते हैं। फर्जी डिग्री का मामला 2004-5 का है जो सन 2015 में सामने आया।


राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ में वह व्यक्ति संवीदा पर सात माह तक पढ़ाता है। प्रतिदिन के कालांश का मासिक ब्यौरा वह खुद बना कर कॉलेज को देता रहा। उसकी जाँच एक प्रोफेसर करता प्रमाणित करता। उसके बाद उस व्यक्ति को भुगतान होता। महाविद्यालय से अनुबंध में लगातार पढ़ाने व कभी भी गैर हाजिर नहीं होने की शर्त पर यह अनुबंध हुआ। 15 जुलाई 2004 से 15 फरवरी 2005 तक का लिखित अनुबंध हुआ। वह हर माह का भुगतान लेते हुए सात माह तक के करीब 32-34 हजार रूपए कॉलेज से लेता है। कॉलेज में इसका रिकार्ड है। उसकी हस्तलिपि में सारे कागजात हैं।
2.  वह व्यक्ति महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की ओर से बीएड में ग्रामोत्थान विद्यापीठ  के टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में नियमित छात्र के रूप में नम्बर आता है। वहां वह कॉलेज में जाता नहीं क्योंकि वह सूरतगढ़ कॉलेज में पढाता है।
3. बीएड की डिग्री नियमित रेग्यूलर छात्र को ही मिल सकती है। इसके लिए निर्धारित संख्या में हाजिरी होने पर ही परीक्षा की पात्रता होती है व प्रवेश का हकदार होता है।
4. सूरतगढ़ कॉलेज में अनुबंध पर व्याख्याता लगने वाला संगरिया नहीं जाता और बीएड परीक्षा का पात्र बनने के लिए संगरिया में फर्जी हाजिरी लगवाता है। इस कूट रचना में संगरिया के कॉलेज के भी व्याख्याता शामिल हैं। उनके बिना यह कूट रचना संभव नहीं।
5.फर्जी दस्तावेज की फर्जी हाजिरी के बल पर वह पात्र नहीं होते हुए भी धोखा कर परीक्षा 2005 में बैठ जाता है।
6. फर्जी दसतावेज के आधार पर वह परीक्षा उत्तीर्ण करता है।
7.फर्जीवाड़े से बीएड करके वह नौकरी स्कूल व्याख्याता में पाता है और सात आठ साल तक सरकार के साठ सत्तर लाख रूपए लेता है जिसका असल में वह हकदार नहीं है।
8. सरकारी स्कूल में व्याख्याता रहते हुए वह दिमाग फिर अपराध करता है।
अपने दूजे नाम से वह कोचिंग चलाता है और उस नाम के विज्ञापन भी छपवाता है। उसके मोबाइल नम्बर तक छपवाता है। कोचिंग कम्पीटशन में उसकी बीएड की डिग्री का फर्जीवाड़ा 2015 में सामने आता है।
8. आरएएस में चयनित व्यक्ति के विरूद्ध  जब भी सरकार मुकद्दमा दर्ज करेगी तब क्या हेगा?


update 16-2-2017.

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