बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

सूरतगढ़ एडीएम/अतिरिक्त जिला कलक्टर की कितनी पावर?



पीडि़त लोगों का सवाल जिनकी सुनवाई नहीं हो रही। खासकर जिनकी नगरपालिका तो बिलकुल नहीं सुनती।


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। एडीएम के पास कितनी पावर है? एडीएम सूरतगढ़ के पास कितनी पावर है? एडीएम हमारी पीड़ाएं सुन सकती है या नहीं?  हम नगरपालिका के चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं। ईओ बात ही नहीं करना चाहती,सुनना तो दूर रहा? बाहर भी कितनी बार जाऐं? कितनी जगह दरख्वासतें लगा चुके हैं। 

सूरतगढ़ में कई महीनों के रिक्त पद पर श्रीमती रचना भाटिया के ज्वाइन करने की खबर लोगों को मिलते ही लोगों में सवाल पैदा हो रहा है? गरीब जनता के मामले अधिकतर नगरपालिका से जुड़े हुए हैं जिनका काम नहीं हो रहा है। ईओ सुनती नहीं और अध्यक्ष मिती नहीं। दोनों पदों पर महिलाओं का राज है। ईओ पद पर श्रीमती प्रियंका बुडानिया है तथा नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष पद पर श्रीमती काजल छाबड़ा विराजमान हैं।
नगरपालिका में धाप कर लूट खसोट चल रही है। भ्रष्टाचार आसमान पर है। ये आरोप जनता नहीं पार्षद तक लगा रहे हैं। निर्माण कार्यों पर अधिक लूट चल रही है। पालिका में कमरों पर नोटिस तक लगा दिए गए हैं कि बिना इजाजत के कोई कमरे में प्रवेश करेगा तो कार्यवाही की जाएगी।
 इससे पहले कर्मचारियों के आगे से कुर्सियां हटवाई जा चुकी हैं ताकि कोई चक्कर पर चक्कर लगाता हुआ बैठ कर अपनी बात न कर सके। वृद्ध लोग महिलाएं क्या बैठने तक का हक नहीं रखती? आखिर यह कार्यालय नागरिकों के लिए है या नहीं? नागरिकों का सम्मान होना चाहिए और उनसे तमीज से बात की जानी चाहिए। प्रभारी सचिव तक यह बात श्रीगंगानगर में कह चुके हैं और हम छाप चुके हैं। प्रभारी सचिव ने तो यहां तक कहा कि ऐसे कर्मचारियों पर कार्यवाही की जाएगी। लेकिन यहां तो पालिका का कोई कर्मचारी नहीं अधिकारी ही रवैया सुधारने को तैयार नहीं है। भ्रष्टाचार इतना अधिक फैल चुका है कि ऐसा लगता है कि हरेक निर्माण कार्य में डील होती है। जो डील नहीं करता उस पर कार्यवाही निर्माण का रोका जाना तोड़ा जाना। सीज किया जाना। अभी महाराणा प्रताप चौक पर बहुत बड़े कॉम्लैक्स का निर्माण चल रहा है और साफ दिखाई पड़ रहा है कि अवैध हो रहा है। इसमें पालिका अध्यक्ष तक का नाम चर्चित हो रहा है। उसको ईओ सीज नहीं करना चाहती। यहां तक की शिकायतों बावजूद वहां पर जाँच करने खुद नहीं गई और किसी को भेजा तक नहीं। आधी अधूरी बिना पलस्तर आदि के ही दुकानों में सामान रखा जा रहा है ताकि कोई अधिकारी कार्यवाही न कर सके। ईओ से सूचना के अधिकार में नकलें मांगी जाती हैं तो वे देने में आनाकानी की जाती है। उसकी अपील अध्यक्ष से की जाती है तो वहां भी वहीं हाल होता है। पालिका से शहर की गंदगी दूर नहीं की जा रही। सुभाष चौक पर एकमात्र महिलाओं का टायलेट है वह गंदा पड़ा रहता है। प्रशासनिक कार्यालय जहां पर तहसीलदार,उपखंड अधिकारी,अतिरिक्त जिला कलक्टर व उप पंजियक का कार्यालय है। वे सभी गंदगी से सड़ांध मारते हैं। इनके आसपास की दीवारें ही खुले मूत्र घर बनी हुई हैं। नगरपालिका के हालातों से दुखी लोग ही पूछ रहे हैं कि एडीएम की पावर कितनी होती है?
लोग जिनमें नेता भी हैं और राजनैतिक दल भी हैं,वे बतलाना नहीं चाहते कि एडीएम की कितनी पावर होती है?
लेकिन हम जनता को बतलाना चाहते हैं कि एडीएम कि पावर बहुत होती है और लिा कलक्टर के पद से मामूली छोटा पद ही होता है। इसलिए  अपनी व्यथा अपनी शिकायत के लिए न्याय पाने के लिए किसी नेता बिचौलिए का इंतजार न करें और खुद पहुंच कर अपनी बात कहने में देरी न करें।
सूरतगढ़  एडीएम की पावर कितनी है? इसका अनुमान लगाऐं कि सूरतगढ़ से लेकर पाकिस्तान बॉर्डर तक की तहसीलें इस पद के अधीन हैं। सूरतगढ़,श्रीबिजयनगर, अनूपगढ़ व घड़साना तहसीलें इनके अधिकार में हैं। सूरतगढ़ के पीडि़तों तो एडीएम कार्यालय तक पहुंचने के लिए सौ कदम ही चलना है।



यहां हमने प्रचीन सूरतेश्वर महादेव मंदिर के घंटे का चित्र दिया है। जब यह घंटा बजता था तब पूरे कस्बे को इसकी गूंज सुनाई पड़ती थी। भावार्थ यही है कि संपूर्ण सूरतगढ़ जागे और अपनी बात को बेहिचक कहे।
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नगरपालिका की अधिशाषी अधिकारी प्रियंका बुडानिया का यहां से तबादला कर दिया गया है। 
ÙP DATED 12-10-2016.

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