रविवार, 2 अक्तूबर 2016

राजस्थानी रामलीला देखने उमड़े दर्शक- मायड़ भाषा में संवाद सुनकर हुए रोमाचित



 सूरतगढ  2 अक्टूबर -  मायड भाषा राजस्थानी लोककला रंगमच की ओर से वार्ड नं 4 स्थित करणीमाता मंदिर परिसर में खेली जाने वाली देश की पहली राजस्थानी रामलीला को देखने को दर्शक उमडे अपनी मायड़ भाषा में संवाद सुनकर दर्शक रोमाचित हुए। 


मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थानी मान्यता आंदोलन के अगुवा डा.राजेन्द्र बारहठ, पत्रकार डा.हरिमोहन सारस्वत, राजस्थान मेघवाल समाज जिला श्रीगंगानगर के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया, उपखंड समिति अध्यक्ष दिलात्मप्रकाश जैन ने अपना उदबोद्धन मायड़ भाषा राजस्थानी में देते हुए संदेश दिया कि अब राजस्थानी भाषा की मान्यता के मुददे को अधिक नहीं अटकाया जा सकता।
 उन्होंने लोककला रंगमच द्वारा किए गए इस प्रयास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाने वाला बताया साथ ही प्रतिभागी कलाकारों व आयोजकों को इस का हिस्सा बनने के लिए बधाई दी। 


प्रथम रात्रि की लीला का शुभारम्भ पूर्व विधायक सरदार हरचंदसिंह सिद्धू, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व जिलाप्रमुख पृथ्वीराज मील, जिलापरिसद सदस्य बसपा नेता डूगरराम गेधर ने किया। 



 प्रथम रात्रि की लीला में अमरिस जवंरियां के निर्देशन में फिल्मी कलाकार जगजीवणसिंह सिद्धू- रावण, बसपा नेता अमित कल्याणा- दशरथ, बसंत कुमार -मारिच, बलराम कुक्कडवाल -विष्णू, अयज शास्त्री-नारद, लालचन्द लिणियां-श्रवण, सुभाष सैन ने इन्द्र , पवन गोस्वामी ने नंदी का किरदार निभाया।
 राजस्थानी रामलीला का लेखन कार्य राजस्थानी साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी ने किया है और पिछले एक माह से कलाकार उत्साह के साथ मायड़ भाषा में रामलीला मंचन की तैयारियों में जुटे हुए थे। अध्यक्ष ओमसाबणियां ने सभी मेहमानों व दर्शकों का आभार व्यक्त किया।

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